19/09/2021
🟡🟡🟡 पितृपक्ष तर्पण विधान 🟡🟡🟡
🔴 शुक्र दिन, 29 सितम्बर 2023 सँ आरम्भ आ
शनि दिन, 14 अक्टूबर 2023 क समापन ।
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🔴 संध्यावन्दनोपरान्त दायाँ हाथक अनामिका में सोना, चाँदी अथवा कुशक पवित्री धारण केलाक बाद तर्पण करी ।
🟡🟡🟡 अगस्ति तर्पण 🟡🟡🟡
29/09/2023 (शुक्र दिन)
🔴 शंख में जल, श्वेत पुष्प (काश), अक्षत, फल, द्रव्य सभ वस्तु राखि दक्षिणाभिमुख भऽ अगस्त तर्पण करी ।
🔴 आवाहन एहि मन्त्र सँ करी :-
ॐ आगच्छ मुनि शार्दूल तेजोरासे जगतपते ।
उदयन्ते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रति गृह्यताम् ॥
🔴 पाठान्तर में
ॐ कुम्भयोनि समुत्पन्न मुनीना मुनिसत्तम् ।
उदयन्ते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रति गृह्यताम् ॥
🔴 तदुपरान्त फल पुष्पाक्षतादियुक्त शंख लए :-
ॐ शंखं पुष्पं फलन्तोयं रत्नानि विविधानि च ।
उदयन्ते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रति गृह्यताम् ॥
🔴 तदुपरान्त काश पुष्प लए :-
ॐ काश पुष्प प्रतीकाश वह्निमारुत सम्भव ।
उदयन्ते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रतिगृह्यताम् ॥
🔴 अर्घ्यक बाद निम्न मन्त्र सँ प्रार्थना करी :-
ॐ आतापी भक्षितो येन वातापी च महावलः ।
समुद्रः शोषितो येन स मेऽगस्त्यः प्रसीदतु ॥
🔴 तखन अगस्तिक पत्नी लोपमुद्राक तर्पण निम्न मन्त्र सँ करी :-
ॐ लोपामुद्रे महाभागे राजपुत्रि पतिव्रते गृह्यणार्घ्घम्मया दत्तं मित्रवारुणि बल्लभे ॥
🔴 ई मात्र पूर्णिमा क करबाक अछि ।
🔴 पितृ तर्पण : 30 अक्टूबर, शनि दिन सँ प्रारम्भ।
🟡🟡🟡 देव तर्पण 🟡🟡🟡
🔴 तदुपरांत यज्ञोपवीत सव्य भाग में राखि पूर्वाभिमुख भऽ यव सहित तेकुशा अथवा सिर्फ कुश सँ देव तीर्थ द्वारा निम्न मन्त्र सँ तर्पण करी :-
ॐ तर्पणिया देवा आगच्छन्तु ।
ॐ ब्रह्मास्तृप्यताम ।
ॐ विष्णुस्तृप्यताम् ।
ॐ रुद्रस्तृप्यताम् ।
ॐ प्रजापतिस्तृप्यताम् ।
ऊँ देवायक्षास्तथा नागा गन्धर्वाप्सरसोऽसुराः ।
क्रूराः सर्पाः सुपर्णाश्च तरवो जम्भकाः खगाः विद्याधारा जलाधारास्तथैवाकाश गामिनः।
निराधाराश्च ये जीवाः पापे धर्मे रताश्चये तेषामाप्यायनायै तद्दीयते सलिलम्मया ॥
🔴 तदुपरांत उत्तराभिमुख भऽ जनऊ के मालाकार कऽ तीर्थ द्वारा निम्न मन्त्र सँ तर्पण करी :-
ॐ सनकादय आगच्छन्तु ।
ॐ सनकश्चसनन्दश्च तृतीयश्च सनातनः । कपिलश्चासुरिश्चैव वोढुः पञ्चशिखस्तथा सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनाम्बुना सदा ।
🟡🟡🟡 ऋषि तर्पण 🟡🟡🟡
🔴 तदुपरांत पुनः पूर्वाभिमुख भऽ यज्ञोपवीत सव्य कऽ देव तीर्थ द्वारा निम्न मन्त्र सँ तर्पण करी :-
ॐ मरीच्यादय आगच्छन्तु ॥
ॐ मरीचिस्तृप्यताम् ।
ॐ अत्रिस्तृप्यताम् ।
ॐ अङ्गिरास्तृप्यताम् ।
ॐ पुलस्त्यस्तृप्यताम् ।
ॐ पुलहस्तृप्यताम् ।
ॐ क्रतुस्तृप्यताम् ।
ॐ प्रचेतास्तृप्यताम् ।
ॐ वशिष्ठस्तृप्यताम् ।
ॐ भृगुस्तृप्यताम् ।
ॐ नारदस्तृप्यताम् ।
🟡🟡🟡 दिव्य पितृतर्पण 🟡🟡🟡
🔴 तहन यज्ञोपवीत अपसव्य कऽ दक्षिणाभिमुख भऽ मोड़ा, तिल, जल लऽ पितृ तीर्थ द्वारा निम्न मन्त्र सँ तर्पण करी :-
ॐ अग्निष्वात्तास्तृप्यन्ताम् जलन्तेभ्यः स्वधानमः -३।
ॐ सौम्यास्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्यः स्वधानमः ॥
ॐ हविष्मन्तस्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्यः स्वधानमः ।
ॐ उष्मास्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्यः स्वधानमः ।
ॐ सुकालिनस्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्य : स्वाधानमः ।
ॐ वर्हिषदस्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्यः स्वधानमः ।
