09/09/2021
मायूसी कुफ्र है और मायूस लोग कैंसर के सामान है जो धीरे-धीरे आपका मनोबल खा जाते है. जो लोग ये कहते है कि मुसलमान इसलिए आज पिछड़ा हुआ है क्योंकि वो हिंदुस्तान पर मुस्लिम हुक्मरानों द्वारा किये गए 800 सालों के शासन पर गर्व करता है और कोई काम नहीं करता दरअसल ऐसे लोग हमारे दरम्यान सबसे ज्यादा मायूसी और इंतेशार फैलाते है. क्यों ना करे गर्व हम अपने गौरवशाली इतिहास पर ? क्यों ना करें हम गर्व हम उन हुक्मरानों पर जिनके लिए इंसाफ सबसे अहम था, जिन्होंने तमाम रियासतों को इकठ्ठा कर के अखंड भारत का निर्माण किया. हिन्दकुश की पहाड़ियों से लेकर सुदूर पूर्वोत्तर की पहाड़ियों तक अपना परचम फैलाया. हिमालय से लेकर मालाबार के पठारों तक ज़ुल्म का खात्मा किया. मुफ्त तालीम, मुफ्त चिकित्सा, सिंचाई, सड़क, न्याय, ज़िला, तहसीलदारी, मालगुज़ारी, बंदरगाह, आयात-निर्यात, एक मुद्रा का निज़ाम क़ायम किया. विस्तार से लिखा जाना यहां सम्भव नहीं है.
आजादी के 75 साल बाद भारतीय मुसलमानों के पास उम्मीद के सिवा बचा क्या है ? उम्मीद ये कि वो दिन जरूर आएगा जब हमारे साथ इंसाफ होगा. समाज में पहचान की बुनियाद पर होने वाला भेद-भाव खत्म होगा. हमें हमारा हक़ मिलेगा क्योंकि हमारे पुरखों ने 800 सालों तक बिना भेद-भाव के लोगों के दिलों पर राज़ किया था. ज़ालिम चाहे किसी भी धर्म के हो उनको खौफ़नाक सज़ा मिलती थी. साशन में गैर मुस्लिम ऊंचे पदों पर विराजमान थे. इसको नज़ीर बना कर अगर हम अपना सीना गर्व से चौड़ा करते है तो तुम बैलेंसवादी लोगों को क्या तकलीफ है ? हम लोग मज़लूमो के साथ इंसाफ के हिमायती है. मक़ाम और ओहदे दुनिया मे रह जाते है.
आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक शासन ब्यवस्था की जिम्मेदारी थी कि वो हर तबके के साथ न्याय करता लेकिन सवर्ण मानसिकता की देन है कि आज तालीम और तिज़ारत में मुसलमानों को उतना हिस्सा नहीं मिला जिसके वो हक़दार थे. इसके बावजूद अपनी मेहनत और काबिलियत से अपनी अलग पहचान बनाई है. कारीगरी, दस्तकारी, मज़दूरी, सिलाई, बुनाई, कढ़ाई जैसे लघु एवं कुटीर उद्योगों में महारत हासिल किया है. मायूसी फैलाने वाले प्रोपेगैंडा बाजों से आप लोग दूर रहिए. इनका काम सिस्टम को जस्टिफाई करना और देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के साथ होने वाले पक्षपात के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराना है.
अब कहाँ ढूंढने जाओगे हमारे कातिल
आप तो क़त्ल का इल्ज़ाम हमी पर रख दो