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"गिलगित बाल्टिस्तान"आज अगर जम्मू कश्मीर के बारे में बातचीत करने की जरूरत है तो वह है POK और अक्साई चीन के बारे में है। इ...
10/08/2019

"गिलगित बाल्टिस्तान"

आज अगर जम्मू कश्मीर के बारे में बातचीत करने की जरूरत है तो वह है POK और अक्साई चीन के बारे में है।

इसके ऊपर देश में भी चर्चा होनी चाहिए गिलगित बाल्टिस्तान जो अभी POK में है।
यह विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि
5 देशों से जुड़ा हुआ है अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, तिब्बत और चाइना l

"वास्तव में जम्मू कश्मीर की महत्ता केवल जम्मू के कारण नहीं, कश्मीर के कारण नहीं, लद्दाख के कारण नहीं वास्तव में अगर इसकी महत्ता है तो वह है गिलगित-बाल्टिस्तान के कारण ही है l"

भारत के इतिहास में भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक (शक , हूण, कुषाण , मुग़ल ) वह सारे गिलगित से हुए l

हमारे पूर्वज जम्मू-कश्मीर के महत्व को समझते थे उनको पता था कि अगर भारत को सुरक्षित रखना है तो दुश्मन को हिंदूकुश अर्थात गिलगित-बाल्टिस्तान उस पार ही रखना होगा l

किसी समय इस गिलगित में अमेरिका बैठना चाहता था, ब्रिटेन अपना आर्मी बेस गिलगित में बनाना चाहता था , सोवियत यूनियन भी गिलगित में बैठना चाहता था यहां तक कि पाकिस्तान में 1965 में गिलगित को सोवियत रूस को देने का वादा तक कर लिया था आज चाइना भी गिलगित में बैठना चाहता है और वह अपने पैर पसार भी चुका है और पाकिस्तान तो बैठना चाहता ही था l

"दुर्भाग्य से इस गिलगित के महत्व को सारी दुनिया समझती है केवल एक उसको छोड़कर जिसका वास्तव में गिलगित-बाल्टिस्तान है और वह है भारत l"

क्योंकि हमको इस बात की कल्पना तक नहीं है भारत को अगर सुरक्षित रहना है तो हमें गिलगित-बाल्टिस्तान किसी भी हालत में चाहिए l

आज हम आर्थिक शक्ति बनने की सोच रहे हैं क्या आपको पता है गिलगित से सड़क मार्ग द्वारा आप विश्व के अधिकांश कोनों में जा सकते हैं गिलगित से By Road 5000 Km दुबई है, 1400 Km दिल्ली है, 2800 Km मुंबई है, 3500 Km RUSSIA है, चेन्नई 3800 Km है लंदन 8000 Km है l

जब हम सोने की चिड़िया थे हमारा सारे देशों से व्यापार चलता था 85 % जनसंख्या इन मार्गों से जुड़ी हुई थी मध्य एसिया यूरेशिया, यूरोप, अफ्रीका सब जगह हम सड़क मार्ग द्वारा जा सकते थे।

अगर गिलगित-बाल्टिस्तान हमारे पास हो l आज हम पाकिस्तान के सामने IPI (Iran-Pakistan-India) गैस लाइन बिछाने के लिए गिड़गिड़ाते हैं । ये हमारी तापी की परियोजना है जो कभी पूरी नहीं होगी।
अगर हमारे पास गिलगित होता तो गिलगित के आगे तज़ाकिस्तान था हमें किसी के सामने हाथ नहीं फ़ैलाने पड़ते l

हिमालय पर्वत श्रृंखला की 10 बड़ी चोटियों है जो कि विश्व की 10 बड़ी चोटियों में से है और ये सारी हमारी है और इन 10 में से 8 गिलगित-बाल्टिस्तान में है l

तिब्बत पर चीन का कब्जा होने के बाद जितने भी पानी के वैकल्पिक पानी के स्त्रोत हैं वह सारे गिलगित-बाल्टिस्तान में है l
आप हैरान हो जाएंगे वहां बड़ी -बड़ी 50-100 यूरेनियम और सोने की खदाने हैं।

आप POK के मिनरल डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को पढ़िए आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे l वास्तव में गिलगित-बाल्टिस्तान का महत्व हमको मालूम नहीं है और सबसे बड़ी बात गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग पाकिस्तान विरोधी है l

दुर्भाग्य क्या है हम हमेशा कश्मीर बोलते हैं जम्मू- कश्मीर नहीं बोलते हैं l कश्मीर कहते ही जम्मू, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान दिमाग से निकल जाता है l

ये जो पाकिस्तान के कब्जे में जो POK है उसका क्षेत्रफल 79000 वर्ग किलोमीटर है उसमें कश्मीर का हिस्सा तो सिर्फ 6000 वर्ग किलोमीटर है और 9000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा जम्मू का है और 64000 वर्ग किलोमीटर हिस्सा लद्दाख का है जो कि गिलगित-बाल्टिस्तान है l

