20/08/2022
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बात आज ही की है, यानि 20 अगस्त की, किसी खरीददारी के काम से मैं मेरी मम्मी के साथ बाज़ार गया हुआ था। दोपहर का टाइम था, धूप भी तेज़ थी। करीब तीन घंटे में हमारी शॉपिंग पूरी हुई। वापिस घर आते वक़्त मैंने कुछ किलोमीटर धीरे से चलने के बाद गाड़ी की रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। कुछ ही सेकेंड्स हुए थे कि अचानक से रोड पर एक गड्ढे( मेरा ध्यान नही गया कि वहाँ वो बम्प है), से झटका लगने के कारण कार का टायर पंचर हो गया। मैंने तभी एकदम से गाड़ी रोकी और कार को चैक किया, टायर रीम टेढ़ा हो गया था। मैंने फिर पापा को फोन किया और बताया कि आने में थोड़ी देर और लगेगी। मैंने जैक लगाकर वो टायर बाहर निकाला, लेकिन दुर्भाग्यवश स्पेयर व्हील(स्टेपनि) में भी हवा नही थी। हम बीच सड़क पर धूप में खड़े थे और आस-पास कोई मेकैनिक नही था। दो-ढाई किलोमीटर पीछे एक भोजनालय के पास एक वर्कशॉप थी। मेरी मम्मी वहीं गाड़ी के पास रुकी और मैंने टायर कंधे पर उठाया और पैदल उस वर्कशॉप की ओर चल पड़ा। थोड़ी दूर चलते ही मुझे थकान महसूस हुई तो मैंने मेरे साइड से गुजरने वाले लोगों की तरफ लिफ्ट के लिए हाथ बढ़ाया, पर कोई नहीं रुका। इस बात का मुझे थोड़ा बुरा लगा क्योंकि मेरी माँ भी मेरी वजह से गर्मी में धूप में खड़ी थी, लेकिन मैं चलता रहा। कुछ आगे और चलने के बाद एक बाइक सवार भैया ने मुझे देखकर बाइक रोक दी और मुझे मेकैनिक तक छोड़ दिया। वहाँ से टायर ठीक करवाकर मैं फिर वापिस गाड़ी तक पहिये को कंधे पर लादे पैदल चला आ रहा हूँ। इन सब में एक घण्टा बीत चुका था। मैं वापिस पहूंचा तो देखा कि पापा भी घर पर काफी इंतज़ार करने के बाद वहीं गाड़ी के पास आ चुके थे। फिर हमने वो टायर वापिस कार में लगाया और फिर घर आये।
मेरा ये सब बात बताकर आपसे सहानुभूति लेने का कोई इरादा नही है बल्कि मैं आपको ये बताना चाहता हूँ कि इस पूरे वाकये से एक सीख लेने को मिली और वो ये थी कि, "आप चाहे कैसी भी मुसीबत में पड़े हों, आपको आपकी मदद खुद ही करनी पड़ेगी।"और दूसरी ये कि "अभी भी दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नही है।" क्योंकि ये बातें हम कहावतों में तो सुन लेते हैं मगर इनका अनुभव भी हमें अपनी जिंदगी में कभी न कभी लेने को ज़रूर मिलता है।
अगर आपको भी लगता है कि मेरा ये अनुभव इन सीख पर उचित बैठता है तो इस पोस्ट को और दोस्तों के साथ share ज़रूर करें।
🙏धन्यवाद🙏