Vedic Astro Vastu Shastra

Directions

Vedic Astro Vastu Shastra Nirav Bhatt is a new age Astro & Vastu Guru very well renowned in Mumbai. We offer consultancy ser

18/01/2026

🌹जीवन में सुख शांति के उपाय🌹

दोस्तों शादी दो आत्माओं का मिलन है इस पवित्र बंधन में स्त्री और पुरुष अपने अपने धर्म, समाज को साक्षी मानकर जीवन भर साथ निभाने के लिए बंधते है इसमें किसी भी प्रकार अवरोध ना केवल उन दोनों के लिए ही वरन उनके पूरे परिवार के लिए भी दुखद साबित होता है । इस संसार में हर व्यक्ति चाहता है की उसका दाम्पत्य जीवन बहुत ही सफल हो , पति पत्नी के मध्य बहुत ही मधुर सम्बन्ध बने रहे और हर मनुष्य के घर में उस परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और आपसी सौहार्द चिरकाल तक विद्यमान रहे , लेकिन आज की भागदौड़ , कड़ी प्रतिस्पर्धा भरी जिन्दगी में संबंधो के बीच दूरियां बडती जा रही है परिवार बिखर रहे है और जो साथ भी है उनमे कहीं न कहीं अहम् का भाव हावी होता जा रहा है, घर में माता - पिता / बड़े बुजुर्गो को उचित मान सम्मान नहीं मिल पा रहा है , और यह सत्य है की यदि पारिवारिक वातावरण अच्छा नहीं है, परिवार के सदस्यों में मतभेद है , कलह है तो व्यक्ति हमेशा मानसिक रूप से आशान्त ही रहेगा , पारिवारिक सुख के आभाव में उसका हर सुख अधुरा ही रहेगा । हम यहाँ पर कुछ ऐसे महत्वपूर्ण नियम / उपाय बता रहे है जिनका पालन करके हमारे परिवार हमारे दाम्पत्य जीवन में अवश्य ही खुशियाँ भरी रहेंगी ।

 कन्या के सुखी विवाहिक जीवन के लिए विवाह के पश्चात् जब कन्या की विदाई होने वाली हो तो किसी पीले रंग के धातु के लोटे में गंगाजल लेकर,उसमें थोडी सी पिसी हल्दी मिलाएं फिर एक तांबे का सिक्का उस लोटे में डालकर कन्या के ऊपर से 7 बार उतार कर उसके आगे गिरा दें, कन्या का विवाहिक जीवन सुखमय रहेगा ।

 यदि कन्या विवाह के चार दिन पूर्व साबुत हल्दी की ७ गांठे, पीतल के ३ सिक्के, थोडा सा केसर, गुड और चने की दाल इन सबको एक पीले वस्त्र में बाँधकर अपनी ससुराल की दिशा में उछाल दे तो उसको अपने पति और ससुराल के अन्य सभी सदस्यों का सदैव भरपूर प्यार मिलेगा।

 यदि कोई कन्या विदाई के बाद अपने ससुराल में प्रवेश करने से पहले चुपचाप मेहंदी में मिले हुए साबुत उडद गिरा दे और फिर प्रवेश करे तो उसका दाम्पत्य जीवन सदा सुखमय रहेगा , उसकी अपने पति और ससुराल के अन्य सदस्यों से सदैव अच्छे सम्बन्ध बने रहेंगे ।

 घर में रोज या सप्ताह में एक बार नमक मिले पानी का पोछा अवश्य लगवाये ।

 यदि घर में पत्नी अपने हाथों में कम से कम २ सोने की या पीली चूड़ी पहने तो भी दाम्पत्य जीवन में प्रेम और घर में सुख बना रहता है ।

 जहाँ तक संभव हो मंगलवार , ब्रहस्पतिवार और शनिवार को घर का कोई भी सदस्य न तो नाखून, बाल काटें , और ना ही शेव बनाये , इसके अतिरिक्त ब्रहस्पतिवार और शनिवार को घर में कपडे भी ना धोएं , नहाते हुए सर को गीला ना करें और बालों में तेल भी कतई ना लगायें ।

 यदि व्यक्ति सुबह नाश्ते में पत्नी या माँ के द्वारा केसर मिश्रित दूध का सेवन करें और काम में जाते समय नियमपूर्वक उनके हाथ से जबान में केसर लगाये और थोड़ी सी चीनी खाए तो घर में सदैव सुख शांति और आर्थिक सम्रद्धि बनी रहती है ।

 यदि घर में क्लेश रहता है घर के सदस्यों में मतभेद रहते है तो घर में आटा शनिवार को ही पिसवाएं या खरीदे और साथ ही १०० ग्राम पिसे काले चने भी लें जो उस आटे में मिला दें जल्दी ही स्थिति में सुधार होते हुए देखेंगे ।

 जब भी घर में खाने पीने की कोई वास्तु (मिठाई , फल आदि ) आयें तो सबसे पहले भगवान को भोग लगायें फिर घर के बड़े बुजुर्गो और बच्चों को देकर ही पति पत्नी उस वस्तु का सेवन करें , यह बहुत ही चमत्कारी और परखा हुआ उपाय है बुजुर्गो के आशीषों और बच्चों के खुशियों से घर में सर्वत्र हर्ष , शुभता का वातावरण बनेगा और उस घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं रहेगी ।

