03/12/2024
महान स्वाधीनता सेनानी, भारत के प्रथम राष्ट्रपति तथा संविधान सभा के अध्यक्ष, भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर भावपूर्ण नमन।
राजेंद्र प्रसाद जी प्रखर देशभक्त तथा कर्मठ व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने देश के प्रथम राष्ट्रपति की भूमिका में गणतंत्र भारत को सशक्त करने का कार्य किया।
असाधारण निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता एवं सैद्धान्तिकता से उन्होंने हमारी संविधान सभा की अध्यक्षता की, जिसका परिणाम यह रहा कि आज भी हमारा संविधान प्रगतिवादी, भविष्य उन्मुखी और परिणाममूलक माना जाता है। उनके नेतृत्व में विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान में शामिल "भारत का संविधान" तीन वर्षों से भी कम समय में बनकर तैयार हो गया।
हमारी संविधान सभा में अलग - अलग विचारधारा से जुड़े लोग थे, लेकिन अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संविधान के प्रत्येक प्रावधान पर उच्च गरिमा एवं मर्यादा से व्यापक चर्चा सुनिश्चित की तथा सभा में सभी के दृष्टिकोण में सामंजस्य बनाते हुए उन पर निर्णय लिए गए। संविधान सभा में हर एक विषय पर विस्तृत और तार्किक संवाद हुआ। राजेन बाबू के धैर्य और कुशल सभा संचालन का ही परिणाम था कि हमारी संविधान सभा विमर्श एवं संवाद की उत्कृष्ट परंपराओं का पर्याय सिद्ध हुई और देश में उच्च लोकतांत्रिक परिपाटियों की स्थापना हुई।
सार्वजनिक जीवन में राजेंद्र बाबू ने जहां सरलता, सादगी, त्याग, सेवा भाव एवं समर्पण के ऊँचे आयाम स्थापित किए, वहीं राष्ट्रपति के रूप में संवैधानिक परंपराओं के मानक भी निर्धारित किए। निश्चय ही गणतंत्र भारत की स्वर्णिम यात्रा में देशरत्न राजेंद्र प्रसाद जी सदैव कालजयी रहेंगे।
इस वर्ष जब हम सभी भारतवासी संविधान के अंगीकरण के 75 गौरवशाली वर्षों का उत्सव मना रहे हैं, राजेन बाबू हमारे लिए और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। समाज, संस्थाओं और राष्ट्र के सशक्तिकरण के लिए समर्पित उनका सम्पूर्ण जीवन आज भी हमारा पथप्रदर्शक है।