Rittu Dhingra Astrologer and Tarot Reader

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Hey friends, Now you can know about you, your friends, family,  through numerology and little bit of my observation...  ...
18/07/2017

Hey friends,
Now you can know about you, your friends, family, through numerology and little bit of my observation...
Each no. is influenced by a planet which effects our life the most are given as below:-
1 Sun ☀️
People who born in dates 1,10,19,28
Strong physical appearance, leadership quality, loyal towards others, passionate towards their goals.
Father plays a significant role in their life and this may vary person to person according to the placement of sun in their birth chart.
They appear to be good athlete, CEO's, politicians, highly posted government officials.
ADVISE :- They have to control their egoistic nature.
**
2 Moon 🌙
People who born on 2,11,20, 29
They are emotional, beautiful with tiny face, possessive in nature and moody.
They are highly imaginative people therefore they do there work very creatively. They have many friends.
There professions are related to their imaginations like dance, painting, etc
ADVISE :- Do one task at a time.👆🏻
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3 Jupiter (guru)
People born on dates 3,12, 21,30
They are much caring about their family values and social image.Good adviser.They believe on logical concepts only. They are good in paper work.
There prosperity, name, fame, reputation increase as their age grows.
ADIVSE :-They should include fruits in their daily diet.
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4 Rahu
People born on dates 4, 13, 22, 31
They are computer lover and intelligent people. They are curious by nature. They have very good intuition power.
They manipulate people through their facial expressions.
They seems to be scientists, researchers, software engineers and computer technicians.
ADVISE :- Always keep in touch with their Gurus or teachers.
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5 Mercury
People born on dates 5,14,23
They are luckiest in the sense of success in their careers. They get successful at early age. They are very entertaining, beautiful, talkative and mimicry artist. They have a lot of informations related to their profession. They like do party hard.
They seems to be mimicry artists, party planners, singers, accountants, businessmen, stock marketer.
ADVISE :- Make sure your teeth should be clean always.

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6 Venus
People born on dates 6,15,24
They have very attractive face and they are choosy in food items. They are brandistic . Their sense of smelling is much more than other people. They love deodorants , perfumes ,etc and they travel a lot.
ADVISE :- They should invest in gold and property as their savings.
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7 Ketu
People born on. 7, 16,25
Full of life people but always empty from inside. They are highly spiritual. They love to go to isolated spiritual places. They are deep thinkers (like novelists, author, etc) They follow only their rules throughout their life and they don't like advises.
ADVISE :- They should keep in touch with those people who inspire and motivate them.
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8 Saturn
People who born dates on 8,17,26
As compare to others, no. 8 people have more struggle in their life.
They are very close to their mother. They are misunderstood many times. They face many ups n downs in their life but after the age of 36-40, their life settles downs in good way.
They turned out to judges, philosophers, social workers, etc
ADVISE :- They should always make themselves busy.
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9 Mars
People born on dates 9, 18, 27
They are very caring, angry 😡, hardworking and stubborn by nature.
They believe to change their situation by their own efforts because mars is all about energy. In some cases their brother play main roles in their life, good or bad depends upon the placement of mars in their birth charts.
ADVISE :- Try to control the anger.
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Note:- This is very basic detail about the person and their nature.
It can be changed because as per other planet's influences in their birth charts...
Thanks 🙏

😇🙏🙏
04/02/2017

😇🙏🙏

Positivity is everywhere,feel it 😇

 #शनि का  #राशिपरिवर्तन (26 January 2017)गुरुवार दिनांक 26.01.17 को रात 09:34 पर  #शनि वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश कर...
25/01/2017

#शनि का #राशिपरिवर्तन (26 January 2017)
गुरुवार दिनांक 26.01.17 को रात 09:34 पर #शनि वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के इस राशि परिवर्तन से मकर राशि हेतु शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी। वृश्चिक राशि हेतु यह अंतिम चरण की साढ़ेसाती होगी व तुला राशि साढ़ेसाती से मुक्त होंगे। शनि के धनु में आते ही कन्या राशि हेतु लघु कल्याणि शुरू होगी व वृष राशि हेतु अष्ठम शनि की ढ्य्या शुरू होगी। शनि धनु राशि में पहले केतु के #नक्षत्र मूल में आकर बाद में शुक्र व सूर्य के नक्षत्र में भ्रमण करेंगे।

