Ilam's Organic Green Tea

Ilam's Organic Green Tea In the himalayan foothills on high altitude of around 6500ft.

This Ilam's oraganic green tea approve by NASA comes from Sakhejung village locality where it grows on the finest tea palnt (cameillia sinesis) in the world.That is situated in the Ilam distt.

कृत्या गुटिका               अदभुत, दिव्य, चेतन्य    संसार की सबसे ज़्यादा शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र से भी ज़्यादा तीव्र मंत्र...
31/03/2026

कृत्या गुटिका
अदभुत, दिव्य, चेतन्य
संसार की सबसे ज़्यादा शक्तिशाली
ब्रह्मास्त्र से भी ज़्यादा तीव्र मंत्रों से सिद्ध,
अगर कृत्या गुटिका को धारण करके इस मंत्र का उपयोग किया तो ब्रह्मांड को भी आप मुट्ठी में कर सकते है !

जिस पर गुजरती है वही जानते है कि कृत्या क्या होती है !
आज भी हज़ारों संत महात्मा, व्यापारी, अधिकारी, उद्योगपति, नेता अभिनेता कृत्या के प्रयोग से पीड़ित है !

कृत्या गुटिका अत्यंत ही शक्तिशाली, मारक क्षमता लिए दुर्लभ गुटिका है ! कृत्या गुटिका का प्रभाव विध्वंसक और रक्षात्मक दोनों ही है ! शत्रु मारण प्रयोग से रक्षा के लिए इसे अमोघ कवच माना गया है !
कृत्या गुटिका का प्रयोग आद्रपटी मारण तंत्र, पुतली विद्या, चकुतरा, शमशान तंत्र, काली साबर प्रयोग आदि में किया जाता है !

'घूंकार रूपं धं धं धनेधां क्लीं क्लीं ह्रीं वां हलवं हलैव। प्रां प्रू पदे पूर्व सदैव कृत्यां क्रां क्रीं कृते कुर्व कदैव कृत्यां !!"

कृत्या संसार की प्रबलतम "महाशक्ति" है !
यह मानव शरीर से उत्पन्न होती है ! मानव शरीर पंच तत्वों से निर्मित होता है, पर कृत्या का निर्माण मात्र तीन तत्वों से ही हुआ है ! इसलिए कृत्या शक्ति अप्रतिम है, कृत्या का प्रहार वेग मन से भी ज्यादा तीव्र है ! शास्त्रों के अनुसार जब भगवान् शिव की पत्नी सती अग्नि में जल गयी थी, तो राजा दक्ष को नष्ट करने के लिए, भगवान शिव ने क्रोध में अपनी जटा से कृत्या (वीरभद्र) का निर्माण कर दक्ष का सर काट दिया था ! उस समय क्रोधित कृत्या के सारे शरीर से आग की लपटें निकल रही थी ! जब सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की, तब वह कृत्या शान्त हुई !

कृत्या साथना क्या है?

यदि तीव्र महाशक्ति 'कृत्या' किसी साधक को सिद्ध हो जाए, तो प्रबल से प्रबल शत्रु उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता ! कृत्या सिद्ध करने पर साधक सर्वशक्ति सम्पन्न बन जाता है !
कृत्या अपने आपमें पूर्णतः मारण शक्ति है ! यदि एक बार इसका प्रयोग कर दिया जाए, तो सामने वाले व्यक्ति के साथ ही साथ उसके आस-पास के व्यक्ति भी नष्ट हो जाते हैं, चाहे वह कितना ही बड़ा सिद्ध योगी या तांत्रिक ही क्यूँ न हो !

तंत्र शास्त्र के अनुसार कृत्या चौंसठ प्रकार की होती है ! इसमें संहारिणी कृत्या अत्यंत ही उम्र और विनाशकारी मानी गयी है ! यदि कोई साधक कृत्या प्रयोग कर दें, तो सामने वाले का बचना तभी सम्भव है, जब वह भी संहारिणीं कृत्या प्रयोग का जानकर हो ! कृत्या शक्ति का उद्देश्य मारण और रक्षा करना दोनों ही होता है !
यदि किसी शत्रु ने आपके तथा आपके किसी सदस्य पर मारण तंत्र का प्रयोग कर दिया है,
तो कृत्या गुटिका के धारण से पूर्ण रक्षा प्राप्त होती है ! ऐसे साधक व्यक्ति पर किसी भी तरह का कोई तंत्र, कोई मंत्र, कोई यंत्र काम नहीं करता !

