Devrishi Astro:Know your future by thumb impression

Devrishi Astro:Know your future by thumb impression Astrologer & Vastu Cunsultant,
Relationship issue.marriage.divorce.addictions.fear & fobias.weit managment.angel healing.kaala jadu.tantra etc. Who am I?

Maharishi Vedic Science
Overview

Astro Maharishi Ji

Astrology Services - Studies Issues, Weight Management, Fear & Phobias and Nadi Dosh Service Provide
www.indiamart.com
Service Provider and Trader of Astrology Services, Studies Issues, Fear & Phobias, Weight Management, Relationship Issue and Nadi Dosh offered by Maharishi Gems Jewellery & Jyotish Kendra, Faridabad, Haryana, India. What is M

aharishi Vedic Science? Maharishi Vedic Science is the science and technology of consciousness. It has its source in the ancient Vedic tradition of India. The term “Vedic” is derived from the Sanskrit word “Veda” which means "knowledge" — knowledge of the field of pure intelligence that is the source of all the diverse fields of knowledge. Integrating Veda and modern science

Vedic Science brings together the ancient Indian tradition of knowledge (Veda) and discoveries of modern science to understand fundamental questions about life. Where do my thoughts come from? The seers of the Vedic tradition looked inside themselves to find answers to questions like: "Who am I?",” Where do my thoughts come from?", "What is the source of my creativity?" They found that underlying their thoughts, perceptions, and actions is a field of pure intelligence, a field of Being, of "I am". A non-material field underlying change

Similarly, modern physics has concluded that underlying the diversity of matter is a non-material field whose self-interactions generates time, space and observable forces and particles. Both approaches identify a non-material field that underlies observable change. Experience of transcendence in world religions

Comparable descriptions of life are found in the writings of masters and saints of major world religions. This common experience of inner transcendence is a common theme in all the world’s religions. What is the value of Maharishi Vedic Science? Maharishi Vedic Science helps you experience and understand higher states of consciousness. It also develops the qualities most important for whatever career you embark upon. Through Maharishi’s techniques and knowledge for development of consciousness, you’ll gain a better understanding of yourself and your place in the world — not just intellectually, but by directly experiencing your own inner nature. Explore universal, fundamental principles — and acquire self-knowledge for growth, transformation, and success in life. By experiencing your own pure consciousness, your thinking and actions will become more coherent, harmonious, and rewarding. Students often remark how “things just start to go my way” as they gain the ability to fulfill desires from inside themselves. Ultimately, our world is a reflection of who we are — everyone shapes his or her own reality.

