Kerakat Business Club

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तुम लोग में दम है तो आमने सामने लडो 🤬🤬🤬🤬 बुजदिलों की तहर घुमने आए लोगो पर गोलियां बरसाते हो
23/04/2025

तुम लोग में दम है तो आमने सामने लडो 🤬🤬🤬🤬 बुजदिलों की तहर घुमने आए लोगो पर गोलियां बरसाते हो

"ख्वाबों को मैंने ज़िद्द और रास्तों की मुश्किलों को दोस्त बना डाला।है भरोसा खुद पर, मैं रुकने वाला नहीं,जो ठान लिया है, ...
24/10/2024

"ख्वाबों को मैंने ज़िद्द और
रास्तों की मुश्किलों को दोस्त बना डाला।
है भरोसा खुद पर, मैं रुकने वाला नहीं,
जो ठान लिया है, उसे पूरा किए बिना हार नहीं मानने वाला"



भारत रत्न के हकदार श्री रतन टाटा सर : गणेश इंडिया रतन टाटा, यह नाम सिर्फ एक उद्योगपति का नहीं, बल्कि महानता, सादगी और से...
12/10/2024

भारत रत्न के हकदार श्री रतन टाटा सर : गणेश इंडिया

रतन टाटा, यह नाम सिर्फ एक उद्योगपति का नहीं, बल्कि महानता, सादगी और सेवा का प्रतीक है। 9 अक्टूबर 2024 की रात जब पूरा भारत सोने की तैयारी कर रहा था, तब एक खबर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया—हमारे प्रिय पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित श्री रतन टाटा जी का देहांत हो गया। यह खबर सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि एक युग का अंत था। आज हर भारतीय और विश्वभर में उनके चाहने वाले शोक में डूबे हुए हैं। रतन टाटा का जीवन इतना विशाल और महान था कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका जीवन सिर्फ कारोबार और पैसे तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। आज जब दुनिया के टॉप 10 अमीरों की सूची में मुकेश अंबानी 98 बिलियन डॉलर और गौतम अडानी 101 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ शामिल हैं, तो यह जानकर हैरानी होती है कि रतन टाटा ने 103 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति दान में दे दी है। उन्होंने कभी अपनी संपत्ति का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि उसे समाज की भलाई में लगाया। यही कारण है कि वह अमीरी की सूची में कभी जगह नहीं बना पाए, लेकिन दिलों में उनकी जगह अमूल्य है। रतन टाटा की विनम्रता और सादगी का एक बेहतरीन उदाहरण है जब वह न्यूयॉर्क से इंडिया लौट रहे थे। उनकी टिकट विस्तारा एयरलाइंस की इकोनॉमी क्लास में बुक थी। एयरलाइंस के अधिकारियों ने उन्हें बिजनेस क्लास में शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन रतन टाटा ने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इकोनॉमी क्लास में ही सफर करना पसंद है क्योंकि वह अपने लोगों के साथ रहना चाहते थे। यह घटना उनकी सादगी और आम लोगों के प्रति जुड़ाव को दर्शाती है।
उनका दिल सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, जानवरों के लिए भी धड़कता था। एक बार उनके ऑफिस में बारिश से भीगता हुआ एक स्ट्रीट डॉग घुस गया। गार्ड्स उसे बाहर भगाने लगे, लेकिन रतन टाटा को यह बात बुरी लगी और उन्होंने उस डॉग के लिए अपने ऑफिस में एक शेल्टर बनवा दिया। यहां तक कि ताज होटल में भी उन्होंने स्ट्रीट डॉग्स को आने की अनुमति दे रखी थी, यह दिखाता है कि उनके दिल में हर जीव के लिए जगह थी। 26/11/2008 का दिन कोई भारतीय नहीं भूल सकता, जब ताज होटल पर आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में ताज होटल के कई कर्मचारियों और मेहमानों ने अपनी जान गंवाई। लेकिन रतन टाटा ने न सिर्फ इस मुश्किल समय में अपने कर्मचारियों का साथ दिया, बल्कि जिन कर्मचारियों और मेहमानों की जान गई, उनके परिवारों की आजीवन चिकित्सा, रोजगार की व्यवस्था की

24 Sep News Paper Cutting of my article regarding Indian Defence System based on Lebnon Israel war strategy             ...
10/10/2024

