अखण्ड भारत-त्रैमासिक पत्रिका

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सम्पादकीय -
गुलाम भारत के आजाद सिपाहियों को समर्पित यह पत्रिका जिसका एकमात्र उद्देश्य अखंड भारत का निर्माण है .वह भारत जो जाति ,धर्म,सम्प्रदाय से परे विश्व भारत हो जिसका एक मात्र धर्म और कर्म मानव सेवा हो ..भारत के शहीद राष्ट्रीय स्वाधीनता संघर्ष में एक नवीन युग के आदर्श प्रतिनिधि के रूप में महानतर है! शहादत का युग रहा स्वातन्त्र्य समर जब क्रांतिक आभा परिवर्तन के पहिये को गुलाम अंधेरो से आजाद स

ुबह की राह दिखाई ! चल पड़ा था बचपन का भारत, युवा भारत,कर्तव्य पथ का बुजुर्ग भारत क़ुरबानी की राह में इन्कलाब के स्वरों में ! महाभारत के शिखंडी का कुछ तो अस्तित्व था पर समकालीन भारत के शिखंडी तो सदा ही परजीवी रहे जो लहू छोस्ते रहे अपने ही माँ भारती भारत का !शहीदों के स्वप्न से यथार्थ की यात्रा में आज भारत कहाँ पंहुचा ?धर्म ,जाति,सत्ता स्वार्थ की तलवारों ने अखंड भारत को कहंद खंड किया है !देशी अंग्रेजो से उत्पीडित जनता को एक हो यह समझना होगा रोटी, कपडा, मकान, के जमीन पर स्वराज की स्थापना के पथ को जो आज के दौर में बेहद कठिन है !दुर्भाग्य से भारतीय क्रांति का बौद्धिक पक्ष हमेशा दुर्बल रहा,भावों की मजबूत इंकलाबी स्वरों ने गुलामी की दीवार तो ढहा दी मजबूत भारत की नीव को खोखला करने वाले दीमको से अपने भारत को बचा नहीं पाए !एक ओर आजादी की अधूरी इमारत एक और गुलामी की आसमानी इबादत ,सोचिये कहाँ जा रहा हमारा भारत ! आज भारत बड़ी द्रुत गति से गतिशील है दुर्गति के पथ पर पल पल लगातार अनियत चाल से !
क्रांति का अर्थ है -महान परिवर्तन !यह परिवर्तन राज्य.समाज,और चिंतन के क्षेत्र में हो सकता है! क्रांति के लिए तलवार नहीं विचार चाहिए !अपने नीजिपन को ख़त्म कर व्यक्तिगत आराम के सपनो को छोड़कर एक एक कदम आगे बढे राष्ट्रवाद के कठिन पथ पर तभी राष्ट्र निर्माण में आपका बहुमूल्य योगदान फलीभूत होगा !अपनी सभ्यता व् संस्कृति की जड़ो से जुड़े रहे, जब राष्ट की जड़े मजबूत होंगी राष्ट्र का
सर्वांगी विकाश होगा ! ज्ञान गंगा का तट विश्वगुरु भारत आज आभाहीन होता जा रहा, जरा देखिये जापान और चीन जैसे राष्ट्रों को जिनकी अपनी एक भाषा है अपना एक संस्कार है, भारत विविधता में एक्यता लेकर क्यों उलझा हुआ है, कारण साफ़ है कि भारत का अपना कोई भाषा या संस्कार ना रहा ,दम तोड़ रही है भारतियता और हमें भारतीय होने पर नाज है ! हमें भारतीय होने पर नाज तभी करना चाहिए जब देश को हम अपने बहुमूल्य जीवन से कुछ दे सकें ! देश की धरती पर तो जन्म से ही यह जीवन समर्पित है यदि कर्म से समर्पित हो जाए तो माटी में मिलने से पहले यह माटी जो रंग लाएगा वो हर बार भारत की माती में जन्म पाने का सौभाग्य पायेगा !
व्यक्ति की हत्या हो सकती है विचारों की नहीं जो विचार जिवंत है जिनमे शहीदे आजम भगत सिंह सिरमौर है,जिन्होंने विचारों को कर्म का यायावर पथ बना दिया और चल पड़ी क्रांति उन्ही राहों पर जहाँ से स्वराज के पथ गढ़े जाते हैं !
भगत सिंह और उनके साथियों के नाम सदा सदा के लिए भारतीय जनता के जेहन में खुद चुके हैं !क्रांतिकारी नारे लगाकर ही संतुष्ट नहीं हुए बल्कि वह प्रतीक थे उस दुर्दमनीय साहस के,मौत से पंजे लड़ाने वाले हौसलों के ,बड़ी से बड़ी कुर्बानी दे सकने की क्षमता थी उनमे !
भगत सिंह और उनके साथियों का बलिदान क्रांति की शसक्त जागृति पैदा कर गई जो सदा रहेगी !लाहौर सेन्ट्रल जेल जहाँ २३ मार्च १९३१ को भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई ,बदले वक़्त के साथ बदला पर भारत की हवाओं में बहते उनके बलिदान की गाथा क्षितिज तक गूंजती है !विडम्बना है कि देश के बटवारे के साथ ही शहीदों के बटवारे हो गए पर इनके बलिदानों पर ना तो कोई असर पड़ा है और ना ही पड़ेगा क्योंकि उनका बलिदान अमर है !बाते हुए भारत को जोड़ना तो अब दूर की बात है पर जो भारत बचा हुआ है उसे ही अखंड बना लिया जाये यही हमारी उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली होगी ! अखंड भारत धर्म से संस्कृति से सभ्यता से संस्कार से फिर एक बार विश्वगुरु भारत !
अखंड भारत पत्रिका एक आह्व्हन है कलम की क्रांति का जो भारत के कण कण में रमे शहादत की गाथा को गायेगा ,भारत क्या था और क्या है जन जन को बतायेगा ,एक नई राह लाएगा शहीदों का भारत कैसा हो !आप मर जायेंगे पर आपके कर्मशील विचार अमर रहेंगे .फिर आइये एक बार आज के क्रांतिकारी बन एक वैचारिक क्रांति से अखंड भारत का पथ गढ़ने में अपना अमूल्य योगदान दिया जाए !