05/02/2016
01/11/2015

🌿वास्तुशास्त्र में क्यों है दर्पण का महत्व🌿
🍁देवर्षि विजय शास्त्री 🍁
वास्तुशास्त्र में दर्पण को उत्प्रेरक बताया गया है, जिसके द्वारा भवन में तरंगित ऊर्जा की सृष्टि सुखद अहसास कराती है। इसके उचित उपयोग द्वारा हम अनेक लाभजनक उपलब्धियां अर्जित कर सकते हैं
कैसे, आइए जानें-
*भवन के पूर्व और उत्तर दिशा व ईशान कोण में दर्पण की उपस्थिति लाभदायक है।
* भवन में छोटी और संकुचित जगह पर दर्पण रखना चमत्कारी प्रभाव पैदा करता है।
* दर्पण कहीं भी लगा हो, उसमें शुभ वस्तुओं का प्रतिबिंब होना चाहिए।
* दर्पण को खिड़की या दरवाजे की ओर देखता हुआ न लगाएं।
* आपका ड्राइंग रूम छोटा हो तो चारों दीवारों पर दर्पण के टाइल्स लगाएं, लगेगा नहीं कि आप अतिथियों के साथ छोटे कमरे में बैठे हैं।
* कमरे में दीवारों पर आमने-सामने दर्पण लगाने से घर के सदस्यों में बेचैनी और उलझन होती है।
* दर्पण को मनमाने आकार में कटवाकर उपयोग में न लाएं।
* मकान का कोई हिस्सा असामान्य शेप का या अंधकारयुक्त हो वहां गोल दर्पण रखें।
यदि घर के बाहर इलेक्ट्रिकल पोल, ऊंची इमारतें, अवांछित पेड़ या नुकीले उभार हैं और आप उनका दबाव महसूस कर रहे हैं तो उनकी तरफ उत्तल दर्पण रखें।
* किसी भी दीवार में आईना लगाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि वह न एकदम नीचे हो और न अधिक ऊपर। अन्यथा परिवार के सदस्यों को सिरदर्द हो सकता है।
* यदि बेडरूम में ठीक बिस्तर के सामने दर्पण लगा रखा हो उसे फौरन हटा दें। यहां दर्पण की उपस्थिति वैवाहिक और पारस्परिक प्रेम को तबाह कर सकती है।
* मकान के ईशान कोण में उत्तर या पूर्व की दीवार पर स्थित वॉशबेसिन के ऊपर दर्पण भी लगाएं। यह शुभ फलदायक है।
* यदि आपके घर के दरवाजे तक सीधी सड़क आने के कारण द्वार वेध हो रहा है और दरवाजा हटाना संभव नहीं है तो दरवाजे पर ‘पा कुआ’ दर्पण लगा दें। यह शक्तिशाली प्रतीक है। अत: इसे लगाने में सावधानी रखना चाहिए। इसे किसी पड़ोसी के घर की ओर केंद्रित करके न लगाएं।

28/10/2015

💮 आज का राशिफल :-
देवर्षि विजय शास्त्री
🐑 राशि फलादेश मेष :-
यात्रा सफल होगी। जीवनसाथी की चिंता रहेगी। रोजगार मिल सकता है। संतान का ध्यान रखें। निवेश शुभ रहेगा।

🐂 राशि फलादेश वृष :-
भागदौड़ रहेगी। धनहानि संभव है। विवाद-जोखिम आदि से दूर रहें। व्यय वृद्धि होगी। दूसरों से अपेक्षा न करें।

👫 राशि फलादेश मिथुन :-
बकाया वसूली होगी। रुके कार्यों में गति आएगी। यात्रा-निवेश मनोनुकूल रहेगा। संतान की चिंता रहेगी।

🐙 राशि फलादेश कर्क :-
कार्यपद्धति में सुधार होगा। नई योजना लाभ देगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। अस्वस्थता रह सकती है। विवाद न करें।

🐯 राशि फलादेश सिंह :-
शत्रु कष्ट देंगे। तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। कार्यों में गति आएगी। लाभ होगा।

🙆🏽 राशि फलादेश कन्या :-
चिंता, तनाव तथा पीड़ा रहेंगे। चोट-चोरी आदि से हानि संभव है। लाभ के अवसर हाथ से निकलेंगे।

📟 राशि फलादेश तुला :-
यात्रा लाभकारी रहेगी। गृहस्‍थ सुख मिलेगा। राजकीय सहयोग मिलेगा। चोरी आदि से हान‍ि संभव है, जोखिम न लें।

🐉 राशि फलादेश वृश्चिक :-
भय, पीड़ा, चिंता तथा तनाव व्यथित करेंगे। लाभ होगा। बेरोजगारी दूर हो सकती है। निवेश-नौकरी लाभ देंगे।

🔱 राशि फलादेश धनु :-
बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। निवेश आदि लाभ देंगे।

🐊 राशि फलादेश मकर :-
विवाद से कार्य बिगड़ सकते हैं। दु:खद समाचार मिल सकता है। जोखिम-जमानत के कार्य टालें। हानि होगी।

🍯 राशि फलादेश कुंभ :-
कार्य की पूर्णता उत्साह व प्रसन्नता की वृद्धि करेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे।

