SAI Kripa Investments

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मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी की शुरुआत रिज़र्व बैंक ने 2011-12 के दौरान की थी | बैंक इसके जरिय...
19/11/2013

मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी की शुरुआत रिज़र्व बैंक ने 2011-12 के दौरान की थी | बैंक इसके जरिये आरबीआई से 8.25 फीसदी की ब्याज दर से कर्ज ले सकते हैं | यह दर लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी रेपो से एक फीसदी ज्यादा है | अगर किन्ही कारणो से बैंको के पास लिक्विडिटी में भारी कमी हो जाती है तो बैंक एमएसएफ के माध्यम से कर्ज ले सकते हैं | इस सुविधा का उद्देश्य़ थोड़े समय के ऐसेट-लायबिलिटी मिसमैच को ज्यादा प्रभावी तरीके से निपटाना है | बैंक एलएएफ रेपो रेट पर भी आरबीआई से कर्ज ले सकते हैं | इसके दर फिलहाल 7.25 फीसदी है | बैंको को एलएएफ रेपो रेट पर कर्ज लेने के लिए एसएलआर को अनिवार्य रूप से 24 फीसदी बनाये रखते हुए अतिरिक्त सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखना पड़ता है | जहाँ तक एमएफएस का सवाल है तो इस सुविधा का लाभ उठाकर बैंक 8.25 फीसदी की दर से अपनी नेट डिमांड और टाइम लायबिलिटी के एक फीसदी का बराबर कर्ज ले सकते हैं | इसमें भी एसएलआर को अनिवार्य रूप से 24 फीसदी बनाये रखना होगा | इस तरह बैंक, सुबह में एलएएफ रेपो विंडो से 7.25 फीसदी की दर से कर्ज ले सकते हैं | दोपहर बाद नकदी की जरूरत होने पर उनको एमएसएफ से कर्ज लेना होगा | इसमें बैंको को एलएएफ रेपो विंडो के जरिये कर्ज लेने से सुबह का वक्त तय करना होगा | इससे पता चलेगा कि बाजार में लिक्विडिटी की क्या सिथति है |

डॉलर प्रवाह बढाने की ओर भारतीय रिजर्व बैंक ने उठाया कदम :-देश में डॉलर का प्रवाह बढाने के लिए आरबीआई ने नया कदम उठाते हु...
14/06/2013

डॉलर प्रवाह बढाने की ओर भारतीय रिजर्व बैंक ने उठाया कदम :-
देश में डॉलर का प्रवाह बढाने के लिए आरबीआई ने नया कदम उठाते हुए स्पेशल इकोनोमिक जोन (सेज) में स्थित मौजूद संयंत्रो को कहा है कि निर्यात की तारीख से एक साल के भीतर कंपनियों को स्वदेश में पैसा वापिस लाना होगा जो की तत्काल प्रभाव के साथ लागू होगा और यह परिवर्तन एक साल तक वैध होगा | इससे पहले निर्यात प्रक्रिया के बाद सेज यूनिट के लिए देश में वापस पैसा लाने पर कोई समय सीमा नहीं थी | आरबीआई ने यह कदम उस वक्त उठाया है जब भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले न्यूनतम स्तर 58.98 रुपये पर पहुँच गई है | इस कदम से निकट भविष्य में देश में डॉलर के प्रवाह में सुधार आ सकता है और आने वाले कुछ माह के दौरान 5 से 6 अरब डॉलर देश में आ सकता है जिससे रुपये की गिरावट पर रोक लगने की उम्मीद है | गौरतलब है कि भारत में 2012-13 के दौरान कुल निर्यात 300.6 अरब डॉलर का किया था जिसमे सेज का हिस्सा करीब 30 फीसदी है |

टेलीग्राम सेवा को 160 साल के सफ़र के बाद आखिरी सलाम :-एक समय देश में ख़ुशी और गम दोनों में कोई भी खबर तेजी से पहुँचाने क...
14/06/2013

