23/03/2021
क्रांतिकारियों के अंतिम दिन
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ये तीनों तस्वीरें असली है। डेली मिलाप अख़बार, लाहौर 1931 की। लाहौर षडयंत्र केस में न्यायालय के निर्णय की ख़बर। भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को फांसी की सज़ा की ख़बर...आज जैसा ही एक दिन था..23 मार्च, 1931 अंग्रेज़ो ने तय तिथि से पहले ही गुपचुप तरीके से भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी पर लटका दिया....देश के लाडले सपूतों के शवों के टुकड़े करके सतलुज नदी के किनारे स्थित हुसैनीवाला ले जाया गया....और जो कुछ भी ज्वलनशील तरल या ठोस उपलब्ध हुआ, उसी से इन क्रांतिकारियों के शवों को जैसे-तैसे जलाया....इसी दौरान यह ख़बर आग की तरह फैल गई....लाला लाजपत राय की बेटी पार्वती देवी और भगत सिंह की बहन बीबी अमरकौर के साथ हज़ारों की तादाद में लोग पहुंच गये! पुलिसवाले शवों के अधजले टुकड़ों को छोड़कर भाग खड़े हुए...जनता ने इन दुलारे क्रांतिकारियों के अधजले शवों को जलती-बुझती चिताओं जैसे ढेर में से वापिस निकाला और लाहौर ले गये..लाहौर में पूरे सम्मान के साथ तीनों अर्थियां निकाली गई...24 मार्च की शाम हजारों लोगों की उपस्थिति में रावी नदी के किनारे अंतिम संस्कार हुआ..इनकी शहादत व्यर्थ नहीं गई...इस ख़बर ने भारत भर में हज़ारों क्रांतिकारी पैदा किये.... आज भी भगत सिंह का नाम सुनते ही सच्चा भारतीय अपने में बब्बर शेर का सा भाव महसूस करता है..उसके रोम रोम में ज्वाला दौड़ने लगती है....यह याद करने दिवस है कि राष्ट्र से बढ़कर कोई नहीं, कुछ नहीं, कुछ भी नहीं..... नमन..मातृभूमि के सपूतों को कोटि कोटि नमन....आप विचार से, कर्म से और शहादत के जज़्बे के साथ सदैव याद रहेंगे...सदैव...
जय हिंद 🇮🇳
#प्रतिलिपि