🐋 राशि फलादेश मीन :-
शुभ समाचार मिलेगा। आत्मसम्मान बढ़ेगा। शत्रु परास्त होंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। जोखिम न लें |

20/10/2015

देवी माँ दुर्गा की पूजा से सभी देवता खुश
सिर्फ आदि शक्ति दुर्गा माँ की पूजा अर्चना से ही खुश हो जाते है समस्त देवी देवता :
all gods worshipeed by durga worship यह प्रसंग हम लाये है दुर्गा सप्तशती से जिसमे बताया गया है की तीनो लोको के कल्याण के लिए किस तरह देवी दुर्गा माँ का अवतरण हुआ है और क्यों देवी माँ दुर्गा की ही आराधना से सभी मुख्य देवी देवताओ का आशीष साधक को प्राप्त होता है |
देवताओ की वेदना पर त्रिदेव और देवताओ के तेज से भगवती का अवतार :
दुर्गा सप्तशती के दुसरे अध्याय से जब दानव राज महिषासुर ने अपने राक्षसी सेना के साथ देवताओ पर सैकड़ो साल चले युद्ध में विजय प्राप्त कर ली और स्वर्ग का राजाधिराज बन चूका था | सभी देवता स्वर्ग से निकाले जा चुके थे | वे सभी त्रिदेव (बह्रमा विष्णु और महेश) के पास जाकर अपने दुखद वेदना सुनाते है | पूरा वर्तांत सुनकर त्रिदेव बड़े क्रोधित होते है और उनके मुख मंडल से एक तेज निकलता है जो एक सुन्दर देवी में परिवर्तित हो जाता है | भगवान शिव के तेज से देवी का मुख , यमराज के तेज से सर के बाल , श्री विष्णु के तेज से बलशाली भुजाये , चंद्रमा के तेज से स्तन , धरती के तेज से नितम्ब , इंद्र के तेज से मध्य भाग , वायु से कान , संध्या के तेज से भोहै, कुबेर के तेज से नासिका , अग्नि के तेज से तीनो नेत्र |
देवताओ द्वारा शक्ति का संचार देवी दुर्गा में :
शिवजी ने देवी को अपना शूल , विष्णु से अपना चक्र , वरुण से अपना शंख , वायु ने धनुष और बाण , अग्नि ने शक्ति , बह्रमा ने कमण्डलु , इंद्र ने वज्र, हिमालय ने सवारी के लिए सिंह , कुबेर ने मधुपान , विश्वकर्मा में फरसा और ना मुरझाने वाले कमल भेट किये , और इस तरह सभी देवताओ ने माँ भगवती में अपनी अपनी शक्तिया प्रदान की |

इन सभी देवताओ के तेज से देवी दुर्गा में रूप के साथ साथ शारीरिक और मानसिक शक्ति का भी संचार होता है | देवता ऐसी महाशक्ति महामाया को देखकर पूरी तरह आशावान हो जाते है की महिषासुर का काल अब निकट है और देवताओ का फिर से स्वर्ग पर राज होगा |

