विवाह दो जीवन , दो परिवारों का आपसी सम्बन्ध होता है , विवाह का असर या उसकी जिम्मेदारी केवल दो लोगो तक ही सिमित नहीं होती अपितु परिवार और समाज की भी इसमें जिम्मेदारी होती है, पुराने ज़माने में विवाह हेतु रिश्ते बताने वालो की अपार संख्या होती थी, परिवार से जुड़े दूर या पास के सभी रिश्तेदार रिश्ता करवाने में अपनी भूमिका अदा करते थे ,मगर अब समयाभाव के कारण वे भूमिका नहीं निभा पा रहे है. कंही कंही
रिश्तों में खटास आने से भी ये प्रचलन कम हो रहा है, ऐसे में लोगों को रिश्ता ढूंढने में कठिनाई का सामना करना पड रहा है,
जोग संजोग क्या है ?
इन्ही कठिंनाइयों को कम करने के लिए जोग संजोग वैवाहिक सेवा प्रारम्भ की गयी , जोग संजोग पिछले १० सालों से राजपूत समाज के लिए निरंतर अपनी शानदार विश्वसनीय सेवा प्रदान कर रहा है। इस से जुड़ने के बाद लोगों का समय व धन तो बच ही रहा है साथ ही ऐसे मनचाहे रिश्ते ढूँढना सरल हो गया है जिनकी वास्तविक चाहत होती है। अब लोगों को इधर उधर भागना नहीं पड़ता , घर बैठे आसानी से वर -वधु का चुनाव कर उनकी विस्तृत जानकारी एंव कांटेक्ट न. ऑन लाइन ही ले कर दोनों परिवार आपस में बात आगे बढ़ा सकते है, जंहा दोनों परिवारों की सहमति बन जाती है रिश्ता तय हो जाता है ,सुखद अनुभव यह रहा कि जोग संजोग के प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष सहयोग से अब तक एक हजार से अधिक जोड़े बन चुके है।
दूसरा पहलू
समाज के कुछ लोग ऐसे भी है जिनके लिए विवाह एक सुखद अनुभूति नहीं रहा। मन मुटाव , विवाह विच्छेद का कारण बना , तलाक हो गए, दुर्भाग्य से विधवा या विधुर हो गए। कुछ लोग शारीरिक अक्षमताओं या अन्य पारिवारिक कारणों से विवाह बंधन में ही नहीं बंध पाये। इस तरह के अनेक परिवारों ने हमसे संपर्क किया और अपेक्षा रखी कि उनके जैसे परिवारों की मदद के लिए भी कदम उठाया जाये। सामान्य तौर पर देखा गया है कि ऐसे परिवारो के सामने समस्या होती है कि वे खुल कर अपनी बात नहीं रख पाते और कोई उनकी मदद नहीं कर पाता ,
लड़को के लिए पुनर्विवाह डंके की चोट पर होता रहा है लेकिन लड़की के पुनर्विवाह का अब विरोध तो नहीं लेकिन आसानी से स्वीकार भी नहीं है। वैसे भी विवाह एक समझौता माना जाता है समझौता पहली बार हो या दूसरी बार सिर्फ लड़कियों को ही करने पड़ते है। अच्छी पढाई लिखाई व लड़को जैसी सक्षमता की बावजूद भी उसका सम्मान कम ही आंका जाता है इन परिस्थितियों से रुबरु हो रहे परिवारो को सहयोग मिल सके इस लिए जोग संजोग ने अपना एक कदम बढ़ाते हुए नई सोच के साथ योग संयोग की शुरुआत की है।
जरुरत आपकी सहयोग हमारा
किन्ही भी कारणों से पुनर्विवाह के लिए मानस रखने वाले परिवारों के लिए रिश्ते ढूंढने में मदद करने के उद्देश्य से वैवाहिक सेवा के रूप में योग संयोग की शुरुआत की जा रही है। जोग संजोग की तरह सिर्फ राजपूत समाज के लिए न होकर राजस्थान मूल के सभी हिन्दू सवर्ण जातियों के लिए शुरू की जा रही है। सीमित जातियों और दायरे की सेवा होने से अपने अपने श्रोत से परिवार, लड़के, लड़की और उनसे सम्बंधित साड़ी जानकारी आसानी से ली जा सके. क्यों कि योग संयोग में अगले पक्ष द्वारा दी गयी जानकारी प्रस्तुत ही की जा सकती है प्रमाणित करना संभव नहीं है.
योग संयोग की कार्य प्रणाली
योग संयोग वैवाहिक सेवा उन लोगो के लिए प्रारम्भ की गयी है जो पुनर्विवाह करने का मानस रखते है , वे खुद चाहे अविवाहित हो , विधवा अथवा विधुर हो या तलाकशुदा हो।
अपेक्षा की जाती है कि वे अपना विवरण पारदर्शिता के साथ हमारी वेबसाइट पर अपलोड करे या [email protected] पर भेजे, जिसका अध्ययन कर आपको मेंबर बनाने के निर्णय से सूचित किया जायेगा।
हमारा कार्यालय आपकी चाहत का ख्याल रखते हुए शेष सदश्यों पर नजर रख कर सम्भावनाओ का अध्ययन जारी रखेगा एवं आपकी पहचान को आपके न चाहने पर सार्वजनिक न करते हुए अगले पक्ष से बात कर आपसे चर्चा करने के बाद दोनों पक्षों को बात चीत के लिए कांटेक्ट डिटेल उपलब्ध करवा कर एक दूसरे के निकट आने का महत्वपूर्ण कार्य करेगा।
विशेष वर्ग के लिए प्रस्तुत इस सेवा के लिए कार्यालय व्यय (वेबसाइट , ब्रॉड बैंड टेलीफोन स्टेशनरी स्टाफ बिजली आदि ) एवं डेटा बढ़ाने के लिए किये गए विज्ञापन व्यय के निमित्त बहुत ही सामान्य शुल्क के रूप में रजिस्ट्रेशन के समय Rs 1000 (एक हजार रूपये) जमा करने होंगे।
ईश्वर न करे योग संयोग की आवश्यकता पड़े लेकिन ईश्वर के विधान को कौन समझ पाया है , जरुरत पड़ने पर विश्वशनीय सेवा से जुड़ कर अपनी कठिनाई को सुलझाने में योग संयोग पुनर्विवाह सेवा का सहयोग ले ।