Dr Shalini Dixit

Dr Shalini Dixit MahaVastu Certified Trainer Her subsequent success in 26+ cases on health and family harmony inspired her to dedicate herself to teaching the Vedic lifestyle.

Astro MahaVastu Remedies Course * A Scientist for 14+ years at IIT and CSIR-CIMAP sought to scientifically research Vedic frameworks, a quest completed by learning the MahaVastu Methodology.

31/10/2024

*कैसे करें महालक्ष्मी का स्वागत*
"दीपावली विशेष"

*आचार्य डॉ शालिनी दीक्षित-*

दीपावली पर पहले से ही तैयारी की जाती है कि सब दिशाओं से समृद्धि आपके घर आए, महालक्ष्मी आपके घर आएँ। इसमें सबसे विशेष ध्यान देने वाली बात यह होती है कि आपका घर साफ़ सुथरा हो, क़रीने से सजाया हुआ। दीपावली का यह विशेष पर्व कार्तिक त्रियोदशी जिसे धनतेरस कहते है से शुरू होता है। इस दिन अपने अपने कुल परम्परा के अनुसार पूजन तो महत्वपूर्ण है ही इसके साथ ही साथ इस दिन भगवान धन्वन्तरि की पूजा उत्तर पूर्व में पूर्व की ओर की दिशा (NNE) में करनी चाहिए। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक हैं। इस दिशा में रखे हुए पानी पीना भी स्वास्थ्य की लिए बहुत अच्छा होता है। यदि आप यहाँ अपनी मेडिसिन रखते है तो उनकी हीलिंग कपैसिटी कई गुना बढ़ जाती है। यह दिशा जल प्रधान होती है इसीलिए यहाँ लाल रंग की अधिकता से बचना चाहिए।
उसके बाद आती है रूप चतुर्दशी या नर्क चौदस। अलग अलग मान्यताएँ व कहानियाँ हैं परंतु सबसे प्रमुख मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त करा कर उन्हें सम्मान दिलाया था. इस वजह से इस दिन दियों की बारात सजाई जाती है. स्कंद, पद्म और भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर उबटन, तेल आदि लगाकर स्नान करना चाहिए।
इस दिन गृहिणियां उबटन लगाकर स्नान करती हैं। लक्ष्मी पूजन से पूर्व गृहलक्ष्मी का शृंगार ज़रूरी है। जब घर में मेहमान आते हैं तब भी स्वयं को ठीक से रखती हैं और जिस दिन साक्षात् लक्ष्मी जी आने वाली हों उससे पहले स्वरूप को निखारकर रखना जरूरी होता है। इसलिए ये दिन रूप चतुर्दशी कहलाता है।

फिर आता है सम्मृधि कि देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का दिन, दीपावली। माँ लक्ष्मी के साथ साथ प्रज्ञा के देवता प्रथम पूज्य श्री गणेश पूजन भी बहुत महत्वपूर्ण है। शुभ दिशा में होने वाली पूजा अपार सम्मृधि का कारक होती है। इस महापूजन के समय मन और आत्मा दोनों का समन्वय बहुत ज़रूरी है। अमावस्या को होने वाला यह पूजन माँ के स्वरूप को पश्चिम दिशा में रख कर करना चाहिए। एक तो यह दिशा, इस दिशा का ऊर्जा चेत्र, जब यहाँ किसी भी देव स्वरूप को स्थापित कर के उसका पूजन करते हैं तो प्राथना विशेष फलदायी होती है।
शनि देवता को न्याय का देवता कहते हैं। वह आपके श्रम के अनुसार आपको फल देते हैं उनकी दिशा भी पश्चिम ही है। सूर्य कार्तिक अमावस्या को तुला राशि में ही होते हैं जिसकी दिशा भी पश्चिम ही है। सूर्य व चंद्रमा एक ही राशि में, एक आत्मा का कारक एक मन का। तो मन व आत्मा जब दोनों संयुक्त हो कर कोई भी कार्य करती है तो सफलता की सम्भावनाएँ बढ़ ही जाती हैं।
इसके अलावा उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व या दक्षिण-पूर्व में भी इस पूजा को किया जा सकता है।

