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सोलर ऊर्जा भविष्य की आवश्यकता है,लेकिन खेजड़ी की लाश पर खड़ा भविष्य टिकाऊ नहीं हो सकता। सोलर ऊर्जा के नाम पर मरुस्थल की ...
16/02/2026

सोलर ऊर्जा भविष्य की आवश्यकता है,लेकिन
खेजड़ी की लाश पर खड़ा भविष्य टिकाऊ नहीं हो सकता। सोलर ऊर्जा के नाम पर मरुस्थल की आत्मा से खिलवाड़
राजस्थान की पहचान केवल रेत, किले और धोरों से नहीं है। इस मरुस्थली प्रदेश की असली पहचान है—खेजड़ी, वह वृक्ष जिसे राजस्थान सरकार ने राज्य वृक्ष घोषित किया है। आज वही खेजड़ी, हरित ऊर्जा यानी सोलर परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर काटी जा रही है। सवाल यह नहीं कि सोलर चाहिए या नहीं, सवाल यह है कि क्या विकास की कीमत जीवन से चुकाई जानी चाहिए?
खेजड़ी: एक वृक्ष नहीं, जीवन-तंत्र
खेजड़ी (Prosopis cineraria) मरुस्थल का ऐसा वृक्ष है जो केवल छाया नहीं देता, बल्कि जीवन देता है।
खेजड़ी पर लगने वाली सांगरी
राजस्थान की पारंपरिक थाली का अभिन्न हिस्सा
आयुर्वेद में पाचन, मधुमेह व संक्रमण जैसे रोगों में उपयोगी
इसकी छाया में,भीषण गर्मी में भी तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है,मनुष्य और पशु हीट स्ट्रोक से बचे रहते हैं,पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था,खेजड़ी के पत्ते, फल और छाया पर निर्भर है,खेजड़ी का कटना केवल एक पेड़ का कटना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की रीढ़ टूटना है।
समझिये पारिस्थितिकी संतुलन पर सीधा प्रहार
विशेषज्ञ मानते हैं कि खेजड़ी मरुस्थली पारिस्थितिकी की की-स्टोन प्रजाति है।
1-मिट्टी संरक्षण
खेजड़ी की गहरी जड़ें मिट्टी को बाँधकर रखती हैं, जिससे
• भूमि कटाव रुकता है
• उपजाऊ मिट्टी बंजर बनने से बचती है
2-जल संतुलन
• वर्षा जल को जमीन में समाहित करने में सहायक
• भू-जल स्तर बनाए रखने में मददगार
3-तापमान नियंत्रण
• खेजड़ी कटने से स्थानीय तापमान बढ़ता है
• लू और गर्मी अधिक घातक होती है
4-जैव विविधता
• पक्षियों, कीटों और छोटे जीवों का आश्रय
• एक वृक्ष कटता है तो पूरी खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है ,यही प्रक्रिया आगे चलकर Ecological Imbalance को जन्म देती है।
सोचना है कि सोलर के नाम पर खेजड़ी क्यों काटी जा रही है? राज्य के कई जिलों—जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर—में सोलर परियोजनाओं के लिए चारागाह भूमि ,खेजड़ी बहुल क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।
कारण साफ है—
भूमि सस्ती है
पर्यावरणीय नियमों की निगरानी कमजोर
ग्राम सभा की सहमति औपचारिक
जबकि सोलर परियोजनाएँ -बंजर, पथरीली और गैर-वन भूमि पर भी लग सकती हैं।
संभावित नुकसान: जो आज नहीं दिखता, कल तबाही बनेगा
सांगरी आधारित आजीविका समाप्त
पशुपालन संकट में
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी से मृत्यु दर में वृद्धि
वर्षा चक्र में असंतुलन
राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को आघात
यह वही खेजड़ी है जिसके लिए विश्नोई समाज ने बलिदान दिया, अमृता देवी ने अपने प्राण न्योछावर किए। आज वही वृक्ष सरकारी उदासीनता का शिकार है।
समाधान संभव है, इच्छाशक्ति चाहिए
विकास और पर्यावरण को आमने-सामने खड़ा करना गलत है।
आवश्यक कदम:
सोलर परियोजनाएँ केवल गैर-वन व बंजर भूमि पर
खेजड़ी कटान पर सख्त प्रतिबंध
ग्राम सभा की वास्तविक और लिखित सहमति
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को सख्ती से लागू करना
खेजड़ी बचेगी तभी राजस्थान बचेगा
खेजड़ी बचाओ — राजस्थान बचाओ
#खेजड़ी

