12/02/2020
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किसी खिलौने की तरह असेम्बल कर बनाए जाते हैं बंकर...
किसी खिलौने की तरह असेम्बल कर बनाए जाते हैं बंकर...ऐसे होते हैं बंकर
जम्मू-कश्मीर की सरकार ने 14,000 नए बंकर बनाने के लिए 416 करोड़ रुपयों का प्रोजेक्ट नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन को दिया है. ये बंकर जम्मू-कश्मीर के 5 सीमावर्ती जिलों सांबा, जम्मू, कठुआ, पुंछ और रजौरी में बनाए जाएंगे.
जम्मू कश्मीर की सरकार ने एक जनता की सुरक्षा के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले का अच्छा असर वहां रहने वाले नागरिकों पर पड़ेगा. सरकार ने फैसला लिया है कि बॉर्डर के पास रहने वाली आम जनता के लिए 14,000 बंकर बनाए जाएंगे. बंकर सुनते ही आपके जेहन में बॉर्डर, लक्ष्य और ऐसी ही फिल्में आती होंगी. मिलिट्री के लिए सरहद के पास जमीन के नीचे बने छोटे-छोटे कमरे, जहां उनका सामान सुरक्षित रहता है, साथ ही उनके खाने-पीने और रहने की भी सुविधा होती है.
यह बंकर सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की फौजें बनाती हैं. एक तरह से ये बंकर बॉर्डर पर लड़ने वाले सिपाहियों के टेम्परेरी घर ही होते हैं. जम्मू-कश्मीर की सरकार ने 14,000 नए बंकर बनाने के लिए 416 करोड़ रुपयों का प्रोजेक्ट नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन को दिया है. ये बंकर जम्मू-कश्मीर के 5 सीमावर्ती जिलों सांबा, जम्मू, कठुआ, पुंछ और रजौरी में बनाए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 160 स्क्वायरफीट के 13,029 बंकर और 800 स्क्वायरफीट के 1,431 बंकर बनाए जाएंगे. इनमें छोटे वाले बंकर एक परिवार के रहने के योग्य होंगे और इनमें 8 से 10 लोग रह सकेंगे. वहीं बड़े बंकरों में एक बार में 40 लोग तक रह सकते हैं.
दरसल सरकार ने यह फैसला 2017 में कई बार पाकिस्तान की तरफ से हुए सीजफायर के उल्लंघन की वजह से लिया है. इन गोलीबारियों में सेना के जवानों के साथ 12 आम नागरिक मारे गए थे और 79 घायल हो गए थे. अपनी सुरक्षा के लिए इन नागरिकों के पास कोई सुविधाएं भी नहीं थीं. इससे पहले भी आतंकी हमलों में आम जनता को जान-माल का नुकसान होता रहा है. इसीलिए इस तरह के हमलों के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए फौजियों से इतर जनता के लिए भी अब बंकर बनाए जाएंगे.
कैसे बनाए जाते हैं भारत में बंकर:
जैसा कि सरकार ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है, ये बंकर बनाने के लिए प्री-कास्ट कंस्ट्रक्शन मेथडोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. प्री-कास्ट तकनीक में होता ये है कि जमीन के ऊपर ही लोहे के सांचों के बीच कंक्रीट भर दी जाती है. इस तरह से कारखानों में दीवारें और छत तैयार कर ली जाती है और उसे जमीन के नीचे फिट कर दिया जाता है.
बंकर बनाते समय उसकी मजबूती और उससे मिलने वाली सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है. यह भी जरूरी है कि जमीन के नीचे फिट की गईं ये दीवारें और छत ऊपरी दबाव को झेलते हुए पानी, कीड़े-मकोड़ों और जासूसों से सुरक्षित रखें.
प्री-कास्ट से बनाए जाते हैं
प्री-कास्ट कंस्ट्रक्शन मेथडोलॉजी के बहुत से फायदे हैं. सबसे पहला फायदा तो ये है कि इससे बनाए गए बंकर बहुत जल्दी बन जाते हैं. इस तरीके से एक बंकर को बनाने में औसतन 2 से 3 दिन लगते हैं. इस तरह से एक साल में ही ये सभी बंकर बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है.
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