शनि का #धनु में #गोचर का #राशियों पर प्रभाव

#मेष
मेष राशि का स्वामी मंगल शनि का मित्र ग्रह है। पिछले ढ़ाई वर्षों से मेष जातकों पर शनि की ढैय्या चल रही थी। इसी कारण हो सकता है इन्हें पिछले समय में अपने जीवन में काफी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हों। नव वर्ष में आपकी शनि की ढ़ैय्या समाप्त हो रही है। अपने शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, धन, ऋण आदि से संबंधित जो समस्याएं लंबे समय से आपको चिंतित कर रही हैं उनसे निजात मिलने की प्रबल संभावना है। अचानक से लाभ प्राप्ति के संयोग भी आपके लिये बन सकते हैं। अत: आपके लिये शनि का राशि परिवर्तन काफी सकारात्मक कहा जा सकता है।
#वृषभ
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है जो कि शनि का मित्र ग्रह है। 2017 में वृषभ जातकों पर शनि की ढ़ैय्या शुरु होगी जो कि शारीरिक-मानसिक, धन व ऋण संबंधी दुष्चिंताओं को बढ़ाने वाली मानी जाती है। आपके बने बनाये कार्यों में भी अचानक बाधाएं आ सकती हैं। हो सकता है अत्यधिक कार्यदबाव या कार्यस्थल पर बढ़ती हुई जिम्मेदारियां आपको कार्य छोड़ने के लिये मजबूर करें। आपके लिये सलाह है कि अपने संयम को बनाये रखें व धैर्य और ईमानदारी के साथ कार्य करते हुए परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करें। हर शनिवार शनिदेव का पूजन कर आप हालातों को सामान्य बना सकते हैं।
#मिथुन
मिथुन राशि का स्वामी बुध है जो कि शनि का सम माना जाता है, आपकी राशि से शनि का परिवर्तन सातवां होगा। शनि की दृष्टि रहने के कारण आपको अपने से बड़े व्यक्ति के क्रोध का शिकार होना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र स्थिरता आ सकती है। शारीरिक रूप से भी अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। संयम और विवेक से ही आप अपनी परेशानियों व परिस्थितियों पर काबू पा सकते हैं। आवेश में आकर जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें किसी भी प्रकार का जोख़िम उठाने से पहले अच्छे से विचार विमर्श करें। शनिदेव की पूजा करें राहत मिल सकती है।
#कर्क
कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है जोकि शत्रु ग्रह है। आपकी राशि से शनि का परिवर्तन छठे घर में होगा जो कि शत्रु और रोग का घर माना जाता है। लंबे समय से चले आ रहे रोग, शत्रु, व बाधाएं दूर होने के आसार हैं। शनि की दृष्टि में न आने के कारण आपके लिये शनि का परिवर्तन सुख-समृद्धि व उन्नति देने वाला रहने की संभावना है।
#सिंह
सिंह राशि का स्वामी सूर्य है जो कि शनि का शत्रु ग्रह है। पिछले ढ़ाई सालों से आपकी राशि पर शनि की ढ़ैय्या चल रही थी जिसके कारण हो सकता है आपका समय कठिनाइयों भरा रहा हो। लेकिन शनि के परिवर्तन के साथ ही शनि की ढ़ैय्या से भी आपको मुक्ति मिलेगी जिसके कारण शनि का परिवर्तन आपके लिये लाभप्रद कहा जा सकता है। लंबे समय से बनी हुई चिंताए, रोग व ऋण आदि से मुक्ति मिल सकती है।
#कन्या
कन्या राशि का स्वामी बुध है। जिसके साथ शनि का संबंध समय रहता है। आपकी राशि में शनि की ढ़ैय्या प्रवेश कर रही है जो कि चिंताजनक हो सकती है। शुरुआती कुछ समय धन हानि के योग बन सकते हैं। इस कारण आपके सुख-शांति भरे जीवन में कुछ खलल पड़ सकता है। समय के साथ-साथ उतार-चढ़ावों का सामना आपको करना पड़ सकता है। शारीरिक रूप से भी अपनी सेहत के प्रति सचेत रहें। शनि देव की पूजा आपके लिये अनिवार्य है।
