Pearls of Astrology

Pearls of Astrology Services offered:
� Vastu Remedies
� Vedic Astrology
� Horary Chart (प्रशन कु?

10/09/2020

ज्योतिष के अनुसार, शुक्र व शनि दोनों मित्र हैं। यदि दो मित्र ग्रह उत्तम स्थिति में हो तो अपनी-अपनी दशा व अंतर्दशा में बहुत अच्छा फल देते हैं। मगर उत्तरकालामृत ग्रन्थ में इसके विपरीत नियम है। जब शुक्र में शनि और शनि में शुक्र की दशा का योग बनता है तो कुबेर भिक्षु और भिक्षु भी कुबेर बन जाता है। अगर शुक्र तथा शनि दोनों उच्च, स्वक्षेत्री, वर्गोत्तम आदि में योगकारक होकर बलवान हो जाए और एक दूसरे की दशा तथा अंतर्दशा बन जाए तो ये स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे समय में कोई कुबेर समान राजा भी भिक्षा मांगकर जीवन निर्वाह करने वाला बन जाता है। इसके विपरीत यदि शुक्र और शनि में से कोई एक बलवान तथा दूसरा बलहीन हो जाए तो बलवान ग्रह का योग फल देता है।

06/08/2020

What is Prashna Kundali?
In Hindi, ‘Prashna’ means Question and ‘Kundali’ means birth chart. So literally, the term prashna kundali, means birth chart of a question. In more detail, prashna kundali is basically the birth chart created based on the date & time when the individual asks the question.
Through the prashna kundali, one can know whether an event will occur or not.
Just like regular kundali, in this importance is given to:
ascendant sign of the native
every house and zodiac sign representations are entirely different
The ascendant in prashana kundali represents the person who asks the question. The seventh house represents the subject matter about which the question is asked. The analysis is done on the basis of the planet that the ascendant represents. Hence, the astrologers take into everything into consideration when analyzing the ascendant of a kundali.To know which question is related to the planet, which looks at the planet ascendant in full view, it can be a question related to that planet or a planet which is strong in the horoscope, it can be a question related to that planet. One can know the reasons behind inner upheaval through prashna kundali. In prashna kundali, the question asked is seen in relation to the ascendant sign.
The zodiac sign in the ascendant house is the shadow of the questionnaire himself. The 7th house is also considered important in relation to the question. The nature of the question is derived from the planet in the ascendant house or from the planet aspecting the ascendant house.
The horoscope serves to indicate the path of happiness and sorrow in life. The prashna kundali provides meaningful information about the possible outcome of related to the question asked. Many times a horoscope is not available if it is unavailable, then due to lack of definite information about the time of birth, the prophecy would not be correct.

14/03/2020

घर में पूजा के कमरे का स्थान सबसे अहम होता है। इस स्थान से ही हमारे मन और मस्तिष्क में शांति मिलती है तो यह स्थान अच्छा होना जरूरी है। आपकी आय काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि घर में पूजाघर कहां है। यहां हिदायत यह है कि किसी लाल किताब के विशेषज्ञ से पूछकर ही पूजाघर बनवाएं अन्यथा सभी तरह का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वास्तु की नजर से पूजाघर घर के बाहर एक अलग स्थान देवता के लिए रखा जाताथा जिसे परिवार का मंदिर कहते थे। बदलते दौर के साथ एकल परिवार का चलन बढ़ा है इसलिए पूजा का कमरा घर के भीतर ही बनाया जाने लगा है अतएव वास्तु अनुसार पूजाघरका स्थान नियोजन और सजावट की जाए तो सकारात्मक ऊर्जा अवश्य प्रवाहित होती है। घर में पूजा घर या पूजा का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए। पूजा घर में मूर्तियां या फोटो इस तरह से रखनी चाहिए कि वे आमने-सामने न हों। घर में सार्वजनिक मंदिर की तरह पूजा कक्ष में गुम्बद, ध्वजा, कलश, त्रिशूल या शिवलिंग इत्यादि नहीं रखने चाहिए। मूर्तियां बार अंगुल से अधिक ऊंची नहीं रखना चाहिए। पूजा गृह शयन कक्ष में नहीं होना चाहिए। यदि शयनकक्ष में पूजा का स्थान बनाना मजबूरी हो तो वहां पर्दे की व्यवस्था करनी चाहिए। पूजा गृह हेतु सफेद, हल्का पीला अथवा हल्का गुलाबी रंग शुभ होता है। वास्तु के अनुसार भगवान के लिए उत्तर-पूर्व की दिशा श्रेष्ठ रहती है। इस दिशा में पूजाघर स्थापित करें। यदि पूजाघर किसी ओर दिशा में हो तो पानी पीते समय मुंह ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखें। पूजाघर के ऊपर या नीचे की मंजिल पर शौचालय या रसोईघर नहीं होना चाहिए, न ही इनसेसटा हुआ। सीढ़ियों के नीचे पूजा का कमरा बिलकुल नहीं बनवाना चाहिए। यह हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए, तहखाने में नहीं। पूजा का कमरा खुला और बड़ा बनवाना चाहिए।