कृत्या का प्रभाव अत्यंत ही विस्फोटक है ! कृत्या मंत्र सामान्य मंत्रों से लाख गुना ज्यादा तीव्रता से काम करता है !
यह परमाणु बम जितना घातक होता है ! इस महाशक्ति में "1000 दुर्गा, 52 भैरव, 64 योगिनी" के जितना बल होता है ! कृत्या कुछ ही क्षण मात्र में हिमालय जैसे बलशाली पहाड़ को राख बना सकती है ! कृत्या की शक्ति के सामने बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों, तांत्रिकों, अघोरियों का तंत्र भी काम करना बंद कर देता है !

इसलिए उच्चकोटि के साधक कृत्या गुटिका को गले में धारण किये हुए रहते है !

कृत्या गुटिका कैसे सिद्ध होती है?

पाखंड से बचें, सोच समझ कर ही योग्य तांत्रिक से कृत्या गुटिका का निर्माण करायें,
कृत्या गुटिका कोई सामान्य गुटिका नहीं है !
यह गुटिका शत्रुओं को पूर्णतया नष्ट करने और उसे मिट्टी में मिला देने में समर्थ है !
कृत्या गुटिका को कालरात्रि पर 24 लाख दुर्गा मंत्र, सवा लाख भैरव मंत्र, सवा लाख आद्रपति काली मंत्र से सिद्ध की जाती है,
इस क्रिया को सिद्ध लोक के सिद्ध साधक ही संपन्न करते है !
पूर्व मैं नाथ सम्प्रदाय के कुछ श्रेष्ठ साधक ही येसी क्रियाएं जानते थे लेकिन, अब कुछ गंजेड़ी, भगड़ी, भिखारियों ने नाथ सम्प्रदाय को बदनाम कर दिया है !

सिद्ध कृत्या गुटिका प्रामाणिक एवं पूर्ण सिद्ध की हुई आप निसंकोच हम से प्राप्त कर सकते है
एवं प्राप्त कर कृत्या तंत्र में सीधा ही उपयोग किया जा सकता है !
यदि प्रयोग और साधना की पूरी जानकारी न हो, तो नि:संकोच जब गुटिका प्राप्त करले तो मुझ से ले सकते है , जिस पर अनेक सधनायें एवं प्रयोग किये जाते है !

रक्षा के लिए नीचे दी हुई विधि से आप कृत्या गुटिका को उपयोग कर सकते है।

कृत्या गुटिका का प्रयोग कैसे करें?

किसी भी शनिवार की रात्रि 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच स्नान आदि करके, काले ऊनि आसन पर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाए, अपने सामने भगवान शिव और माँ काली की मूर्ति या चित्र स्थापित करें,

सामने एक थाली में काजल से अपने शत्रु का नाम लिखें,
नाम के उपर काली मिर्च की ढेरी बनाये, उस ढेरी पर कृत्या गुटिका को स्थापित करें, सामने शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाएं, भगवान शिव से अपने प्राणों की रक्षा के लिए मन ही मन प्रार्थना करें !
इसके बाद कृत्या मंत्र की संहारणी या सर्प अस्तियो की माला से मात्र 11 माला का जाप कृत्या माला सें करें !

गुटिका धारण मंत्र -
Note- ( मंत्र गोपनीय रखा जाता है, गुटिका के साथ भेज दिया जायेगा )

जाप के बाद गुटिका के नीचे रखी काली मिर्च को अपने शिर के उपर से इंटिकलोक' उल्टा 8 बार घुमा कर कपूर के साथ जला दें, इसके बाद कृत्या गुटिका को अपने गले में धारण कर कर ले,
दूसरे दिन से कृत्या मन्त्र की 3 माला का जाप 27 दिनों तक करें !

