22/04/2023
ग्रहों के राजा सूर्य इस बार जैसे ही उच्च के हुए, बहुत बड़े स्तर के #दुष्टों_का_दलन शुरू हो गया, चाहे वह अपराध जगत के हों, चाहे राजनीति में हों या फिर अन्य किसी भी क्षेत्र में। ज्योतिष के जानकार जानते हैं कि अपने सेनापति मंगल की मेष राशि पर सूर्य जब पहुंचते हैं तो वह सर्वाधिक ताकतवर होते हैं, अर्थात प्रचंड शक्ति के साथ अपना शौर्य दिखाते हैं। इस बार 14 अप्रैल को सूर्य उच्च के हुए और 15 अप्रैल से ही उनका तांडव शुरू हो गया... महत्वपूर्ण बात यह है कि मेष राशि के ठीक पीछे अपनी मीन राशि पर गुरु बृहस्पति भी विराजमान थे। गुरु का यह बैकअप राजा सूर्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया। अपने सेनापति के घर में घुसे हुए राहु को देखकर सूर्य का रौद्र रूप भयंकर हो गया। उसके बाद तो जो कुछ भी हुआ और जो हो रहा है वह बताने की जरूरत नहीं है। दिन-रात सारे टीवी चैनल और अखबार उसी का वर्णन कर रहे हैं...
इसी दौरान उत्तर प्रदेश में निकायों के चुनाव भी चल रहे हैं।
गुरु बृहस्पति महाराज के अस्त होने के कारण फिलहाल स्थिति क्या बनेगी, वह अभी बहुत स्पष्ट नहीं हो पा रहा है परंतु 27 अप्रैल को जैसे ही #गुरु_उदित होंगे, सीन बहुत बदली हुई नजर आएगी। जो जनप्रतिनिधि चुने जाने हैं उनकी वास्तविक छवि तभी उभर कर सामने आएगी। उदाहरण के रूप में यहां #धर्मनगरी_काशी_और_तीर्थराज प्रयाग की ही सिर्फ यदि मैं चर्चा करूं तो मेरा मानना है कि इन सनातन धर्म के प्रमुख शहरों से जो महापौर इस बार चुनकर आने वाले हैं उनकी अपनी कुंडली में #मंगल_की_बहुत_ही_महत्वपूर्ण_भूमिका होनी चाहिए,, क्योंकि गोचर में मंगल की मेष राशि पर ही इस समय सारा तांडव चल रहा है। अर्थात धार्मिक रूप से बहुत खास इन महानगरों के #प्रथम_नागरिक मंगल प्रधान व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। काफी संभावना है कि उनकी शनि की महादशा चल रही हो, अर्थात महापौर वही चुना जाएगा जो लंबे समय से सीधे जनता से जुड़ा होगा। ऐसे किसी प्रत्याशी के महापौर चुने जाने की कतई कोई संभावना नहीं बन रही है जो सूर्य, बुध, शुक्र या राहु प्रधान हो। अर्थात परिवारवादी राजनीति के पोषक अथवा धन-बल के कारण ऊपर से थोपे गए किसी भी प्रत्याशी के महापौर चुने जाने की संभावना कतई नहीं है। ग्रहों की वर्तमान स्थितियों को देखते हुए पार्टी कोई भी हो, परंतु उसने यदि किसी धन कुबेर अथवा किसी परिवारवाद के पोषक प्रत्याशी को मैदान में उतारा है तो जनता उसे खारिज करने में जरा भी संकोच नहीं करेगी। बृहस्पति के उदित होने के बाद ऐसे प्रत्याशियों के एक्सपोज होने की प्रबल संभावना है,, क्योंकि इस समय राहु सूर्य और बृहस्पति बहुत करीब आ चुके हैं। बृहस्पति का सहारा व निर्देश पाकर शुक्र या राहु प्रधान कथित नेताओं का मानमर्दन करने में सूर्य जरा भी संकोच नहीं करेंगे। पिछले दिनों प्रयागराज में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। कांग्रेस के एक पार्षद प्रत्याशी को तिरंगे की अवमानना के आरोप में न सिर्फ पार्टी से निकाल दिया गया बल्कि उसे जेल की हवा भी खानी पड़ी। ऐसे तमाम नेता पूरे प्रदेश में बहुत जल्दी ही पूरी ज़लालत के साथ एक्सपोज होने वाले हैं। जल्दी ही बहुत सारे वीडियो ऐसे वायरल होंगे जिससे इन नेताओं की हकीकत जनता के सामने आएगी, ताकि जनता अपना सही फैसला सुना सके। शनि ग्रह भी वर्तमान माहौल में परोक्ष रूप से बृहस्पति व मंगल का पूरा समर्थन कर रहा है,, क्योंकि शनि की तीसरी नीच दृष्टि सूर्य और राहु तक पहुंच रही है।