जय हो विजय हो अखंड भारत उदय हो .राष्ट्र पथ पर सदा कोटि कोटि वन्दे मातरम् ....अरविन्द योगी

क्रांतिकारियों के अंतिम दिन************************ये तीनों तस्‍वीरें असली है। डेली मिलाप अख़बार, लाहौर 1931 की। लाहौर षड...
23/03/2021

क्रांतिकारियों के अंतिम दिन
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ये तीनों तस्‍वीरें असली है। डेली मिलाप अख़बार, लाहौर 1931 की। लाहौर षडयंत्र केस में न्‍यायालय के निर्णय की ख़बर। भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को फांसी की सज़ा की ख़बर...आज जैसा ही एक दिन था..23 मार्च, 1931 अंग्रेज़ो ने तय तिथि से पहले ही गुपचुप तरीके से भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी पर लटका दिया....देश के लाडले सपूतों के शवों के टुकड़े करके सतलुज नदी के किनारे स्थित हुसैनीवाला ले जाया गया....और जो कुछ भी ज्‍वलनशील तरल या ठोस उपलब्‍ध हुआ, उसी से इन क्रांतिकारियों के शवों को जैसे-तैसे जलाया....इसी दौरान यह ख़बर आग की तरह फैल गई....लाला लाजपत राय की बेटी पार्वती देवी और भगत सिंह की बहन बीबी अमरकौर के साथ हज़ारों की तादाद में लोग पहुंच गये! पुलिसवाले शवों के अधजले टुकड़ों को छोड़कर भाग खड़े हुए...जनता ने इन दुलारे क्रांतिकारियों के अधजले शवों को जलती-बुझती चिताओं जैसे ढेर में से वापिस निकाला और लाहौर ले गये..लाहौर में पूरे सम्‍मान के साथ तीनों अर्थियां निकाली गई...24 मार्च की शाम हजारों लोगों की उपस्थिति में रावी नदी के किनारे अंतिम संस्‍कार हुआ..इनकी शहादत व्‍यर्थ नहीं गई...इस ख़बर ने भारत भर में हज़ारों क्रांतिकारी पैदा किये.... आज भी भगत सिंह का नाम सुनते ही सच्‍चा भारतीय अपने में बब्‍बर शेर का सा भाव महसूस करता है..उसके रोम रोम में ज्‍वाला दौड़ने लगती है....यह याद करने दिवस है कि राष्‍ट्र से बढ़कर कोई नहीं, कुछ नहीं, कुछ भी नहीं..... नमन..मातृभूमि के सपूतों को कोटि कोटि नमन....आप विचार से, कर्म से और शहादत के जज़्बे के साथ सदैव याद रहेंगे...सदैव...
जय हिंद 🇮🇳