 यदि घर में पति पत्नी में मतभेद होते है तो 11 गोमती चक्रों को लाल रंग की सिंदूर की डिब्बी में रखकर घर में रखें तो उनके बीच के सभी प्रकार के क्लेश दूर हो जाएंगे।

 दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बनाये रखने के लिए नियमित रूप से केले व पीपल वृक्ष की सेवा करें, गुरूवार को केले व पीपल दोनों के वृक्ष को जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और शनिवार को पीपल में सरसों के तेल का दीपक जलाएं एवं मीठा जल अर्पित करें।

 दाम्पत्य जीवन में निरंतर प्रेम बनाये रखने के लिए पत्नी अपने पति द्वारा भोजन करने के बाद उसके बचे हुए भोजन में से निवाला अवश्य खाएं किंतु अपने बचे भोजन में से उसे न खाने दे, ऐसा करने से पति हमेशा अपनी पत्नी से प्रेम करता रहेगा और कभी भी किसी और स्त्री की और आकर्षित नहीं होगा , ऐसा कम से कम सप्ताह में एक बार तो अवश्य ही करे ।

 यदि घर की स्त्री प्रतिदिन प्रात: उठते ही सर्वप्रथम मुख्य द्वार पर अपने इष्ट देव का नाम लेते हुए सुख और सौभाग्य के प्रार्थना करते हुए एक लोटा जल डाले तो उसका अपने पति से और उस घर के सभी सदस्यों का आपस में हमेशा प्रेम बना रहता है और उस घर का आर्थिक पक्ष भी हमेशा मजबूत रहेगा ।

 यदि पति-पत्नी के बीच रोज ही झगडा होता है तो शयनकक्ष में रात में पति अपने तकिए के नीचे लाल सिंदूर और पत्नी अपने तकिए के नीचे कपूर की टिक्की रख दें। प्रातः काल पति आधा सिंदूर घर में कहीं गिरा दे और आधा पत्नी की मांग में भर दे और पत्नी कपूर को घर के बाहर जला दें , ऐसा किसी भी शुक्ल पक्ष में सोमवार से रविवार लगातार ७ दिनों तक और उसके बार जहाँ तक संभव हो रोज करें अगर रोज न भी हो सके तो सोमवार और मंगलवार दो दिन अवश्य ही करने की कोशिश करें , दोनों के बीच का क्लेश खत्म हो जायेगा ।

 नवमी के दिन श्वेतार्क यानि सफ़ेद मदार का पौधा लाकर घर में लगायें | दिवाली के दिन उस पौधे की अवश्य ही पूजा करें | सफ़ेद मदार के पौधे को घर में लगाने और उसकी पूजा से आपको जरुर लाभ होगा | इससे पति पत्नी के बीच प्यार भी बढ़ेगा |

 पत्नी तुलसी का पौधा लाकर घर में किसी ऊंचाई वाले स्थान पर लगायें | तुलसी जी को नित्य जल दें, सिन्दूर चढायें और संध्या के समय घी का दीपक जलाएं | इससे अखण्ड सौभाग्य प्राप्त होगा और दाम्पत्य प्रेम भी बढ़ेगा |

 पति-पत्नी में प्रेम बनाये रखे के लिए पत्नी बुधवार को तीन घंटे का मौन रखें, शुक्रवार को अपने हाथ से साबूदाने की खीर में मिश्री डाल कर बनाये और अपने पति और घर के बाकि सदस्यों को खाने के लिए दे तथा उस दिन इत्र का दान करें ,व अपने कक्ष में भी इत्र रखें, इससे भी प्रेम में अवश्य ही वृद्धि होती है । मजबूत रहेगा ।

🙏🏻*बच्चों की शिक्षा के सर्वोत्तम रुद्राक्ष*🙏🏻                    🌻छः मुखी रुद्राक्ष🌻🌹छः मुख वाले रूद्राक्ष पर छः धारियाँ...
14/10/2024

🙏🏻*बच्चों की शिक्षा के सर्वोत्तम रुद्राक्ष*🙏🏻

🌻छः मुखी रुद्राक्ष🌻

🌹छः मुख वाले रूद्राक्ष पर छः धारियाँ होती हैं।🌻

🌻छः मुख वाला रुद्राक्ष शिव जी के पुत्र कार्तिकेय की शक्ति का केन्द्र बिन्दु है।🌹

🌹यह विद्या,ज्ञान, बुद्धि को देने वाला है।🌻

🌻छः मुख वाला रुद्राक्ष पढ़ने वाले छात्रों, बौद्धिक कार्य करने वालो को बल देने वाला है।🌹

🌹इसको पहनने से मनुष्य वाक् पटु बनता है।🌻

🌻यह विद्या अध्ययन में अद्भुत शक्ति देता है।🌹

🌹छः मुख वाले रूद्राक्ष के विषय में कहा जाता है कि यह छः तरह की बुराइयों काम,क्रोध,लोभ,मोह,मत्सर,मद को जड़ से खत्म करता है।🌻

🌻इसके धारण करने से स्मरण शक्ति प्रबल होती है तथा बुद्धि का विकास तेजी से होता है।🌹

👉*व्यापार में आ रही बाधा को दूर करने के उपाय*〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️बुधवार के दिन भगवान गणेश के मंदिर जाएं, हरी दूब, ना...
28/06/2024

👉*व्यापार में आ रही बाधा को दूर करने के उपाय*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

बुधवार के दिन भगवान गणेश के मंदिर जाएं, हरी दूब, नारियल, पान, फल अर्पित करें, गणेश जी की आरती करें, काम में आ रही बाधा को दूर करने की प्रार्थना करें. इससे आपके काम बनने लगेंगे.

