Vastu Jyoti Consultant

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धरती (पृथ्वी), जल, अग्नि, वायु और आकाश—इन पाँच तत्वों का संतुलन वास्तु का पहला और मुख्य सिद्धांत है।भवन निर्माण या सजावट में इन तत्वों की उपयुक्तता और स्थान निर्णायक भूमिका निभाते हैं। संपर्क करने हेतु मोबाइल नंबर 96816 36776.

Vastu Award from Vastu Shikher.
11/06/2026

Vastu Award from Vastu Shikher.

Astro Vastu ka certificate Acharya jee se late hue.
09/06/2026

Astro Vastu ka certificate Acharya jee se late hue.

Acharya Pankaj Jee
09/06/2026

Acharya Pankaj Jee

Holi ki bahut bahut sabhkamana mere aur mere Pariwar ki traf se.Jai Shree Krishna,Radhey Radhey.
04/03/2026

Holi ki bahut bahut sabhkamana mere aur mere Pariwar ki traf se.
Jai Shree Krishna,Radhey Radhey.

27/10/2025

Chatti Maiya sabhi ki Manokamna purn kare.

Chhat Puja ki bahut sari Shubhkamana.
26/10/2025

Chhat Puja ki bahut sari Shubhkamana.

13/10/2025

उत्तर दिशा के वास्तु दोष वह स्थितियाँ होती हैं, जब घर की उत्तर दिशा में वास्तु के नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती है। मुख्य उत्तर दिशा के वास्तु दोष उत्तर दिशा में भारी सामान, जैसे अलमारी या संदूक रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और यह वास्तु दोष माना जाता है।जूते-चप्पल, कबाड़ एवं टूटी-फूटी चीज़ें उत्तर दिशा में रखना अशुभ होता है; इससे धन की कमी, क्लेश और अशांति बढ़ती है।उत्तर दिशा में शौचालय (toilet), बाथरूम या किचन बनाना सबसे बड़ा वास्तु दोष है, जिससे आर्थिक परेशानियाँ और कर्ज़ के योग बन जाते हैं।कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस या रबर प्लांट) उत्तर दिशा में रखने से भी परिवार में अशांति और बाधाएँ आती हैं।उत्तर दिशा को अवरोधित (blocked) या गंदा रखना जैसे कोई बड़ा पेड़, दीवार, खम्बा या कूड़े का ढेर – इससे भी वास्तु दोष पैदा होते हैं।उत्तर दिशा की दीवारों पर गहरे या अशुभ रंग करवाने से नकारात्मकता का संचार होता है।उत्तर दिशा के वास्तु दोष के परिणाम आर्थिक नुकसान व धन की कमी।परिवार में कलह, अशांति और तनाव।स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और नौकरी या व्यापार में बाधाएँ।

उत्तर दिशा के वास्तु दोष की वजह से व्यवसाय में नई opportunities नहीं मिलतीं और काम में मन नहीं लगता है, इसका संबंध ज्यादातर ऊर्जा संकट, आर्थिक अवरुद्धता और ग्राहक या पार्टनरशिप में रुकावटों से है।उत्तर दिशा के वास्तु दोष का व्यवसाय पर प्रभाव, उत्तर दिशा में भारी सामान, अलमारी, कबाड़ या शौचालय होने से नई business opportunities, ग्राहक, कॉन्ट्रेक्ट और नेटवर्क बनने के रास्ते बंद हो जाते हैं।अगर उत्तर दिशा अवरुद्ध या गंदी है, तो मार्केटिंग, सेल्स या नेटवर्किंग के प्रयासों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, मेहनत करने के बाद भी क्लाइंट नहीं बनते या डील्स विफल हो जाती हैं।उत्तर दिशा का वास्तु दोष व्यवसाय में पैर फैलाने या आगे बढ़ने की ऊर्जा को रोक देता है — जिससे तनाव और निराशा आती है।इसके कारण आर्थिक नुकसान, ग्राहक कम होना, पुराने क्लाइंट्स का जाना, और नए व्यापारिक संबंधों में बाधा होना आम बात है।
उपाय और क्या करें उत्तर दिशा को खुला, साफ और अवरोध-मुक्त रखें; यहाँ कूड़ा, जूते, फालतू सामान या वजनदार चीजें हर हाल में न रखें।ऑफिस या दुकान में मिरर (आइना) उत्तर दिशा में लगाने से opportunities बढ़ती हैं; साथ ही कुबेर यंत्र या तुलसी का पौधा रख सकते हैं।कैश काउंटर, रजिस्टर, अकाउंट्स डिपार्टमेंट की दिशा उत्तर रखें, जिससे धन और नई deals की संभावनाएँ बनती रहें।उत्तर दिशा में लाल–पीला रंग न करवाएँ, हल्का नीला या हरा रंग शुभ है।उत्तर दिशा की प्रवेश द्वार clutter-free रखना और कर्मचारियों को उत्तर दिशा की ओर बैठाकर काम करवाना लाभकारी होता है।उत्तर दिशा के वास्तु दोष दूर करके, कारोबार में नए ग्राहक, संपर्क, कॉन्ट्रैक्ट और आर्थिक प्रगति के अवसर स्वतः बढ़ने लगते हैं।