कृत्या गुटिका मन्त्रः

नोट- ( मंत्र गोपनीय रखा जाता है, गुटिका के साथ भेज दिया जायेगा )

कृत्या गुटिका के लाभः

1, यदि किसी शत्रु ने आपके उपर मारण तंत्र का प्रयोग कर दिया है, तो कृत्या गुटिका के धारण से पूर्ण रक्षा होती है ! ऐसे साधक पर किसी भी तरह का कोई मंत्र, कोई तंत्र, कोई यंत्र काम नहीं करता !

2, कृत्या गुटिका अत्यंत घातक है, जो रक्षात्मक, विध्वंसक दोनों रूपों में समान रूप से कार्य करती है !
अगर आप ने कृत्या गुटिका धारण की हुई है,
उस व्यक्ति पर अगर किसी भी तांत्रिक या तांत्रिक से तंत्र करवाने वाले व्यक्ति का वंश नष्ट हो जायेगा !

3, इस कृत्या गुटिका के गले में होते हुए बड़े से बड़ा तांत्रिक भी कुछ नही उखाड़ सकता !

4, घर की रक्षा के लिए, कृत्या गुटिका को घर के मुख्य द्वार पर लगाना चाहियें, जिससे सभी तरह के तंत्र-मंत्र से आपका घर और घर के सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित रहे !

5, कृत्या गुटिका को गले में धारण करने से तन्त्र दोष, पितृ दोष, ग्रह दोष आदि तुरंत शांत हो जाते है !

6, इस गुटिका को भूमि में दबाने से सभी प्रकार का वास्तु दोष शांत हो जाता है, यदि कृत्या गुटिका दबा नहीं सकते, तो घर के दक्षिण दिशा में इस गुटिका को, लाल वस्त्र में बांध कर किसी एकांत स्थान पर रख सकते !

7, कृत्या गुटिका के प्रयोग से खोया हुआ सम्मान, संपत्ति, पद-प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त होने लगती है !

Note- शत्रु की फोटो पर, कृत्या गुटिका को काले कपड़े में बांध कर पीपल के नीचे दबाने से शत्रु पूर्णतया नष्ट हो जाता है, वह अपने जीवन में किसी लायक नहीं रहता उसकी गति-मति बुद्धि सब कुछ बर्बाद हो जाता है !
इस गुटिका की नित्य पूजा करने से घर सभी प्रकार से सुरक्षित रहता है, उसके घर पर तन्त्र,चोर और शत्रु आदि का भय नहीं रहता !

इस गुटिका कवच के धारण किये व्यक्ति का शत्रु, कुछ नहीं बिगाड़ सकते, ऐसे शत्रुओं के प्लान रखे के रखे रह जाते है !

*मुक़दमों में सफलता पाने के लिए और शत्रुओं को पराजित करने के लिए इससे बड़ा कोई उपाय पूरे विश्व में नहीं है*!

कृत्या शक्ति का साधक जिस रूप में आव्हान करता है, कृत्या साधक की उसी आज्ञा का पालन करती है !

कृत्या गुटिका के सावधानियाँ
कृत्या गुटिका की पूजा-साधना के समय नशा व तामसिक भोजन के सेवन से दूर रहे !
कृत्या गुटिका को गंदे हाथों से न छुएं

कृत्या साधना और तंत्र प्रयोग किसी अच्छे गुरु के निर्देशन में ही करें !
समाज के हित के लिए, कृत्या गुटिका का प्रयोग करें, जिज्ञासा - अज्ञानता वश किसी पर भी कृत्या गुटिका प्रयोग नही करें ,
याद रखें जो आज मित्र है, वही शत्रु होता है, कल वापस मित्र भी हो सकता है !
कृत्या का किया गया प्रयोग कभी भी खाली नही जाता !
अगर आप किसी भी व्यक्ति पर वे-वजह कृत्या गुटिका का प्रयोग करते हो तो हानि होती है !