#तुला
तुला राशि का स्वामी शुक्र है जो कि शनि के मित्र ग्रह हैं। आपकी राशि से शनि की साढ़े साती समाप्त हो रही है। शनि का परिवर्तन होने से पिछले सात सालों में परिश्रम, संयम, धैर्य का आपको मन अनुसार फल मिलने का योग है। आपके लिये शनि का राशि परिवर्तन काफी सुखद रहने के आसार हैं। व्यापार, कार्य, शिक्षा आदि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता आपके निकट रहने के आसार हैं। थोड़े से प्रयासों से आप इसे हथिया सकते हैं।
#वृश्चिक
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है जिसके साथ शनि का मित्रवत संबंध माना जाता है। आपकी राशि से शनि का द्वितीय चरण समाप्त हो रहा है। आपकी राशि से ही शनि परिवर्तन कर रहे हैं जिसे ज्योतिष शास्त्र में उतर्राध दशा कहा जाता है। लंबे समय से अदालती मामलों, कार्यक्षेत्र, धन आदि में आ रही बाधाएं भी दूर होने के आसार बन सकते हैं। नये कार्यक्षेत्र, नये व्यवसाय के भी योग हैं आपके लिये शनि का परिवर्तन शुभ कहा जा सकता है।
#धनु
धनु राशि का स्वामी बृहस्पति है जिनके साथ शनि का संबंध सम है। आपकी राशि में ही शनि प्रवेश कर रहे हैं। पिछले ढ़ाई सालों से चली आ रही कठिनाइयां कुछ कम हो सकती हैं। हृद्य, श्वास संबंधी रोग होने की भी संभावना हो सकती है। अपने खान-पान का खास तौर पर ध्यान रखें। राशि परिवर्तन के कुछ समय बाद शनि वक्री भी होंगे लेन-देन के मामलों में भी विशेष सतर्कता बरतें। आपके लिये शनि का राशि परिवर्तन मध्यम कहा जा सकता है।
#मकर
मकर राशि के स्वामी स्वंय शनि है लेकिन राशि परिवर्तन के कारण मकर जातकों पर शनि की साढ़ेसाती शुरु हो रही है। इस कारण मकर जातकों को कार्यक्षेत्र से लेकर जीवन के विभिन्न पहलुओं में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि स्वाराशि होने के कारण इसका फल आपके लिये मध्यम मिलने के आसार हैं। यदि आप चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते हैं तो आने वाले समय में आप सफलता की मिसाल कायम कर सकते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें खासकर सिर आदि में चोट लगने या दर्द रहने के योग बन रहे हैं। शनिदेव की पूजा अर्चना करना आपके लिये लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
#कुंभ
कुंभ राशि का स्वामी भी स्वयं शनि है। आपकी राशि से शनि का परिवर्तन ग्यारहवें भाव में हो रहा है जो कि लाभ का घर माना जाता है। विदेश जाने के इच्छुक जातकों के लिये मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आपके लिये धन लाभ के भी योग बन रहे हैं। शनि का परिवर्तन आपके लिये हर क्षेत्र में लाभप्रद रहने के आसार हैं। ईमानदारी से अच्छे समय का उपयोग करें आने वाले समय में पूर्ण लाभ की प्राप्ति हो सकती है।
#मीन
मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं। इनके साथ शनि का मधुर संबंध माना जाता है। आपकी राशि से शनि का परिवर्तन दसवां होगा जोकि आपके कार्यक्षेत्र को दर्शाता है। कार्यक्षेत्र में सफलताएं मिलने का योग बने रहने के आसार हैं। जो जातक पिछले कुछ समय से रोजगार पाने के लिये प्रयासरत हैं उन्हें इच्छित क्षेत्र में रोजगार पाने के सुअवसर प्राप्त हो सकते हैं। आपकी राशि में शनि का परिवर्तन शुभ व खुशियां प्रदान करने वाला रह सकता है।