यह कभी कश्मीर का हिस्सा नहीं था यह लद्दाख का हिस्सा था वास्तव में सच्चाई यही है l इसलिए पाकिस्तान यह जो बार-बार कश्मीर का राग अलापता रहता है तो उसको कोई यह पूछे तो सही - क्या गिलगित-बाल्टिस्तान और जम्मू का हिस्सा जिस पर तुमने कब्ज़ा कर रखा है क्या ये भी कश्मीर का ही भाग है ?? कोई जवाब नहीं मिलेगा l

क्या आपको पता है गिलगित -बाल्टिस्तान , लद्दाख के रहने वाले लोगो की औसत आयु विश्व में सर्वाधिक है यहाँ के लोग विश्व अन्य लोगो की तुलना में ज्यादा जीते है l
भारत में आयोजित एक सेमिनार में गिलगित-बाल्टिस्तान के एक बड़े नेता को बुलाया गया था उसने कहा कि "we are the forgotten people of forgotten lands of BHARAT" l

उसने कहा कि देश हमारी बात ही नहीं जानता l किसी ने उससे सवाल किया कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं ?? तो उसने कहा कि 60 साल बाद तो आपने मुझे भारत बुलाया और वह भी अमेरिकन टूरिस्ट वीजा पर और आप मुझसे सवाल पूछते हैं कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं l

उसने कहा कि आप गिलगित-बाल्टिस्तान के बच्चों को IIT , IIM में दाखिला दीजिए AIIMS में हमारे लोगों का इलाज कीजिए l हमें यह लगे तो सही कि भारत हमारी चिंता करता है हमारी बात करता है l गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान की सेना कितने अत्याचार करती है लेकिन आपके किसी भी राष्ट्रीय अखबार में उसका जिक्र तक नहीं आता है l आप हमें ये अहसास तो दिलाइये की आप हमारे साथ है l

और मैं खुद आपसे यह पूछता हूं कि आप सभी ने पाकिस्तान को हमारे कश्मीर में हर सहायता उपलब्ध कराते हुए देखा होगा l वह बार बार कहता है कि हम कश्मीर की जनता के साथ हैं, कश्मीर की आवाम हमारी है l लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि किसी भी भारत के नेता, मंत्री या सरकार ने यह कहा हो कि हम POK - गिलगित-बाल्टिस्तान की जनता के साथ हैं, वह हमारी आवाम है, उनको जो भी सहायता उपलब्ध होगी हम उपलब्ध करवाएंगे आपने यह कभी नहीं सुना होगा l

कांग्रेस सरकार ने कभी POK - गिलगित-बाल्टिस्तान को पुनः भारत में लाने के लिए कोई बयान तक नहीं दिया प्रयास तो बहुत दूर की बात है l हालाँकि पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के समय POK का मुद्दा उठाया गया फिर 10 साल पुनः मौन धारण हो गया और फिर से नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में ये मुद्दा उठाया l

आज अगर आप किसी को गिलगित के बारे में पूछ भी लोगे तो उसे यह पता नहीं है कि यह जम्मू कश्मीर का ही भाग है l वह यह पूछेगा क्या यह कोई चिड़िया का नाम है ?? वास्तव में हमें जम्मू कश्मीर के बारे में जो गलत नजरिया है उसको बदलने की जरूरत है l

अब करना क्या चाहिए ?? तो पहली बात है सुरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवेदनशील है इस पर अनावश्यक वाद-विवाद नहीं होना चाहिए l एक अनावश्यक वाद विवाद चलता है कि जम्मू कश्मीर में इतनी सेना क्यों है?? तो बुद्धिजीवियों को बता दिया जाए कि जम्मू-कश्मीर का 2800 किलोमीटर का बॉर्डर है जिसमें 2400 किलोमीटर पर LOC है l आजादी के बाद भारत ने पांच युद्ध लड़े वह सभी जम्मू-कश्मीर से लड़े भारतीय सेना के 18 लोगों को परमवीर चक्र मिला और वह 18 के 18 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं l

इनमें 14000 भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं जिनमें से 12000 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं l अब सेना बॉर्डर पर नहीं तो क्या मध्यप्रदेश में रहेगी क्या यह सब जो सेना की इन बातों को नहीं समझते वही यह सब अनर्गल चर्चा करते हैं l
वास्तव में जम्मू कश्मीर पर बातचीत करने के बिंदु होने चाहिए- POK , वेस्ट पाक रिफ्यूजी, कश्मीरी हिंदू समाज, आतंक से पीड़ित लोग , धारा 370 और 35A का दुरूपयोग, गिलगित-बाल्टिस्तान का वह क्षेत्र जो आज पाकिस्तान -चाइना के कब्जे में है l जम्मू- कश्मीर के गिलगित- बाल्टिस्तान में अधिकांश जनसंख्या शिया मुसलमानों की है और वह सभी पाक विरोधी है वह आज भी अपनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं, पर भारत उनके साथ है ऐसा उनको महसूस कराना चाहिए, देश कभी उनके साथ खड़ा नहीं हुआ वास्तव में पूरे देश में इसकी चर्चा होनी चाहिएl

