12/12/2021
इनकम टैक्स रिटर्न भरने की भागमभाग शुरू हो चुकी है. डेडलाइन 31 दिसंबर है. आप सुनते आ रहे हैं कि फाइलिंग से चूके तो 10 हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है, लेकिन लाखों लोग ऐसे भी हैं, जो हर साल इस कन्फ्यूजन में घिरे रहते हैं कि उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करनी चाहिए या नहीं. इनमें अधिकांश वे नौकरीपेशा लोग भी हैं, जिनकी सालाना सैलरी तो ढाई लाख रुपये से ज्यादा है, लेकिन कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, न ही कोई TDS कटता है. बहुत से लोग थोड़ा-बहुत टैक्स कटने के बाद इस डर से रिटर्न नहीं भरते कि कहीं किसी पचड़े में न फंस जाएं.
इस तरह की आपकी कई उलझनों को तो हम यहां सुलझाएंगे ही. साथ ही रिटर्न भरने के कुछ ऐसे फायदे भी बताएंगे, जिनके बिना सरकारी जुर्माना तो छोड़िए, आपको अपने लेवल पर भी कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है. वैसे आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि कुछ मामलों में ढाई लाख रुपये से कम इनकम पर भी रिटर्न भरना जरूरी होता है.
वित्तवर्ष 2020-21 में अगर आपकी इनकम ढाई लाख रुपये से ज्यादा रही है, तो आपके लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य है. 60 साल से ऊपर और 80 साल से कम उम्र के लोगों के लिए छूट की यह आय-सीमा 3 लाख रुपये है. 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को 5 लाख
रुपये तक सालाना इनकम पर रिटर्न भरने से छूट मिली हुई. लेकिन तीनों ही कैटेगरी में यह छूट कुछ शर्तों के साथ है.
अगर आपकी सालाना इनकम ढाई लाख से कम है. लेकिन देश से बाहर कहीं भी कोई संपत्ति या निवेश है, तो आपको IT रिटर्न भरना ही होगा. भारत के बाहर किसी बैंक अकाउंट में अगर आप सिग्नेटरी हैं, यानी खाता आपका है या आपकी ओर से खुलवाया गया है तब भी.
अगर किसी बैंक के करंट अकाउंट में आपके नाम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा हुई है, तब भी रिटर्न भरना होगा. भले ही उससे कोई ब्याज नहीं आता या उस वित्त वर्ष में आपको कोई इनकम नहीं हुई हो.
वित्त वर्ष में अगर आप या परिवार के किसी सदस्य की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है तो भी आप पर रिटर्न भरने की जिम्मेदारी आती है. अगर किसी ने साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा की बिजली खर्च कर डाली हो, तब भी उसकी कम सालाना इनकम मायने नहीं रखती और उसे रिटर्न दाखिल करना होगा.
यही कन्फ्यूजन सबसे ज्यादा लोगों को होता है. अगर आपकी सालाना इनकम ढाई लाख रुपये से ज्यादा है. लेकिन कानूनी तौर पर मिली हुई छूट जैसे, सेक्शन 80C के तहत डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर मिलने वाली कटौती आदि के बाद अगर आप पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, तब भी आपको रिटर्न भरना चाहिए. इसके अपने फायदे हैं-
पहला, अगर उस साल आपके बैंक एफडी पर टीडीएस कटा हो तो उसका रिफंड लेने के लिए रिटर्न भरना ही एक मात्र विकल्प है. अगर आप कोई व्यवसायी, कॉन्ट्रैक्टर या स्वरोजगार वाले व्यक्ति हैं और किसी भी दफ्तर या विभाग में टीडीएस कटा बैठे हैं, तो बिना रिटर्न भरे वाजिब रिफंड नहीं ले पाएंगे.
दूसरा, अगर आप किसी बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो उसकी एलिजिबिलिटी आपकी इनकम से ही तय होती है और बैंक हमेशा इनकम टैक्स रिटर्न को तरजीह देता है. बड़े होम लोन के मामले में तो कुछ बैंक रिटर्न को ही इनकम प्रूफ मानकर चलते हैं.
तीसरा, कई देश वीजा देने के मामले में आपसे इनकम टैक्स रिटर्न मांगते हैं और वे यह दलील नहीं स्वीकार करेंगे कि आपने रिटर्न इसलिए नहींं भरा क्योंकि आपकी टैक्स लाइबिलिटी नहीं बनती. पासपोर्ट ऑफिस और कुछ अन्य कामों में इनकम प्रूफ ही नहीं एड्रेस प्रूफ के तौर पर भी रिटर्न की कॉपी मान्य होती है.
चौथा, आपको शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में नफा-नुकसान हुआ हो तो रिटर्न मिस करने से एक तो पुरानी रिटर्न्स से चली आ रही कैपिटल गेन या लॉस की चेन टूट जाएगी. और हो सकता है कि आप कोई बड़ा रिफंड या राहत चूक जाएं. किसी भी तरह के कैपिटल गेन या लॉस का एडजस्टमेंट बिना रिटर्न भरे संभव नहीं है.