Dhanlaxmi Astrology

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08/01/2021

क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेष शैया पर विश्राम कर रहे हैं और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा रही हैं।
विष्णु जी के एक पैर का अंगूठा शैया के बाहर आ गया और लहरें उससे खिलवाड़ करने लगीं।
क्षीरसागर के एक कछुवे ने इस दृश्य को देखा और मन में यह विचार कर कि मैं यदि भगवान विष्णु के अंगूठे को अपनी जिव्ह्या से स्पर्श कर लूँ तो मेरा मोक्ष हो जायेगा उनकी ओर बढ़ा।
उसे भगवान विष्णु की ओर आते हुये शेषनाग जी ने देख लिया और कछुवे को भगाने के लिये जोर से फुँफकारा। फुँफकार सुन कर कछुवा भाग कर छुप गया।
कुछ समय पश्चात् जब शेष जी का ध्यान हट गया तो उसने पुनः प्रयास किया। इस बार लक्ष्मी देवी की दृष्टि उस पर पड़ गई और उन्होंने उसे भगा दिया।
इस प्रकार उस कछुवे ने अनेकों प्रयास किये पर शेष जी और लक्ष्मी माता के कारण उसे कभी सफलता नहीं मिली। यहाँ तक कि सृष्टि की रचना हो गई और सत्युग बीत जाने के बाद त्रेता युग आ गया।
इस मध्य उस कछुवे ने अनेक बार अनेक योनियों में जन्म लिया और प्रत्येक जन्म में भगवान की प्राप्ति का प्रयत्न करता रहा। अपने तपोबल से उसने दिव्य दृष्टि को प्राप्त कर लिया था।
कछुवे को पता था कि त्रेता युग में वही क्षीरसागर में शयन करने वाले विष्णु राम का, वही शेष जी लक्ष्मण का और वही लक्ष्मी देवी सीता के रूप में अवतरित होंगे तथा वनवास के समय उन्हें गंगा पार उतरने की आवश्यकता पड़ेगी। इसीलिये वह भी केवट बन कर वहाँ आ गया था।
एक युग से भी अधिक काल तक तपस्या करने के कारण उसने प्रभु के सारे मर्म जान लिये थे इसीलिये उसने राम से कहा था कि मैं आपका मर्म जानता हूँ।
संत श्री तुलसी दास जी भी इस तथ्य को जानते थे इसलिये अपनी चौपाई में केवट के मुख से कहलवाया है कि
“कहहि तुम्हार मरमु मैं जाना”।
केवल इतना ही नहीं, इस बार केवट इस अवसर को किसी भी प्रकार हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। उसे याद था कि शेषनाग क्रोध कर के फुँफकारते थे और मैं डर जाता था।
अबकी बार वे लक्ष्मण के रूप में मुझ पर अपना बाण भी चला सकते हैं पर इस बार उसने अपने भय को त्याग दिया था, लक्ष्मण के तीर से मर जाना उसे स्वीकार था पर इस अवसर को खो देना नहीं।
इसीलिये विद्वान संत श्री तुलसी दास जी ने लिखा है -
( हे नाथ ! मैं चरणकमल धोकर आप लोगों को नाव पर चढ़ा लूँगा; मैं आपसे उतराई भी नहीं चाहता। हे राम ! मुझे आपकी दुहाई और दशरथ जी की सौगंध है, मैं आपसे बिल्कुल सच कह रहा हूँ। भले ही लक्ष्मण जी मुझे तीर मार दें, पर जब तक मैं आपके पैरों को पखार नहीं लूँगा, तब तक हे तुलसीदास के नाथ ! हे कृपालु ! मैं पार नहीं उतारूँगा। )
तुलसीदास जी आगे और लिखते हैं -
केवट के प्रेम से लपेटे हुये अटपटे वचन को सुन कर करुणा के धाम श्री रामचन्द्र जी जानकी जी और लक्ष्मण जी की ओर देख कर हँसे। जैसे वे उनसे पूछ रहे हैं कहो अब क्या करूँ, उस समय तो केवल अँगूठे को स्पर्श करना चाहता था और तुम लोग इसे भगा देते थे पर अब तो यह दोनों पैर माँग रहा है।
केवट बहुत चतुर था। उसने अपने साथ ही साथ अपने परिवार और पितरों को भी मोक्ष प्रदान करवा दिया। तुलसी दास जी लिखते हैं -.
चरणों को धोकर पूरे परिवार सहित उस चरणामृत का पान करके उसी जल से पितरों का तर्पण करके अपने पितरों को भवसागर से पार कर फिर आनन्दपूर्वक प्रभु श्री रामचन्द्र को गंगा के पार ले गया।
उस समय का प्रसंग है ... जब केवट भगवान् के चरण धो रहे है ।
बड़ा प्यारा दृश्य है, भगवान् का एक पैर धोकर उसे निकलकर कठौती से बाहर रख देते है, और जब दूसरा धोने लगते है,
तो पहला वाला पैर गीला होने से जमीन पर रखने से धूल भरा हो जाता है,
केवट दूसरा पैर बाहर रखते है, फिर पहले वाले को धोते है, एक-एक पैर को सात-सात बार धोते है ।
फिर ये सब देखकर कहते है, प्रभु एक पैर कठौती मे रखिये दूसरा मेरे हाथ पर रखिये, ताकि मैला ना हो ।
जब भगवान् ऐसा ही करते है। तो जरा सोचिये ... क्या स्थिति होगी , यदि एक पैर कठौती में है दूसरा केवट के हाथो में,
भगवान् दोनों पैरों से खड़े नहीं हो पाते बोले - केवट मै गिर जाऊँगा ?
केवट बोला - चिंता क्यों करते हो भगवन् !.
दोनों हाथो को मेरे सिर पर रख कर खड़े हो जाईये, फिर नहीं गिरेगे ,
जैसे कोई छोटा बच्चा है जब उसकी माँ उसे स्नान कराती है तो बच्चा माँ के सिर पर हाथ रखकर खड़ा हो जाता है, भगवान् भी आज वैसे ही खड़े है।
भगवान् केवट से बोले - भईया केवट ! मेरे अंदर का अभिमान आज टूट गया...
केवट बोला - प्रभु ! क्या कह रहे है ?.
भगवान् बोले - सच कह रहा हूँ केवट, अभी तक मेरे अंदर अभिमान था, कि .... मै भक्तो को गिरने से बचाता हूँ पर..
आज पता चला कि, भक्त भी भगवान् को गिरने से बचाता है।।

