30/05/2020
जय श्री राधे।
भगवान श्रीकृष्णजी की मूर्ति की पीठ के दर्शन न करें।
हमारे यहां पूजा-पाठ से जुड़े अनेक विधान हैं । मंदिर जाने को लेकर भी हैं, जैसे शुद्ध वस्त्र धारण करके व स्नान कर ही मंदिर जाना। ऐसा ही एक विधान है कि कृष्ण भगवान की पीठ के दर्शन नहीं करने का। इसलिए जब भी कृष्ण भगवान के मंदिर जाएं तो यह जरुर ध्यान रखें कि कृष्ण जी कि मूर्ति की पीठ के दर्शन न करें।
वास्तव में पीठ के दर्शन न करने के संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण जरासंध से युद्ध कर रहे थे, तब जरासंध का एक साथी असुर कालयवन भी भगवान से युद्ध करने आ पहुंचा। कालयवन श्रीकृष्ण के सामने पहुंच कर ललकारने लगा। तब श्रीकृष्ण वहां से भाग निकले। इस तरह रणभूमि से भागने के कारण ही उनका नाम रणछोड़ पड़ा। जब श्रीकृष्ण भाग रहे थे, तब कालयवन भी उनके पीछे-पीछे भागने लगा।
इस तरह भगवान रणभूमि से भागे क्योंकि कालयवन के पिछले जन्मों के पुण्य बहुत अधिक थे और कृष्ण किसी को भी तब तक सजा नहीं देते, जब तक कि पुण्य का बल शेष रहता है। कालयवन, कृष्णा की पीठ देखते हुए भागने लगा और इसी तरह उसका अधर्म बढऩे लगा क्योंकि भगवान की पीठ पर अधर्म का वास होता है और उसके दर्शन करने से अधर्म बढ़ता है। जब कालयवन के पुण्य का प्रभाव खत्म हो गया तब श्रीकृष्ण एक गुफा में चले गए। जहां मुचुकुंद नामक राजा निद्रासन में था। मुचुकुंद को देवराज इंद्र का वरदान था कि जो भी व्यक्ति राजा को नींद से जगाएगा, उस पर राजा की नजर पढ़ते ही वह भस्म हो जाएगा। कालयवन ने मुचुकुंद को कृष्ण समझकर उठा दिया और राजा की नजर पढ़ते ही असुर-कालयवन, वहीं भस्म हो गया।
अत: भगवान श्री हरि की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि इससे हमारे पुण्य कर्म का प्रभाव कम होता है और अधर्म बढ़ता है।