अगर दुकानदार का दुकान में मन नहीं लगता, गल्ले में बरकत नहीं होती, रूपया पैसा बराबर आता रहता है परन्तु बचत नहीं होती तो नित्य श्री सूक्त का पाठ अथवा लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। गल्ले में लाल कपड़ा बिछाकर श्री यंत्र, महालक्ष्मी तथा कुबेर यंत्र शुभ मुहूर्त में तीनों एक साथ स्थापित करना चाहिए।

घर के लिए तो बैठी हुई लक्ष्मी, सरस्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा अच्छी होती है, लेकिन व्यापारिक संस्थानों में लक्ष्मी जी, गणेश जी और सरस्वती की मूर्ति खड़ी हुई होनी चाहिए।

लक्ष्मी नारायण मंदिर में शुक्रवार के दिन गुड़, चना बांटने से व्यापार में वृद्धि मिलती है.

अगर बिजनेस में लगातार घाटा हो रहा है, तो किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के किसी भी दिन ऑफिस या कारखाना के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर गेहूं का आटा एक-एक मुट्ठी भरकर रख दें। इस उपाय को लगातार एक माह तक करें। ऐसे करने से व्यापार में लगातार लाभ मिलेगा।

रोजाना सुबह कौवे को रोटी खिलाएं। ऐसा करने से भी बिजनेस में तरक्की होगी।

रात को सोने से पहले एक बर्तन में जौ भरकर बेड के नीचे रख लें। अगले दिन सुबह किसी जरूरतमंद या गरीब को दे दें।

🙏*आचार्य निरव भट्ट*🙏

♦️ *जन्मकुंडली में विवाहविच्छेद और विच्छेद का समय*==================================आजकल कई जातको के वैवाहिक जीवन मे परे...
17/06/2024

♦️ *जन्मकुंडली में विवाहविच्छेद और विच्छेद का समय*
==================================
आजकल कई जातको के वैवाहिक जीवन मे परेशानिया इतनी बढ़ जाती है कि बात अलगाव तक आ जाती है।अब विवाह विच्छेद योग होंगे तब ही अलगाव हो सकता है अन्यथा नही साथ ही विवाह विच्छेद कब तक होगा, यह सब निर्भर करेगा पति-पत्नी की कुंडली के सातवें भाव(विवाह भाव) की स्थिति पर।सामान्य शब्दों में विवाह विच्छेद होना यह सही नही है इससे दो लोगो का साथ ही इन दो लोगो पति-पत्नी से जुड़े लोगों को नुकसान पहुचता है जैसे संतान आदि को।
लेकिन यदि विवाह विच्छेद ग्रहो के द्वारा निर्धारिक ही है तब उसमे इंसान की एक नही चलती और ग्रह नक्षत्र अपना काम करते ही है।
क्या स्थितियां योगो की होती है कि विवाह विच्छेद होता ही है और मुख्य प्रश्न है कब तक होगा❓👇🏼👇🏼
👉जब पति-पत्नी की कुंडली के सातवें भाव, सातवे भाव के स्वामी पर ज्यादा ही मात्रा में अशुभ ग्रहों या पाप ग्रहों जैसे शनि राहु केतु मंगल का प्रभाव होगा, या अस्त आदि ग्रहो का ज्यादा ही इन पाप ग्रहों के साथ प्रभाव युति या दृष्टि से पड़ता हो और शुभ ग्रहों , गुरु शुक्र बुध का प्रभाव सातवे भाव पर नही होगा तब तलाक होगा।ऐसी स्थिति में विवाह विच्छेद होने से कोई रोक नही सकता है।
अब कैसे इसे और आसान तरह से समझे👇🏼👇🏼
🔹अगर किसी जातक या जातिका की वृश्चिक लग्न की कुंडली बने तब यहाँ सातवे भाव का स्वामी शुक्र बनता है।अब यहाँ शुक्र पर शनि की दृष्टि पड़ती हो साथ ही सातवे भाव पर राहु केतु हो या मंगल हो या इनकी दृष्टि हो तब यहाँ, यह सातवे भाव स्वामी शुक्र पर शनि की दृष्टि और सातवें भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव विवाह विच्छेद कराएगा, यहाँ विवाह बच नही पाएगी।।
एक अन्य तरह से इस प्रकार से समझे 👇🏼👇🏼
🔹मकर लग्न में सातवें भाव का स्वामी चन्द्र बनता है अब चन्द्र अस्त होकर किसी भी एक जैसे शनि राहु केतु मंगल से पीड़ित हो दृष्टि से या इन पाप ग्रहों के साथ बैठकर और सातवें भाव मे कोई पाप ग्रह की दृष्टि हो या कोई पाप/क्रूर ग्रह शनि राहु केतु मंगल में से कोई बैठा हो तब यहाँ तलाक होगा, लेकिन ऐसी स्थिति में बृहस्पति या अन्य शुभ ग्रहों की दृष्टि कमजोर स्थिति में सातवें भाव पर हुई तब विवाह विच्छेद लंबे समय मे होगा, ऐसी स्थिति में शुभ ग्रह विवाह विच्छेद होने नही देगा जल्दी, पाप ग्रह विवाह चलने नही देगा।।
अब कब होगा विवाह विच्छेद समझते हैं 👇🏼👇🏼👇🏼
🔹जब भी सातवे भाव मे बैठे किसी अलगाब वादी ग्रह जैसे शनि राहु केतु या सप्तमेश(सातवे भाव के स्वामी) के साथ बैठे ग्रह या सप्तमेश की दशा में तलाक होगा, खासकर उसमे भी पाप या क्रूर ग्रह की दशा में विवाह विच्छेद होगा।
इसे इस प्रकार से समझते है👇🏼
🔹 जन्मकुंडली में कन्या लग्न में गुरु सातवे भाव का स्वामी होता है अब सातवे भाव मे राहु बेठा हो और सातवें भाव मे गुरु भी राहु के ही साथ हो और सातवें भाव+गुरु पर शनि की भी दृष्टि हो या सातवा भाव किसी अन्य तरह से दूषित हो तब यहाँ राहु की दशा लगते ही जो कि सातवे भाव मे सातवे भाव के स्वामी गुरु के साथ ही बैठा है विवाह विच्छेद करा देगा।।
इस तरह सातवे भाव संबंधी जब ग्रह दशाएं चलेगी इसमे भी अलगाववादी ग्रहो की दशाएं जैसे शनि राहु केतु मंगल या सप्तमेश इन ग्रहो के साथ हो तब सप्तमेश की दशा में तलाक हो जाएगा, किस महीने में हो सकता है इसके लिए प्रत्यंतर,दशा , प्राण दशा समयकाल बात देगी।।