ॐ आज्यापास्तृप्यन्तामिदं जलन्तेभ्यः स्वधानमः ॥
🟡🟡🟡 यम तर्पण 🟡🟡🟡
🔴 यम के तर्पण निम्न मन्त्र सँ करी :-
ॐ यामादय आगच्छन्तु ॥
ऊँ यमाय नमः। ऊँ धर्मराजाय नमः। ऊँ मृतवे नमः । ॐ कालाय नमः । ॐ अन्तकाय नमः । ॐ वैवस्वताय नमः । ॐ सर्वभूतक्षयाय नमः । ॐ औदुम्बराय नमः । ॐ दध्नाय नमः । ॐ नीलाय नमः । ॐ परमेष्ठिने नमः । ॐ वृकोदराय नमः । ॐ चित्राय नमः । ॐ चित्रगुप्ताय नमः । ॐ चतुर्दशैते यमाः स्वस्ति कुर्वन्तु तर्पिता ।
🟡🟡🟡 पितृ तर्पण 🟡🟡🟡
🔴 निम्न मन्त्र सँ सब पितरक तीन-तीन अञ्जलि जल दी :-
🔴 और अमुकक स्थान पर क्रमशः पितरक गोत्र एवं नामक उच्चारण करी ।
ॐ आगच्छन्तुमे पितरं इमं गृहं तपोञ्जलिम् ।।
ॐ अद्यामुक गोत्रः पिताऽमुकशर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा - ३।
ॐ अद्यामुक गोत्रः पितामहोऽमुक शर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा - ३।
ॐ अद्यामुक गोत्रः प्रपितामहोऽमुक शर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा - ३।
ॐ अद्यामुक गोत्रः वृद्धप्रपितामहोऽमुक शर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा - ३।
ॐ तृप्यध्वम् - ३ ।
ॐ अद्यामुक गोत्रः मातामहोऽमुक शर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा -३।
ॐ अद्यामुक गोत्रः प्रमातामहोऽमुक शर्मा तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा -३।
ॐ अद्यामुक गोत्रः वृद्धप्रमातामहोऽमुक शर्मा तृप्यमामिदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा -३।
ॐ तृप्यध्वम् -३।
🔴 निम्न मन्त्र सँ मातृ पितरक एक-एक अञ्जलि जल दी :-
🔴 और अमुकक स्थान पर क्रमशः मातृ पितरक गोत्र एवं नामक उच्चारण करी ।
ऊँ अद्यामुकगोत्रा माताऽमुकी देवी तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ अद्यामुक गोत्रा पितामही अमुकी देवी तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ अद्यामुक गोत्रा प्रपितामही अमुकी देवी तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ तृप्यध्वम् - १।
ॐ अद्यामुक गोत्रा मातामही अमुकी देवी तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ अद्यामुक गोत्रा प्रमातामही अमुकी देवी
तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ अद्यामुक गोत्रा वृद्धप्रमातामही अमुकी देवी तृप्यतामिदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा - १।
ॐ तृप्यध्वम् - १।
🔴 उपरोक्त तर्पणक बाद पत्नी, भाई, सम्बन्धी, आचार्य तथा गुरु लोकनिक हेतु तर्पण करक चाही :-
ॐ येऽबान्धवा बान्धवा वा येऽन्यजनमनि बान्धवाः ।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु यश्चास्मत्तोऽभिवाञ्छति ॥
ये मे कुले लुप्तिपिण्डा पुत्रदारा विवर्जिताः ।
तेषांहि दत्तमक्षय्यमिदमस्तु तिलोदकम् ॥
आब्रह्मस्तस्व पर्यन्त देवर्षि पितृ मानवाः ।
तृप्यन्तु पितरः सर्वे मातृ मातामहोदयः ॥
अतीत कुल कोटीना सप्तद्विपनिवासिनाम् ।
आब्रह्म भुवनाल्लोकादिदमस्तु तिलोदकम् ॥
🔴 एहि मंत्र सँ अन्तिम अञ्जलि देलाक बाद निम्न मंत्र सँ स्नान कालक भीजल वस्त्रके गाड़ि जल खसा दी :-
ॐ ये चाऽस्माकं कुले जाता अपुत्रा गोत्रिणो मृताः ।
ते तृप्यन्तु मया दतैर्वस्त्रनिष्पीडिनोदकम् ॥
🔴 तकर बाद एहि मन्त्र सँ सूर्य के तीन बेर अर्घ दी :-
ॐ नमो विवस्तवे ब्रह्मन् भास्वते विष्णु तेजसे । जगत्सवित्रे शुचये सवित्रे कर्मदायिने ॥
एषोऽर्घ्यः ॐ भगवते श्री सूर्यनारायणाय नमः ।
ॐ विष्णुर्विष्णुर्हरिर्हरिः ।
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