दीपावली की महापूजा के बाद उत्तर भारत में कई जगहों पर गोवर्धन पूजा का प्रावर्धान है जिसमें पूजा के लिए गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत पूरी श्रद्धा भाव से बनाया जाता है। इसे लेटे हुये पुरुष की आकृति में बनाया जाता है और फिर नाभि के स्थान पर एक कटोरी जितना गड्ढा बना लिया जाता है और वहां एक कटोरी व मिट्टी का दीपक रखा जाता है फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, मधु और बतासे इत्यादि डालकर पूजा की जाती है। गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का बड़ा महत्व है कई लोग प्रतीकात्मक रूप से इस गोवर्धन की भी परिक्रमा करते हैं व भगवान कृष्ण को अंनकूट का भोग लगाते हैं।

पाँच दिनों तक चलने वाला यह महापर्व भाई दूज के दिन समाप्त होता है और दे जाता है पूरे वर्ष भर रहने वाला उल्लास। भ्रातृ द्वितीया (भाई दूज) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। कहते हैं कि भाई दूज के दिन भाई बहन यमुना में स्नान करने के बाद भाई को तिलक करने से भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता व भाई बहन सुखी रहते है।

**रंगोली*की सही दिशा व सही रंग*
कैसे कर सकते हैं हम दिशाओं को संतुलित जिससे वर्ष भर रहे हमारे घर में धन का प्रभाव। सबसे पहले तो घर या कार्य स्थल की साफ़ सफ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए फिर महालक्ष्मी का स्वागत विविध प्रकार की रंगोलियों से भी कर सकते हैं।
वास्तु शास्त्र में रंगोली का बहुत महत्व है, और इसका उपयोग घर की विभिन्न दिशाओं में किया जाता है ताकि सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित किया जा सके और नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जा सके। विभिन्न दिशाओं में अलग अलग आकार व रंगो का चयन उस दिशा की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है। वैसे तो रंगोली में बहुत सारे रंग होते हैं परंतु कौन सी दिशा में किस रंग व आकार की रंगोली को प्राथमिकता देनी चाहिए, आइए देखें-

उत्तर दिशा: इस दिशा में रंगोली बनाने से धन और समृद्धि आती है। हरे, नीले और सफ़ेद रंग की लहरिया आकार की रंगोली उत्तर दिशा में बनाई जाती है।

दक्षिण दिशा: इस दिशा में लाल और नारंगी, बैगनी, गुलाबी जैसे चटक रंग की रंगोली बनाने से नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जा सकता है। तिकोने आकार की रंगोली यहाँ ज़रूर बनानी चाहिए।

पूर्व दिशा: इस दिशा में रंगोली बनाने से सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा आती है। पीले, नारंगी और हरे रंग आयताकार रंगोली पूर्व दिशा में बनाई जाती है।

पश्चिम दिशा: इस दिशा में रंगोली बनाने से जीवन में सफलता मिलती है। सफेद और पीले रंग की गोल और चौकोर रंगोली पश्चिम दिशा में बनाई जाती है।

केंद्र: इस स्थान पर रंगोली बनाने से घर में संतुलन और शांति बनी रहती है। सभी रंगों की रंगोली केंद्र में बनाई जा सकती है परंतु पीला रंग प्राथमिकता में होना चाहिए।

इसके अलावा भी दिशाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न दिशाओं में रंगोली बना सकते हैं। महालक्ष्मी आप सबके जीवन को सम्मृधि के रंगों से भर दें ऐसी शुभकामनाओं के साथ नमस्कार, शुभ दीपावली!