#प्रतिलिपि

पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त भारत के जाबांजों को कोटि कोटि नमन अखण्ड भारत से।तेज थे जो देश के वो आसमानी हो ग...
14/02/2021

पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त भारत के जाबांजों को कोटि कोटि नमन अखण्ड भारत से।

तेज थे जो देश के
वो आसमानी हो गये
हम यहाँ घरों में बैठे
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में सो गयें ।

बो गयें वो प्रेम बीज देश का
क्रान्ति के संदेश का
सांस में स्वदेश का
रक्त में उजास का
देश के प्रकाश का
वो आकाश हो गयें
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में खो गयें ।

वक्त़ का मिजाज है
सत्ता सबके साथ है
पहले सबका स्वारथ है
उसके बाद भारत है
सबकीे सबको चाहत है
सबसे सबको राहत है
किसका दिल आहत है
मजहबों में बंट गया
जाति से ये कट गया
गोरे कबके चल दिये
घर के गोरे रह गये
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में सो गयें ।

पंचतत्व हो गये
देश पे जो मर गये
बूंद-बूंद रक्त से
वो सींचते हैं देश को
लूटते क्यों लूटते
सत्ता वाले देश को
कल गुलामी गैर से थी
अब गुलामी घर में है
गाँव अब शहर में है
जाने किस विकास में
क्यों कैसे खो रहें
परसु सा प्रहार हो
शत्रु का संहार हो
अखण्ड राग युद्ध का
वो बजाके सो गयें
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में खो गयें ।

अपने घर की बात है
क्या विश्व की औकात है
गुलाम होके खण्ड-खण्ड
हम तो बस युं हुयें
बंट गये हैं सरहदों में
दिल मगर बंटा नहीं
सत्ता का बुखार देखो
देश से हटा नहीं
कर्म का फल यहाँ
हर कोई पायेगा
शत्रु जो अखण्डता का
वक्त़ पे मारा जायेगा
आहूतियां जो शेष हैं
अखण्ड यज्ञ अशेष है
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में खो गयें ।

क्रान्ति यह विशेष है
देश में विदेश है
दर्द बनके दौर का
माँ के लाल सो गयें
चूड़ियाँ बिलख पडी़
मांग सूनी हो गयी
जल रही मशाल है
संक्रमित ये काल है
देश के जो भाल हैं
सरहदों में सो गये
वो सरहदों में खो गयें ।
#जय अखण्ड भारत
#अरविन्द भारत

संपादक - अखण्ड भारत त्रैमासिक पत्रिका

 #मां 🌺ज्ञान दो मां ,भक्ति दो मां , और वैराग्य अपार दो lमोह का आवरण हटा दो, निज शरण में प्यार दो llजन्म पाया किसलिए और द...
30/01/2021

#मां 🌺

ज्ञान दो मां ,भक्ति दो मां , और वैराग्य अपार दो l
मोह का आवरण हटा दो, निज शरण में प्यार दो ll

जन्म पाया किसलिए और देह है क्योंकर मिली,
निज हृदय के गेह में, वेदना है क्यों पली ?
निज कृपा की इक किरण को आदित्य का आकार दो ll

है सुता तेरी जो जननी , माता है वो भी किसी की,
फिर ममता की कैसी परीक्षा ले रही माता इसी की l
ममता की तुम सिन्धु हो मां, ममत्व का अधिकार दो ll

जो नहीं हैं योग्य उनको, योग्यता उपधान क्यों हैं,
मानवता की ही डगर में, शूल का व्यवधान क्यों है ?
करुणा - कलित हर इक हृदय को, नेह का आधार दो ll