🙏*आचार्य निरव भट्ट*🙏

08/05/2024

कैसे ज्ञात करें कि अपने वंश के कुलदेवता अथवा कुलदेवी कौन हैं ??

आज के समय में प्राय: देख जा रहा है कि लोगों को अपने कुलदेवता व कुलदेवी कौन हैं यह ज्ञात ही नहीं है। वर्षों से कुलदेवता व कुलदेवी को पूजा नहीं मिल रही है। घर-परिवार का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त हो जाने से अनेकानेक समस्याएं अनायास घेर रही हैं, नकारात्मक ऊर्जाओं की आवाजाही बिना रोक-टोक हो रही है, वर्षों से स्थान परिवर्तन के कारण पता ही नहीं है कि हमारे कुलदेवता व कुल देवी कौन है कैसे उनकी पूजा होती है कब उनकी पूजा होती है आदि।

यह ज्ञात करने के लिए एक प्रभावी प्रयोग है जिससे यह जाना जा सकता है कि आपके कुलदेवता कौन है यह एक साधारण किन्तु प्रभावी प्रयोग है जिससे आप अपने कुलदेवता अथवा देवी को जान सकते हैं।

🔘 प्रयोग को मंगलवार से शुरू करें और ११ मंगलवार तक करते रहें।

🔘 मंगलवार को सुबह स्नान आदि से स्वच्छ पवित्र हो अपने देवी देवता की पूजा करें।

🔘 फिर एक साबुत सुपारी लेकर उसे अपना कुलदेवता व कुलदेवी मानकर स्नान आदि करवाकर, उस पर मौली लपेटकर किसी पात्र में स्थापित करें।

🔘 इसके बाद आप अपनी भाषा में उनसे अनुरोध करें कि "हे कुल देवता मैं आपको जानना चाहता हूँ मेरे परिवार से आपका परिचय विस्मरण हो गया है हमारी गलतियों को क्षमा करते हुए हमें अपनी जानकारी दें इस हेतु में आपका यहाँ आह्वान करता हूँ, आप यहाँ स्थान ग्रहण करें और मेरी पूजा ग्रहण करते हुए अपने बारे में हमें बताएं इसके बाद उस सुपारी का पंचोपचार पूजन करें ।

🔘 अब रोज रात को उस सुपारी से प्रार्थना करें की हे कुल देवता व कुलदेवी में आपको जानना चाहता हूँ कृपा कर स्वप्न में मार्गदर्शन दीजिये।

🔘 फिर सुपारी को तकिये के नीचे रखकर सो जाइए।

🔘 सुबह उठाकर पुनः उसे पूजा स्थान पर स्थापित कर पंचोपचार पूजन करें।

🔘 यह क्रम प्रथम मंगलवार से ११ मंगलवार तक निरंतर रखें।

🔘 हर मंगलवार को व्रत रखें इस अवधि के दौरान शुद्धता पवित्रता व ब्रह्मचर्य का विशेष ध्यान रखें, यहाँ तक की बिस्तर और सोने का स्थान तक शुद्ध और पवित्र रखें।