18/02/2020

वास्तु के अनुसार आपको घर में दक्षिण दिशा में सोना चाहिए। जिससे आपके स्वभाव में बदलाव होगा। ध्यान रखें कि पश्चिम की और सिर रख कर नहीं सोये। घर के उत्तर व पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा ना होने दें और ना ही इधर भारी मशीनें रखें। यह आपके घर में वास्तु दोष का कारण बन सकता है। आप घर के उत्तर-पूर्व में कचरा पेटी रख दें। यदि आपके घर के पूर्व कोने में टॉयलेट है तो सीट को इस तरह लगाएं कि उस पर उत्तर या दक्षिण की और मुंह करके बैठ सके। इससे आपके घर का वास्तु दूर होगा और आपको हर काम में अवश्य ही सफलता मिलेंगी।

अपने मकान दूकान पर वास्तु निरिक्षण के लिए संपर्क करें ,-- 8168023431

15/02/2020

घर के ईशान्य क्षेत्र में (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में) कोई भी पालतू जानवर न बांधें। कुत्ते, मुर्गे एवं भैंसों के संबंध में तो और भी सावधान रहें, अन्यथा घर में परेशानियों का अंबार लगा रहेगा

06/01/2020

श्राद्ध कर्म के दौरान लोग अपने पितरों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, पूजा-हवन और अन्न दान करते हैं। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का ये सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। वैसे अगर बात पितृदोष की करें तो किसी भी जातक की कुंडली के नवम भाव को पूर्वजों का स्‍थान माना जाता है और नव-ग्रह में सूर्य स्‍पष्‍ट रूप से पूर्वजों के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में जिस किसी भी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य बुरे ग्रहों के साथ विराजमान होते हैं या फिर सूर्य पर बुरे ग्रहों की दृष्टि पड़ रही होती है उस जातक की कुंडली में पितृदोष होता है।
कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष आ जाता है तो उस व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लग जाती हैं। फिर लगातार प्रयास और कड़ी मेहनत के बावजूद उस व्यक्ति को उसकी मेहनत का फल नहीं मिल पता है। सिर्फ इतना ही नहीं कुंडली में पितृ दोष की वजह से वो इंसान हमेशा दिक़्क़तों में घिरा रहता है। ऐसे इंसानों के घर में हमेशा धन की कमी बनी रहती है, उनके परिवार में कलह रहती है, और ऐसे लोगों के घर में कोई ना कोई हमेशा ही बीमार रहने लग जाता है। अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको आपकी ज़िंदगी में नज़र आने लगे तो समझ जाइये कि आपकी कुंडली में पितृ दोष है और आपको जल्द से जल्द इसका निवारण कर लेना चाहिए।

हर कोई चाहता है कि घर में हमेशा सुख-शांति का माहौल रहे, उसके लिए वह हर दिन प्रयास करता है। वास्तु द्वारा हम अपने भाग्य क...
03/01/2020

हर कोई चाहता है कि घर में हमेशा सुख-शांति का माहौल रहे, उसके लिए वह हर दिन प्रयास करता है। वास्तु द्वारा हम अपने भाग्य को जितना हो सके उतना खुशहाल बनाने की कोशिश कर सकते हैं। आपको किस तरह की परेशानी लगतार बनी हुई है, इसके लिए हम आपको बताते हैं कि आपके घर में वास्तु दोष कहां है…
घर में बच्चे की किलकारी ना गुंजना, वास्तु दोष की निशानी हो सकती है। ऐसा तभी होता है, जब आपके मकान का मध्य भाग सही ना हो या वो उठा हुआ हो। घर के इस भाग को सही कराएं, जिससे आपकी समस्या का अंत हो। साथ ही घर में कभी भी कीकर का वृक्ष ना लगाएं।

क्या आपकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब बनी हुई है और साथ कई परेशानियां आपकी चिंता का कारण बनी हुई है? वास्तु के अनुसार, इसका मुख्य कारण नैऋत्य कोण में घर का मुख्य द्वार होना है। इसके लिए आपको मुख्य द्वार सही करवाना होगा। दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य के स्थान को नैऋत्य दिशा का नाम दिया गया है। इस दिशा पर निरूति या पूतना का आधिपत्य है। ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु इस दिशा के स्वामी हैं।