24 Sep News Paper Cutting of my article regarding Indian Defence System based on Lebnon Israel war strategy

रतन टाटा, एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही दिल में इज़्ज़त और सम्मान पैदा होता है। उनका व्यक्तित्व और काम सिर्फ़ व्यापार तक सीमि...
09/10/2024

रतन टाटा, एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही दिल में इज़्ज़त और सम्मान पैदा होता है। उनका व्यक्तित्व और काम सिर्फ़ व्यापार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने देश और समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने का सपना देखा। रतन टाटा का आज इंतकाल हो गया, और इस खबर ने हर किसी के दिल को छू लिया।रतन टाटा का जन्म एक समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, लेकिन उनका जीवन सादगी और समाजसेवा का प्रतीक रहा। उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान संभालते हुए इसे दुनिया के सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल किया, लेकिन उनकी असली पहचान उनके दिल में बसी इंसानियत और समाज के प्रति उनके योगदान से बनी।वह कभी सिर्फ़ पैसे कमाने पर ध्यान नहीं देते थे। उनकी नज़र हमेशा इस बात पर रहती थी कि कैसे उनके काम से देश को फायदा हो, कैसे समाज में बदलाव लाया जा सके। उन्होंने बहुत से स्कूल, अस्पताल, और समाजसेवी संस्थाएँ बनाई, ताकि हर इंसान को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें। उनका सपना था कि हर भारतीय के जीवन में सुधार हो और सभी को समान अवसर मिले।रतन टाटा बहुत विनम्र थे। वह हमेशा कहते थे कि सफलता का असली मतलब सिर्फ़ पैसे और शोहरत नहीं है, बल्कि यह है कि आपने कितने लोगों की ज़िन्दगी में बदलाव लाया। उनका कहना था, "अगर आप धनी हैं और दूसरों की मदद नहीं कर रहे हैं, तो आपकी दौलत का कोई मतलब नहीं।"उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह हमेशा निडर होकर सही काम करने की हिम्मत रखते थे। चाहे व्यापार में नुकसान हो या मुनाफा, वह अपने उसूलों पर कायम रहते थे। वह लोगों को प्रेरित करते थे कि जीवन में कठिनाईयों से कभी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनसे लड़कर आगे बढ़ना चाहिए।रतन टाटा की सादगी और बड़प्पन ने उन्हें सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में एक मिसाल बना दिया। वह सच्चे राजा थे, लेकिन उनके पास कोई ताज नहीं था। उनका ताज था लोगों के दिलों में बसी इज़्ज़त और प्यार। आज उनके जाने से पूरा देश दुखी है, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमें प्रेरित करती रहेंगी।रतन टाटा के जीवन से हमें सिखने को मिलता है कि असली सफलता दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है। हम सब उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में सुधार ला सकते हैं और उनकी तरह एक अच्छा इंसान बन सकते हैं।

कम हो या ज्यादा हमे अपना कामअपने हिसाब से करना पसंद है 🙂
08/10/2024

कम हो या ज्यादा हमे अपना काम
अपने हिसाब से करना पसंद है 🙂

2 अक्टूबर, गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी जन्म दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि और नमन 💐💐💐💐दोस्तों, कुछ लोग महात्मा गांधी ...
02/10/2024

2 अक्टूबर, गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी जन्म दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि और नमन 💐💐💐💐

दोस्तों, कुछ लोग महात्मा गांधी जी को पसंद नहीं करते, और उनमें से मुख्यतः तीन तरह के लोग होते हैं। पहला समूह वे लोग हैं जो डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर को आदर्श मानते हैं। उनका मानना है कि गांधी जी धार्मिक थे और वर्ण व्यवस्था का समर्थन करते थे। दूसरा समूह वे हैं जो नाथूराम गोडसे को नायक मानते हैं, और तीसरा समूह वे लोग हैं जिनके अनुसार, अगर गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार को भगत सिंह की फांसी रोकने के लिए पत्र लिखा होता, तो शायद भगत सिंह की फांसी रुक सकती थी।

इन तीनों विचारधाराओं पर मेरी राय इस प्रकार है:

1. अंबेडकरवादी विचारधारा:
मैं पूरी तरह से अंबेडकरवादी लोगों का समर्थन करता हूं, क्योंकि मैं खुद वर्ण और जाति व्यवस्था का प्रबल विरोधी हूं। मेरा मानना है कि समाज में वास्तविक तरक्की और विकास तभी संभव है जब हम सभी को समान समझें। इतिहास के पन्नों में हमें सम्राट अशोक के समय जाति-व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं मिलता। और यह भी ऐतिहासिक तथ्य है कि उस समय भारत अखंड था और "सोने की चिड़िया" के रूप में जाना जाता था।

2. माफ़ीवीर नाथूराम गोडसे और सावरकर:
मैं नाथूराम गोडसे को "माफी वीर" सावरकर का अनुयायी मानता हूं। सावरकर वह व्यक्ति थे जिन्होंने अंग्रेजों से पेंशन ली और कभी भी स्वतंत्रता आंदोलन के सही सहयोगी नहीं रहे। कई मामलों में, उन्होंने ब्रिटिश सरकार को भारत में हो रहे ब्रिटिश-विरोधी आंदोलनों की जानकारी दी, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन कमजोर हुआ। माफ़ीवीर सवारकर धार्मिक कट्टरपंथी थे जेसे मोहम्मद अली जिन्ना स्लामिक कट्टरपंथी दोनो देश के लिए घातक थे क्योंकि भारत सब धर्मों का देश है इसकी आज़ादी के लिए हमारे लोगों ने हिंदू मुस्लिम जैन बौद्ध पारसी सिक्ख बनके नहीं लड़े वह भारतीय थे। जो लोग मेरी बातों पर विश्वास नहीं करते, वे खुद सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखे पत्र पढ़ सकते हैं।

3. भगत सिंह की फांसी:
शहीद-ए-आजम भगत सिंह को मैं स्वतंत्रता आंदोलन में सबसे प्रमुख मानता हूं। गांधी जी ने उनकी फांसी रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन उन्होंने भगत सिंह को यह भी कहा कि वे ब्रिटिश सरकार से माफी मांग लें। यह बात भगत सिंह को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और उन्होंने माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया, जो कि मेरे अनुसार पूरी तरह से सही था। यहां दोनों अपनी जगह पर सही थे—गांधी जी ने पत्र लिखा और भगत सिंह ने अपने देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं किया।

अंतिम विचार:
मैं सिर्फ यह कहना चाहता

29/09/2024
Israel’s Attack on Lebanon: A   for  September 17, 2024, at 3:00 PM, a significant event shook the world: Israel launche...
23/09/2024

Israel’s Attack on Lebanon: A for

September 17, 2024, at 3:00 PM, a significant event shook the world: Israel launched a smart, non-conventional attack on Hezbollah in Lebanon. This wasn’t a typical missile strike. Instead, 3,000 mini-explosions, concealed in devices resembling pagers, detonated in different locations. These explosions, orchestrated by Israel’s intelligence agency Mossad and cyber unit 8600, resulted in 25 deaths and over 2,800 injuries. The pagers, initially ordered by Hezbollah from Vietnam to coordinate their operations, were rigged by Israel months earlier. This attack demonstrated the immense potential of modern technology, which can cause massive destruction remotely without detection.Should India Be Cautious?
Absolutely. India must learn from such incidents and enhance its readiness. Israel’s use of advanced technology has shown how small, precise strikes can cause enormous damage. If a country like China, which exports vast quantities of electronic goods to India, were to employ similar tactics, are we prepared? Many of the electronic devices we use daily, such as mobile phones, TVs, laptops, and more, are manufactured in China. If any of these devices were compromised with explosives or malicious software, it would pose a severe national security threat.Therefore, I urge the Indian government to impose stricter inspections on imported goods, particularly from China, and prioritize 'Make in India' projects. This would reduce dependency on foreign technology and strengthen our ability to produce essential goods domestically.The Need for Educational Reform
Our education system also needs to evolve. In today's world, practical learning and project-based work should take precedence over traditional rote learning. Only then can we equip the younger generation with the skills required to innovate and compete globally. Despite initiatives like 'Digital India,' we are still largely consumers of foreign technology. Platforms like Gmail, Google, Facebook, and Twitter dominate our digital landscape, with no Indian alternatives that can compete on the same scale.While innovations like UPI have gained global recognition, India remain

Malleability of Metals and Success: Flexibility Without Compromise."Just like metals are malleable and can bend without ...
17/09/2024

Malleability of Metals and Success: Flexibility Without Compromise.
"Just like metals are malleable and can bend without breaking, successful people are flexible. They adapt to challenges without losing their core values."


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