सुप्त है शुभ कर्म सारे और अशुभ का तांडव है ,
कौरवों के व्यूह में , फंस गए ज्यों पांडव हैं l
सारथी हर एक मन को, कृष्ण सा साकार दो ll

तुम शिवा शक्ति सृजन हो, भाव भक्ति और भजन हो,
सृष्टि का कण कण तुम्हीं हो, अन्त भी और विजन हो l
ममतामय हो जाए मानव, मानवता का उद्गार दो ll

🌺 अमिता 'अशेष'

बेटी- बिन बेटी(शक्ति) काल में गति नहींविषाक्त दानावल में समाज केजलकर क्यों राख बनेगी बेटी रत्न जड़ित नीलम सी आँखे है बेटी...
24/01/2021

बेटी- बिन बेटी(शक्ति) काल में गति नहीं

विषाक्त दानावल में समाज के
जलकर क्यों राख बनेगी बेटी
रत्न जड़ित नीलम सी आँखे है बेटी
मेघ के जल सी अगाध गहन है बेटी।

भीगे केश राशि से चंचल चपला सी
जल की बूँदें बन बरखा बरसाती है बेटी
बार बार मुख आलिंगन कर माँ की
नयनो में स्नेहिल छवि बनाती है बेटी।

मानव स्वप्नों की परिभाषा है बेटी
अलग नही कभी निर्माण से बेटी
माँ से माँ की गर्व गर्विता आशा है बेटी
धैर्य गति सी शीतल सी वाणी है बेटी।

पूर्ण चन्द्र की चंद्रिका जैसी है बेटी
यज्ञ आहुति निर्मल कायान्वित है बेटी
दंश मिटेगा जीवन से नया जमाना है बेटी
अग्नि स्वरूपा माँ के आंचल में पलती है बेटी।

धू-धू विकृति मन दुर्भिछ जलाएगी बेटी
ढोंगी हर चेहरे पर हवन कराएगी बेटी
कोढ़ मानव संस्कृति से मिटाएगी बेटी
जो नहीं दिखा था सब दिखाएगी बेटी।

सारे दुःशासन को पाठ पढ़ाएगी बेटी
अबसे कृष्ण को नहीं बुलाएगी बेटी
मर्मान्तक चीखें नहीं उठाएगी बेटी
त्रिशूल धारिणी खड्ग उठाएगी बेटी।

जितने पौरुष पाखंडी उन्हें सताएगी बेटी
उनकी काया माया खुद जलायेगी बेटी
अट्टाहास भूखे दरिंदो के दबाएगी बेटी
नामर्दों की जलती चिता जगाएगी बेटी।

जर्जर युग बीत रहा अब धीरे-धीरे
अग्नि शिखा दीप्त सदा रहेगी बेटी
जल कर राख हो जाएगी बलि वेदी
प्रकृति शक्ति को प्रण सिखाएगी बेटी
मानवमय नया जाना लाएगी बेटी।

अरविन्द भारत
#प्रधान_संपादक_अखण्ड_भारत

कोई  धर्म  हो , कोई  जाति  हो , कोई  हो  त्योहार ,दिल में लेकिन हों खुशियाँ , हो  ें_केवल_प्यार |आता है क्या लेकर कोई, ज...
25/12/2020

कोई धर्म हो , कोई जाति हो , कोई हो त्योहार ,
दिल में लेकिन हों खुशियाँ , हो ें_केवल_प्यार |

आता है क्या लेकर कोई, जायेगा क्या कुछ लेकर,
कलह-क्लेश में कट जायें क्यूँ , #दिन_जीवन_के_चार |

#मानवता से बड़ा नहीं है ,धर्म कोई इस दुनिया में ,
क्यूँ कहते तुम छोटे हो तो, जाओ हमसे हार |

हम बच्चों से सीखो तुम ,आपस में #मिलकर_रहना ,
भेद - भाव से भरा है मन क्यूँ ,क्यों कलुषित उद्गार |

धरती उजली, उजला अम्बर हो उजला मन का हर कोना,
प्यार है जीवन, प्यार ज्योति है , #प्यार_जगत_का_सार |

पोंछ के आँसू आँखों से ,अधरों पर #मुस्कान सजा दें,
क्या इससे भी बढ़कर है कोई , दुनिया में #उपहार |

