09/06/2021
6 भाषाओं में गीत गाकर दुनिया को लोकसंगीत से मुग्ध करने वाले ‘लाखा खान’ पद्मश्री सम्मान से हुए सम्मानित, इनकी कला के आगे नतमस्तक हो जाएंगे आप
इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो अपने नाम से नहीं बल्कि अपने काम से पहचाने जाते हैं। उनका काम ही इतना बड़ा होता है कि उनके आगे हर चीज़ छोटी लगने लगती है। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है राजस्थान के जोधपुर जिले के रहने वाले लाखा खान। जिन्होंने अपने लोक संगीत के जरिए पुरी दुनिया को भारतीय कला से परिचित कराया है। लाखा खान के लोग संगीत की खासियतक यह है कि वो एक गीत को 6 भाषाओं में गा सकते हैं। लाखा खान (Lakha Khan) 6 भाषाओं में गीत गाने वाले भारत के एकमात्र प्यालेदार सिंधी सारंगी वादक हैं। यही कारण है कि लाखा खान को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रेगिस्तान से निकलकर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाना लाखा खान के लिए इतना आसान नहीं था। आइए जानते हैं उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी।
बचपन से ही थी संगीत में रूचि
राजस्थान के जोधपुर जिले के बाप तहसील के रनेरी गांव में लंगा समुदाय के पारंपरिक संगीतकारों के परिवार में जन्में लाखा खान को कम उम्र में ही उनके पिता थारू खान ने और बाद में उनके चाचा मोहम्मद खान ने मंगणियारों के मुल्तान स्कूल की रचनाओं का प्रशिक्षण दिया था। लाखा खान को बचपन से ही सारंगी बजाने का शौक था। देश-विदेश में सबसे मुश्किल माने जाने वाली सिंध की 27 स्ट्रिंग की सारंगी के वे सबसे बेहतरीन कलाकार माने जाते हैं। लोक संगीत को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया। बहुत छोटी उम्र में उनकी संगीत की शिक्षा मुल्तान के मंगणयार स्कूल में शुरू हो गई। जोधपुर के कोमल कोठारी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अलग मुकाम पर ले गए। साठ के दशक में उनकी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति कोमल कोठारी के सहयोग से ही संभव हो पाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।