🔘 ब्रह्मचर्य के साथ-साथ मांस-मदिरा से पूर्ण परहेज रखें।

🔘इस प्रयोग की अवधि के अन्दर आपको स्वप्न में आपके कुलदेवता व कुलदेवी की जानकारी मिल जायेगी, अगर स्वयं न समझ सकें तो योग्य जानकार से स्वप्न विश्लेषण करवाकर जान सकते हैं।

इस तरह वर्षों से भूली हुई कुलदेवता की समस्या हल हो जाएगी और पूजा और अर्ध्य देने पर आपके परिवार की बहुत सी समस्याएं समाप्त हो जायेंगी जीवन की बहुत समस्याओं से हम बच सकते हे यदि कुछ और बातों का हम पालन करें तो अपनी जन्म कुंडली में बुरे ग्रहो से भी मुक्त हो सकते हैं।

♦️ निम्न बातों का पालन अवश्य करें ........

👉1. किसी भी ख़ुशी के मौके पर व होली, दीपावली व दशहरे, शादी, जन्मदिन, पर्व आदि पर घर में पूर्ण स्वच्छता से भोजन तैयार करें और दो थाली भोजन एक में भगवान् का भोग लगाएं और दूसरी थाली से अपने पितरों का भोग लगाकर उचित दक्षिणा के साथ किसी सात्विक ब्राह्मण को दे।

👉2. अपने रस्म रिवाज अनुसार इन्ही अवसरों पर अपने कुल के देवी देवता का श्रद्धा पूर्वक पूजन और भोग सामग्री आदि दें।

👉3. अपने बुजुगों का कभी भी अपमान न करे बल्कि उनकी सेवा करें।

👉4. भूल से भी सर्प और कुत्ता जीव जंतुओं को ना मारे।

👉5. माह में एक बार परिवार सहित गऊ शाला में जाकर अपने हाथ से चारा पानी आदि दे।

👉6. गरीब और जरुरत मंद वृद्ध मजदूर कोड़ी दिव्यांग आदि लोगों की मदद करे।

👉7. हृदय से प्रभु को जितना समय हो याद करे और विचारवान बने चिंतन करे भजन सुमिरन करे।

👉8. अपनी पुरानी कुल परंपरा रस्म रिवाजो व जो बुजुर्गों द्वारा चली आ रही है उनका श्रद्धा पूर्वक पालन करे।

🙏*आचार्य निरव भट्ट*🙏

हनुमान चालीसा के सन्दर्भ में ,I*शास्त्रों अनुसार कलयुग में हनुमानजी की ही भक्ति को सबसे जरूरी, प्रथम और उत्तम बताया गया ...
31/08/2023

हनुमान चालीसा के सन्दर्भ में ,I
*शास्त्रों अनुसार कलयुग में हनुमानजी की ही भक्ति को सबसे जरूरी, प्रथम और उत्तम बताया गया है लेकिन अधिकतर जनता भटकी हुई है। वह ज्योतिष और तथाकथित बाबाओं, गुरुओं को ही अपना सबकुछ मानकर बैठी है। ऐसे भटके हुए लोगों को राम ही बचाने वाले हैं। आओ जानते हैं कि हनुमान चालीसा क्यों पढ़ते हैं?*

*🚩1. अदृश्य शक्तियों से रक्षा हेतु :-* हनुमान चालीसा का पाठ जहां हमें भूत-प्रेत जैसी न दिखने वाली आपदाओं से बचाती है, वहीं यह ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव से भी बचाती है। हनुमान चालीसा पढ़ते रहने से बुरी और नकरात्मक शक्ति का असर नहीं होता हैं।

*🚩2. घटना दुर्घटना से बचने हेतु :-* जो व्यक्ति‍ प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ता है उसके साथ कभी भी अचानक से होने वाली घटना और दुर्घटना नहीं होती है।

*🚩3. भय से मुक्ति हेतु :-* यदि आपको किसी भी प्रकार का जाना अनजाना भय है तो आपको हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करना चाहिए। यह जीवन को भयमुक्त बनाती है।

*🚩4. मानसिक शांति हेतु :-* यदि आप मानसिक अशांति झेल रहे हैं, कार्य की अधिकता से मन अस्थिर बना हुआ है, घर-परिवार की कोई समस्या सता रही है तो ऐसे में इसके पाठ से चमत्कारिक फल प्राप्त होता है, इसमें कोई शंका या संदेह नहीं है। मन के सभी विकार दूर होतें है और मन स्थिर बना होता है।

*🚩5. रोग से मुक्ति हेतु :-* हनुमान चालीसा पढ़ते रहने से जातक हर तरह के रोग से मुक्ति हो जाता है, बस मन में यह आस्था होना जरूरी है कि हनुमानजी मेरी सारी पीड़ा हर लेंगे।

*🚩6. संकटों से बचने के लिए :-* हनुमानजी संकट मोचन है। वे हर तरह के संकट से बचाते हैं। जीवन में किसी भी प्रकार का संकट आ गया है तो रोज 7 बार हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए।

