24/09/2014
25 सितंबर से शारदीय नवरात्र का आरंभ होगा।शारदीय नवरात्र में घटस्थापना मुहूर्त शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व 25 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस बार नवमी तिथि क्षय हो रही है। अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन रहेगी। मां भगवती जगदंबा के भक्तों को 2 अक्टूबर को ही देवी महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना एक ही दिन करनी होगी।तिथि का क्षय होने से नवरात्रि आठ दिनों में ही शुसंपन्न होगी।25 सितम्बर, गुरूवार के दिन हस्त नक्षत्र सूर्याेदय से सायं19:39 तक है इसके बाद चित्रा नक्षत्र प्रारम्भ होगा, जो घटस्थापना में वर्जित माना जाता है। इसलिए इस दिन घटस्थापना सूर्याेदय प्रातः6:14 के बाद हस्त नक्षत्र में ही सायं 7:39 तक करना सौभाग्यशाली रहेगा। निर्णय सिंधु के अनुसार नवरात्र में घट स्थापना समय चित्रा नक्षत्र में शुभ योग कारक नहीं माना जाता है...।
घटस्थापना मुहूर्त - प्रातः 6.14 बजे 7:29 बजे तक शुभ के चौघडियॉ रहेगा। 10:31 बजे से 12 तक चर व 12 बजे से1:31 तक लाभ और अमृत चौघडिया दोपहर 13:31 से दोपहर 14:59बजे तक व 16:31 से 18:01 बजे तक शुभ के चौघडिए में भी घट स्थापना कर सकते हैं।
मित्रों इस बार अद्भुत योग हैं.जो की कई वर्षों के बाद आया है.इस वर्ष जगत जननी मां भवानी का आगमन पालकी से होगा व गमन हाथी पर होगा, जो अति शुभ है देवीपुराण में नवरात्रि में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताये इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है दुर्गा जी गुरुवार को पालकी पर सवार होकर आयेगी एवं शुक्रवार को विसर्जन होने से हाथी पर बेठकर जायेगी........!!!
इस बार गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरु होगा। गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू हो, तो यह देवीकृपा व इष्ट साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है....।
धर्मशास्त्र में नवमी युक्त दशहरे को श्रेष्ठ फलदायी बताया गया है। दशहरे का पर्व 3 अक्टूबर को मनाना शास्त्र सम्मत है। देवी आराधना का महापर्व नवरात्रि 25 सितंबर को घटस्थापना के साथ शुरू होगा। 2 अक्टूबर को महाअष्टमी के साथ नवमी का पर्व भी मनेगा।