टेलीग्राम सेवा को 160 साल के सफ़र के बाद आखिरी सलाम :-
एक समय देश में ख़ुशी और गम दोनों में कोई भी खबर तेजी से पहुँचाने का जरिया रही टेलीग्राम सेवा इन्टरनेट के आधुनिक दौर में अपनी हार मान चुकी है | देश में टेक्नोलॉजी के जबरदस्त बदलाव के कारण स्मार्टफोन, ईमेल और एसएम्एस जैसे संचार माध्यमों के सामने टेलीग्राम सेवा अब बेकार साबित हो रही है | सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने आगामी 15 जुलाई से इसे औपचारिक रूप से बंद करने का फैसला किया है क्योंकि टेलीग्राम सेवा को व्यावसायिक रूप से चलाना अब फायदे का सौदा नहीं रहा है | लोगों के पास सन्देश पहुँचाने के लिए अब टेलीग्राम के बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं और कोई भी इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा है |

रूपया एतिहासिक न्यूनतम स्तर पर :-चालू सप्ताह का पहला दिन रुपये के लिए बड़ा ही अमंगलकारी रहा | अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले ...
11/06/2013

रूपया एतिहासिक न्यूनतम स्तर पर :-
चालू सप्ताह का पहला दिन रुपये के लिए बड़ा ही अमंगलकारी रहा | अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारतीय मुद्रा की कीमत सोमवार को अपने सर्वकालिक न्यूनतम स्तर 58.17 रुपये प्रति डॉलर पर आ गयी | ज्यादातर विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मजबूत हो जाने से ही रूपया पस्त हो गया | आयातकों एवं बैंकों की ओर से डॉलर की काफी मांग निकलने से भी रूपया गोता खाने पर विवश हो गया | इसके साथ ही धीमे आर्थिक विकास एवं कम निवेश से परेशान सरकार की मुश्किलें अब ओर ज्यादा बढ जाने की आशंका है | यही नहीं, रुपये के काफी कमजोर हो जाने से तमाम आयातित उत्पाद अब कहीं ज्यादा महंगे साबित हो रहे हैं | ऐसे में आयात पर काफी हद तक निर्भर कंपनियों के मार्जिन पर भी असर पड़ने का अंदेशा है |
क्यों गिर रहा है रूपया :-
*अमरीका के फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में अपनी बांड खरीद में कमी किये जाने की सम्भावना, बांडो पर यील्ड बढ जाने से निवेशक अब मुड़ रहे हैं अमरीकी ट्रेज़री की ओर |
*भारत में चालू खाता घाटे के काफी बढ जाने के कारण भी इस देश के प्रति घटता जा रहा है विदेशी निवेशकों का आकर्षण |
*भारत में घट गया है विदेशी पूंजी का प्रवाह, जबकि आयातकों की ओर से बढ गयी है डॉलरों की मांग |
कमजोर रुपये का असर :-
1) सरकार पर - क्रूड आयल व कोयले का आयात अब ओर ज्यादा महंगा, जिससे से बढ रहा है सरकार का आयात बिल | धीमे विकास व कम निवेश से परेशान सरकार की मुश्किलें अब ओर ज्यादा बढने का अंदेशा |
2) कम्पनियों पर - तमाम आयातित उत्पाद अब कहीं ज्यादा महंगे, इससे आयात पर काफी हद तक निर्भर कम्पनियों के मार्जिन पर असर पड़ने का अंदेशा | आईटी कम्पनियों के कमाई बढने की उम्मीद, जिससे बढ सकते हैं उनके शेयर भाव |
3) लोगों पर - विदेश यात्रा के साथ-साथ विदेश में पढ़ाई भी महँगी, आयातित वस्तुओं को खरीदने के लिए जेब से निकालने पड़ेंगे ज्यादा रुपये |

