30/12/2016
उपयोगी बाते
1. पूजा में एक से अधिक दीपक जलाने
हो तो कभी भी दीपक से
दीपक नहीं जलाना चाहिए | जो ऐसा करते
है उन्हें अनेक बार परेशानियों का सामना करना पड़
सकता है |
अतः प्रत्येक दीपक माचिस की तीली से
ही जलाए |
2. चन्दन को घिस कर कभी भी तांबे के पात्र
में नहीं रखना चाहिए |
3. यदि आप शंख की पूजा करते है और उसमे
पानी भरना है तो कभी भी डुबाकर
नहीं भरना चाहिए | ऐसा करने से पूजा का कार्य
सिद्ध नहीं हो पाता है | शंख में
आचमनी द्वारा ही जल डाले | संकल्प के
लिए जिस ताम्बे या चांदी के चम्मच का उपयोग
किया जाता है
उसे ही आचमनी कहते है |
4. शंख को पृथ्वी पर नहीं रखना चाहिए |
पूजा में अगर शंख की पूजा करते है तो उसे अनाज
की ढेरी पर रखना चाहिए |घर के पूजा स्थान
पर रखना हो तो आसन पर स्थान दे |तभी शंख
की कृपा प्राप्त होगी |
5. प्रसाद बाँटते समय धयान रखे
की प्रसादजमीन पर ना गिरे |अगर गिरता है
तो उसे तुरंत उठा ले और उसे किसी सुरक्षित स्थान पर
रख दे |प्रसाद को जूठे हाथ से नहीं बाटना चाहिए और
ना ही ग्रहण करना चाहिए | हाथो को धोकर
ही प्रसाद बांटे एवं ग्रहण करे |
6. पूजा प्रारम्भ करने के पश्चात चाहे
कैसी भी स्थिति हो ,
कभी भी जोर से नहीं बोले ,
किसी पर क्रोध करना अथवा अपशब्द
कहना पूजा को खंडित कर देता है |
हल्दी का ये छोटा सा उपाय करने से कभी घर
नहीं आती गरीबी :
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स्वस्तिक का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है। हर
शुभ कार्य की शुरूआत स्वस्तिक बनाकर
ही की जाती है। यह मंगल
भावना एवं सुख सौभाग्य का प्रतीक है। ऋग्वेद में
स्वस्तिक के देवता सवृन्त का उल्लेख है। सवृन्त सूत्र के
अनुसार
इस देवता को मनोवांछित फलदाता सम्पूर्ण जगत
का कल्याण करने और
देवताओं को अमरत्व प्रदान करने वाला कहा गया है।
स्वस्तिक शब्द
को 'सु' औरं 'अस्ति' दोनों से मिलकर बना है। 'सु'
का अर्थ है शुभ
और 'अस्तिका अर्थ है- होना यानी जिस से 'शुभ हो',
'कल्याण हो वही स्वस्तिक है।
यही कारण है कि घर के वास्तु को ठीक
करने के लिए स्वस्तिक का उपयोग किया जाता है।
स्वस्तिक के चिह्न
को भाग्यवर्धक वस्तुओं में गिना जाता है। इसे बनाने से
घर
की नकारात्मक ऊर्जा बाहर
चली जाती है। घर में
किसी भी तरह का वास्तुदोष होने पर घर के
मुख्यद्वार के बाहरी हिस्से को धोएं और गोमूत्र
का छिड़काव कर। दरवाजे के दोनों और नियम से
हल्दी-
कुमकुम का स्वस्तिक बनाएं। यह प्रयोग नियमित रूप से
करने पर कई
तरह के वास्तुदोष अपने आप खत्म हो जाएंगे। साथ
ही, मां लक्ष्मी प्रसन्न
होंगी और घर में
कभी दरिद्रता नहीं आएगी।
कहा गया है....