वास्तव में जम्मू-कश्मीर के विमर्श का मुद्दा बदलना चाहिए l जम्मू कश्मीर को लेकर सारे देश में सही जानकारी देने की जरूरत है l इसके लिए एक इंफॉर्मेशन कैंपेन चलना चाहिए l पूरे देश में वर्ष में एक बार 26 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर का दिवस मनाना चाहिए l और सबसे बड़ी बात है जम्मू कश्मीर को राष्ट्रवादियों की नजर से देखना होगा जम्मू कश्मीर की चर्चा हो तो वहां के राष्ट्रभक्तों की चर्चा होनी चाहिए तो उन 5 जिलों के aatanki तो फिर वैसे ही अपंग हो जाएंगे l

इस कश्मीर श्रृंखला के माध्यम से मैंने आपको पूरे जम्मू कश्मीर की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों से अवगत करवाया और मेरा मुख्य उद्देश्य सिर्फ यही है जम्मू कश्मीर के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को यह सब जानकारियां होनी चाहिए l
अब आप इतने समर्थ हैं कि जम्मू कश्मीर को लेकर आप किसी से भी वाद-विवाद या तर्क कर सकते हैं l किसी को आप समझा सकते हैं कि वास्तव में जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां क्या है l वैसे तो जम्मू कश्मीर पर एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है लेकिन मैंने जितना हो सका उतने संछिप्त रूप में इसे आपके सामने रखा है l

अगर आप इस विचारणीय लेख को अधिक से अधिक जनता के अंदर प्रसारित करेंगे तभी हम जम्मू कश्मीर के विमर्श का मुद्दा बदल सकते हैं अन्यथा नहीं l

इसलिए मेरा आप सभी से यही अनुरोध है कि आप इस क्रांतिकारी लेख को अधिक से अधिक लोगों की जानकारी में लायें, ताकि देश की जनता और नई पीढ़ी को जम्मू कश्मीर के संदर्भ में सही तथ्यों का पता लग सके l जय हिंद, जय भारत।

प्रियव्रत पुष्कर ji ki wall se🚩🙏🌹

25/03/2017

कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?

नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |
नोट : -अपने बच्चों को बार बार पढ़वाये और स्वयं भी जानकारी रखे धर्म को जानना हमरा कर्तव्य है। शेयर करे ताकि हर सनातनी इस जानकारी को जाने..

13/02/2017
श्री हनुमान चल्लीसा :-दोहा °°°°°°°°°°°°°°°°°°श्री गुरु चरण सरोज रजनिज मन मुकुर सुधार बरणौ रघुबर बिमल जसुजो दायक फलचार ।।...
26/08/2015

श्री हनुमान चल्लीसा :-

दोहा
°°°°°°°°°°°°°°°°°°

श्री गुरु चरण सरोज रज
निज मन मुकुर सुधार
बरणौ रघुबर बिमल जसु
जो दायक फलचार ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके
सुमिरौं पवन कुमार
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं
हरहु कलेश बिकार ।।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर
जै कपीस तिहुँलोक उजागर
रामदूत अतुलित बलधामा
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरण बिराज सुबेशा
कानन कुंडल कुंचित केशा ।।

हाथ बज्र अौ ध्वजा बिराजै
कॉधे मूंज जनेऊ साजे
शंकर सूवन केशरी नंदन
तेज प्रताप महा जग बंदन ।।

बिद्यावान गुणी अति चतुरा
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया ।।

सूक्ष् रूप धरि सियोंहि दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे
राम चंद्र के काम संवारे ।।

लाये संजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्हि बहुत बढ़ाई
तुम मम प्रिय भरत सम भाई ।।

सहस बदन तुम्हरो जैस गावै
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें
सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहिसा ।।

जम कुबेर दिगपाल जहॉ ते
कबि कोबिद कहि सके कहॉ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना
जुग सहस्र योजन पर भानु
लील्यो ताहिं मधुर फल जानु ।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाही
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।

राम दुयारे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख तुम्हारी सरन
तुम रक्षक काहूं को डरना ।।

अपन तेज सम्हारो आपै
तीनो लोक हाँक ते काँपे
भुत पिशाच निकट नही आवे
महाबीर जब नाम सुनावे ।।

नासै रोग हरे सब पिसा जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट ते हनुमान छुड़ावै मन क्रम बचन ध्यान जो लावै सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै ।।

चारो जग परताप तुम्हारा हैँ परसिद्ध जगत उजियारा साधू संत के तुम रखवारे असुर निकन्दन राम दुलारे
अष्ठ सिद्धि नब निधि के दाता
अस वर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पास सदा रहो रघुपति के दासा ।।

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ।।

और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्ब सुख करई
संकट कटै मिठे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बलबीरा ।।
जय जय जय हनुमान गोसाई
कृपा करो गुरुदेव की नाई
जो शत बार पाठ कर कोई छुटई बन्दी महासुख होई

जो यह पढ़ें हनुमान चल्लीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसी दास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ ह्रदय मँह् डेरा ।।

दोहा !!!""""!!!~||~®~||~!!!""""!!!