निष्काम कर्मयोगी, आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ कृष्ण, साक्षी भाव से द्रष्टा बने सब स्वीकारते हुए सहज बने रहे।भगवद स्वरूप ...
26/08/2024

निष्काम कर्मयोगी, आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ कृष्ण, साक्षी भाव से द्रष्टा बने सब स्वीकारते हुए सहज बने रहे।
भगवद स्वरूप हो कर भी दृष्टा बने रहना, यही परम धर्म है ll
श्री कृष्ण सिखाते हैं… जीवन में कितनी भी प्रतिकूल परिस्थिति क्यों न हो, उसका मुकाबला मुस्कराते हुए ही करना चाहिए।
संसार की रणभूमि में अपने जीवन की महाभारत में जय के लिए कृष्ण के जीवन सूत्र ही लक्ष्य सिद्धि के कारगर मंत्र हैं।

मैं, महावास्तु आचार्य डॉ शालिनी दीक्षित 20 जुलाई '24 से आपका ऑनलाइन महावास्तु फाउंडेशन कोर्स शुरू कर रही हूँ।।अब, वास्तु...
19/07/2024

मैं, महावास्तु आचार्य डॉ शालिनी दीक्षित 20 जुलाई '24 से आपका ऑनलाइन महावास्तु फाउंडेशन कोर्स शुरू कर रही हूँ।।

अब, वास्तु शास्त्र के अनोखे रहस्य अपने ही घर के नक़्शे पर सीखें और घर में संबंधों, करियर, धन और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के सरल एवं प्रभावशाली महावास्तु समाधान प्राप्त करें।

कोर्स में एनरॉल करें: https://mahavastu.com/enroll-omfc-fb"

05/06/2024

Spiritualism ये है spiritualism वो है मेरे हिसाब से तो बस जो हो आप बस वही हो यही spiritualism है l आपका पूरा सच!

जरूरी नहीं की ये सच लोग जाने
जरूरी ये है कि ये सच आप जाने

सनातन की यात्रा बाहर से अंदर है और यही एक मात्र सत्य हैl एक लाइन बहुत खूबसूरत है सर की, "रील को रियल के जैसे जियो"l

वाह सार इसी में, संसार इसी में ll

मैं, महावास्तु आचार्य शालिनी दीक्षित 06 अप्रैल '24 से आपका ऑनलाइन महावास्तु फाउंडेशन कोर्स शुरू कर रहा हूँ/रही हूँ।।अब, ...
04/04/2024

मैं, महावास्तु आचार्य शालिनी दीक्षित 06 अप्रैल '24 से आपका ऑनलाइन महावास्तु फाउंडेशन कोर्स शुरू कर रहा हूँ/रही हूँ।।

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26/01/2024
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था,भगवान की वाणी!!इससे मिलने वाली...
23/12/2023

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था,भगवान की वाणी!!
इससे मिलने वाली सीख को आप बदल नहीं सकते पर यह सीख व्यक्ति का जीवन ज़रूर बदल सकती है।कुछ तो घटित होता है, कृतज्ञ हूँ की "गुरुसखा ख़ुशदीप बंसल जी" ने गीता के सरल स्वरूप से मिलाया।
कहते हैं कि अर्जुन से पहले सूर्य को मिला था गीता के सूत्र दिए थे, जिनका अनवरत कर्मरत रहना ही जगत को चलायमान रखता है।

भारत की शिक्षा पद्धति में भले ही वैदिक पाठय़क्रम का विरोध किन्हीं कारणों से होता हो, लेकिन विश्व की बहुत सी यूनीवर्सिटीज में सभी छात्रों के लिए गीता पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है।
हार्वर्ड जैसे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान भारत के प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ दिए जाते हैं। इन ग्रंथों में भगवत गीता का मैनेजमेंट की दृष्टि से विशेष अध्ययन भी शामिल है।

Shree BhagvadGeeta by Dr. Khushdeep Bansal; Hindi and English
https://shorturl.at/kqDN5

"गीता जयंती" की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Amazon.in: geeta khushdeep bansal

08/10/2023

A query often asked by seekers that what facing or direction they should prefer and found that they actually do'nt have a clear idea that what is facing!
Which side of the directions they need to look when it comes about facing of your home or any building.
So here i come with "Facing of a building".

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