#शनिदेव से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें (Facts of Shani Dev)

शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है।
शनि देव का वाहन गिद्ध, कुत्ता, भैंस आदि हैं।
शनिवार को तेल, काले तिल, काले कपड़े आदि दान करने से शनि देव प्रसन्न रहते हैं।
मान्यता है कि शनि देव की अपने #पिता #सूर्यदेव से अच्छे रिश्ते नहीं हैं।
एक कथानुसार हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तभी से हनुमान जी की आराधना करने वाले जातकों को शनि देव नहीं सताते।
शनि देव की गति मंद यानि बेहद धीमी है। इसी कारण एक राशि में वह करीब #साढ़ेसात #साल तक रहते हैं।

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http://nakshtram.com/ #दीपावली के पर्व पर सभी लोग अपने घर और दफ्तर की साफ-सफाई कर  #मांलक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां कर...
30/10/2016

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#दीपावली के पर्व पर सभी लोग अपने घर और दफ्तर की साफ-सफाई कर #मांलक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां करते हैं। इस पर्व पर पूजा पाठ का खास महत्व होता है। तो ऐसे में मुहूर्त का भी खास महत्व होता है। क्योंकि #सहीमुहूर्त पर पूजा पाठ कर आप इस खास मौके का सही लाभ उठा सकते हैं। इस साल विक्रम संवत् 2073 में कार्तिक कृष्ण #अमावस्या रविवार #30अक्टूबर को सूरज उगने से पहले ही शुरू होकर रात 12 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। स्वाती नक्षत्र भी सुबह 09 बजकर 02 मिनट से शुरू होकर पूरी रात भर रहेगा और अगले दिन दोपहर 11 बजकर 50 मिनट पर खत्म होगी। रविवार में लुम्बक योग श्रेष्ठ है। इसलिए दीपावली पर्व रविवार 30 अक्टूबर 2016 को पूरे विश्व मे मनाया जाएगा।
#लक्ष्मी #पूजा #मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat): शाम 06:27 से लेकर रात को 08: 09 तक
महानिशा काल पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:38 से लेकर रात को 12:30 तक
दिवाली पूजा #विधि (Diwali Puja Vidhi)

घर में शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और #गणेशजी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर तथा चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए। इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए। गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इनके साथ- साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, काली मां और कुबेर देव की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय 11 छोटे दीप तथा एक बड़ा दीप जलाना चाहिए।
सभी छोटे दीप को घर के चौखट, खिड़कियों व छतों पर जलाकर रखना चाहिए तथा बड़े दीपक को रात पर जलता हुआ घर के पूजा स्थान पर रख देना चाहिए।

इसके बाद लक्ष्मी जी के आगमन का ध्यान करते हुए ‘श्री लक्ष्मी देवी दें। स्वागतम्’ मंत्र का उच्चारण कर लक्ष्मी जी का स्वागत करें। इसके बाद प्रसाद के तौर पर चढ़ाई गई मिठाई को परिवार में बाँटे।

#लक्ष्मीमंत्र (Laxmi Mantra in Hindi)

लक्ष्मी जी की पूजा के समय निम्न मंत्र का लगातार उच्चारण करते रहना चाहिए:
ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥







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http://nakshtram.com           🙏 #नरकचतुर्दशी  कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चौदस के दिन मनाया जाता हैं | इसे नरक मुक्ति का ...
28/10/2016

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#नरकचतुर्दशी कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चौदस के दिन मनाया जाता हैं | इसे नरक मुक्ति का त्यौहार माना जाता हैं | इस वर्ष 2016 में यह पर्व #29अक्टूबर शनिवार के दिन मनाया जायेगा | नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस चतुर्दशी तिथि को #छोटीदीपावाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय #दीपदान का बड़ा महत्व है।
पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था।
नरकासुर का वध करके #श्रीकृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया। इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।
#नरकासुर का वध और 16 हजार कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतु्र्दशी के दिन दीनदान और पूजा का विधान है।