मंत्र सिद्ध प्राणप्रतिष्ठा कृत्या गुटिका एवं संहारणी माला मात्र - 23000/Rs

जिसको भी चाहिये शीघ्र संपर्क करें
Calling- 6375304953
Watsup-9414163286

हिमालय का सिद्धयोगी मंत्र मार्तण्ड Dr Balveer Singh Rajawat

'चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025'            को कीजिये (सर्वाबाधा निवारक, अखंड लक्ष्मी दायक एवं श्रेष्ठमय जीवन प्राप्ति शनि सा...
04/09/2025

'चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025'
को कीजिये
(सर्वाबाधा निवारक, अखंड लक्ष्मी दायक एवं श्रेष्ठमय जीवन प्राप्ति शनि साधना श्री शनि साधना)

आप के जीवन निर्माण के लिए मिल रही है, 2 साधनायें

शक्तिपात युक्त मात्र 30-30 मिनीट

50 साल बाद चंद्र ग्रहण पर शनि देव बना रहे दुर्लभ संयोग,
शुरू होगा गोल्डन टाइम, करियर और कारोबार में तरक्की के योग
इस दुर्लभ संयोग से भाग्य चमक सकता है तो अवश्य कीजिये ये साधनायें,

यह चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को रात 10.58 बजे से देर रात 01.26 बजे तक रहेगा. ऐसे में चंद्र ग्रहण का सूतक दोपहर 12.57 बजे शुरू हो जाएगा, इस दौरान शाम के वक्त एक घड़ी ऐसी भी आएगी, जिसमें सूतक ज्यादा प्रभावशाली होगा !

'श्रेष्ठमय जीवन प्राप्ति शनि साधना'