लोहड़ी - ईद - दिवाली - क्रिसमस , सबका यही संदेश ,
धरती को स्वर्ग बनाने का , अपना #सपना_हो_साकार |


✍️ अमिता 'अशेष'

युग है नया अब भी मगर, चल रही पुरानी रीत है।अधिकारों से वंचित स्त्री,दंभित पुरूषों की जीत है।कहकर कलंकित तज दिया,राम ने स...
24/12/2020

युग है नया अब भी मगर, चल रही पुरानी रीत है।
अधिकारों से वंचित स्त्री,दंभित पुरूषों की जीत है।
कहकर कलंकित तज दिया,राम ने सीता को वन में।
देकर परीक्षा अग्नि की, नहीं पुनीत उसकी प्रीत है ॥

अमिता अशेष
२०-७-२०१५

~~अमर शहीद माँ भारती के जाबांज पुत्र बिसमिल रोशन, लहरी, अशफाक, को १९ दिसम्बर को काकोरी कांड के लिए  बलिदान हुए भारत पर। ...
18/12/2020

~~अमर शहीद माँ भारती के जाबांज पुत्र बिसमिल रोशन, लहरी, अशफाक, को १९ दिसम्बर को काकोरी कांड के लिए बलिदान हुए भारत पर। आपको कोटि कोटि नमन अखंड भारत परिवार से
.....जो सदा भारत की हवाओं में बहते हैं ...
यदि देश हित मरना पड़े मुझको सहस्त्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान मैं लाउं कभी ।
हे ईश, भारतवर्ष में ‘शतबार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो ।।
मरते बिसमिल रोशन, लहरी, अशफाक, अत्याचार से,
होंगे पैदा सैकड़ों उनके रूधिर की धार से ।।
उनके प्रबल उद्योग से उद्धार होगा देश का,
तब नाश होगा सर्वथा दुख ‘शोक के लवकेश का ।।


मै अक्सर रातों में सोता नहीं,
पर जरा भी मै अब रोता नहीं,
आंसू सूख गए इन आँखों से,
तारे टूट गए सब ख्वाबों के,
सारी रात सोचता रहता हूँ,
आँखों में हमेशा दौड़ता रहता है
ओह!भूखा भारत,व्याकुल भारत,
टूटी ममता की विह्वल चाहत !

मुस्कराते रहते हैं आँखों में अक्सर,
मौत को ललकारते शहीद भगत सिंह,
सिंह से दहाड़ते चंद्रशेखर आजाद,
अहले हिंदुस्तान के शायर अशफाक,
क्रांति के कर्म पुजारी पंडित राम प्रसाद,
सपना शहीदों का हो रहा अब ख़ाक,
शहीदों का भारत हो रहा नित बर्बाद !

सदियों से बचपन भूखा है, युवा भटका है,
वृद्ध सारे सदियों से स्वार्थ में ही बीमार हैं,
तानाशाहों की चलती आई स्वार्थी सरकार है,
फ़ैल रहा नित भ्रष्टों के भ्रष्टाचार का व्यापार है,
हाय रे! यह जीवन ही हमारा हुआ धिक्कार है!

खो गया स्वराज का अमर इंकलाबी प्यार है,
आखिर क्यों जी रहे हम, कैसा यह अधिकार है
सोन चिरैया भारत सत्ता के चालों की झंकार है
नीद से जागो अब तो भारत माँ के वीरों तुम ही,
जो तुम्हारे दिलों में अपने ही भारत से प्यार है !

दिखा दो जो तुम्हारे दिलों में स्वराज की चाहत है,
आखिर क्यों सदियों से विश्व गुरु तुम्हारा ही भारत है,
नीद भी तभी आये हमारे इन आँखों में जब साँसे टूटे,
फिर ना कोई सत्ता का लोभी तुम्हारा यह भारत लूटे,
सौगंध हमें इस पावन भारत की अद्भुद माटी की,
शहीदों के स्वराज की स्वप्निल उस आजादी की,
हर सपना शहीदों का हम फिर से जरूर सजायेंगे,
सौगंध माँ के दूध की शहीदों का भारत हम बनायेंगे !