#नरकचतुर्दशी पूजा #विधि (Narak chaturdashi puja vidhi)
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान का महत्व होता हैं | इस दिन स्नान करते वक्त तिल एवम तेल से नहाया जाता है, इसके साथ नहाने के बाद सूर्य देव को अर्ध्य अर्पित करते हैं |
इस शरीर पर चंदन लेप लगाकर स्नान किया जाता हैं एवम भगवान कृष्ण की उपासना की जाती हैं |
रात्रि के समय घर की दहलीज पर दीप लगाये जाते हैं एवम यमराज की पूजा भी की जाती हैं |

इस दिन हनुमान जी की अर्चना भी की जाती हैं |
एक मान्यता हैं कि इस दिन कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चौदस के दिन हनुमान जी ने माता अंजना के गर्भ से जन्म लिया था | इस प्रकार इस दिन दुखों एवम कष्टों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की भक्ति की जाती हैं जिसमे कई लोग हनुमान चालीसा, हनुमानअष्टक जैसे पाठ करते हैं | कहते हैं कि आज के दिन #हनुमानजयंती होती हैं | यह उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता हैं | इस प्रकार देश में दो बार हनुमान जयंती का अवसर मनाया जाता हैं | एक बार चैत्र की पूर्णिमा और दूसरी बार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चौदस के दिन |

हिन्दू समाज में  #धनतेरस सुख-समृद्धि,  #यश और  #वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता  #कुबेर और आयुर्वेद के देव...
27/10/2016

हिन्दू समाज में #धनतेरस सुख-समृद्धि, #यश और #वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता #कुबेर और आयुर्वेद के देव #धन्वंतरि की पूजा का बड़ा महत्त्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में स्कन्द पुराण में लिखा है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है। साल 2016 में धनतेरस का त्यौहार #28अक्टूबर को मनाया जाएगा।
धनतेरस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
इस बार धनतेरस पूजा के लिए 28 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक #मुहूर्त है। यह मुहूर्त 45 मिनट का है। वहीं इस दिन प्रदोष काल 5 बजकर 35 मिनट से 8 बजकर 11 मिनट तक हैं। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 27 अक्टूबर 2016 को शाम 4बजकर 15 मिनट से हो जाएगी। #लक्ष्मीपूजन प्रदोष काल के दौरान होना चाहिए। प्रदोष काल की अवधि 2 घंटे 24 मिनट की है
धनतरेस पर धनवंतरी और लक्ष्मी गणेश की पूजा करने के लिए-:सबसे पहले एक लकड़ी का पट्टा लें और उस पर स्वास्तिक का निशान बना लें।
इसके बाद इस पर एक तेल का दिया जला कर रख दें
दिये के आस पास तीन बार गंगा जल छिड़कें
इसके बाद दीपक पर रोली का तिलक लगाएं और साथ चावल का भी तिलक लगाएं
इसके बाद दीपक में थोड़ी सी मिठाई डालकर मीठे का भोग लगाएं
फिर दीपक में 1 रुपया रखें। रुपए चढ़ाकर देवी लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पण करें
इसके बाद दीपक को प्रणाम करें और आशीर्वाद लें और परिवार के लोगों से भी आशीर्वाद लेने को कहें।
इसके बाद यह दिया अपने घर के मुख्य द्वार पर रख दें, ध्यान रखे कि दिया दक्षिण दिशा की ओर रखा हो।
दीपावालीके पहले धनतेरस पर #गजकेसरी का योग बन रहा है। इस दिन चंद्र और गुरु दोनों ही कन्या राशि में भ्रमण करेंगे।चंद्र और गुरु जब एक ही राशि में होते है,तो गजकेसरी का योग बनता है। इसलिए इस बार की दिवाली पर धनतेरस का दिन विशेष लाभदायी रहेगा। ऐसे अवसर पर नवीन वस्त्राभूषण,वाहन खरीदने के श्रेष्ठ बनता है।
धनतेरस के दिन #खरीददारी (Shoping on Dhanteras)
नई चीजों के शुभ आगमन के इस पर्व में मुख्य रूप से नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है। आस्थावान भक्तों के अनुसार चूंकि जन्म के समय धन्वंतरि जी के हाथों में अमृत का कलश था, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना अति शुभ होता है। विशेषकर #पीतल के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।

