12/05/2024
माँ !!!!!
एक अक्षर पूरा ब्राह्मण !!
तेरी मेरी हर बात !
तेरे साथ वो सुबह वाली चाय !!!
बिना कुछ कहे तू बहुत कुछ समझाए !!!
जो हर ग़म मेरा अपनाए , तेरी दुआओ से हासिल सारी दुनिया !
जो कुछ भी मुझमें बाक़ी वो बस तेरी ही ख़ूबियाँ !!
बस अब हर बात में तू ही याद आये ,
मेरी आँखों की नमी में तेरा हाथ मेरे माथे पे सहलाये अब कोई नई ऐसा जो ये ख़ालीपन भर पाए !!!
माँ !!!
बस एक अक्षर पूरा ब्राह्मण सजाये !!
तूलिका विशाल !!!!