*🚩7. बल, विद्या और बुद्धि हेतु :-* हनुमान चालीसा पढ़ते रहने से आदमी की बुद्धि जागृत हो जाती है। उसे सही गलत का ज्ञान होने लगता है, जिसके कारण वह अपने विवेक से काम करता है। इसी के साथ उसकी शारीरिक कमजोरी भी दूर होकर हनुमानजी उसे बल प्रदान करते हैं। व्यक्ति हर तरह की सांसारिक विद्या में पारंगत भी हो जाता है।

*🚩8. गृह कलेश से मुक्ति हेतु :-* हनुमान चालीसा पढ़ते रहने से घर में किसी भी प्रकार का कलेश नहीं होता है और सभी तरह के कलेश का नाश हो जाता है। सभी तरह की बाधाओं से भक्त को मुक्ति मिलती है।

*🚩9. शनि, राहु और केतु पीड़ा से मुक्ति :-* नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति पर शनि, राहु और केतु का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैया का असर भी नहीं होता है।

🙏*आचार्य निरव भट्ट *🙏

!!!!!!!  नवग्रह के अति सुलभ उपाय !!!!!!सूर्य को अर्घ्य देने से बेहतर हैउगते सूरज को जी-भर निहारनामोती पहनने से अच्छा है ...
18/11/2022

!!!!!!! नवग्रह के अति सुलभ उपाय !!!!!!

सूर्य को अर्घ्य देने से बेहतर है
उगते सूरज को जी-भर निहारना

मोती पहनने से अच्छा है
चांदनी ओढ़ के सोना
और गर हो सके
चंदा का चकोर ही हो जाना

मंगल दुरुस्त करना हो तो
खून की ज़रूरत की ख़बर लगते ही
दौड़ जाना रक्तदान के लिए अस्पताल की ओर,
और ध्यान रहे
किसी का खून बहाने से पहले
जान लेना उसके लहू का रंग

बुध की बेहतरी के लिए
ज़रूरी नहीं है गाय को देना हरा चारा
बस हरी घास पर नंगे पैर चल लेना कुछ देर

गुरु को मनाना हो
तो घूम आना अपने स्कूल या कॉलेज
रिटायरमेंट की दहलीज़ पर खड़े
किसी टीचर के चेहरे की मुस्कुराहट बन जाना

शुक्र की मेहरबानी चाहिए
तो औरतों के साथ तमीज़ से पेश आना
और हो सके तो उन्हें ज़रूर देना
उनके हक़ की इज्ज़त का वो हिस्सा
जिसका मिलना उन्हें सदियों से बाक़ी रहा है

शनि से रहमत चाहिए
तो बुजुर्गों,कमज़ोरों और मजदूरों पर
थोड़ा रहम करना

राहु पर काबू
रखना हो
तो काबू में रखना अपनी भूख,
हर एक तरह की भूख...
वजह उसका कभी पेट नहीं भरता
जो सिर्फ एक सिर है
आखिर उसका पेट भला भरेगा भी कैसे?

केतु से तो बिल्कुल भी मत डरना
वह तुमसे वो सब करवाएगा
जिससे तुम आजिज़ आ चुके हो
सो बस आजिज़ आ जाना

अपना सारा डर
और
सारे दुराग्रह झटक देना
नवग्रह खुद-ब-खुद बेहतर हो जाएँगे..

🙏*आचार्य निरव भट्ट *🙏

*स्वप्न फल विचार*1- सांप दिखाई देना- धन लाभ2- नदी देखना- सौभाग्य में वृद्धि3- नाच-गाना देखना- अशुभ समाचार मिलने के योग4-...
21/10/2022

