21/01/2023
सिंध के क्रांतिकारियों को कहीं से यह सूचना प्राप्त हुई कि बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलन को कुचलने के लिए हथियारों से लैस सैकड़ों अंग्रेजी सैनिकों एवं बारूद लेकर एक विशेष रेलगाड़ी बलूचिस्तान के लिए रवाना हो रही है।
यह समाचार जब 19 वर्षीय #हेमू_कालानी जी तक पहुँचा तो उन्होंने इस रेलगाड़ी को बेपटरी करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। दो अन्य साथी भी इस कार्य को पूरा करने के लिए उनके साथ आए। रेलगाड़ी गुजरने से पहले ही तीनों क्रांतिकारी पटरी पर पहुंचे, जहाँ हेमू कालानी जी पटरी को क्षतिग्रस्त करना प्रारंभ कर दिया।
रात की शांति में हथौड़े की आवाज बहुत दूर तक सुनाई दे रही थी, जिसे सुन गश्त कर रहे सिपाही आवाज की दिशा में दौड़ पड़े। सिपाहियों को देख उनके दोनों साथी तो छिप गए, मगर हेमू कालानी जी को बंदी बना लिया गया। जेल में उन्होंने तीह-तरह की यातनाओं को सुना, लेकिन अपने साथियों के नाम बताने से साफ इनकार कर दिया।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ‘‘अभिमन्यु‘‘ कहे जाने वाले शहीद हेमू कालानी जी ऐसे क्रांतिकारी थे जिनके लिए न तो कारावास के दौरान दी जाने वाली पीड़ाओं का कोई अर्थ था और न ही मृत्यु का कोई भय। उन्नीस वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। उनके बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।