23/03/2026
सब कहते हैं
बेचारा गुलाब, कांटों से घिरा रहता है
और कांटो के बीच भी, मुस्काता रहता है।
ये कांटे ही हैं,
जो गुलाब को बचाए हुए हैं
ये कांटे ही हैं,
जो गुलाब को खिलाए हुए हैं।
मैंने कब गुलाब को,
आघात पहुँचाया है
कब गुलाब का साथ छोड़ा है,
या दिल तोड़ा है।
गुलाब की ओर बढ़ने वाले,
हाथों को ही घायल किया है
यदि कांटा न होता,
तो क्या गुलाब होता ?
वह तोड़ लिया जाता,
काट दिया जाता,
रौंद दिया जाता,
चबा लिया जाता
उसकी रूप माधुरी का,
उसकी मोहक स्मित का,
उसके सुन्दर अस्तित्व का,
किसी को भान भी न होता ।
गुलाब को इसका भान है,
तभी तो उसके चेहरे पर,
एक राजसी मुस्कान है,
कांटा ही गुलाब की पहचान है।......