*स्वप्न फल विचार*

1- सांप दिखाई देना- धन लाभ
2- नदी देखना- सौभाग्य में वृद्धि
3- नाच-गाना देखना- अशुभ समाचार मिलने के योग
4- नीलगाय देखना- भौतिक सुखों की प्राप्ति
5- नेवला देखना- शत्रुभय से मुक्ति
6- पगड़ी देखना- मान-सम्मान में वृद्धि
7- पूजा होते हुए देखना- किसी योजना का लाभ मिलना
8- फकीर को देखना- अत्यधिक शुभ फल
9- गाय का बछड़ा देखना- कोई अच्छी घटना होना
10- वसंत ऋतु देखना- सौभाग्य में वृद्धि
11- स्वयं की बहन को देखना- परिजनों में प्रेम बढऩा
12- बिल्वपत्र देखना- धन-धान्य में वृद्धि
13- भाई को देखना- नए मित्र बनना
14- भीख मांगना- धन हानि होना
15- शहद देखना- जीवन में अनुकूलता
16- स्वयं की मृत्यु देखना- भयंकर रोग से मुक्ति
17- रुद्राक्ष देखना- शुभ समाचार मिलना
18- पैसा दिखाई- देना धन लाभ
19- स्वर्ग देखना- भौतिक सुखों में वृद्धि
20- पत्नी को देखना- दांपत्य में प्रेम बढ़ना
21- स्वस्तिक दिखाई देना- धन लाभ होना
22- हथकड़ी दिखाई देना- भविष्य में भारी संकट
23- मां सरस्वती के दर्शन- बुद्धि में वृद्धि
24- कबूतर दिखाई देना- रोग से छुटकारा
25- कोयल देखना- उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
26- अजगर दिखाई देना- व्यापार में हानि
27- कौआ दिखाई देना- बुरी सूचना मिलना
28- छिपकली दिखाई देना- घर में चोरी होना
29- चिडिय़ा दिखाई देना- नौकरी में पदोन्नति
30- तोता दिखाई देना- सौभाग्य में वृद्धि
31- भोजन की थाली देखना- धनहानि के योग
32- इलाइची देखना- मान-सम्मान की प्राप्ति
33- खाली थाली देखना- धन प्राप्ति के योग
34- गुड़ खाते हुए देखना- अच्छा समय आने के संकेत
35- शेर दिखाई देना- शत्रुओं पर विजय
36- हाथी दिखाई देना- ऐेश्वर्य की प्राप्ति
37- कन्या को घर में आते देखना- मां लक्ष्मी की कृपा मिलना
38- सफेद बिल्ली देखना- धन की हानि
39- दूध देती भैंस देखना- उत्तम अन्न लाभ के योग
40- चोंच वाला पक्षी देखना- व्यवसाय में लाभ
41- स्वयं को दिवालिया घोषित करना- व्यवसाय चौपट होना
42- चिडिय़ा को रोते देखता- धन-संपत्ति नष्ट होना
43- चावल देखना- किसी से शत्रुता समाप्त होना
44- चांदी देखना- धन लाभ होना
45- दलदल देखना- चिंताएं बढऩा
46- कैंची देखना- घर में कलह होना
47- सुपारी देखना- रोग से मुक्ति
48- लाठी देखना- यश बढऩा
49- खाली बैलगाड़ी देखना- नुकसान होना
50- खेत में पके गेहूं देखना- धन लाभ होना
51- किसी रिश्तेदार को देखना- उत्तम समय की शुरुआत
52- तारामंडल देखना- सौभाग्य की वृद्धि
53- ताश देखना- समस्या में वृद्धि
54- तीर दिखाई- देना लक्ष्य की ओर बढऩा
55- सूखी घास देखना- जीवन में समस्या
56- भगवान शिव को देखना- विपत्तियों का नाश
57- त्रिशूल देखना- शत्रुओं से मुक्ति
58- दंपत्ति को देखना- दांपत्य जीवन में अनुकूलता
59- शत्रु देखना- उत्तम धनलाभ
60- दूध देखना- आर्थिक उन्नति
61- धनवान व्यक्ति देखना- धन प्राप्ति के योग
62- दियासलाई जलाना- धन की प्राप्ति
63- सूखा जंगल देखना- परेशानी होना
64- मुर्दा देखना- बीमारी दूर होना
65- आभूषण देखना- कोई कार्य पूर्ण होना
66- जामुन खाना- कोई समस्या दूर होना
67- जुआ खेलना- व्यापार में लाभ
68- धन उधार देना- अत्यधिक धन की प्राप्ति
69- चंद्रमा देखना- सम्मान मिलना
70- चील देखना- शत्रुओं से हानि
71- फल-फूल खाना- धन लाभ होना
72- सोना मिलना- धन हानि होना
73- शरीर का कोई अंग कटा हुआ देखना- किसी परिजन की मृत्यु के योग
74- कौआ देखना- किसी की मृत्यु का समाचार मिलना
75- धुआं देखना- व्यापार में हानि
76- चश्मा लगाना- ज्ञान में बढ़ोत्तरी
77- भूकंप देखना- संतान को कष्ट
78- रोटी खाना- धन लाभ और राजयोग
79- पेड़ से गिरता हुआ देखना किसी रोग से मृत्यु होना
80- श्मशान में शराब पीना- शीघ्र मृत्यु होना
81- रुई देखना- निरोग होने के योग
82- कुत्ता देखना- पुराने मित्र से मिलन
83- सफेद फूल देखना- किसी समस्या से छुटकारा
84- उल्लू देखना- धन हानि होना
85- सफेद सांप काटना- धन प्राप्ति
86- लाल फूल देखना- भाग्य चमकना
87- नदी का पानी पीना- सरकार से लाभ
88- धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना- यश में वृद्धि व पदोन्नति
89- कोयला देखना- व्यर्थ विवाद में फंसना
90- जमीन पर बिस्तर लगाना- दीर्घायु और सुख में वृद्धि
91- घर बनाना- प्रसिद्धि मिलना
92- घोड़ा देखना- संकट दूर होना
93- घास का मैदान देखना- धन लाभ के योग
94- दीवार में कील ठोकना- किसी बुजुर्ग व्यक्ति से लाभ
95- दीवार देखना- सम्मान बढऩा
96- बाजार देखना- दरिद्रता दूर होना
97- मृत व्यक्ति को पुकारना- विपत्ति एवं दुख मिलना
98- मृत व्यक्ति से बात करना- मनचाही इच्छा पूरी होना

🙏*आचार्य निरव भट्ट *🙏

*वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं*१. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की प...
21/10/2022

*वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं*

१. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।
२. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।
३. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
४. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
५. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
६. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
७. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।
८. कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।
९. देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
९. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
१०. भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
११. भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
१२. लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
१३. हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें। समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं। पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
१४. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
१५. जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
१६. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।
१७. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।
१८. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
१९. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
२०. संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
२१. दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
२२. यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।