माँ दुर्गा ने महिषासुर और उसकी सम्पूर्ण सेना का वध करके देवताओ को फिर से स्वर्ग दिला दिया | माँ के जय जयकार तीनो लोको में हुई |
तब से जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करता है उसे सभी देवताओ का आशीष मिलता है |देवी माँ दुर्गा की पूजा से सभी देवता खुश
सिर्फ आदि शक्ति दुर्गा माँ की पूजा अर्चना से ही खुश हो जाते है समस्त देवी देवता :
all gods worshipeed by durga worship यह प्रसंग हम लाये है दुर्गा सप्तशती से जिसमे बताया गया है की तीनो लोको के कल्याण के लिए किस तरह देवी दुर्गा माँ का अवतरण हुआ है और क्यों देवी माँ दुर्गा की ही आराधना से सभी मुख्य देवी देवताओ का आशीष साधक को प्राप्त होता है |
देवताओ की वेदना पर त्रिदेव और देवताओ के तेज से भगवती का अवतार :
दुर्गा सप्तशती के दुसरे अध्याय से जब दानव राज महिषासुर ने अपने राक्षसी सेना के साथ देवताओ पर सैकड़ो साल चले युद्ध में विजय प्राप्त कर ली और स्वर्ग का राजाधिराज बन चूका था | सभी देवता स्वर्ग से निकाले जा चुके थे | वे सभी त्रिदेव (बह्रमा विष्णु और महेश) के पास जाकर अपने दुखद वेदना सुनाते है | पूरा वर्तांत सुनकर त्रिदेव बड़े क्रोधित होते है और उनके मुख मंडल से एक तेज निकलता है जो एक सुन्दर देवी में परिवर्तित हो जाता है | भगवान शिव के तेज से देवी का मुख , यमराज के तेज से सर के बाल , श्री विष्णु के तेज से बलशाली भुजाये , चंद्रमा के तेज से स्तन , धरती के तेज से नितम्ब , इंद्र के तेज से मध्य भाग , वायु से कान , संध्या के तेज से भोहै, कुबेर के तेज से नासिका , अग्नि के तेज से तीनो नेत्र |
देवताओ द्वारा शक्ति का संचार देवी दुर्गा में :
शिवजी ने देवी को अपना शूल , विष्णु से अपना चक्र , वरुण से अपना शंख , वायु ने धनुष और बाण , अग्नि ने शक्ति , बह्रमा ने कमण्डलु , इंद्र ने वज्र, हिमालय ने सवारी के लिए सिंह , कुबेर ने मधुपान , विश्वकर्मा में फरसा और ना मुरझाने वाले कमल भेट किये , और इस तरह सभी देवताओ ने माँ भगवती में अपनी अपनी शक्तिया प्रदान की |

इन सभी देवताओ के तेज से देवी दुर्गा में रूप के साथ साथ शारीरिक और मानसिक शक्ति का भी संचार होता है | देवता ऐसी महाशक्ति महामाया को देखकर पूरी तरह आशावान हो जाते है की महिषासुर का काल अब निकट है और देवताओ का फिर से स्वर्ग पर राज होगा |

माँ दुर्गा ने महिषासुर और उसकी सम्पूर्ण सेना का वध करके देवताओ को फिर से स्वर्ग दिला दिया | माँ के जय जयकार तीनो लोको में हुई |
तब से जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करता है उसे सभी देवताओ का आशीष मिलता है |

20/10/2015

Astrologer & Vastu Cunsultant,
Relationship issue.marriage.divorce.addictions.fear & fobias.weit managment.angel healing.kaala jadu.tantra etc.

नवरात्र पर्व के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजन और उन्हें घर बुलाकर भोजन कराने का विधान होता है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दि...
20/10/2015

