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27/05/2026

“गुरुवार को रसोई की ये चीज़ खाली क्यों नहीं रखी जाती?”
अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः।यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः।।
संसार के सभी प्राणी अन्न (भोजन) से उत्पन्न होते हैं और उसी से जीवित रहते हैं।पर्जन्यादन्नसम्भवः: वह अन्न वर्षा (पर्जन्य) से पैदा होता है।यज्ञाद्भवति पर्जन्यः: वर्षा यज्ञ (कर्तव्य कर्म और परोपकार) से होती है।यज्ञः कर्मसमुद्भवः: यज्ञ की उत्पत्ति कर्मों से होती है, जो मनुष्य द्वारा किए जाते हैं।इसलिए गुरुवार को
रसोई के अन्न पात्र को पूरी तरह खाली रखना
अशुभ माना जाता था।
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26/05/2026

गणपति के बड़े उदर का गहरा आध्यात्मिक अर्थ क्या है?”
लम्बोदरं परम सुन्दर एकदन्तं, पीताम्बरं त्रिनयनं परमंपवित्रम्।उद्यद्धिवाकर निभोज्ज्वल कान्ति कान्तं, विध्नेश्वरं सकल विघ्नहरं नमामि॥यह पंक्तियाँ भगवान श्री गणेश के अत्यंत लोकप्रिय श्री गणेश स्तवन का एक अंश हैं। इनका अर्थ है: जो बड़े उदर (पेट) वाले हैं, परम सुंदर हैं, एक दंत वाले हैं, चार भुजाओं वाले हैं और प्रसन्न मुख वाले हैं, उन देव का मैं सभी विघ्नों (बाधाओं) की शांति के लिए स्मरण/प्रणाम करता हूँ।इसके जाप से जीवन, व्यापार, नौकरी या शिक्षा में आ रही सभी रुकावटें और अड़चनें दूर होती हैं。भगवान गणेश को बुद्धि का देवता माना जाता है, इसलिए इसके नियमित पाठ से ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है。किसी भी नए काम (जैसे यात्रा, परीक्षा, या नया व्यवसाय) से पहले इसके उच्चारण से कार्य में सफलता (सर्व कार्य सिद्धि) सुनिश्चित होती है。आप प्रतिदिन सुबह या शाम पूजा के समय धूप, दीप जलाकर इस श्�

25/05/2026

“उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं
यः शोकवह्निं जनकात्मजायाः।
आदाय तेनैव ददाह लङ्कां
नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम्॥”यह श्लोक श्री हनुमान् नमस्कारः (या श्री हनुमान स्तवन) का अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक है, जिसमें हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम का वर्णन किया गया है।जिन्होंने खेल-खेल में ही (लीलापूर्वक) समुद्र के जल को पार कर लिया, जनक की पुत्री (माता सीता) के हृदय की विरह-शोकाग्नि को (एक संदेश के रूप में) प्राप्त करके, उसी अग्नि से पूरी स्वर्णनगरी लंका को जला डाला, उन अंजनीपुत्र (श्री हनुमान जी) को मैं हाथ जोड़कर (प्रणाम की मुद्रा में) प्रणाम करता हूँ।हनुमान जी ज्ञानियों में अग्रगण्य और बुद्धि के दाता हैं। इस श्लोक के जप से कठिन से कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता (विवेक) बढ़ती है।माता सीता के दुःख को दूर करने वाले हनुमान जी का यह श्लोक मन से चिंता, निराशा और शोक को मिटाकर सकारात्मकता लाता है।
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24/05/2026

“शिव को ‘नीलग्रीव’ क्यों कहा गया?”
“नमो नीलग्रीवाय सहस्राक्षाय मीढुषे।
अथो ये अस्य सत्वानोऽहं तेभ्योऽकरं नमः॥”यह मंत्र भगवान शिव के विराट और कल्याणकारी स्वरूप की स्तुति करता है। नीलकंठ का अर्थ है कि वे विष को धारण करके भी संसार की भलाई करते हैं, जबकि 'सहस्राक्ष' और 'मीढुषे' उनके सर्वव्यापी और दाता रूप को दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त, शिव के गणों को भी नमन करके भक्त यह प्रार्थना करता है कि भगवान के साथ-साथ उनके अनुयायी भी उस पर अपनी कृपा बनाए रखें“जो विष को भी शक्ति बना दे…
वही शिव”
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23/05/2026

