24/09/2023
*”आर्थिक साक्षरता अभियान!”*
*”नौकर नहीं मालिक बनो और मालिक के पहले नौकर बनो ।”*
*”अपने व्यवसाय के चालक और मालक़ बनो और अपनी नीति निर्धारित करो। चालक तथा मालक़ हमेशा जीतते है और नौकर तथा ग्राहक हमेशा हारते है।”*
*”अपने व्यवसाय के मालिक बनने का पहला पायदान यह होना चाहिए ।”*
हमारी जो समस्या है वह सार्वत्रिक जन कि समस्या हो और उसको सुलझाने का आनंद , अनुभव और आमदनी हमारे पास हो तो इसीको हमारा व्यवसाय बनाना चाहिए।
अगर हमारे पास काम का अनुभव नहीं है तो कोई बात नहीं , लेकिन कोई भी काम करने से हमको आनंद और आमदनी मिलता हो तो हम उस काम को करके शिक्षा के साथ अनुभव पा सकते है ।
किसी व्यवसाय का मालिक बनने से पहले उस व्यवसाय का नौकर बनो और वह शिकों जो आप पहले से नहीं जानते थे …..खोजी बनो । तब यह जानकारी और अनुभव ही आपको मालक बना देगी। नौकर बनने पर वेतन नहीं तो शिक्षा कितनी मिलेगी इस पर ज़ोर दो , ताकि हम मालक़ बन सके और उस व्यवसाय के मालिक़ और अधीनिस्त कर्मचारी से दोस्ताना मैत्रीपूर्ण रिश्ते बनाये रखो ताकि वह हमारा मेंटर बन जाये।
अब अपने व्यवसाय का ध्यान रखने का समय है मतलब व्यवसाय का सबक अपने काम से काम रखो पर अमल करे। अपने व्यवसाय पर जी - जान छिड़क दो और बाक़ी सबकूछ सफल होने तक भूल जाओ ….मतलब समय लगाओ तथा काम पर फ़ोकस करो और व्यवसाय को तंत्र में बदलों।
पहले सुरआत छोटे व्यवसाय , एक कदम से करो लेकिन सोच बड़ी रखे और अनुभव के साथ आगे बढ़कर बड़ा व्यवसायी बन जाओ। बड़े खेल की बड़ी तस्वीर दिखाएगी बड़े लाभ का अंतर ,अवसर यह केवल वित्तीय शिक्षा ,वित्तीय बुद्धि और वित्तीय आई क्यूँ के सोच और कर्म का खेल हो सकता है । सूचना युग में सोच - विचार ही पैसा है क्योंकि पैसों के खेल के नियम बदल गये है । लेकिन हम अब भी पुराने नियमों के अनुसार नये पैसों के साथ खेल - खेल रहे होने के कारण हम हार जाते है । अब हमको पैसे के नये नियमों और नये पूँजीवाद के साथ नये तरीक़े के साथ खेल खेलना शिकना होगा , तब हम जीत का जश्न मना सकते है।
विद्यमान सिस्टम को बदलने से ज़्यादा आसान ख़ुद को बदलना होता है और अपना सिस्टम विकसित करना अच्छा होता है ।सोच बदलो दुनिया बदले नज़र आएगी , ख़ुद को बदलो दूसरो को नहीं ……अत्त दीपो भव ….स्वाभिमानी बने रहो।
*”बिज़नेस के संसार में आप सभी का स्वागत है।क्योंकि विपुल मात्रा में पैसा होने का संसार अब खुल गया है ….अपनी आखों से नहीं तो दिमाक से देखना हितकारक होगा।”*
अज्ञान तब भी था और अब भी नज़र आता है। इसलिए अज्ञानी नहीं तो ज्ञानी बनो। अपने पैसे को बढ़ाना , पैसों की रक्षा करना , पैसों का बज़ट करना और पैसों का निवेश योजना बनाना बहुत महत्वपूर्ण वित्तीय बुद्धि है । क्योंकि हमारी अज्ञानता उनको बहुत अमीर बनाती रहेगी। हमारे पैसों का नियोजन और नियंत्रण हमारे हात में होना चाहिए। हमारे वित्तीय नियोजन में सबसे पहले नियंत्रण के साधन संसाधन , दूसरे स्थान पर विकास के साधन संसाधन और तीसरे स्थान पर वितरण के साधन संसाधन होना चाहिए। आर्थिक संगठन और अनार्थिक संगठन का मेलज़ोल , समन्वय की योजना का हिस्सा हो तो दीर्घकालिक निरंतरता और स्थिरता पैदा करने का एक बिज़नेस मॉडल विकसित हो सकता है। जिसमें चालक , मालक , नौकर और ग्राहक का हित सुनिश्चित हो जाता है।
आपका साथी
*प्रफुल देवगड़े*