🙏*आचार्य निरव भट्ट *🙏

केसर के तिलक का महत्व एव लाभ -सनातनी संस्कृति में तिलक का बहुत महत्व माना जाता है। कोई धार्मिक कार्य या पूजा-पाठ में सबस...
21/10/2022

केसर के तिलक का महत्व एव लाभ -

सनातनी संस्कृति में तिलक का बहुत महत्व माना जाता है। कोई धार्मिक कार्य या पूजा-पाठ में सबसे पहले सबको तिलक लगाया जाता है। यही नही जब हम कभी किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं तब भी सर्वप्रथम हमें तिलक लगाया जाता है। सनातनी संस्कृति व शास्त्रों में तिलक को मंगल व शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जब भी कोई व्यक्ति शुभ काम के लिए जाता है तो उसके मस्तक पर तिलक लगाकर उसे विदा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं तिलक आपकी कई मनोकामनाएं भी पूरी करता है।

शास्त्रों में तिलक के संबंध में विस्तार से बताया गया है। अलग-अलग पदार्थों के तिलक करने से अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति होती है। चंदन, अष्टगंध, कुमकुम, केसर आदि अनेक पदार्थ हैं जिनके तिलक करने से कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं। यहां तक कि ग्रहों के दुष्प्रभाव भी विशेष प्रकार के तिलक से दूर किए जा सकते हैं।

तिलक का मुख्य स्थान मस्तक पर दोनों भौ के बीच में होता है, क्योंकि इस स्थान पर सात चक्रों में से एक आज्ञा चक्र होता है। शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन तिलक लगाने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति को ज्ञान, समय से परे देखने की शक्ति, आकर्षण प्रभाव और उर्जा प्रदान करता है। इस स्थान पर अलग-अलग पदार्थों के तिलक लगाने का अलग-अलग महत्व है। इनमें सबसे अधिक चमत्कारी और तेज प्रभाव दिखाने वाला पदार्थ केसर है। केसर का तिलक करने से कई कामनाओं की पूर्ति की जा सकती है।

दांपत्य में कलह खत्म करने के लिए -

जिन लोगों का दांपत्य जीवन कलहपूर्ण हो उन्हें केसर मिश्रित दूध से शिव का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही अपने मस्तक, गले और नाभि पर केसर कर तिलक करें। यदि लगातार तीन महीने तक यह प्रयोग किया जाए तो दांपत्य जीवन प्रेम से भर जाता है।

मांगलिक दोष दूर करने के लिए -

जिस किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मांगलीक दोष होता है ऐसे व्यक्ति को दोष दूर करने के लिए हनुमानजी को लाल चंदन और केसर मिश्रित तिलक लगाना चाहिए। इससे काफी फायदा मिलता है।

सफलता और आरोग्य प्राप्त करने के लिए -

जो व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, आकर्षक व्यक्तित्व, सौंदर्य, धन, संपदा, आयु, आरोग्य प्राप्त करना चाहता है उसे प्रतिदिन अपने माथे पर केसर का तिलक करना चाहिए। केसर का तिलक शिव, विष्णु, गणेश और लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। शिव से साहस, शांति, लंबी आयु और आरोग्यता मिलती है। गणेश से ज्ञान, लक्ष्मी से धन, वैभव, आकर्षण और विष्णु से भौतिक पदार्थों की प्राप्ति होती है।

आकर्षक प्रभाव पाने के लिए -

केसर में जबर्दस्त आकर्षण प्रभाव होता है। प्रतिदिन केसर का तिलक लगाने से व्यक्ति में आकर्षण प्रभाव पैदा होता है और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मोहित करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।

केसर के अन्य प्रयोग और लाभ -

1 जिन स्त्रियों को शुक्र से संबंधित समस्या है, जैसे पति से अनबन, परिवार में लड़ाई झगड़े, मान-सम्मान की कमी हो वे किसी महिला या कन्या को मेकअप किट के साथ केसर दान करें।

2 घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है। पैसे की बचत नहीं होती है तो नवरात्रि या किसी भी शुभ दिन सात सफेद कौडि़यों को केसर से रंगकर उन्हें लाल कपड़े में बांधें और श्रीसूक्त के सात बार पाठ करें। अब इस पोटली को अपनी तिजोरी में रखें। जल्द ही धनागम होने लगेगा।

3 अपने व्यापार या कामकाज से जुड़े दस्तावेज जैसे बही-खातों, तिजोरी आदि जगह केसर की स्याही का छिड़काव करने से व्यापार खूब फलता है।

4 मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए एक सफेद कपड़े को केसर की स्याही से रंगें। अब इस कपड़े को अपनी तिजोरी या दुकान आदि के गल्ले में बिछाएं और पैसा इसी कपड़े पर रखें। यह स्थान पवित्र बना रहे इसका खास ध्यान रखें। ऐसा करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है और पैसे की आवक अच्छी होती है।

5 चतुर्दशी और अमावस्या के दिन घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण में केसर की धूप देने के पितृ प्रसन्न होते हैं। इससे पितृदोष शांत होता है और व्यक्ति के जीवन में तरक्की होने लगती है।

🙏*आचार्य निरव भट्ट *🙏

Address

Mumbai

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vedic Astro Vastu Shastra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share