पवन तनय संकट हरन
मंगल मूरति रूप
राम लषन सीता सहित
ह्रदय बसहु सुर भूप ।।

!!!०^०!!!०^०!!!०^०!!!०^०!!!०^०!!!०^०!!!०^०!!!

जय जय राम सीता राम ~
जय मारुती नन्दन ~
जय अंजनी पुत्र ~
जय बजरंग बली ~

कल्याण मस्तु ★ कल्याण मस्तु ★ कल्याण मस्तु
!!!""""!!!""""!!!""""!!!~@~!!!""""!!!""""!!!"""

गीता में भगवान ने कहा है--" जब-जब धर्मकी हानि होती है, तब-तबमेरी कोई शक्ति इस धरा -धाम पर अवतारलेकरभक्तो के दु:ख दूर करत...
09/06/2015

गीता में भगवान ने कहा है--" जब-जब धर्म
की हानि होती है, तब-तब
मेरी कोई शक्ति इस धरा -धाम पर अवतार
लेकर
भक्तो के दु:ख दूर करती है और धर्म
की स्थापना कारती है |" भक्त-भय-
भंजन, मुनि-मन रंजन अंजनीकुमार
बालाजी का घाटा मेंहदीपुर में प्रादुर्भाव
इसी उद्देश्य से हुआ है | मर्यादा पुरुषोत्म
भगवान श्री राम ने परम प्रिय भक्त
शिरोमणि
पवनकुमार की सेवाऔं से प्रस्न्न होकर
उन्होने
यह वरदान दिया -" हे पवनपुत्र ! कलियुग में
तुम्हारी प्रधानदेव के रुप में पूजा होगी
|" घाटा मेंहदीपुर में भगवान महावीर
बजरंग बली का प्रादुर्भाव वास्तव में इस युग
का
चमत्कार है |
राजस्थान राज्य के दो जिलों (सवाई
माधोपुर व दौसा) में विभक्त
घाटा मेंहदीपुर स्थान बडी लाइन के
बाँदीकुई स्टेशन से जो कि दिल्ली ,
जयपुर, अजमेर , अहमदाबाद लाइन पर है, २४
मील की दूरी पर स्थित है
| इसी प्रकार बडी लाइन के हिंडोन
स्टेशन से भी यहाँ के लिए बसें मिलती
हैं | अब तो आगरा , मथुरा, व्रंदावन, अलीगढ
आदी से सीधी बसें जो
जयपुर जाती हैं बालाजी के मोड पर
रूकती हैं | फंटीयर मेल से
महावीरजी स्टेशन पर उतरकर
भी हिंडोन होकर बस द्वारा बालाजी
रेलवे की बडी लाइन पर बयाना और
महावीरजी सटेशनों के बीच
दिल्ली, मथुरा, कोटा , रतलाम , बडौदा,
मुंबई लाइन
पर स्थित है | हिंडोन से सवा घण्टे का समय
बालाजी तक बस द्वारा लगता है | यह
स्थान दो
पहाडियों के बीच बसा हुआ बहुत आकर्षक
दिखाई
पड्ता है | यहाँ की शुध्द जलवायु और पवित्र
वतावरण मन को बहुत आनंद प्रदान करता है |
यहाँ नगर
जीवन की रचनाएँ भी
देखने को मिलेंगी |
यहाँ तीन देवों की प्रधानता है -
श्री बालाजी महाराज, श्री
प्रेतराज सरकार और श्रीकोतवाल (भैरव) |
यह
तीन देव यहाँ आज से लगभग १००० वर्ष पूर्व
प्रकट हुए थे |इनके प्रकट होने से लेकर अब तक
बारह
महंत इस स्थान पर सेवा -पूजा कर चुके हैं और
अब तक
इस स्थान के दो महंत इस स्थान पर सेवा -
पूजा कर चुके हैं
और अब तक इस स्थान के दो महंत इस समय
भी विधमान हैं | सर्व श्री
गणेश्पुरी जी महाराज (भूतपूर्व
सेवक) श्री किशोरपुरीजी
महाराज (वर्तमान सेवक ) | यहाँ के उत्थान
का युग
श्री गणेशपुरी जी महाराज
के समय से प्रारंभ हुआ और अब दिन-प्रतिदिन
बढ्ता
ही जा रहा है | प्रधान मंदिर का निर्माण
इन्हीं के समय मे हुआ | सभी धर्म-
शालाएँ इन्हीं के समय में बनीं | इस
प्रकार इनका सेवाकाल श्री बलाजी
घाटा
मेंहदीपुर के इतिहास का स्वर्ण युग
कहलाएगा |
प्रारंभ में यहाँ घोर बीहड जंगल था |
घनी झाडियों में शेर-चीते, बघेरा आदि
जंगली जानवर पडे रहते थे | चोर-डाकुऔं का
भी भय था | श्री महंतजी
महाराज के पूर्वजों को जिनका नाम
अग्यात है , स्वपन हुआ
और स्वप्न की अवस्था में ही वे
उठकर चल दिए | उन्हे पता नहीं था कि वे
