28/04/2024
माँ के स्वर्गवास के दो माह बाद अमेरिका में सैटल मामा-मामी घर आये तो चित्रकार भाँजे ने उन्हें माँ की पोर्ट्रेट दिखायी।
“बहुत बढ़िया! तुमने तो कमाल कर दिया, बेटा। तेरी माँ जवानी में इतनी ही खूबसूरत थीं,” मामाजी बोले।
“हू-ब-हू मिला दिया, वाह!” मामीजी के मुँह से निकला।
भाँजे की आँख भर आयी। वह बताने लगा—
“मैं बहुत परेशान था, मुझे अपनी माँ का पोर्ट्रेट बनाने में ही कामयाबी नहीं मिल रही थी। मैं कई दिन से इसमें मशगूल था, और मंज़िल दूर थी। पहले तो स्कैचिंग में ही दिक्कतें आयीं। कभी आँखें, कभी नाक, कभी होंठ कभी गाल, और कभी ठोढ़ी! जैसे तैसे करके स्कैच पूरा हुआ तो उसे पेंट करने में दिक्कत। कभी स्किन का कलर मैच नहीं हो रहा, कभी शेडिंग ज्यादा गहरी हो गयी, कभी लाइटिंग।“
“मैंने उस रात माँ की अधूरी पोर्ट्रेट के आगे प्रार्थना की और अपने जाने-अनजाने गुनाहों की क्षमा माँगी। कहा कि मैं उनसे बहुत प्रेम करता था, करता हूँ, और करता रहूँगा।“
“उस रात माँ मेरे सामने आयीं। वह बहुत सुंदर लग रही थीं, और मैं छोटा बच्चा था। माँ मेरे साथ खेलीं, हँसीं, मेरे लिए स्वादिष्ट खाना बनाया। मैं तृप्त हो गया। फिर मुझे बुखार हुआ, और माँ मुझे उठा कर डॉक्टर के पास भागीं। रिक्शा न मिला तो पैदल ही दो किलोमीटर दूर डॉक्टर के क्लिनिक पर चली गयीं। डॉक्टर गुस्सा हो गया, “रिक्शा कर लेतीं, पैदल क्यों आयीं?”
“इतने पैसे नहीं थे,” माँ बेबाकी से बोलीं।
“अचानक कुत्ते के भौंकने से मेरी नींद खुलीं तो पाया कि मैं सपना देख रहा था। माँ को याद करके मैं रोया और बेचैन हुआ। कई करवटें बदलने पर भी नींद न आयी, तो उठ बैठा और पोर्ट्रेट पूरी करने लगा। हर कलर सही जमा, हर स्ट्रोक सटीक बैठा, मेरी पोर्ट्रेट सही दिशा में बढ़ चली। बिना थके मैं लगा रहा और पोर्ट्रेट संतुष्टी की सीमा तक आगे बढ़ती रही,“ यह बता कर चित्रकार चुप हो गया।
“डॉक्टर वाली बात जो तुम्हें माँ ने सपने में बतायी, वह हक़ीक़त में हुई थी, जब तुम ढाई साल के थे,” मामाजी उस दिन को याद करके हैरानी से बोले, तो चित्रकार और मामीजी भी हैरान हो गये।
“माँ ऐसी ही होती है, पुत्तर जी! मरने के बाद भी माफ कर देती है,” उसकी पूरी बात समझ कर मामीजी बोलीं तो चित्रकार को लगा कि पोर्ट्रेट में माँ आ समायी हैं।
Love is life