शनि ग्रह सूर्य पुत्र है और सदा वक्र भाव से गतिशील रहता है ! मनुष्य जीवन पर इसका प्रभाव सर्वाधिक होता है ! शनि ग्रह अन्य सभी ग्रहों से तेजस्वी ग्रह स्वरूप में है ! क्योंकि यह तामस स्वभाव वाला ग्रह है ! सामान्यतः यह माना जाता है कि यह चिंता कारक ग्रह है ! वास्तव में शनि चिंतन कारक ग्रह है जो कि मनुष्य को हर समय सही सोच के लिय विवश करता रहता है !
मनुष्य जीवन में सबसे अधिक चिंता का कारण आयु, मृत्यु, धन हानि, घाटा, मुकदमा, शत्रुता, महामारी जैसी विषम स्थितियां हैं !
ऐसी कुस्थितियां ग्रहों के प्रतिकूल होने के फलस्वरूप प्राप्त होती हैं ! जबकि शनि ग्रह चतुराई, धूर्तता, लोहा, तिल, तेल, हिंसा आदि का भी कारक ग्रह है ! इसलिये शनि ग्रह की शांति सभी मनुष्य चाहते हैं ! शनि चिंता प्रदान करने वाला ग्रह है ! इस कारण हर व्यक्ति शनि से डरता है और शनि बाधा का उपाय ढूंढता है !
शनि सभी ग्रहों में महाशक्तिशाली और घातक हैं ! कहते हैं कि सांप का काटा और शनि का मारा पानी नहीं मांगता ! जब शनि की दशा का प्रभाव पड़ा, तो कृष्ण को मूल जन्म स्थान मथुरा का त्याग करना पड़ा और द्वारिका में शरण लेनी पड़ी भीलों के देश में !
श्रीराम का राज तिलक होने वाला था उनको सब छोड़कर नंगे पांव वन में दर-दर भटकने को विवश होना पड़ा ! शनि के प्रभाव से जब कर्मयोगी, सत्यवादी, धर्म का आचरण करने वाले सभी शिक्षाओं में पारंगत अवतारी व्यक्तित्व पुरूष नहीं बच सके, तो भला सामान्य लोगों का शनि के प्रकोप से बच पाना कहां सम्भव है?
नवग्रहों में शनि सर्वाधिक प्रभावशली व क्रूर ग्रह है जिसका प्रभाव संसार में सभी मनुष्यों पर पड़ता है ! यह एक मात्र ग्रह है जिसके पीछे ईश्वर शब्द जुड़ा हुआ है ! शनि ग्रह में ही वह क्षमता है कि यह अति प्रदायक अर्थात अति प्रदान करने वाला और अति विनाशक ग्रह है ! जब भी संसार में शनि का प्रकोप पड़ता है तो अति हानि, विनाश, महामारी आती ही है !
वर्तमान में शनि ग्रह का प्रभाव नौ राशियों पर क्रूर रूप में आधिपत्य है, इसीलिये कोरोना जैसी विनाशकारी महामारी लाखों लोगों को अकाल मृत्यु में धकेल रही है और यह महाविनाश अनेक वर्षों तक बना रहेगा ! शनि दोष के कारण अनेको प्रकार की बाधायें जीवन में आयेगी।शनि दोष निवारण के लिए दीक्षा व नियमित साधनाओं का आश्रय लेना आवश्यक है ! जिससे साधक जीवन में वह स्थिति प्राप्त कर पाता है, जिसके लिये वह निरन्तर प्रयत्नशील रहता है। यह कहा जाता है कि शनि अनुशासित बनाता है, शनि ग्रह अपने प्रभाव में अनुशासन एवं नियन्त्रण सीखाता है, शनि ग्रह आत्म नियन्त्रण, विचार और सीमा में रहने वाला ग्रह है !इसके प्रभाव में धैर्य, स्थिरता, परिपक्वता और वास्तविकता आती है ! इसका प्रभाव ठोस, धैर्य से विचार करने वाला, तीव्र एवं कटु होता है। शनि हमें उतना ही प्रदान करता है, जितना हम अपने नियन्त्रण में रख सकते हैं !
शनि के प्रभाव में मनुष्य बाधाओं और मुसीबतों को पार करना सीखता है ! शनि मनुष्य को प्रयासों का फल देता है ! इसके प्रभाव से मनुष्य जिम्मेदार, विश्वास करने योग्य, धैर्यशील बनता है ! शनि के प्रभाव वाले व्यक्ति कभी भी जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाते ! शनि ही मनुष्य को बल और संतोष प्रदान करता है, क्योंकि यह बाधाओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति भी देता है! शनि के कमजोर होने से व कुदृष्टि पड़ने पर सारे गुण अवगुण में बदल जाते हैं। विपरीत स्थितियों में मनुष्य धैर्यहीन, कामचोर, निर्बल, कमजोर, चरित्रहीन हो जाता है, बाधाओं से घबराने वाला व्यक्ति बन जाता है। कमजोर शनि भाव से सांसारिक व्यक्ति के जीवन में विपन्नता, कुविचारों की वृद्धि होती है साथ ही उसका जीवन अनियन्त्रित स्वरूप बन जाता है।
शनि के तीव्र प्रभाव से मुक्ति व महामारी जैसी बीमारियों से सुरक्षा शनि साधना और शनि दोष निवारण शक्तिपात दीक्षा से ही संभव है। गुरू ही शक्तिपात दीक्षा के माध्यम से शिष्य के भीतर एक विशिष्ट दक्षता प्रदान करते हैं, जिससे शिष्य की संघर्ष करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है, इस हेतु निरन्तर साधना व शनि दोष निवारण शक्तिपात दीक्षा अवश्य ही प्राप्त करनी चाहिये।
केवल शनि पर तेल चढ़ा देने अथवा तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करने से शनि की कृपा प्राप्त नही होती है। गुरू द्वारा शक्तिपात दीक्षा एवं साधना के द्वारा ही शनि को अनुकूल व महामारी जैसी बीमारीयों से बचा जा सकता है !
7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसमें शनि वक्री भाव है जो आप लोगों के जीवन मैं श्रेष्ठतम साबित होंगे एवं शनि संताप से निवृत्ति हेतु
सर्वाबाधा निवारक, अखंड लक्ष्मी दायक एवं श्रेष्ठमय जीवन प्राप्ति शनि साधना श्री शनि साधना
शक्तिपात दीक्षा प्राप्त करें !

शक्तिपात सहयोग राशि मात्र-1500/Rs

जिसको भी यह साधना करनी है, हमारे watsup पर निम्न जानकारी भेज दें !
अपना नाम-
पिता या पति का नाम-
गोत्र या सर नेम -
अपना फ़ोटो -
Note- जो व्यक्ति उस दिन हवन करने चाहाते उन्हें विधि भेज दी जायेगी !
फोन- 6375304953
Watsup- 9414163286

हिमालय का सिद्धयोगी मंत्र मार्तण्ड Dr Balveer Singh Rajawat

03/03/2024
09/09/2023

तन्त्र-मंत्र-यंत्र , ध्यान-धारणा-समाधी

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