कहाँ जा
रहे हैं और इसी दशा में उन्होने एक
बडी विचित्र लीला देखी |
एक और से हजारो दीपक जलते आ रहे है |
हाथी-घोडों की आवाजें आ
रही है | और एक बहुत बडी फोज
चली आ रही है | उस फोज नें
श्री बालाजी की
तीन प्रदक्षिणाएँ की और फोज के
प्रधान ने नीचे उतरकर श्री महारज
की मूर्ति साष्टांग प्रणाम किया तथा
जिस रस्ते से
वे आए थे उसी रसते से चले गये | गोसाँई
जी महाराज चकित होकर यह सब देख रहे थे |
उन्हे कुछ डर सा लगा और वे वापिस अपने
गाँव चले गए
किन्तु नींद नही आइ और बार-बार
उसी विषय पर विचार करते हुए उनकी
जैसे ही आँखें लगी उन्हें स्वपन मे.
तीन मूर्तियाँ, उनके मन्दिर और विशाल
वैभव दिखाई
पडा और उनके कानों में यह आवाज
आई-"उठो,
मेरी सेवा का भार ग्रहण करो | मै
अपनी लीलाओं का विस्तार करुँगा |"यह
बात कौन कह रहा था, कोई दिखाई नहीं
पडा | गोसाँई
जी ने एक बार भी इस पर ध्यान
नहीं दिया | अन्त में श्री हनुमान
जी महाराज ने इस बार स्वयं उन्हें दर्शन दिए
और पूजा का आग्रह किया |
दूसरे दिन गोसाँई जी महाराज उस मूर्ति के
पास
पहुँचे तो उन्होने देखा कि चारों और से घंटा-
घडियाल और नगाडों
की आवाज आ रही है किंतु दिखाई
कुछ नहीं दिया | इसके बाद श्री गोसाँई
जी ने आस-पास के लोग इकट्ठे किए और
सारी बातें उन्हे बताई | उन लोगो ने मिलकर
श्री महारज की एक छोटी
सी तिवारी बना दी और यदा-
कदा भोग प्रसाद की व्यवस्था कर दी |
कई एक चमत्कार भी महाराज की
व्यवस्था कर दी | कई एक चमत्कार
भी श्री महाराज ने दिखाए किन्तु यह
बढ्ती हुई कला कुछ विधर्मियो के
शासनकाल मे
फिर से लुप्त हो गई | किसी शासक ने
श्री महाराज की मूर्ति को खोदने का
प्रयत्न कीया | सैकडों हाथ खोद लेने पर
भी जब मूर्ति के चरणों का अन्त नही
आया तो वह हार-मानकर चला गया |
वास्तव मे इस मूर्ति को
अलग से किसी कलाकार ने गढकर
नही बनाया है, अपितु यह तो पर्वत का
ही अगं है और यह समूचा पर्वत
ही मानो उसका कनक भूधराकार शरीर
है | इसी मूर्ति के चरणों में एक छोटी-
सी कुण्डी थी जिसका जल
कभी बीतता ही
नहीं था | रहस्य यह है कि महाराज
की बाईँ और छाती के नीचे
से एक बारीक जलधारा निरन्तर बहती
रहती है जो पर्याप्त चोला चढ जाने पर
भी बंद नही होती |
इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई |
१९७१ में श्री महाराज ने अपना चोला
बदला | उतारे
हुए चोले को गाडियों में भरकर श्री गंगा में
प्रवाहित
करने हेतु बहुत से आदमी चल दिए | चोले को
लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो रेलवे
अधिकारियों
ने चोले का लगेज तय करने हेतु उसे तोला किंतु
वह तुलने मे
ही नही आया | कभी एक
मन बढ जाता तो कभी एक मन घट जाता |
अंत में
हारकर चोला वैसे ही गंगाजी को सम्मान
सहित भेज दिया गया | उस समय हवन,
ब्राहाण भोजन एवं
धर्म ग्रंथों का पारायण हुआ और नए चोलो
में एक नई ज्योति
उत्पन्न हुई जिसने भारत के कोने -कोने में
प्रकश फैला दिया |
यहाँ की सबसे बडी विशेषता
यही है | कि मूर्ति के अतिरिक्त किसी
व्यक्ति विशेष का कोई चमत्कार नहीं है |
क्या है
सेवा, श्रध्दा और भक्ति ? श्री महंत
जी महाराज भी इस विषय मे उतने
ही स्पष्ट है जितने अन्य यात्रीगण |
यहाँ सबसे बडा असर सेवा भक्ति का ही है |
चाहे
