30/12/2019
ज्योतिष शास्त्र में जीवन की हर मुश्किल का सामना करने के लिए, हर क्षेत्र में सफलता और मनवांछित लाभ के लिए कुछ उपायों की बहुत मान्यता है। इन ज्योतिष उपायों को पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से अवश्य कार्य सिद्ध होते हैँ। एेसे कुछ अनेक छोटे व आसान उपाय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत बताए गए हैं, जिन्हें करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो सकती है। बहुत से लोग इन उपायों के बारे में या तो जानते नहीं है और यदि जानते हैं तो इन पर विश्वास नहीं करते। इन उपायों पर विश्वास करने के लिए जरूरी है स्वयं पर विश्वास करना,
ज्योतिष के अनुसार, यदि ये उपाय सच्चे मन से किए जाएं तो जल्दी ही इनका सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है, अब उपाय करवाना भी एक विज्ञान है मैंने कई बार देखा है कि कुछ लोग अपनी दुकानदारी सिर्फ उपाय पर चला रहे हैं वो लोग समस्या की जड़ तक जाना ही नही चाहते बस कुंडली देखि और किसी चमत्कारी किताब जिसमे उपाय थोक में लिखे हैं को चिपका देते हैं और इंतज़ार करते हैं कि जातक की ज़िन्दगी में कोई चमत्कार हो जायेगा , ये बिलकुल गलत धारणा है कि सिर्ग उपाय कर लेने से समस्या ठीक हो जायेगी और वो भी रटे रटाये उपाय जो किसी steroid की तरह हर बीमारी में काम आते हैं,अब थोड़ा ये जानते हैं कि उपाय क्या और कैसे करवाया जाए , जब भी कोई जनम पत्रिका ज्योतिष के पास आती है तो पहले कुंडली का लगन लग्नेश सप्तमेश दशमेश आदि मुख्या भावों का अवलोकन किया जाता है फिर वक्री और अस्त का विचार किया जाता है ,उसके बाद कोनसा ग्रह किस नक्षत्र में है ये देखा जाता है और सबसे बाद में महादशा और गोचर का विचार किया जाता है , अब सवाल ये उठता है कि इन सब बातों में से किस बात का सबसे ज्यादा महत्व होगा , और जिसका महत्व होगा उसीका उपाय करवाया जायेगा ,यही एक दक्ष ज्योतिषी का कार्य है कि इनमें से किस स्थिति का उपाय करवाया जाए और कई बार तो इनमें से कोई भी स्थिति समस्या का मुख्य कारण नही होती, मुख्या कारण होता है मकान या व्यवसाय स्थल का ख़राब वास्तु, अब कुछ डेढ़ सयाने लोग ये कहकर अपनी हेकड़ी झाड़ देते हैं कि ये तो जी पंडितों ज्योतिषियों का धंधा है वरना पहले कौन वास्तु को मानता था तो उन महानुभावों के लिए मेरा ये कहना है कि सही मायने में वास्तु पहले ही लागू होता था ,आज के समय में हमने ही इसे दूषित किया है , वास्तु का निरिक्षण करते समय मुख्या तौर पर घर के मुख्य द्वार , रसोई , और मंदिर का विचार किया जाता है और पहले के ज़माने में ये सब सही परिणाम देते थे क्योंकि मुख्या द्वार मध्य में होता था , शौच के लिए लोग बाहर ही जाते थे, मंदिर भी पूरे गांव या कसबे का एक ही होता था , घर के मध्य में तुलसी का पौधा होता था , संयुक्त परिवार होता था , घर के बड़े बुजुर्ग घर के मुख्य द्वार के पास की बैठक में रहते थे जो कि वास्तु के हिसाब से राहु का स्थान था , अब बताये कोउ कि पहले वास्तु के नियम लागू थे या नही , अब ये फ्लैट और सोसाइटी की मानसिकता वालों को ये बात कौन समझाए .