12/10/2025

वायव्य कोण (North-West) क्या है वायव्य कोण उत्तर (North) और पश्चिम (West) दिशा के बीच स्थित है और इसका वास्तु में बहुत महत्व है।यह दिशा 'वायु' तत्व का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए इसे 'वायु कोण' भी कहा जाता है।वायव्य कोण के गुण इस दिशा की सही व्यवस्था समाजिक संबंध, नेटवर्किंग, मित्रता, परिवर्तन और यात्रा के लिए शुभ मानी जाती है।यहाँ गेस्ट रूम, स्टोरेज, गैरेज, लिविंग रूम या डाइनिंग स्पेस होना अनुकूल रहता है।वायव्य कोण में वास्तु दोष और प्रभाव वायव्य कोण में दोष होने पर मित्रों से मतभेद, रिश्तों में डिस्टर्बेंस, सरकारी या कानूनी परेशानियाँ, व्यापार में बाधाएँ, तथा मित्रों या सहयोगियों से मनमुटाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।यदि वायव्य कोण में मास्टर बेडरूम, पूजाघर, मुख्य द्वार, स्टडी या ऑफिस बनाया जाए, तो घर के सदस्यों के स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।वायव्य कोण में वास्तु दोष का असर सामाजिक नेटवर्क, रिश्ते, मानसिक शांति और व्यापार पर पड़ता है। इसलिए वायव्य दिशा का उचित वास्तु और उसमें आवश्यक सुधार करना बेहद जरूरी है| उत्तर-पश्चिम (Northwest) दिशा का महत्व इसलिए है क्योंकि यह 'Support' और 'Helpful Friends' का क्षेत्र होता है, जिससे जीवन में सामाजिक सहायता, नेटवर्किंग और बदलाव की ऊर्जा मिलती है।वास्तु शास्त्र के अनुसार Northwest दिशा वायु तत्व और चंद्रमा से संबंधित है, जो मानसिक संतुलन, परिवर्तन, मूवमेंट और रिलेशनशिप्स को दर्शाती है।वास्तु के 16 ज़ोन में Northwest को सपोर्ट जोन की संज्ञा दी गई है—यानी यह क्षेत्र व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को सहयोग और समर्थन प्रदान करता है|

11/10/2025

घर की पश्चिम दिशा में वास्तु दोष के कारण जीवन में बाधाएं, आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य समस्याएं और घर में अशांति जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पश्चिम दिशा शनि (Saturn) से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इसे श्रेष्ठ बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। पश्चिम दिशा को लाभ या फल प्राप्ति की दिशा माना गया है—यानी इस दिशा में किए गए कर्मों का फल जीवन में इसी दिशा से मिलता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा का संबंध कर्मों के परिणाम, प्रतिष्ठा, यश और सामाजिक मान-सम्मान से होता है। यदि कोई भी कार्य सही नीयत और संकल्प के साथ किया जाए तो उसका फल भी सुखद तथा दीर्घकालिक मिलता है। यही कारण है कि पश्चिम दिशा को 'फलों की दिशा' या 'लाभ की दिशा' कहा जाता है।पश्चिम दिशा और कर्म का फल वास्तु शास्त्र में यह दिशा उस दिशा का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ से हर व्यक्ति अपने जीवन के कर्मों का परिणाम या रिटर्न पाता है।अगर घर में पश्चिम दिशा का वास्तु मजबूत और संतुलित हो, तो यश, प्रतिष्ठा, सामाजिक मान्यताएँ, तथा जीवन में स्थिरता का लाभ मिलता है।इसी दृष्टिकोण को ध्यान रखते हुए वास्तु के अनुसार घर, कार्यालय, या किसी भी स्थान के पश्चिम दिशा को विशेष महत्व दिया जाता है। पश्चिम दिशा संबंधी सामान्य दोष मुख्य द्वार का गलत स्थान (विशेषकर दक्षिण-पश्चिम में) गंदगी, कूड़ेदान या पानी की निकासी का गलत स्थान,बड़े शीशे या ग्लास डिज़ाइन का अधिक होना | पश्चिम-संबंधित कमरों में गलत रंगों का उपयोग कट, खिड़कियाँ या दरवाजे का वास्तु-विरुद्ध स्थान वास्तु दोष के प्रभाव से घर की सुख-शांति में बाधा आती है | बरकत और आर्थिक वृद्धि रुकती है |घर के सदस्यों को स्वास्थ्य और संबंधों की समस्या हो सकती है|

09/10/2025

नैऋत्य कोण (South-West Corner) कहा जाता है, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा होती है। इस दिशा का स्वामी राहु ग्रह माने जाते हैं, और इसका संबंध घर की स्थिरता, सुरक्षा, और परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य से जुड़ा होता हैं।नैऋत्य कोण के वास्तु दोष के लक्षण इस दिशा में गड्ढा, बोरिंग, कुआं, या खाली स्थान होना भारी वास्तु दोष है। इससे घर में आर्थिक संकट, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, और सुख-शांति में बाधा आती है।नैऋत्य कोण में पूजा घर या रसोईघर बनाना अशुभ होता है, जिससे परिवार में अशांति, मानसिक तनाव, और धन की तंगी होती है।गंदगी, अंधेरा या साफ-सफाई की कमी इस दिशा में रहने से परिवार के मुखिया को पैरों, नितंब, और हड्डियों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।अगर नैऋत्य कोण हल्का या कमजोर है, तो इससे कोर्ट-कचहरी के मामले, शत्रु बढ़ना, और सामाजिक प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर पड़ता है।नैऋत्य कोण के वास्तु दोष के प्रभाव घर का स्वामी या मुखिया मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याएं, और बार-बार धन हानि का अनुभव करते हैं।परिवार में कलह, मुकदमेबाज़ी, और रुकावटें आने लगती हैं।घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे घर की सुख-समृद्धि धीरे-धीरे कम हो जाती है।
वास्तु दोष के समाधान और सलाह के लिए संपर्क करने हेतु मोबाइल नंबर 96816 36776.

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