कोई कैसा भी बीमार क्यों न हो, यदि
वह सच्ची श्रध्दा लेकर आया है तो
श्री महाराज उसे बहुत शीघ्र
स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगे | इसमे कोई सन्देह
नही |
भूत-प्रेत की बाधा, पागलपन,
म्रगी,लकवा,टी.बी.
बाँझपन या अन्य किसी भी प्रकार
की कोई बीमारी क्यों न हो
अति शीघ्र दूर हो जाती है | यध्पि
हम लोग भोतिक विग्यान के युग में रह रहे हैं
किन्तु शायद
श्रीबालाजी के स्थान पर आकर सब
कुछ भूल जाते है और तन-मन से श्री चरणो के
भ्क्त बन जाते है | जैसा कि कहा गया है----
"नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं,
मेंहदीपुर दरबार"
यहाँ आने पर ही मनुष्य को विदित होता है
कि
भूतादि किस प्रकार मानव जाति को
पीडा पहुँचाते है
तथा किस प्रकार उनसे छुटकारा मिलता है |
जैसे ही
दु:खी आदमी मगराज के दरबार में
आता है | उससे कुछ थोडा-सा प्रसाद तीनो
देवताओ को चढाना पडता है जिसमें श्री
बालाजी महाराज को लड्डू का, श्री
प्रेतराज सरकार को चावल का, श्री
कोतवाल
कप्तान (भैरव ) को उडद का प्रसाद लगाया
जाता है | इस
प्रसाद में से दो लड्डू रोगी को खिलाए
जाते है |
बाकी बचा हुआ प्रसाद जानवरो को डाल
दिया जाता है
| ज्यो ही मरीज उन दो लड्डुओ को
खाता है त्यो ही वह झूमने लगता है और स्वम
ही भूत उसके शरीर मे आकर बोलने
लगता है | उसके ऊपर अपने आप ही भयंकर
मार पडने लगती है | वह भागने की
कोशिश करता है किंतु अपने आप ही उसके
हाथों
में हथकडी और उसके पैरो मे बेडी
पड जाती है | वह अपने हाथो से अपने आप को
सैकडो जूते मारता है | हाहाकार मचाता है |
कभी
महाराज की आग्या से वह धोक के पेड से
उल्टा
लटक जाता है | कभी उसमे आग जलाकर उसमे
फुक जाता है और फाँसी या सूली पर
लटक जाता है | यहाँ तक कि मारों से तंग
आकर या तो वह
महाराज के चरणो मे बैठ जाता है अन्यथा
समाप्त कर दिया जाता
है | ईमानदारी के साथ जो भूत श्री
महाराज के चरणो मे बैठ जाता है उन्हे ये
अपना दूत बना लेते
है | संक्ट कट जाने के बाद प्रत्येक रोगी को
भी महाराज की और से एक दूत मिलता
है जो कि सदा उसके पास रहता है और आगे
होने
वाली किसी भी बात
की सुचना देता रहता है, किन्तु कभी-
कभी ऐसा भी देखने मे आया है कि लोग
दूत की बातो या बहकावे मे आकर अपना
नुकसान
कर बैठते है | इन्हे अपने ही दूत से पथ-
प्रदर्शन माँगना चाहिए | जब तक उन्हे अपना
स्वयं का दूत
न मिले तब तक शांतिपूर्वक श्री महाराज के
चरणो
मे प्रार्थना करते रहना चाहिए | क्योकि
प्रार्थना मे अपार
शक्ति होती है | यहाँ कोई अस्पताल या
तवाखाना
नही है, ना ही यहाँ कोई डाँक्तर, वैध
या हकीम है |
यहाँ के सार्वभौम श्री बालाजी महाराज
है | बहुत से यात्री रोगी को यहाँ लाकर
डाल देते है | न तो महाराज से प्रार्थना ही
करते
है और न निर्धारित नियमो का पालन ही
करते है |
पूजा और आरती के समय भी मंदिर में
आने का कष्ट नही करते | बाहर ही
चहलकदमी करते है इधर -उधर की
निंदा स्तुति करते है और जब कष्ट दूर नही
होता
तो बालाजी महाराज को दोष देते है और न
जाने
क्या-क्या ऊँट-पटांग बकते फिरते है
बुध्दिवादियों का यहाँ आना
व्यर्थ है | यहाँ तो अपने मान-सम्मान की
भी चिन्ता छोड. देनी चाहिए | भगवान के
दरबार मे भक्त का कोई नजी मान सम्मान
नही होता है | शायद आपने सुना होगा कि