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा: स्वस्ति न:
पूषा विश्ववेदा:।
स्वस्तिनस्ता रक्षो अरिष्टनेमि:
स्वस्ति नो बृहस्पर्तिदधातु।।
माना जाता है कि इस मंत्र में चार बार आए 'स्वस्ति'
शब्द के रूप में
चार बार कल्याण और शुभ की कामना से
श्रीगणेश के साथ इन्द्र, गरूड़, पूषा और
बृहस्पति का ध्यान और आवाहन किया गया है।
- इस मंगल-प्रतीक का गणेश की उपासना,
धन, वैभव और ऐश्वर्य
की देवी लक्ष्मी के साथ,
बही-खाते
की पूजा की परंपरा आदि में विशेष स्थान है।
चारों दिशाओं के अधिपति देवताओं, अग्नि, इन्द्र,
वरुण और सोम
की पूजा हेतु एवं सप्तऋषियों के आशीर्वाद
को पाने के लिए स्वस्तिक बनाया जाता है। यह
चारों दिशाओं और
जीवन चक्र का भी प्रतीक है।
शास्त्रों के मुताबिक स्वस्तिक परब्रह्म, विघ्रहर्ता व
मंगलमूर्ति भगवान श्रीगणेश का भी साकार रूप
है। स्वस्तिक का बायां हिस्सा 'गं' बीजमंत्र होता है,
जो भगवान श्रीगणेश का स्थान माना जाता है। इसमें
जो चार
बिंदियां होती है, उनमें गौरी,
पृथ्वी, कूर्म यानी कछुआ और अनन्त
देवताओं का वास माना जाता है।
इसी तरह वेद भी 'स्वस्तिक'
श्रीगणेश का स्वरूप होने की बात कहते
हैं। स्वस्तिक बनाने के धर्म दर्शन में व्यावहारिक नजरिए
से संकेत
यही है कि जहां माहौल और संबंधों में प्रेम,
प्रसन्नता, श्री, उत्साह, उल्लास, सौंदर्य व विश्वास
होता है, वहां शुभ, मंगल और कल्याण होता है
यानी श्री गणेश का वास होता है।
उनकी कृपा से अपार सुख और सौभाग्य प्राप्त
होता है।
- स्वस्तिक का आविष्कार आर्यों ने किया और पूरे
विश्व में यह फैल
गया। आज तक स्वस्तिक का प्रत्येक धर्म और संस्कृति में अलग-
अलग रूप में इस्तेमाल किया गया है। कुछ धर्म और
समाजों में
स्वस्तिक का गलत अर्थ लेकर उसका गलत जगहों पर
इस्तेमाल
किया तो कुछ ने उसके सकारात्मक पहलू को समझा।
स्वस्तिक को भारत में ही नहीं, दुनिया के
कई दूसरे देशों में विभिन्न स्वरूपों में देखा गया है।
जर्मनी, यूनान, अमेरिका, स्कैण्डिनेविया,
सिसली, स्पेन, सीरिया, तिब्बत,
चीन, साइप्रस और जापान, फ्रंस, रोम, मिस्र, ब्रिटेन,
आदि देशों में भी स्वस्तिक का प्रचलन
किसी न किसी रूप में मिलता है।
* तुलसी की है ये एक महिमा.....!
* तुलसी के निकट जिस मन्त्र-स्तोत्र आदि का जप-
पाठ
किया जाता है, वश सब अनंत गुना फल
देनेवाला होता है |
* प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत, दैत्य आदि सब
तुलसी के पौधे से दूर भागते है |
* ब्रह्महत्या आदि पाप तथा पाप और खोटे विचार से
उत्पन्न
होनेवाले रोग तुलसी के सामीप्य एवं सेवन से
नष्ट हो जाते है |
* तुलसी का पूजन, रोपण व धारण पाप को जलाता है
और
स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदायक है |
* श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक
पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है |
* जो चोटी में तुलसी स्थापित करके
प्राणों का परित्याग करता है, वह पापराशि से मुक्त
हो जाता है |
* तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट
हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य
की प्राप्ति होती है |
* तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त
हो जाता है |
* तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल जो अपने सिर पर
धारण करता है, उसे गंगास्नान और १० गोदान का फल
प्राप्त
होता है |
*आदिवासियों द्वारा शिवलिंगी के
बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ
पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाता है,
महिला को जल्द ही संतान सुख
की प्राप्ति होती है।
*औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में
थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में
लाभ होता है।
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के
अनुसार
तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए
तो त्वचा पर
किसी भी तरह के संक्रमण में आराम
मिलता है।
*किडनी की पथरी में
तुलसी की पत्तियों को उबालकर
बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन
करने से
पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
*दिल की बीमारी में यह वरदान
साबित होती है क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राल
को नियंत्रित करती है। जिन्हें हॄदयाघात हुआ हो,
उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से
करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के
पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राल
की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई
भी स्वस्थ वयक्ति सेवन में ला सकता है।
*इसकी पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में
नींबू का रस मिलायें और रात को चेहरे पर लगाये
तो झाईयां नहीं रहती,
फुंसियां ठीक होती है और चेहरे
की रंगत में निखार आता है।
*फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक
मिलाकर
पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में
आदिवासी हर्बल जानकार फ्लु के दौरान बुखार से
ग्रस्त
रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने
की सलाह देते हैं।
*माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। प्रतिदिन
दिन में
4-5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ
ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम
मिलने लगता है।
घर के माहौल को पवित्र बनाने के लिए शास्त्रों में एक
फायदेमंद उपाय
बताया गया है।
वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाए रखने के लिए घर में
शास्त्रोक्त
धुआं करना चाहिए। यह कोई सामान्य धुआं नहीं है।
इसके लिए निम्न सामग्री का उपयोग
किया जाता है। बाजार
से किसी भी पूजन
सामग्री की दुकान से लोबान, कपूर, गुगल,
देशी घी और चंदन लेकर आएं। प्रतिदिन घर
के मंदिर में भगवान की विधिवित पूजा-
आरती के बाद गाय के गोबर से बने कंडे या उपले
को जलाएं। अब थोड़ा लोबान, कपूर, गुगल,
देशी घी और चंदन उस पर रख दें। जब
धुआं होने लगे तब इस धुएं को पूरे घर में फैलाएं।
इस धुएं के प्रभाव से घर के वातावरण में मौजूद
सभी सुक्ष्म कीटाणु नष्ट हो जाएंगे,
हवा में पवित्र सुगंध फैल जाएगी। इसके अलावा घर
की सभी नेगेटिव
एनर्जी निष्क्रीय
हो जाएगी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़
जाएगा।
आपके आसपास का वातावरण पूरी तरह पवित्र और
शुद्ध हो जाएगा। प्रतिदिन ऐसा होने पर
सभी देवी-देवताओं की कृपा आप
पर बनी रहेगी।
जानिये महत्वपूर्ण बातें -
महत्वपूर्ण बातें -
[१] मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान
ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे |
[२] सूर्यास्त के समय
किसी को भी दूध,दही या प्याज
माँगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त
हो जाती है |
[३] छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर
ना धोएं..हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध
खराब होने
लगते हैं |
[४] फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन
उसके छिलके
कूडादान में ना डालें वल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से
लाभ होगा |
[५] माह में एक बार किसी भी दिन घर में
मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित
एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में
इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं
तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है
|
[६] माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान
जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन
नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा |
[७] रात्री में सोने से पहले रसोई में
बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र
मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में
बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के
मार्ग में बाधा नही आवेगी |
[८] वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई
भी पीली वस्तु अवश्य खाएं
हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन
हरी वस्तु खाएं लेकिन
पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख
समृद्धि बड़ेगी |
[९] रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से
निकाल
कर रख सकते है हानि से बचोगें |
[१०] स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग
किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व
परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात
मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और
सूखा तौलिया ही प्रयोग करें |
[११] कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ
घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश
की वृद्धि होगी |
ऐसे ही अनेक अपशकुन है जिनका हम ध्यान रखें
तो जीवन में
किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ेगा तथा सुख
समृद्धि बड़ेगी |
वास्तु टिप्स-
[१] जिस घर में
बांसुरी रखी होती है
वहां प्रेम और धन की कोई
कमी नहीं रहती है। घर
में बांसुरी ऐसे स्थान पर रखनी चाहिए
जहां से वह आसानी से नजर
आती रहे। किसी दीवार पर
भी सुंदर सी बांसुरी लगाई
जा सकती है। इससे घर
की सुंदरता भी आकर्षक
हो जाएगी।
[२] तुलसी का पौधा हमेशा घर के पूर्व दिशा या उत्तर
दिशा की ओर ही लगाना चाहिए, दक्षिण
दिशा में तुलसी कठोर यातना और कारागार का भय
देती है।
[३] फेंगशुई के अनुसार हंसों का जोड़ा शयनकक्ष में रखने
से
पति और पत्नी के बीच प्यार और
विश्वास में वृद्धि होती है।
[४] अगर पति-पत्नी में लगातार झगड़ा होता है
तो उन्हें वास्तु के हिसाब से अपने डबल-बेड पर
इकहरा गद्दा बिछाना चाहिए।
[५] कमरे में हर तरह के सामान को सलीके से
रखना चाहिए। इससे घर तो सुव्यवस्थित
रहता ही है, घर में खुशहाली और
शांति का माहौल भी बनता है।
[६] बेडरूम में पलंग के ठीक सामने
