28/08/2026
मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की, दांतलगढ़ में रखी राज्य की नींव
नरहैट मत्स्य प्रदेश के राजा थे राव बादा, मीना समाज के अंतिम शासक के रूप में होती है पहचान
सुरेश शर्मा
जमवारामगढ़. मुगल बादशाहों की अधीनता स्वीकार नहीं करने वाले महाराणा प्रताप की वीरगाथाएं इतिहास में प्रसिद्ध हैं। इसी तरह मुगल बादशाह हुमायूं और अकबर के समकालीन मीना समाज के ब्याड़वाल गोत्र के अंतिम शासक वीर शिरोमणि राव बादा भी अपनी वीरता और स्वाभिमान के लिए याद किए जाते हैं। जनश्रुतियों, लोकगीतों, जागा पोथियों और इतिहास से संबंधित पुस्तकों में राव बादा के शौर्य और संघर्ष का उल्लेख मिलता है।बताया जाता है कि राव बादा मत्स्य प्रदेश के नरहैट के राजा थे। उनके पूर्वजों ने जमवारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग दौसा-मनोहरपुर-148 के समीप दांतली गांव में दांतलगढ़ के रूप में अपने राज्य की नींव रखी थी। गांव में पुराने महलों के अवशेष आज भी मौजूद हैं। दांतलगढ़ से अलवर के प्रतापगढ़ होते हुए झिरी तक का क्षेत्र नरहैट मत्स्य प्रदेश में शामिल बताया जाता है। पहाड़ियों के बीच स्थित नरहैट को राव बादा ने अपनी राजधानी बनाया था।राव बादा का जन्म 1497 में बताया जाता है। उनके पिता रायचंद ब्याड़वाल और माता हीरा बाई थीं। दादा केता राव तथा परदादा जोधाराव थे। राव बादा के पांच विवाह हुए। उनकी पहली चार पत्नियों से कोई संतान नहीं हुई, जबकि पांचवीं पत्नी बाली बाई से पुत्र खैराती, कीरत कुमार और पुत्री संसबदनी उर्फ शीशवंदनी का जन्म हुआ।
बताया जाता है कि राव बादा ने 1532 में नरहैट में महल, कुएं और बावड़ियों का निर्माण कराया। हुमायूं और बाद में अकबर ने राज्य का विस्तार करने के दौरान राव बादा से संधि और दोनों परिवारों के बीच रिश्तेदारी के प्रयास किए, लेकिन राव बादा ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। राव बादा और उनके सैनिक छापामार एवं गुरिल्ला युद्ध में निपुण बताए जाते हैं।
रिश्तेदारी का प्रस्ताव भी ठुकराया
लोककथाओं के अनुसार राव बादा की पुत्री शीशवंदनी अत्यंत रूपवान थीं। उनका विवाह मेवात के राजा टोडरमल के पुत्र दरियामल से हुआ था। अकबर अपने पुत्र सलीम (जहांगीर) का विवाह शीशवंदनी से करना चाहता था, लेकिन राव बादा ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बाद मुगल सेना ने नरहैट को चारों ओर से घेर लिया। मई-जून 1576 में हुए भीषण युद्ध में राव बादा और उनके पुत्र कीरत कुमार के शहीद होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद उन्होंने अंतिम समय तक मुगल अधीनता स्वीकार नहीं की।नरहैट की पहाड़ी पर कीरत कुमार भौमिया का मंदिर होने तथा दांतली में राव बादा भौमिया के मंदिर में पूर्वजों द्वारा पूजा किए जाने की परंपरा बताई जाती है। दांतली में वीर शिरोमणि राव बादा विकास संस्थान की ओर से दांतली तिराहे पर घोड़े पर सवार राव बादा की प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा स्थापना की वर्षगांठ हर वर्ष 27 अगस्त को मनाई जाती है।
फोटो कैप्शन: दांतली में राव बादा सर्किल पर स्थापित शूरवीर राव बादा की घोड़े पर सवार प्रतिमा।