17/05/2026
मक्का शरीफ मे हज्ज का उमराह का मौका जिवन मे ऐक बार नसीब होता है ज्यादातर मुसलमानो को वो खुश किस्मत है जिन्हे दुबारा नसीब हो
हज्ज मे जानेवालो वक्त को जाया मत करना जो मुबारक लम्हा मिले है इसका इस्तेमाल इबादतो मे करे खाने पीने रहेने के शिकवा शिकायत मे वक्त बरबाद न करे
30 दीन रहेना है ज्यादातर तवाफ करे...कुरान की तिलावत करे जिस मक्का मे कुरान नाजिल हुवा वो मुबारक शहेर मे कुरान की रोजाना तिलावत करे
कसरत से काबा शरीफ के सामने बैठकर दुरूद शरीफ पढे कल्मा का विर्द करे
अपने लिऐ अपनी औलाद के लिऐ मरहूम की मगफेरत के लिऐ तवाफ करे उमराह करे
इस शहेर की अजमतो को दिलो मे बसाये यही बा बरकत नूरे इमान से रोशनी देने वाले शहेर से दीने इस्लाम की पाकिजगी हक्कानीयत का ऐलान हुवा
ये मुबारक शहेर मे हमारे नबी रहेमतवाले ताजवाले जाहो जलाल वाले बडी शानवाले नबी मे खूब तकलीफे...मुसीबत....भूख..प्यासो को जेलकर जालिमो के जुल्म को बर्दाश्त करके दीन को फेलाया है उस मक्का शहेर मे आप सब को रहेना हज्ज करना नसीब हुवा है
इस मुबारक शहेर मे कितने सारे अंबिया ओने हाजरी दी है मीना की मुक्कदस वादी मस्जिदे खैफ मे सित्तेर अंबिया अलैहिस्सलाम आराम फरमाते है
मीना... मुजदलफा.... अरफात ये सब अल्लाह अज़्ज़वज़ल के फजल वाली जगहे है... अपने जिवन के यादगार मौको को अपने सीने बसाले
आप सब हमारे लिऐ भी दुआ करे हम भी दुआ करते है
अल्लाह अज़्ज़वज़ल आप सबको भी सहेत ओर तंदुरुस्ती के साथ हज्ज के तमाम अरकान मुकम्मल की अदायगी हो शैतान मरदुद के हर वसवसो से हिफाजत हो आमीन
🖋️ *खालक मोहमंद इकबाल अशरफी मोडासा*