आईना होना अशुभ होता है। इससे
गृहस्वामी को अनिद्रा,
बेचैनी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
[७] ध्यान रखे कि कम से कम कीलें
दीवार में लगाई जाएं। यानी जितने
की जरूरत हो,
उतनी ही कीलें
लगाना श्रेयस्कर रहेगा। वास्तु के अनुसार
ज्यादा कीलें अशुभ्ा होती हैं।
इसी वजह से प्राचीन काल में लोग
लोहे के स्थायन पर
लकड़ी की कीलें इस्तेमाल में
लाते थे।
[८] डूबती नाव या जहाज अगर घर में
रखा हो तो अपने साथ आपका सौभाग्य भी डुबा ले
जाता है। घर में रखी डूबती नाव
की तस्वीर या कोई शोपीस
सीधा आपके घर के रिश्तों पर आघात करता है।
रिश्तों में डूबते मूल्यों का प्रतीक है यह चिह्न।
इसे अपने घरौंदे से दूर रखें।
[९] दक्षिण की दीवार पर दर्पण
कभी भी न लगाएं। दर्पण हमेशा पूर्व
या उत्तर की दीवार पर
ही लगाना चाहिए।
[१०] फटे-पुराने जूते-मौजे, छाते, अण्डर गारमेंट्स
आदि जितनी जल्दी हो सके घर से
बाहर फैंक दें अन्यथा घर में सकारात्मक
ऊर्जा का सर्वथा अभाव
रहेगा और व्यर्थ की परेशानियां घेरे
रहेंगी।
ऐसी जानकारी जो शायद आपने पहले
कभी
ही डाल
करे 9 आदतों मै सुधार , घर मे
होगी खुशिया अपार :--
१) - अगर आपको कहीं पर भी थूकने
की आदत है तो यह निश्चित है
कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल
भी जाता है
तो कभी टिकेगा ही इस लिये केवल पिक
दान मे में ही यह काम कर आया करें !
२) -जिन
लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन
वहीं उसी जगह पर छोड़ने
की आदत होती है
उनको सफलता कभी भी स्थायी
रूप से नहीं मिलती हे .!
बहुत मेहनत करनी पड़ती है और
ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.!
अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर
उनकी सही जगह पर रख आते हैं
तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं !
३) - जब भी हमारे घर पर कोई
भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम
करने वाला, उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहू का सम्मान करते हैं.!
जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को स्वच्छ
पानी हमेशा पिलाते हैं उनके घर में
कभी भी राहू का दुष्प्रभाव
नहीं पड़ता.!
४) - घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे
ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और
थोड़ी देखभाल की जरुरत
होती है.!
जिस घर में सुबह-शाम
पौधों को पानी दिया जाता है
तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए
परेशानियों से डटकर लड़ पाते हैं.!
जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन
लोगों को नसो की बीमारी ओर
परेशानियाँ जल्दी से नहीं पकड़
पातीं.!
५) - जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े
इधर-
उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से
लगाकर रखें,
आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी .
ओर शत्रु स्वयं ही पराजित होंगे !
६) - जो लोग जब भी सो कर उठते हे वे
अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर
हमेशा फैला हुआ होगा,
सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं,
तकिया कहीं, कम्बल कहीं ? उसपर
ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे तक फैला कर रखते
हैं ! ऐसे
लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित
नहीं रहती,
जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान
रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.! एसे
लोगों का राहू और शनि खराब होगा,
इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर
समेट दें.!
७) - पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त
ख़ास ध्यान देना चाहिए,
जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते
समय
अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें,
कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट
रुक कर मुँह और पैर धोयें.!
आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा,
दिमाग
की शक्ति बढेगी और क्रोध
धीरे-धीरे कम होने लगेगा.!
८) - रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर
धीरे-धीरे उस घर से
लक्ष्मी चली जाती है और
उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव
आने लगते
हैं.!
इसके विपरित घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं
तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.!
उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.!
हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक
माना गया है.!
ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और
घर
में रहने वाले
सदस्यों की भी तरक्की होती है.!
9) - निती सुबाह उठते
ही कयी लोग व्यर्थ के द्रश्य
ही प्रथम बार देख कर उठते हे जिन से उन
का दिन ठिक नही जाता, इस लिये
रोजना उठतेही अपने
दोनो हाथो की हथेलिया देखे और जमीन
को पेर पढ कर ही दिन की शुरुवात
करना चाहिये.