 #खेजड़ी रूंख बचा के राखले, रूंख धरा रा ओप। रूंख अठे ना रैयसीं, कुदरत करसी कोप।।  तुळछी मुरधर खेजङी, जाण संत रो भेख। साध...
16/02/2026

#खेजड़ी
रूंख बचा के राखले, रूंख धरा रा ओप।
रूंख अठे ना रैयसीं, कुदरत करसी कोप।।
तुळछी मुरधर खेजङी, जाण संत रो भेख।
साधु जेहड़ी साधना, परतख इण में पैख।।
छप्पनियें री छाँव में, कीनी काळ किलोळ।
औद बची जद आपणी, छोडा खाया छोल।।
#खेजड़ी #पर्यावरण #खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो #खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव #खेजड़ी_बचाओ #खेजड़ी #बीकानेर

आया हाकम राज रा,घालण दरखत घाव।
मिनखा री मानी नही,तगडो राजमद ताव।
दे बलिदान खेजड़ली,अमर करी अखियात।
रूंख रुखाळै जीव दे,ओ जग जाणी बात।
धिन गुरू र धिन धिन धरा,धिन बिश्नोई जात।
जुग जुग रहसी जीवती, अमर बात अखियात।।
कहे अमृता सुणो, निज धर्म री आण।
सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्ता जाण।
#खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो #खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव #खेजड़ी_बचाओ #खेजड़ी #बीकानेर

 #खेजड़ी रूंख बचा के राखले, रूंख धरा रा ओप। रूंख अठे ना रैयसीं, कुदरत करसी कोप।।  तुळछी मुरधर खेजङी, जाण संत रो भेख। साध...
16/02/2026

#खेजड़ी
रूंख बचा के राखले, रूंख धरा रा ओप।
रूंख अठे ना रैयसीं, कुदरत करसी कोप।।
तुळछी मुरधर खेजङी, जाण संत रो भेख।
साधु जेहड़ी साधना, परतख इण में पैख।।
छप्पनियें री छाँव में, कीनी काळ किलोळ।
औद बची जद आपणी, छोडा खाया छोल।।
#खेजड़ी #पर्यावरण #खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो #खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव #खेजड़ी_बचाओ #खेजड़ी #बीकानेर

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , ...
16/02/2026

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , अगर पर्यावरण संरक्षण (पेड़ पौधे बचाने) पर आज हमने ध्यान नहीं दिया तो हमारा अस्तित्व मिट जाएगा , अब प्रकृति के साथ और अधिक छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , ...
16/02/2026

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , अगर पर्यावरण संरक्षण (पेड़ पौधे बचाने) पर आज हमने ध्यान नहीं दिया तो हमारा अस्तित्व मिट जाएगा , अब प्रकृति के साथ और अधिक छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

अगर पेड़ नहीं बचाए तो… 🌳🔥
दहकता हुआ भारत पास है।
आज खेजड़ी कट रही है, कल छांव कटेगी, परसों साँसें।
पेड़ कटेंगे तो
🌡️ गर्मी रिकॉर्ड तोड़ेगी, 💧 पानी युद्ध बनेगा, 🌾 खेती बर्बाद होगी, 🏥 बीमारियाँ बढ़ेंगी,
और सरकारें सिर्फ रिपोर्ट पढ़ती रहेंगी।
जो आज “विकास” के नाम पर पेड़ काट रहा है,
वही कल एसी, ऑक्सीजन और पानी के लिए रोएगा।
👉 पेड़ नहीं बचे तो न भविष्य बचेगा, न पीढ़ी।
अब भी वक्त है—
#खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो #खेजड़ी_कटाई_बंद_करो #खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ #प्रकृति_नहीं_तो_कुछ_नहीं
#खेजड़ी_बचाओ , #जीवन_बचाओ
ेड़_नहीं_बचाए_तो
#खेजड़ी_कटाई_बंद_करो
#जलवायु_संकट
ी_चेतावनी
#प्रकृति_नहीं_तो_कुछ_नहीं

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , ...
16/02/2026

प्रकृति मानव के उपभोग के लिए नही है, संकल्प करें कि प्रकृति से हम जितना ले रहे हैं, उस अनुपात में उसे लौटाना भी चाहिए , अगर पर्यावरण संरक्षण (पेड़ पौधे बचाने) पर आज हमने ध्यान नहीं दिया तो हमारा अस्तित्व मिट जाएगा , अब प्रकृति के साथ और अधिक छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

16/02/2026

खेजड़ी बचाओ आंदोलन ।

16/02/2026
31/05/2025

वन्य जीवों पर दया करो।

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