27/09/2024
एक अखबार बाँटने वाले लड़के ने एक क़िस्सा सुनायाः-
“जिन घरों में मैं अखबार बाँटा करता था, उनमें से एक ने एक बार अपने दरवाज़े पर लटके अख़बार डालने वाले डिब्बे को कुछ इस तरह से अवरुद्ध कर दिया था कि मैं उसमें अख़बार डाल ही नहीं सकता था।”
“तब उनका मैंने दरवाजा खटखटाया। अस्थिर कदमों वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति, जो बनर्जी सा’ब थे, ने धीरे से दरवाजा खोला। मैंने पूछा, ‘सर, आपने बॉक्स के छेद को क्यों अवरुद्ध कर दिया है?’ तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैंने जानबूझकर ऐसा किया है।’ वे मुस्कुराए फिर बोले, ‘मैं चाहता हूँ कि आप हर दिन मुझे अखबार दें... पर कृपा करके पहले दरवाजा खटखटाएँ या घंटी बजाएँ और फिर मुझे व्यक्तिगत रूप से अख़बार दें!’”
अख़बार वाला बताए जा रहा था, “मैं हैरान हो गया, पर पूछा, ‘ज़रूर सर, लेकिन क्या यह हम दोनों के लिए असुविधाजनक और समय की बर्बादी वाला मामला नहीं होगा?’”
“वो बोले, ‘नहीं, ऐसा नहीं होगा। जो बोला, वही करना… और हाँ, मैं तुम्हें इसके लिए हर महीने 500/- रुपये अतिरिक्त दूँगा।’”
“विनती भरी अभिव्यक्ति के साथ उन्होंने कहा, ‘अगर कभी ऐसा दिन आए, जब आप दरवाज़ा खटखटाए और मैं न खोलूँ, तो कृपया पुलिस को बुला लेना!’”
“मैं चौंक गया, मैंने पूछा, ‘क्यों?’”
“उन्होंने उत्तर दिया, ‘मेरी पत्नी का निधन हो चुका है, मेरा बेटा विदेश में रहता है… और मैं यहाँ अकेला रहता हूँ, कौन जानता है कि कब मेरा समय आ जाए?’ उस पल, मैंने उस बूढ़े आदमी की धुंधली आँखों को नम होते देखा।”
“उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने कभी तुम्हारा अखबार नहीं पढ़ा... मैं सिर्फ़ दरवाज़ा खटखटाने या दरवाजे की घंटी बजने की आवाज सुनने के लिए तुमसे अख़बार लेता हूँ, एक परिचित-चेहरा देखने और कुछ शब्दों और खुशियों का आदान-प्रदान करने के लिए!’”
“उसने हाथ जोड़कर कहा, ‘बेटे, कृपया मुझ पर एक एहसान करना! यह मेरे बेटे का विदेशी फोन नंबर है। यदि किसी दिन तुम दरवाजा खटखटाओ और मैं जवाब न दूँ, तो कृपा करके मेरे बेटे को फोन करके सूचित कर देना..!!’”
हाल के दशकों में आई तरक़्क़ी की बाढ़ के बीच, कई लोग कुछ अलग ही क़िस्म की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अपने परिचित अकेले रह रहे इस तरह के बुजुर्गों के साथ व्हाट्सअप पर अभिवादन का आदान-प्रदान करना भी, उनके घर के दरवाज़े पर घंटी बजाने से कम नहीं होगा!
Shanker Lal Chhatri
- इंद्रजीत अहलूवालिया