Chiranjelal Kumawath

Chiranjelal Kumawath Politics

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देश में व्याप्त "भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों को जगाना" ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है! जय हिंद! जय भारत!

वह ख़ून कहो किस मतलब का...???
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वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं
वह ख़ून कहो किस मतलब का, आ सके देश के काम नहीं

वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें जीवन नरवानी है
जो परवश होकर बहता है, वह ख़ून नहीं पानी है

उस दिन लोगों ने सही-सही, ख़ूँ की क़ीमत

पहचानी थी
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में, मांगी उनसे क़ुर्बानी थी

बोले स्वतन्त्रता की ख़ातिर, बलिदान तुम्हें करना होगा
तुम बहुत जी चुके हो जग में, लेकिन आगेमरना होगा

आज़ादी के चरणों में, जो जयमाल चढ़ाई जाएगी
वह सुनो! तुम्हारे शीषों के फूलों से गूँथी जाएगी

आज़ादी का संग्राम कहीं, पैसे पर खेला जाता है
यह शीश कटाने का सौदा, नंगे सर झेला जाता है

आज़ादी का इतिहास, नहीं काली स्याही लिख पाती है
इसको लिखने के लिए, ख़ून की नदी बहाई जाती है

यूँ कहते-कहते वक्ता की, आँखों में ख़ून उतर आया
मुख रक्तवर्ण हो गया, दमक उठी उनकी स्वर्णिम काया

आजानु बाँहु ऊँची करके, वे बोले रक्त मुझे देना
उसके बदले में, भारत की आज़ादी तुम मुझसे लेना

हो गई सभा में उथल-पुथल, सीने में दिल न समाते थे
स्वर इंक़लाब के नारों के, कोसों तक छाएजाते थे

‘हम देंगे-देंगे ख़ून’- शब्द बस यही सुनाई देते थे
रण में जाने को युवक खड़े तैयार दिखाई देते थे

बोले सुभाष- इस तरह नहीं बातों से मतलब सरता है
लो यह काग़ज़, है कौन यहाँ आकर हस्ताक्षरकरता है

इसको भरने वाले जन को, सर्वस्व समर्पण करना है
अपना तन-मन-धन-जन-जीव न, माता को अर्पण करना है

पर यह साधारण पत्र नहीं, आज़ादी का परवाना है
इस पर तुमको अपने तन का, कुछ उज्ज्वल रक्त गिराना है

वह आगे आए, जिसके तन में ख़ून भारतीय बहता हो
वह आगे आए, जो अपने को हिन्दुस्तानी कहता हो

वह आगे आए, जो इस पर ख़ूनी हस्ताक्षर देता हो
मैं क़फ़न बढ़ाता हूँ; आए जो इसको हँसकर लेता हो

सारी जनता हुंकार उठी- ‘हम आते हैं, हम आते हैं’
माता के चरणों में यह लो, हम अपना रक्तचढ़ाते हैं

साहस से बढ़े युवक उस दिन, देखा बढ़ते हीआते थे
और चाकू, छुरी, कटारों से, वे अपना रक्तगिराते थे

फिर उसी रक्त की स्याही में, वे अपनी क़लम डुबोते थे
आज़ादी के परवाने पर, हस्ताक्षर करते जाते थे

उस दिन तारों ने देखा था, हिन्दुस्तानी विश्वास नया
जब लिखा था रणवीरों ने, ख़ूँ से अपना इतिहास नया!

जय हिंद! जय भारत! जय माँ भारती!

धन्यवाद!
राष्ट्रवादी
प्रचलित नाम
चिरंजीलाल कुमावत
पसंदीदा उद्धiरण
"कर्म ही पूजा है - कर्म ही धर्म है"

24/09/2025

संघ में आपका प्रवेश नहीं है आप में संघ कितना प्रवेश हुआ यह मायने रखता है 🚩
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमें

*_कोटि-कोटि नमन २५ अगस्त/जन्म-दिवस, लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज।_*   बाबा री बीज-आज है जिनका जन्मदिन, जानें कौन थे रा...
25/08/2025

*_कोटि-कोटि नमन २५ अगस्त/जन्म-दिवस, लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज।_*

बाबा री बीज-आज है जिनका जन्मदिन, जानें कौन थे रामदेव जी

बाबा रामदेव जी, जिन्हें हिन्दू और मुस्लिम समुदाय में समान रूप से श्रद्धा के साथ याद किया जाता है, का जन्म 1409 ईस्वी में हुआ था। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह दिन भाद्रपद शुक्ल बीज (भादवा सुदी बीज) के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म राजस्थान के रुणिचा में, शासक अजमल जी और माता मैनादे के घर हुआ। अजमल जी का कोई संतान नहीं था और वे द्वारकाधीश की भक्ति में लीन रहते थे। भगवान द्वारकाधीश ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वचन दिया कि वे स्वयं उनके घर पुत्र के रूप में अवतार लेंगे। इस प्रकार बाबा रामदेव जी का जन्म हुआ।

बाबा रामदेव जी का बचपन
बाबा रामदेव जी का बचपन साधारण नहीं था। उनके जन्म के समय महल में अद्भुत घटनाएँ घटीं—जल के बर्तन दूध में बदल गए, घंटियाँ स्वतः बजने लगीं, और आकाशवाणी हुई। बाबा रामदेव जी के बचपन से ही चमत्कारी लीलाएँ प्रकट होने लगीं। एक घटना के अनुसार, जब उनकी माँ ने दूध उबलते देखा, तो बाबा रामदेव जी ने मात्र हाथ के इशारे से दूध को थमा दिया। उनकी ये चमत्कारी लीलाएँ उन्हें साधारण मानव से अलग बनाती थीं।

