14/04/2026
डाॅक्टर अंबेडकर ने संघर्ष का सबसे अलग और अनोखा रास्ता चुने थे!वे अनशन के खिलाफ थे, वे भूख हड़ताल के खिलाफ थे,उन्होंने अनशन और भूख हड़ताल का प्रयोग नहीं किया!
वे बौद्धिक संघर्ष के कायल थे!शास्त्र का जवाब उन्होंने शास्त्र लिख कर दिया!पत्र-पत्रिकाओं में उपेक्षित किए जाने का जवाब स्वयं पत्र-पत्रिकाएं प्रकशित कर दिया. शिक्षा से वंचित किए जाने का जवाब सबसे अधिक पढ़-लिखकर दिया!
वे कानूनी तथा संवैधानिक संघर्ष के कायल थे!नाना प्रकार के अत्याचार सहने के बावजूद भी वे सशस्त्र आंदोलन के समर्थक नहीं थे!उनकी अहिंसा अत्यंत गहरी और सूक्ष्म थी!
जिसे स्कूल में अलग और पीछे बैठाया गया हो, जिसे पानी तक छूने नहीं दिया गया हो, जिसके छू जाने से गाड़ीवान भी अपने को अपवित्र मानता हो, जिसके कपड़े और बाल छूने से भी लोग हिचकिचाते हों, वह व्यक्ति शस्त्र न उठाकर यदि बौद्धिक लड़ाई लड़े तो यह अहिंसा की पराकाष्ठा है!
इतिहास-ग्रंथों में महात्मा गांधी के अहिंसा-सिद्धांतों पर बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन डाॅक्टर अंबेडकर के अहिंसा-सिद्धांतों पर सन्नाटा है!