20/12/2016
चीन को बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध हटने से निर्यात में भारी बढ़ोतरी की संभावनाएं
मुंबईः चावल कंपनियों के शेयरों में आज बढ़त दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी कोहिनूर फूड्स के शेयरों में रही। चावल कंपनियों के शेयरों में उछाल इसलिए आई है क्योंकि चीन को बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध हटने से निर्यात में भारी बढ़ोतरी की संभावनाएं पैदा हुई हैं।
कोहिनूर के शेयर की कीमत 14.6 फीसदी बढ़कर 72.85 रुपये पर पहुंच गई, जबकि चमनलाल सेतिया का शेयर 6.1 फीसदी चढ़कर 74.2 रुपये पर बंद हुआ। ब्रांडेड बासमती चावल की अग्रणी कंपनी एलटी फूड्स (दावत ब्रांड) का शेयर 2.6 फीसदी चढ़कर 282.3 रुपये पर बंद हुआ। गैरबासमती चावल की उत्पादक अशर एग्रो का शेयर 4.7 फीसदी उछाल के साथ 13.3 रुपये पर पहुंच गया। कोहिनूर फूड्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने कहा, ‘हम चीन के आयातकों से बातचीत करने के लिए जल्द ही अपनी एक टीम भेजेंगे। अगर संभव हुआ तो हम वहां स्थानीय वितरक भी बनाएंगे।’ कारोबारी सूत्रों के मुताबिक अन्य निर्यातक पहले ही चीन को निर्यात की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
30 नवंबर को 14 भारतीय कंपनियों से बासमती के आयात पर सहमति जताई थी। इन कंपनियों में एलटी फूड्स, केआरबीएल (केआरबीएल) और कोहिनूर शामिल हैं। इस समय हॉन्ग कॉन्ग के रास्ते चीन को बासमती का मामूली निर्यात होता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा की हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात के लिए चीन का बाजार खुलना बासमती कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है। इससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम मांग और हाल में कीमतों में बड़ी गिरावट से उबर पाएंगे। वर्ष 201617 में कीमत के लिहाज से बासमती चावल का निर्यात पिछले साल के स्तर पर ही रहने के आसार हैं, लेकिन वित्त वर्ष 2018 में यह 10 फीसदी बढ़कर 25,500 करोड़ रुपये होने की संभावना है। इक्रा के सहायक उपाध्यक्ष दीपक जोतवाणी ने कहा, ‘इस साल बासमती चावल का उत्पादन पिछले साल से कम रहने का अनुमान है।
नया बाजार मिलने से अगले साल बासमती की ज्यादा कीमत मिल सकती है। इसके अलावा आगामी महीनों में मांग के आधार पर किसान वित्त वर्ष 2018 के सीजन में बासमती की बुआई बढ़ा सकते हैं।’ वैश्विक चावल उत्पादन में भारत और चीन का संयुक्त रूप से हिस्सा करीब 40 फीसदी है। पूरे विश्व में करीब 74 करोड़ टन चावल का उत्पादन होता है। कुल उत्पादन में चीन का हिस्सा करीब 27 फीसदी है। हालांकि दोनों ही देशों में चावल की सबसे ज्यादा खपत होती है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भागीदार नहीं बन पाते हैं। फिर भी भारत चावल का शुद्ध निर्यातक है, जबकि चीन शुद्ध आयातक है। आमतौर पर चीन के चावल की लंबाई कम होती है और यह सुगंधित नहीं होता है। हालांकि चीन में आय का स्तर बढ़ने और वैश्विक व्यापार फलनेफूलने से वहां की आबादी अन्य किस्मों के चावल भी पसंद करने लगी है। इससे चीन में चावल का आयात होने लगा है, जो मुख्य रूप से थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और भारत से होता है।
हाल के वर्षों में चीन चावल के सबसे बड़े आयातक के रूप में उभरा है। बासमती सबसे अच्छी किस्म का चावल है और इस नाम से आधिकारिक रूप से केवल भारत और पाकिस्तान ही निर्यात कर सकते हैं। इस चावल के करीब 75 फीसदी हिस्से का निर्यात होता है। भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। कीमत के लिहाज से भारत का बासमती चावल का निर्यात 21 फीसदी चक्रवृद्धि सालाना दर से बढ़ रहा है। यह 200405 में 2,824 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 201516 में 22,718 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।