द्रोपदी जिस समय दुष्टो से घिरकर
चिल्लाई
थी स्वयं बैकुण्ठ्नाथ ने आकर उसका
चीज बढाया था | गजरज को उबारा था
और प्रहलाद
को बचाया था | यह सब भक्ति का ही
प्रभव था |
रामायण में गोस्वामी तुलसीदास
जी ने कहा है ---
"रामहिं केवल प्रेम पियारा ||
जानि लेहु जो जानन हारा || "
वस्ताव मे प्रार्थना में महान शक्ति निहित
है | अत:
सभी यात्री भाइयो का यह
पुनीत कर्त्तव्य है कि वे तन, मन, धन से
श्री महाराज के चरणो के अनुगामी बन
जाएँ और कही भी इधर -उधर
भटकने का कष्ट न करे | श्री महाराज
जी उनके कष्टों को दुर कर देगे | कहा
भी है -
"एकहि साधे सब साधे, सब साधे सब जाय |"
गीता मे श्री क्रष्ण ने कहा है ----
अनन्याश्चिन्त्यन्तो माम, ये जना:
पार्युपासते |
तेषां नित्याभियुक्ताना, योग्क्षेम
वहाम्यह्म || "
अर्थात --जो भक्त दुनियाँ के सारे झंझट
छोडकर केवल मेरा
ही ध्यान करते है उनके कल्याण की
मुझे चिन्ता रहती है, अर्थात उनका योगक्षेम
मै
ही वहन करता हूँ |
अत: जो भी रोगी जिस स्थान पर आएँ
उन्हे पूर्णरुपेण भगवत भक्त बनकर तपस्यामय
जीवन बिताना चाहिए तभी उनके संकट
शीघ्र समाप्त होगे |
यहाँ प्राय: भारत के कोने - कोने से
यात्रीग्ण आते
है | उनके रहने की समुचित व्यवस्था है | अनेक
बडी - बडी धर्मशालाएँ है |
पानी के कुएँ और बिजली है |
यहाँ की एक जो सबसे महत्तवपूर्ण बात है, वह
यह है कि अन्य तीर्थ स्थानो की
तरह न तो यहाँ पण्डे, पुजारी ही
यात्रियो से कुछ माँगते है और न ही जेबकतरे
एव
चोर ही है | अगर किसी
यात्री का गलत रवैया मिलता है तो उसे तुरंत
स्थान
छोडने को विवश कर दिया जाता है |
यह स्थान प्रारंभ से ही गोस्वामी
निहंग मताधिकारियों के अधिकार मे रहा
है | वर्तमान समय का
वैभव श्री गणेशपुरी जी
महाराज के सेवाकाल मे बढा | वास्तव मे
जिनकी
सेवा और साधना जितनी उच्च्कोटि की
थी कि जिसकी समनता
कही अन्यत्र नही मिल
सक्ती | आप पूज्यपाद गोसाई श्री
शिवपुरी के योग्य शिष्य है | वर्तमान समय मे
श्री गणेशपुरी जी महाराज
के सर्वाधिक योग्य शिष्य श्री
किशोरपुरी जी महाराज के सर्वाधिक
योग्य शिष्य श्री कीशोरपुरी
जी महाराज स्थान के उत्तराधिकारी
नियुक्त किए गए है |जिस समय श्री महाराज
की सेवा - पूजा की सम्पूर्ण वयवस्था
का भार आपके ही ऊपर है | आप बहुत
ही योग्य विद्वान एव चरित्रवान है |
आपका
स्वभव गंगाजल के समान निर्मल है, हमे पूर्ण
विश्वास है
कि आपके सेवा काल मे जिस स्थान की
दिन
दूनी रात चौगुनी उन्नति होगी
|
अतिथि सत्कार, साधु और ब्राह्मणो की
सेवा,
नुष्ठान और यग्य यहाँ निरतर चलने वाले
धार्मिक क्रत्य है
जिसके आधार पर जिस स्थान की निरंतर
प्रगति
होती जा रही है | कहा भी
है--
"धर्मेण हन्यते ब्याधि:"
अर्थात धर्म के प्रभाव से सभी विपत्तियाँ
एव
बीमारियाँ दूर होती है | मै समझता हूँ
शायद यहाँ की लीला का वास्तविक
रहस्य यही है |
यहाँ आने के पश्चात यात्रियों का यह
कर्त्तव्य है कि वे इधर
- उधर सात पहाडी आदि के चक्कर मे पडकर
भतकते न फिरे | यदि किसी प्रकार का उन्हें
खतरा
हो गया तो स्थान बहकावे मे इधर - उधर
भटकने का कष्ट न
करे | केवल सर्वतोभवेन श्री महाराज के
चरणो का
ही ध्यान करे और सभी यात्रियो के
साथ सहयोग का भाव रखे | ईर्ष्या-द्वेष की
यहाँ
आवश्यकता नही है | —

