17/09/2026
गजल: इश्क़ दोबारा करना
पुराने दर्द की तसवीर को उतारा करना,
जो दिल को रास न आए, वो दरकिनार करना।
भला शिकवा करें क्यूँ हम किसी से दुनिया में,
छूटे जो हाथ किसी का, तो दूसरा करना।
अरे, उजड़ के बैठ न जाना कभी मजारों पर,
जो पहला इश्क़ मिटा दे, तो दूसरा करना।
नज़र चुराने से क्या फ़ायदा मोहब्बत में,
जो सच में हाल-ए-दिल पूछे, इशारा करना।
चराग़-ए-उम्र बुझाने की ज़िद न कर मुसाफिर,
अंधेरी रात में सूरज का इंतज़ार करना।
पुराने दर्द का मातम फ़िज़ूल है 'अम्बरीष',
नया सफ़र है तो कोई नया किनारा करना
अम्बरीष चन्द्र पाठक
जौनपुर यूपी