क्या है ट्विन डेफिसिट ?आयात और निर्यात में बढ रहे अंतर के कारण करंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाते का घाटा बढता जा रहा है...
06/06/2013

क्या है ट्विन डेफिसिट ?
आयात और निर्यात में बढ रहे अंतर के कारण करंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाते का घाटा बढता जा रहा है | बीते वर्ष जुलाई से सितम्बर के बीच चालू खाते का घाटा जीडीपी के 5.4 प्रतिशत के स्तर पर रहा | जबकि सरकार इसे 5.3 प्रतिशत के स्तर पर रखा जाए | चालू खाते और राजकोषीय घाटे से सम्बंधित जो आंकड़े आ रहे हैं उनसे नीति निर्माताओं पर दबाव बन रहा है और इसके कारण चालू वर्ष के दौरान बनने वाली नीतियां भी प्रभावित होंगी | इसके कारण देश में वितीय अस्थिरता बढने का खतरा मंडरा रहा है | जिस तरह से राजकोषीय और चालू खाते का घाटा बढ रहा है, उससे इसे ट्विन (जुड़वां) डेफिसिट कहा जा रहा है |
जब किसी देश में ट्विन डेफिसिट की स्थिति बनती है तो वहां पर वितीय अस्थिरता का खतरा मंडरा जाता है | अगर यह ज्यादा हो जाता है तो इससे कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं | भारत इस दिक्कत से पहले भी 1991 में गुजर चुका है | ऊँचे चालू खाते का घाटा का मतलब होता है कि देश में विदेशी करंसी कि मांग ज्यादा बढ गई है जिसका असर घरेलु मुद्रा पर होता है और इसके कारण घरेलु मुद्रा का अवमूल्यन हो जाता है | इसका एक प्रभाव यह भी है कि इससे देश में निवेश आने के बजाये मुद्रा का फ्लो बाहर की तरफ हो जाता है |

भारत सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से 8 प्रतिशत कर दिया है | देश में बढते चालू खाता घाटे को काबू में रखने की खात...
06/06/2013

भारत सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से 8 प्रतिशत कर दिया है | देश में बढते चालू खाता घाटे को काबू में रखने की खातिर ही सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है | सोने में आयात में कमी सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, इसके तहत अब बैंकों के साथ-साथ सभी नामांकित एजेंसियों और स्टार ट्रेडिंग हाउस द्वारा भी सोने का आयात किये जाने पर पाबंदी लगा दी है | अब वे केवल वाजिब जरुरत वाले निर्यातकों की ज्वेलरी मांग को पूरा करने के लिए ही सोने का आयात कर सकेंगे |

22/04/2013
BANKING, INSURANCE, PENSION Dept of Financial Services, M*F, Government of IndiaThe Banking Laws (Amendment) Bill, 2012,...
13/03/2013

BANKING, INSURANCE, PENSION
Dept of Financial Services, M*F, Government of India
The Banking Laws (Amendment) Bill, 2012, was passed by both the Houses of Parliament in December, 2012 and has been enforced w.e.f. 18.1.2013. The law is expected to benefit bank customers in the following manner--(i) Enhance financial inclusion, (ii) Increase the effectiveness of the regulatory and supervisory powers of RBI, and (iii) Establish the Depositor Education and Awareness Fund.

19/02/2013

क्या है आई आई पी - Index of Industrial Production :-
औधोगिक उत्पादन सूचकांक (आई आई पी) का किसी देश की अर्थव्यवस्था में ख़ास महत्त्व होता है | इससे पता चलता है कि उस देश कि अर्थव्यवस्था में औधोगिक वृद्धि किस गति से हो रही है | आई आई पी के अनुमान के लिए 15 एजंसियों से आंकड़े जुटाए जाते है | इनमे डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पालिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ़ माईन्स, सेंट्रल स्टैटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं | सांख्यिकी मंत्रालय के ताजा मानको के मुताबिक़ किसी उत्पाद को इसमें शामिल किये जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रूपए होना चाहिए तथा इसके मासिक उत्पादन के आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए | इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माईनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है | फिर उन्हें उप-श्रेणियों मसल-बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर डयुरेब्लेस और कंज्यूमर नान- डयुरेब्लेस में बांटा जाता है | सबसे पहले 1937 को आधार वर्ष मानते हुए आई आई पी तैयार किया गया था |