01/06/2015

हरिवंशराय बच्चन जी की एक खूबसूरत कविता,,

"रब" ने. नवाजा हमें. जिंदगी. देकर;
और. हम. "शौहरत" मांगते रह गये;

जिंदगी गुजार दी शौहरत. के पीछे;
फिर जीने की "मौहलत" मांगते रह गये।

ये कफन , ये. जनाज़े, ये "कब्र" सिर्फ. बातें हैं. मेरे दोस्त,,,
वरना मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई ना. हो...!!

ये समंदर भी. तेरी तरह. खुदगर्ज़ निकला,
ज़िंदा. थे. तो. तैरने. न. दिया. और मर. गए तो डूबने. न. दिया . .

क्या. बात करे इस दुनिया. की
"हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हे"

जो सामने. हे. उसे लोग. बुरा कहते. हे,
जिसको. देखा. नहीं उसे सब "खुदा". कहते. है....

01/06/2015

II श्री हरिः शरणम् II II जय जय श्री राधे II

3 ऐसे भक्त, जिनके शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका :

कबीरदास (1398-1518)— 1518 में कबीर ने काशी के पास मगहर में देह त्याग दी। मृत्यु के बाद उनके शव को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। हिन्दू कहते थे कि उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से होना चाहिए और मुस्लिम कहते थे कि मुस्लिम रीति से। इसी विवाद के चलते जब उनके शव पर से चादर हट गई, तब लोगों ने वहाँ फूलों का ढेर पड़ा देखा। बाद में वहाँ से आधे फूल हिन्दुओं ने ले लिए और आधे मुसलमानों ने। मुसलमानों ने मुस्लिम रीति से और हिंदुओं ने हिंदू रीति से उन फूलों का अंतिम संस्कार किया। मगहर में कबीर की समाधि है।

चैतन्य महाप्रभु (1486-1534)— 15 जून, 1534 को रथयात्रा के दिन जगन्नाथपुरी में संकीर्तन करते हुए वह जगन्नाथ जी में लीन हो गए और शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका I

मीराबाई (1498-1547)— मीराबाई बहुत दिनों तक वृन्दावन में रहीं और जीवन के अंतिम दिनों में द्वारका चली गईं। जहाँ 1547 ई. में वह नाचते-नाचते श्री रणछोड़राय जी के मन्दिर के गर्भग्रह में प्रवेश कर गईं और मन्दिर के कपाट बन्द हो गये। जब द्वार खोले गये तो देखा कि मीरा वहाँ नहीं थी। उनका चीर मूर्ति के चारों ओर लिपट गया था और मूर्ति अत्यन्त प्रकाशित हो रही थी। मीरा मूर्ति में ही समा गयी थीं। मीराबाई का शरीर भी कहीं नहीं मिला।

19/07/2014

Son : papa circus dekhne chale???

Papa : No.........son I m busy

Son : Usme ek ladki ne bina kapdon ke sher pe sawari ki hai. ...!!!!!

Papa : bahut ziddi ho gaye ho....Har baat zidd karke manvate ho....
Chalo bahut din hue sher nahin dekha....!!!!!...
...
...
...
...
...
...
...
...
...

Iske Aage ki kahaani...

Son & papa phir circus dekhne gaye. Papa ne sabse aage wali seat ki ticket bhi le li... 😎
Lion show aaya aur chala gaya par bina kapadon ki ladki nahi aayi...Circus show khatam ho gaya...

Papa : Tumne toh kaha tha ki ek ladki bina kapdon ke aayegi?

Son : Bina kapdo ke toh sher kaha tha, ladki nahi........

I swear you will read it again

Tum Agar Kisi KiChahat Paane Ke Liye Jee RaheHo,To Apne Dil Ki Baat Use BataDo,?Q ki Zindagi "Moqa" Kam Aur DhokaZyada D...
24/06/2014

Tum Agar Kisi Ki
Chahat Paane Ke Liye Jee Rahe
Ho,
To Apne Dil Ki Baat Use Bata
Do,?
Q ki Zindagi "Moqa" Kam Aur Dhoka
Zyada Deti He....!!

04/05/2014

दिल-ए-नादान, क्यां हो गया है तुझे
दर्द सहकर भी, यूँ मुस्कुराने चला है

शीशे की तरह है, नाजुक मेरे ज़ज्बात
बिखेरकर इन्हे तू, फिर समेटने चला है

सोहबत में किसकी, रंगत बदलती रही
होश गवांकर यूँ, फिर सम्भलने चला है

ख्यालो के कारवां, लफ्ज़ो में बसने लगे
लिखकर जिन्हे तू, फिर सवाँरने चला है

एहसास के वजूद की, खुशबू शायराना
पढकर इक गज़ल, रूह महकाने चला है

दिल-ए-नादान, क्यां हो गया है तुझे
इश्क दां सफर, फिर आज़माने चला है...!!

Meri tanhai ka mujhe gila nahi,kya hua jab koi mujhe mila nahi,phir v dua karenge aapke waste,aapko wo sab mile ,jo mujh...
01/05/2014

Meri tanhai ka mujhe gila nahi,
kya hua jab koi mujhe mila nahi,
phir v dua karenge aapke waste,
aapko wo sab mile ,
jo mujhe mila nahi..

10/03/2014

किसी शायर ने खूब कहा है:
इस दौर में वफ़ा की उम्मीद क्या करते
हो?
इस दौर में वफ़ा की उम्मीद क्या करते
हो?
वो दौर और था जब;
लोग सच्चे,
घर कच्चे
और
10-15 बच्चे
हुआ
करते थे।

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Nadbai
321602

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