02/07/2025
बहुत ही निराशाजनक अनुभव 😞
आज दिल बहुत दुखी है। जब हम अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, तो एक उम्मीद होती है — कि वहां उन्हें प्यार, देखभाल और सही मार्गदर्शन मिलेगा। लेकिन कुछ स्कूल तो सिर्फ पैसे कमाने की सोचते हैं, बच्चों की भलाई से उन्हें कोई मतलब ही नहीं होता।
हाल ही में स्कूल कैंपस में जो अनुभव हुआ, वो बहुत ही तकलीफदेह था। वहाँ बच्चों की परवाह नहीं थी, सिर्फ फीस, नोटिस, और नियम-कायदों की बात थी। न कोई संवेदनशीलता, न समझदारी। एकदम ठंडी और बेरुखी व्यवस्था।
स्कूल को बच्चों का दूसरा घर होना चाहिए — लेकिन जब वह सिर्फ एक बिज़नेस बन जाए, तो सबसे ज़्यादा नुकसान हमारे बच्चों का होता है।
हर उस माता-पिता से कहना चाहता/चाहती हूँ जो ये पढ़ रहे हैं — चुप मत रहिए। जब सिस्टम गलत हो, तो आवाज़ उठाइए। हमारे बच्चों का भविष्य पैसों से बड़ा है।
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