यह कविता क्यों ? अशफाकउल्ला कट्टर मुसलमान हो कर पक्के आर्यसमाजी और रामप्रसाद के क्रान्तिकारी दल के सम्बन्ध में यदि दाहिना हाथ बन सकते है, तब क्या भारतवर्ष की स्वतन्त्रता के नाम पर हिन्दू मुसलमान अपने निजी छोटे-छोटे फायदों का ख्याल न करके आपस में एक नहीं हो सकते ?
खुली आँखों से हम अंधे हुए जा रहे हैं, हमारी आस्था और विश्वाश के बल पर सत्ता लोभी सदियों से भारत को बेच रहे हैं, जो जितना ही नीच है वह उतना ही बड़ा महात्मा है, आखिर कहा गयी माटी की सोंधी महक जिसमे राष्ट्र प्रेम के राग महकते हैं, खोने लग है शहीदों का सपना ,जो हम ना जगे अब भी ,फिर बहुत देर हो जाएगी ,जागो भारत माँ के वीरों तुम्हारा भारत खो रहा है , वन्दे मातरम ,,, #अरविन्द भारत

अखण्ड भारत के सन्दर्भ में अनन्य सिपाही सरदार बल्लभ भाई पटेल जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि कोटि अभिनन्दन आज के अखंड भारत स...
15/12/2020

अखण्ड भारत के सन्दर्भ में अनन्य सिपाही सरदार बल्लभ भाई पटेल जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि कोटि अभिनन्दन आज के अखंड भारत से .....
~~यह भारत देश है मेरा !...~~
जहाँ मानवता के रखवाले ही मानवता को मारें
स्वप्न शहीदों के बंनते जहां नील गगन के तारे
जहां मंदिर-मस्जिद संग सत्ता अपना राग पुकारे
श्रद्धा-भक्ति के चेहरों में भूख से जीवन चित्कारे
था कौन सा भारत तेरा,यह भारत देश है मेरा !!...................................................................
धन्य यहाँ की जनता जो जपती स्वारथ की माला
सभ्यता भूली बचपन देखो कहां रहे कोई बालक-बाला
शिक्षा, वेद भुलाएँ, मिले कहाँ गीता-रामायण पढने वाला
जहाँ सूरज उगने पर भी रहता मन में कोई अँधेरा
था कौन सा भारत तेरा, यह भारत देश है मेरा !!..................................................................
जहाँ गंगा रोये बदहाली पे, जमुना बनती काला पानी
कृष्ण,कावेरी सी कितनी ही नदियों की खोती निशानी
उत्तर,दक्षिण,पूरब,पश्चिम में फैली नफ़रत की कहानी
सूने खलिहान हुए हैं,कहीं खेतों में बाजारों ने रंग बिखेरा
था कौन सा भारत तेरा, यह भारत देश है मेरा !!.........................................................................
घोटालों की इस धरती पे घोटाले भी अलबेले
सत्ता की रोज दीवाली मनती, गुंडों के लगते मेले
निर्धन की रोटी से अक्सर भ्रष्टाचार के होते खेले
यहाँ काम अर्थ और स्वार्थ अब चारो और है घेरा
था कौन सा भारत तेरा, यह भारत देश है मेरा !!..........................................................................
जहाँ आसमां से बातें करते कुधर्मी और पाखंडी
भुजदण्डो का बल भूल चलते धरने की पगडण्डी
हर नगर डगर पे भारत बेचने वालों की लगती मंडी
माटी के लाल नहीं अब जो अपना हक हथियालें
और सत्ता की बंसी जहाँ बजाता आये शाम सवेरा
था कौनसा भारत तेरा, यह भारत देश है मेरा !!

यह गीत क्यों ? स्वप्न से यथार्थ की यात्रा में आज का भारत बड़ी ही लानत के साथ लिखने पर बाध्य लेखनी .गर्व नहीं शर्म महसूस करता है मन .पर कलम का कर्म है बोलना तो कलम भला क्यों चुप रहे ...फिल्म सिकंदरे आजम के गीत का हर मुखड़ा जो बचपन में रोमांचितकर जाता था ,यथार्थ आज विह्वल कर जाता है ।.वन्दे अखण्ड भारतम
प्रयास जब प्रचण्ड होगा
भारत अखण्ड होगा ।।

अरविन्द भारत

#प्रधान_संपादक_अखण्ड भारत

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