यदि आपके घर में ईश्वरीय कृपा नहीं हो रही है, हर वक्त किसी ना किसी का स्वास्थ्य खराब रहता है या फिर धन की बरकत नहीं हो रही है तो इसके लिए ईशान कोण में दोष हो सकता है। पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं, उस स्थान को ईशान कोण की संज्ञा दी गई है। इस दिशा को आप सही करवाएं।

कर्ज से आपको मुक्ति नहीं मिल रही है तो इसके लिए आपका वायव्य कोण में दोष हो सकता है। साथ ही इस स्थान में दोष होने से पड़ोसियों, मित्रों और संबंधियों से बुरे संबंधों का कारण बनता है। उत्तर और पश्चिम दिशा के मिलन का स्थान वायव्य कोण कहलाता है
Message us to get your own consultation📩📿🌟

30/12/2019

ज्योतिष शास्त्र में जीवन की हर मुश्किल का सामना करने के लिए, हर क्षेत्र में सफलता और मनवांछित लाभ के लिए कुछ उपायों की बहुत मान्यता है। इन ज्योतिष उपायों को पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से अवश्य कार्य सिद्ध होते हैँ। एेसे कुछ अनेक छोटे व आसान उपाय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत बताए गए हैं, जिन्हें करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो सकती है। बहुत से लोग इन उपायों के बारे में या तो जानते नहीं है और यदि जानते हैं तो इन पर विश्वास नहीं करते। इन उपायों पर विश्वास करने के लिए जरूरी है स्वयं पर विश्वास करना,
ज्योतिष के अनुसार, यदि ये उपाय सच्चे मन से किए जाएं तो जल्दी ही इनका सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है, अब उपाय करवाना भी एक विज्ञान है मैंने कई बार देखा है कि कुछ लोग अपनी दुकानदारी सिर्फ उपाय पर चला रहे हैं वो लोग समस्या की जड़ तक जाना ही नही चाहते बस कुंडली देखि और किसी चमत्कारी किताब जिसमे उपाय थोक में लिखे हैं को चिपका देते हैं और इंतज़ार करते हैं कि जातक की ज़िन्दगी में कोई चमत्कार हो जायेगा , ये बिलकुल गलत धारणा है कि सिर्ग उपाय कर लेने से समस्या ठीक हो जायेगी और वो भी रटे रटाये उपाय जो किसी steroid की तरह हर बीमारी में काम आते हैं,अब थोड़ा ये जानते हैं कि उपाय क्या और कैसे करवाया जाए , जब भी कोई जनम पत्रिका ज्योतिष के पास आती है तो पहले कुंडली का लगन लग्नेश सप्तमेश दशमेश आदि मुख्या भावों का अवलोकन किया जाता है फिर वक्री और अस्त का विचार किया जाता है ,उसके बाद कोनसा ग्रह किस नक्षत्र में है ये देखा जाता है और सबसे बाद में महादशा और गोचर का विचार किया जाता है , अब सवाल ये उठता है कि इन सब बातों में से किस बात का सबसे ज्यादा महत्व होगा , और जिसका महत्व होगा उसीका उपाय करवाया जायेगा ,यही एक दक्ष ज्योतिषी का कार्य है कि इनमें से किस स्थिति का उपाय करवाया जाए और कई बार तो इनमें से कोई भी स्थिति समस्या का मुख्य कारण नही होती, मुख्या कारण होता है मकान या व्यवसाय स्थल का ख़राब वास्तु, अब कुछ डेढ़ सयाने लोग ये कहकर अपनी हेकड़ी झाड़ देते हैं कि ये तो जी पंडितों ज्योतिषियों का धंधा है वरना पहले कौन वास्तु को मानता था तो उन महानुभावों के लिए मेरा ये कहना है कि सही मायने में वास्तु पहले ही लागू होता था ,आज के समय में हमने ही इसे दूषित किया है , वास्तु का निरिक्षण करते समय मुख्या तौर पर घर के मुख्य द्वार , रसोई , और मंदिर का विचार किया जाता है और पहले के ज़माने में ये सब सही परिणाम देते थे क्योंकि मुख्या द्वार मध्य में होता था , शौच के लिए लोग बाहर ही जाते थे, मंदिर भी पूरे गांव या कसबे का एक ही होता था , घर के मध्य में तुलसी का पौधा होता था , संयुक्त परिवार होता था , घर के बड़े बुजुर्ग घर के मुख्य द्वार के पास की बैठक में रहते थे जो कि वास्तु के हिसाब से राहु का स्थान था , अब बताये कोउ कि पहले वास्तु के नियम लागू थे या नही , अब ये फ्लैट और सोसाइटी की मानसिकता वालों को ये बात कौन समझाए .

वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन के नीचे दबी हुई वस्तुओं का सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भवन और उसमें रहने वाले लोग...
30/12/2019

वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन के नीचे दबी हुई वस्तुओं का सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भवन और उसमें रहने वाले लोगों पर होता है। यह प्रभाव सामान्यतः दो से तीन मंजिल तक रहता है। भवन निर्माण से पहले भूमि की जांच करवाना इसी के चलते जरूरी होता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दोष की स्थिति में भवन में रहने वाले के मान- सम्मान, प्रतिष्ठा में कमी आती है साथ ही सुख का नाश और दुर्भाग्य का निर्माण होता है। हमेशा मन अशांत और भवन में भय का माहौल बना रहता है। परिवार में अकारण ही अशांति रहती है और आपसी संबंध बिगड़ने लगते हैं। पाताल दोष यदि बेडरूम में है तो सोने वाले को बुरे सपने आते हैं तथा वैवाहिक जीवन में असफलता भी देखने को मिलता है। स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दोष के ऑफिस में होने पर आर्थिक तौर पर कठनाईयों का सामना करना पड़ता है। व्यापार में हानि होती है।

अधिकतर वास्तुकला के जानकार दिशाओं का अंदाजा सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर, मैगनेटिक कम्पास के बिना करते हैं, जबकि इस यंत्र के बिना वास्तु कार्य नहीं करना चाहिए। दिशाओं के सूक्ष्म अंशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अतः जरूरी रेनोवेशन या निर्माण कार्य, अच्छे जानकार वास्तु शास्त्री की देखरेख में ही करवाना ठीक होता है।

We have reached 1600+ page likes.Thankyou everyone for the support.For any Vastu Consultation or Gem Therapy or Astrolog...
29/12/2019

We have reached 1600+ page likes.
Thankyou everyone for the support.

For any Vastu Consultation or Gem Therapy or Astrological Prediction : Message us.( )

वास्तु एक पूल है मानव और प्रकृति के बीच। हम जितने आधुनिक हो रहे है उतना ही दूर हो रहे हमारे वेदों से। वास्तु एक विज्ञानं...
29/12/2019

वास्तु एक पूल है मानव और प्रकृति के बीच। हम जितने आधुनिक हो रहे है उतना ही दूर हो रहे हमारे वेदों से। वास्तु एक विज्ञानं है सभी चीज़ो को सही जगह पर रखना और प्रकृति के तत्वों क साथ संतुलन बनाये रखने का। अगर कोई घर या काम करने की जगह कोई भी वास्तु का सिद्धांत का उल्लंघन करता है तो फिर उससे vastu dosh कहा जाता है। वास्तु दोष के कारन उस भवन में रह रहे व्यक्तियों को पारिवारिक , सार्थिक और सामाजिक मुसीबतों का सामना करना पढ़ता है। हर वास्तु दोष के उपाय होते है ताकि वो vastu dosh हटाया जा सके। वास्तु दोष के निवारण के कई तरीके है , जैसे की कमरे के सामान की जगह बदलना, घर का आतंरिक डिज़ाइन बदलना। अगर vastu dosh निवारण बताये गए माने जाते है तोह घर की सुख शान्ति और ख़ुशी लौट आती है

vastu dosh के कारन बहुत सारे है। कुछ वास्तु दोष के कारन हो सकते है जैसे की घर मे रह रहे लोगो की वजह से भी वास्तु खराब होता है। अगर घर मे रहने वाले लोग अनैतिक आचरण करते हो तोह उस वजह से भी घर का वास्तु ख़राब होता है। कई बार ऐसा भी होता है की घर का वास्तु सही है पर फिर भी घर मे सब सही नहीं लगता। इसका एक ही कारन है जो की है नकारात्मक ऊर्जा जो घर मे होती है। यदि आपको भी ऐसा कुछ महसूस हो रहा है तो बिना देरी किये इसका निवारण कीजिये.

वास्तु निरिक्षण के लिए संपर्क करें.

whatsapp no. 8168023431

DM📩(Message) us for more details.
25/12/2019

DM📩(Message) us for more details.


Address

Kaithal
136027

Telephone

+918168023431

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Pearls of Astrology posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Pearls of Astrology:

Share