रामसा पीर: सामाजिक न्याय का प्रतीक
बाबा रामदेव जी का जीवन केवल चमत्कारों तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने दलित समुदाय की एक बालिका, डालीबाई को अपनी धर्म बहन बनाया, जो उस समय के सामाजिक परिवेश में एक क्रांतिकारी कदम था। उनके इन कार्यों के कारण वे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में समान रूप से पूजनीय बने और ‘रामसा पीर’ के रूप में विख्यात हुए।

भैरव राक्षस वध
बाबा रामदेव जी का अवतार एक महत्वपूर्ण उद्देश्य के लिए हुआ था—भैरव नामक राक्षस के आतंक से जनता को मुक्ति दिलाना। भैरव राक्षस पोकरण के आसपास के लोगों को सताता था और उन्हें मार डालता था। एक दिन, बाबा रामदेव जी ने अपनी ईश्वरीय शक्ति से इस दैत्य का अंत कर दिया। इससे पूरे क्षेत्र में शांति का वातावरण स्थापित हुआ।

बाबा रामदेव जी का विवाह
सन 1426 में बाबा रामदेव जी का विवाह अमरकोट के राजा दलपत जी की पुत्री नैतलदे से हुआ। नैतलदे जन्म से विकलांग थीं, लेकिन बाबा रामदेव जी ने अपने चमत्कार से उन्हें ठीक कर दिया और वे विवाह के समय अपने पैरों पर चल सकीं। इस चमत्कार ने उन्हें और भी प्रसिद्ध बना दिया।

24 चमत्कार (पर्चे)
बाबा रामदेव जी के जीवन में 24 प्रमुख चमत्कारों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें "पर्चे" कहा जाता है। इनमें से पहला पर्चा उन्होंने अपनी माँ मैनादे को झूले में झूलते हुए दिया था। उनके अन्य चमत्कारों में भैरव राक्षस का वध, सेठ बोहितराज की डूबती नाव को बचाना, और अपनी बहन सुगना को सांप के डसने से बचाना शामिल हैं। ये चमत्कार उनकी दिव्यता और सामाजिक समर्पण को दर्शाते हैं।

समाधि और रामदेवरा मेला
बाबा रामदेव जी ने मात्र तैंतीस वर्ष की आयु में समाधि लेने का निर्णय लिया। समाधि लेने से पूर्व उन्होंने अपने भक्तों से कहा कि वे सदैव उनके साथ रहेंगे। उनकी समाधि जैसलमेर के रामदेवरा में स्थित है, जो आज एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है। भादवा सुदी बीज के दिन यहाँ विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आते हैं। यह स्थान हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, जहाँ सभी धर्मों के लोग अपने सिर झुकाते हैं।

सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक
बाबा रामदेव जी का जीवन सांप्रदायिक सौहार्द्र और समानता का प्रतीक था। मुस्लिम समुदाय उन्हें ‘रामसा पीर’ के नाम से पूजता है। हर साल लाखों की संख्या में लोग रामदेवरा मेले में शामिल होते हैं, जिसमें हिंदू-मुस्लिम दोनों ही भाग लेते हैं। बाबा रामदेव जी ने अपने जीवनकाल में जो प्रेम, समानता और एकता का संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

इस प्रकार, बाबा रामदेव जी का जीवन न केवल चमत्कारों से भरा था, बल्कि समाज सुधार और मानवीयता की उच्चतम मिसाल भी था। उनका संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है और उनकी समाधि पर हर साल आने वाले लाखों भक्त उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

साभार _गजेन्द्र सिंह राठौड़

05/08/2025

।।संघ में आपका प्रवेश नही आप में संघ का प्रवेश कितना हुआ यही वास्तव में मायने रखता है......।।

01/08/2025

रिश्तां बणाना सोरा है हुकम, पण निभाणा दोरा‌ है, खास तो उण टैम जद अपणे ही परायों जिस्यों बरताव करै।

05/01/2025

30/12/2024

राधे राधे #राधे_राधे

30/12/2024
अंतिम सांसे गिन रहे जटायु ने प्रभु श्री राम से कहा मुझे पता था, मैं रावण से युद्ध नहीं जीत सकता फिर भी मैं रावण से लड़ा ...
30/12/2024

अंतिम सांसे गिन रहे जटायु ने प्रभु श्री राम से कहा मुझे पता था, मैं रावण से युद्ध नहीं जीत सकता फिर भी मैं रावण से लड़ा यदि मैं युद्ध नहीं करता तो आने वाली पीढ़ियां मुझे कायर कहती.!
क्योंकि "नारी" का अपहरण होता रहा और तुम छुप कर बैठे रहे धर्म मिटने को है धर्म रक्षा के लिए अगर राम नही बन सकते तो कम से कम जटायु तो बनो.!!

शुभ दीपावाळीप्रभु श्री राम से प्रेरणा लेकर करे दीपावली का अभिनन्दन। मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण का अनुसरण करने से माँ लक्...
31/10/2024

शुभ दीपावाळी
प्रभु श्री राम से प्रेरणा लेकर करे दीपावली का अभिनन्दन। मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण का अनुसरण करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होगी।

#शुभ_दीपावली

संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता आज भी अंतिम पंक्ति में खड़े होकर खुश रहते है, क्योंकि उनके लिए अपनी  #राजनीति के चमकना...
28/10/2024

संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता आज भी अंतिम पंक्ति में खड़े होकर खुश रहते है, क्योंकि उनके लिए अपनी #राजनीति के चमकना नहीं उनके लिए #संगठन_सर्वोपरि है।

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