🚩🚩🚩जय श्रीराम 🚩🚩🚩
#धर्मो_रक्षति_रक्षितः

29/12/2020

*जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं है की आप कितने खुश है,*
*लेकिन ये महत्वपूर्ण है की आपकी वजह से कितने लोग खुश है !!*

*🙏राधे राधे🙏*

25/12/2020

प्लास्टिक का पेड़ अगर आक्सीजन देने लगे तो क्रिसमस मना लेना वरना तुलसी और पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक जला देना
||जय श्री राम||

19/12/2020

♥️नमः शिवाय♥️

जीवन का उद्देश्य निश्चित होना चाहिए। किस उद्देश्य के लिए जन्म लिया है यह स्वयं जानना होगा। लक्ष्य निर्धारित नहीं होगा तो कहाँ जाएंगे?

मनुष्य का जन्म दुःख भोगने के लिए नहीं हुआ है। ये पूरी की पूरी गलत धारणा है।

बड़े भाग मानुष तन पावा!

जब मनुष्य का तन बड़े भाग्य से मिला तो दुःख क्यों?
दुःख का कारण सँस्कार हैं। जो सतो, रजो और तमोगुणी रूप में हमारी सुषुम्ना नाड़ी में संचित होते हैं।

तमोगुणी सँस्कार सुषुम्ना नाड़ी में सबसे नीचे के स्तर में, उसके ऊपर रजोगुणी सँस्कार उससे भी ऊपर सतोगुणी सँस्कार जमा रहते हैं।

सँस्कार आते कहाँ से हैं?
सँस्कार कर्म से बनते हैं। प्रारब्ध, संचित और क्रियमाण ये तीन कर्म हैं।

इसीलिए कहा गया है-
कर्म प्रधान विश्व रचि राखा।
जो जस करहिं सो तस फल चाखा।।

जब मां कुण्डलिनी, चेतना मूलाधार से ऊपर उठती हैं तो सँस्कार भस्म होने लगते हैं। कर्म कटने लगते हैं।

👉अपनी चेतना को बढ़ाने के लिए माँ भगवती की शक्ति साधना करें।

07/12/2020
Jai Shri Krishna 🌼
04/12/2020

Jai Shri Krishna 🌼

Beautiful words 🙏🏻
03/12/2020

Beautiful words 🙏🏻

Jai Shree Krishna 🌺
02/12/2020

Jai Shree Krishna 🌺

20/10/2020

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’

इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी।

उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”

16/10/2020

!!जय श्री महाकालेश्वर!!

अनायासेन मरणम् ,
बिना देन्येन जीवनम्।
देहान्त तव सानिध्यम् ,
देहि मे परमेश्वरम्॥

इस श्लोक का अर्थ है ~ बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर न पड़ें, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हों। परवशता का जीवन ना हो। कभी किसी के सहारे ना रहाना पड़े। जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो। हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें देना।

🙏🏼🙏🏼

Address

LAXMI PALACE OPP`MAIN GATE OF SAPNA GARDEN
Kalyan
421003

Opening Hours

Monday 11am - 7pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm

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