“सूर्य देव के 12 नाम — हर नाम में छुपा है एक रहस्य”
“आदित्यः सविता सूर्यः
खगः पूषा गभस्तिमान्।
सुवर्णसदृशो भानुः
हिरण्यरेता दिवाकरः॥”
नियमित रूप से सूर्य देव के इन १२ नामों का स्मरण करने से बल, बुद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है...इस श्लोक में दिए गए नामों के मुख्य अर्थ इस प्रकार हैं:आदित्यः: अदिति के पुत्र।सविता: संसार को उत्पन्न करने वाले।सूर्यः: संपूर्ण जगत की आत्मा और प्राण।खगः: आकाश में विचरण करने वाले।पूषा: जगत का पोषण करने वाले।गभस्तिमान्: किरणों को धारण करने वाले (प्रकाशमान)।सुवर्णसदृशो: सोने के समान कांतिमय।भानुः: प्रकाश या दीप्ति के प्रतीक।हिरण्यरेता: स्वर्ण के समान तेज वाले।दिवाकरः: दिन को करने वाले (दिनकर)।

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22/05/2026

“ऋषि पिप्पलाद ने शनि को इस विशेष नाम से क्यों पुकारा?”
कोणस्थः पिंगलोबभ्रुः कृष्णो रौद्रोन्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः।। एतानि दशनामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। शनैश्चर कृता पीड़ा न कदाचिद्भविष्यति।।
जो व्यक्ति सुबह उठकर शनि देव के इन दस नामों का पाठ करता है, उसे कभी भी शनि के प्रकोप या पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ता है।
यह प्रसिद्ध श्लोक श्री शनि स्तोत्र का एक प्रमुख भाग है。 इसे महान ऋषि पिप्पलाद द्वारा शनि देव की स्तुति में रचा गया था
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21/05/2026

कमल और लक्ष्मी का संबंध सिर्फ सुंदरता नहीं… बहुत गहरा है
“या सा पद्मासनस्था
विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिः
स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥”
कमल की सबसे बड़ी विशेषता है कि वो
कीचड़ में रहकर भी निर्मल और सुंदर रहता है
इसलिए शास्त्रों में कमल को समृद्धि ,पवित्रता और ऊँची चेतना
का प्रतीक माना गया।यानी
माँ लक्ष्मी सिर्फ धन नहीं…
“ऊर्जा की शुद्धता” का भी प्रतीक हैं।
यह माँ लक्ष्मी का ध्यान मंत्र है। इसके नियमित जाप से घर में बरकत आती है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और धन के नए मार्ग खुलते हैं。 माँ लक्ष्मी के इस दिव्य स्वरूप की कल्पना करने से मन से दरिद्रता, नकारात्मकता और आलस्य दूर होता है。

20/05/2026

“केले के वृक्ष का संबंध सीधे विष्णु तत्व से क्यों जोड़ा गया?”
“नमो ब्रह्मण्यदेवाय
गोब्राह्मणहिताय च।
जगद्धिताय कृष्णाय
गोविन्दाय नमो नमः॥”
यह श्लोक भगवान कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण, रक्षा, और संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना को प्रकट करता है। इस प्रार्थना का जाप करने से आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है
परंपराओं में
गुरुवार को केले के वृक्ष में जल अर्पित करना, हल्दी चढ़ाना और दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया। क्योंकि केले के वृक्ष को
Vishnu तत्व से जोड़ा गया है .. केले का वृक्ष निरंतर वृद्धि, स्थिरता और पोषण का प्रतीक माना गया इसलिए इसे गुरु ऊर्जा और समृद्धि से जोड़ा गया।
“जहाँ वृद्धि…वहीं गुरु तत्व”

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20/05/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sanjay Dakhore, Ganga Basnet, Naval Kishore, Pardhuman Kumer Choubey, Anil Bohre, Rajesh Kumar, Sunil Angeera, Shivani Chaurasia, Ajeet Hura, Deepak Sharma, Sunil Kumar Sharma, Prashant Srinet, Nirmala Agrawal, Rckjain Rckjain, Anju Mehra, Sashamitaranee Chhotaray, Sheetal Singh, Deepak Patel, Gautam Kumar, Mohit Sethi, Rupali Chetry, Dinesh Thunga, Subhash Pandey, Arun Kumar, Jagjeet Singh Shekhawat, Prem Prakash Upadhyay, Sanjay Paswan

20/05/2026

I got over 5,200 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

19/05/2026

“ऋग्वेद में गणेश जी को ‘कवि’ क्यों कहा गया?”
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥
यह मंत्र मुख्य रूप से बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जपा जाता है। इसे अक्सर किसी नए कार्य, अध्ययन या पूजा की शुरुआत करने से पहले उच्चारित किया जाता है।इसे हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश के सबसे प्रमुख और शक्तिशाली वैदिक मंत्रों (श्री गणेश स्तुति) में से एक माना जाता है, जो किसी भी कार्य की शुरुआत में बुद्धि और सफलता के लिए जपा जाता है।
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