08/02/2013

क्या है स्टॉप लॉस (Stop Loss of Share) :-
स्टॉप लॉस वह बिंदु या शेयर मूल्य होता है जिस पर लोग अपने शेयर को बेच देते हैं और उसके बाद होने वाले नुकसान से बच जाते हैं अथवा जिसके बाद आपको कोई नुकसान नहीं होता | यह किसी विशेष शेयर के मामले में आपके नुकसान की सीमा तय करता है | उदाहरण के लिए अगर आपने कोई शेयर 100 रुपये में ख़रीदा है, आपको पता लगता है कि इसमें गिरावट आ सकती है तो आप अपने ब्रोकर को कह देंगे कि अगर इस शेयर के भाव 95 रुपये के स्तर पर आ जाएँ तो वह शेयर को बेच दे | इस तरह से इस शेयर के मामले में आपका स्टॉप लॉस 95 रुपये हो गया | अगर इसके बाद भी शेयर का भाव कम आता है तो उससे आपको कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि आप उसे 95 रुपये के स्तर पर हीं बेच चुके हैं | केवल गिरावट के समय हीं नहीं, बल्कि यह तब भी कर सकते है जब शेयर के भाव बढ रहे हों | उदाहरण के लिए अगर आप 100 रुपये के भाव पर ख़रीदे गए उसी शेयर के बारे में अपने ब्रोकर से कहें कि जब यह शेयर 115 रुपये पर पहुँच जाए तो उसे बेच दिया जाए | इस तरह से ऊपरी सीमा के मामले में भी आप स्टॉप लॉस तय कर सकते हैं |

07/02/2013

Central Banks Interest Rates :-
Central Banks Interest Rates Next Meeting
FED (United State) 0.00%-0.25% Mar 20, 2013
ECB (European Union) 0.75% Feb 07, 2013
BOE (United Kingdom) 0.50% Feb 07, 2013
SNB (Swiss) 0.00% Mar 14, 2013
RBA (Australia) 3.00% Feb 07, 2013
BOC (Canada) 1.00% Mar 06, 2013
RBNZ (New Zealand) 2.50% Mar 13, 2013
BOJ (Japan) 0.10% Feb 14, 2013
RBI (India) 7.75%

07/02/2013

मोबाइल पर अवांछित "वैल्यू एडेड सेवा " से छुटकारे के लिए नया नंबर :-
अगर आपके मोबाइल ऑपरेटर ने बिना आपकी मर्जी के कोई भी "वैल्यू एडेड सेवा" चालू कर दी है तो इससे निजात पाने के लिए सभी मोबाइल आपरेटरों के ग्राहक 155223 पर कॉल कर किसी भी वैल्यू एडेड सेवा जैसे कालर ट्यून, मोबाइल इन्टरनेट आदि के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे | अगर ग्राहक ने 24 घंटे के दौरान इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा दी है तो कंपनी को ग्राहक के अकाउंट से काटी गयी रकम लौटानी होगी | यह सेवा 2 फरवरी से सभी टेलीकॉम आपरेटरों ने लागू कर दी है | टेलीकॉम आपरेटर को ग्राहक के फ़ोन आने के 4 घंटे के दौरान सेवा को बंद करना होगा | लेकिन अगर ग्राहक सेवा एक्टिवेट होने के 24 घंटे बाद शिकायत दर्ज कराते हैं तो उनके पैसे रिफंड नहीं होंगे |

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