नवरात्र पर्व के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजन और उन्हें घर बुलाकर भोजन कराने का विधान होता है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन आखरी नवरात्रों में इन कन्याओ को नौ देवी स्वरुप मानकर इनका स्वागत किया जाता है | माना जाता है की इन कन्याओ को देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज से माँ दुर्गा प्रसन्न हो जाती है और अपने भक्तो को सुख समृधि का वरदान दे जाती है |
दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन क्यों और कैसे किया जाता है?
नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के दौरान कन्या पूजन का बडा महत्व है. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिविंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है. अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को उनका मनचाहा वरदान देती हैं. नवरात्रे के किस दिन करें कन्या पूजन : कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन और भोज रखते हैं और कुछ लोग अष्टमी के दिन | हम्हरा मानना है की अष्टमी के दिन कन्या पूजन श्रेष्ठ रहता है |
कन्या पूजन विधि
जिन कन्याओ को भोज पर खाने के लिए बुलाना है , उन्हें एक दिन पहले ही न्योता दे दे | मुख्य कन्या पूजन के दिन इधर उधर से कन्याओ को पकड़ के लाना सही नही है | गृह प्रवेश पर कन्याओ का पुरे परिवार के सदस्य पुष्प वर्षा से स्वागत करे और नव दुर्गा के सभी नौ नामो के जयकारे लगाये | अब इन कन्याओ को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाकर इन सभी के पैरो को बारी बारी दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथो से उनके पैर धोने चाहिए और पैर छुकर आशीष लेना चाहिए | उसके बाद पैरो पर अक्षत, फूल और कुंकुम लगाना चाहिए | फिर माँ भगवती का ध्यान करके इन देवी रुपी कन्याओ को इच्छा अनुसार भोजन कराये | भोजन के बाद कन्याओ को अपने सामर्थ के अनुसार दक्षिणा दे , उपहार दे और उनके पुनः पैर छूकर आशीष ले |
नवरात्र पर्व पर कन्या पूजन में कितनी हो कन्याओं की उम्र ?
कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए | यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है |
सिर्फ 9 दिन ही नहीं है यह कन्या देवियाँ :
नवरात्रों में भारत में कन्याओ को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते है | बहूत जगह कन्याओ पर शोषण होता है , उनका अपनाम किया जाता है | आज भी भारत में बहूत सारे गाँवों में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है | ऐसा क्यों | क्या आप देवी माँ के इन रूपों को क्यों ऐसा अपमान करते है | हर कन्या अपना भाग्य खुद लेकर आती है | कन्याओ के प्रति हमहें हम्हारी सोच बदलनी पड़ेगी | यह देवी तुल्य है | इनका सम्मान करना इन्हे आदर देना ही ईश्वर की पूजा के तुल्य है |

11/09/2015

गुलाब🌹 जल चेहरे के लिए सबसे ज्यादा और प्रभावशाली प्रकृतिक जल है। गुलाब जल में नींबू की कुछ बूंदों को मिलाकर चेहरे पर मलें। एैसा आप कुछ सप्ताह तक करते रहने से चेहरे में निखार आने लगेगा। यदि शरीर में कहीं पर काला पन हो तो आप सोते समय इसका इस्तेमाल करें आपको फायदा होगा।
दूसरा प्राकृतिक उपाय है शहद का इस्तेमाल करना। कच्चे दूध में शहद की कुछ बूंदे डालकर उसे चेहरे पर लगाएं। यह चेहरे की प्राकृतिक रौनक वापस लाएगा। और चेहरे को कोमल बनाने में यह असरकारी और प्रभावशाली प्रयोग है।
चेहरे की खोई हुई रंगत को वापस लाने के लिए आप संतरे के छिलके का प्रयोग भी कर सकते हो।
संतरे के छिलकों को धूप में सुखा लें और फिर इन्हें पीसकर चूर्ण बना लें फिर इस चूर्ण में नींबू का रस, कच्च दूध और थोड़ा गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट तक चेहरे पर लगे रहने दें। फिर ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। यह त्वचा का खोया हुआ गोरा रंग वापस लाएगा।
टमाटर का प्रयोग भी आपकी खोई हुई चेहरे की रंगत को वापस लाने में मदद करता है। क्योंकि टमाटर में मौजूद गुण चेहरे की नमी वापस तो लाते ही हैं साथ ही चेहरे से काले धब्बों को मिटाने में मदद करते हैं। आप टमाटर के रस में थोड़ा सा कच्चा दूध और गुलाब जल को मिलाकर चेहरे पर लगायें एैसा करने से चेहरे से कील, मुहासों से निजात मिलता है।

हल्दी का इस्तेमाल से चेहरा कोमल और चमकदार बनता है। पुराने समय से ही हल्दी को सुंदरता का प्रतिक माना गया हैं हल्दी में थोड़ी मलाई और कच्चे दूध के साथ आटा मिलाकर चेहरे पर मलें और 10 मिनट के बाद चेहरा धो लें।

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Shop No. 261, Ground Floor Lekhraj Market, Indira Nagar, Lucknow
Lucknow
226016

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