उदाहरण स्वरूप काशी और प्रयागराज के महापौर प्रत्याशियों की यहां मैं जो कुंडली प्रस्तुत कर रहा हूं, संयोग से यह दोनों ही कुंडलियां वृश्चिक लग्न वाली हैं और दोनों में ही शनि की महादशा चल रही है। कन्या राशि वाली कुंडली में मंगल की अंतर्दशा चल रही है और वृष राशि वाली में सूर्य की अंतर्दशा चल रही है। मैं यह अभी नहीं बताऊंगा कि कौन सी कुंडली प्रयागराज के किस प्रत्याशी की है और कौन सी कुंडली काशी के किस प्रत्याशी की है, तथा यह प्रत्याशी किस पार्टी के उम्मीदवार हैं। जैसा कि मैंने स्पष्ट रूप से ऊपर बताया है कि वर्तमान ग्रह गोचर के अनुसार इन दोनों ही धार्मिक महानगरों के महापौर वही चुने जाएंगे जिनके ग्रह गोचर कुछ इस तरह 👇👇 से सपोर्ट कर रहे होंगे, भले ही वह किसी भी पार्टी या किसी भी विचारधारा के प्रत्याशी हो सकते हैं।
आइए इन कुंडलियों के अनुसार ग्रहों की स्थिति थोड़ा और स्पष्ट कर दें... यह दोनों ही कुंडली इन दोनों महानगरों में से एक-एक महापौर प्रत्याशी की बताई जाती है। ऊपर वाली वृश राशि वाली कुंडली (मैंने यहां चलित कुंडली का चित्र दिया है। इस चलित चार्ट में चंद्रमा सातवें घर से खिसक कर आठवें घर में चले गए हैं जो कि इस चित्र में दिखाई पड़ रहा है,, परंतु मूल लग्न कुंडली में चंद्रमा सातवें घर में ही हैं अर्थात अपनी उच्च राशि पर हैं) पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि सूर्य और चंद्रमा का जबरदस्त राजयोग तो है ही, बृहस्पति और सूर्य का भी बहुत ही बेहतरीन राजयोग बन रहा है इस कुंडली में... क्योंकि त्रिकोण अर्थात पंचम स्थान के स्वामी होकर बृहस्पति दसवें घर मैं बैठे हैं और दसवें घर के स्वामी सूर्य को पांचवीं दृष्टि से देख भी रहे हैं। यह राजयोग भी बहुत उच्च स्तर का है और किसी महानगर का महापौर बनाने के लिए पर्याप्त शक्ति देता है। इस कुंडली में शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा भी चल रही है।
जो दूसरी कुंडली कन्या राशि वाली है इसमें शनि की महादशा में मंगल की अंतर्दशा चल रही है। इसमें भी अनेक राजयोग आप देख सकते हैं। वर्तमान में जिस शनि की महादशा चल रही है वह शनि चतुर्थ स्थान अर्थात केंद्र स्थान का स्वामी होकर छठे घर में बैठा है और पंचम स्थान के स्वामी गुरु को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। इसके साथ ही मंगल एवं चंद्रमा भी एक दूसरे के आमने सामने बैठकर प्रबल राजयोग बना रहे हैं।
उदाहरण स्वरूप यहां यह दोनों कुंडली देने का आशय मेरा सिर्फ इतना ही है कि इस बार तमाम सारे नगर प्रमुख और निकायों के अध्यक्ष जो चुनकर आएंगे उनके ग्रहों की विशेषता भी कुछ इसी प्रकार होने की प्रबल संभावना बनती है। कह सकते हैं कि अनेक विजेताओं की कुंडलियां भी लगभग ऐसी ही या इससे मिलती-जुलती हो सकती हैं। जिन कुंडलियों के #राजयोग ज्यादा शक्तिशाली होंगे वही प्रत्याशी अंत में विजेता घोषित होगा।
Pramod Shukla