#धनतेरसकथा (Dhanteras Katha in Hindi)
कहा जाता है कि इसी दिन यमराज से राजा हिम के पुत्र की रक्षा उसकी पत्नी ने किया था, जिस कारण दीपावली से दो दिन पहले मनाए जाने वाले ऐश्वर्य का त्यौहार धनतेरस पर सायंकाल को यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। इस दिन को यमदीप दान भी कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है और पूरा परिवार स्वस्थ रहता है। इस दिन घरों को साफ-सफाई, लीप-पोत कर स्वच्छ और पवित्र बनाया जाता है और फिर शाम के समय रंगोली बना दीपक जलाकर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है।

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 #अहोईअष्टमी व्रतरविवार यानी 23 अक्टूबर 2016 के दिन है अहोई अष्टमी का व्रत अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत ...
22/10/2016

#अहोईअष्टमी व्रत
रविवार यानी 23 अक्टूबर 2016 के दिन है अहोई अष्टमी का व्रत अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत #कार्तिकमास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जिन स्त्रियों की संतान हैं उनके द्वारा यह व्रत किया जाता है। अहोई अष्टमी का पर्व मुख्य रुप से अपनी #संतानकीलंबीआयु की कामना के लिए किया जाता है। अहोई अष्टमी व्रत संक्षिप्त विधि #संतानकीशुभता बनाए रखने के लिए क्योकि यह उपवास किया जाता है। इसलिए इसे केवल माताएं ही करती है। मान्यता के अनुसार इस दिन से दीपावली महोत्सव का आरंभ माना जाता है। अहोई अष्टमी के #उपवास को करने वाली महिलाएं इस दिन प्रात:काल में उठकर, एक कोरे करवे (मिट्टी का बर्तन) में पानी भर कर माता अहोई की पूजा करती है। पूरे दिन बिना कुछ खाए व्रत किया जाता है। शाम में में माता को फलों का भोग लगाकर, फिर से पूजन किया जाता है तथा सांयकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई का पूजन किया जाता है। तारों को करवे से अर्ध्य दिया जाता है। और गेरूवे रंग से दीवार पर अहोई माता की आकृति बनाई जाती है,जिसका सांयकाल में पूजन किया जाता है। कुछ मिठाई बनाकर, माता को भोग लगा कर संतान के हाथ से पानी पीकर व्रत का समापन किया जाता है। अहोई व्रत के दिन व्रत करने वाली माताएं प्रात: उठकर स्नान करे, और पूजा पाठ करके अपनी संतान की दीर्घायु व सुखमय जीवन हेतू कामना करती है। और माता अहोई से प्रार्थना करती है, 'हे माता मैं अपनी संतान की उन्नति, शुभता और आयु वृ्द्धि के लिये व्रत कर रही हूं, इस व्रत को पूरा करने की आप मुझे शक्ति दें'। यह कर कर #व्रत का संकल्प लें। एक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से संतान की आयु में वृ्द्धि, स्वास्थय और सुख प्राप्त होता है। साथ ही माता पार्वती की पूजा भी इसके साथ-साथ की जाती है। क्योंकि माता पार्वती भी संतान की रक्षा करने वाली माता कही गई है। उपवास करने वाली स्त्रियों को व्रत के दिन क्रोध करने से बचना चाहिए। और उपवास के दिन मन में बुरा विचार लाने से व्रत के पुन्य फलों में कमी होती है. इसके साथ ही व्रत वाले दिन, दिन की अवधि में सोना नहीं चाहिए। अहोई अष्टमी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 6 बजकर 57 मिनट तक है। तारों का उदय शाम 6:08 मिनट पर है अहोई माता की पूजा करने के लिये अहोई माता का चित्र गेरूवे रंग से मनाया जाता है। इस चित्र में माता, सेह और उसके सात पुत्रों को अंकित किया जाता है। संध्या काल में इन चित्रों की पूजा की जाती है। सायंकाल की पूजा करने के बाद अहोई माता की कथा का श्रवण किया जाता है। तारे निकलने पर इस व्रत का समापन किया जाता है। तारों को करवे से अर्ध्य दिया जाता है। और तारों की आरती उतारी जाती है। इसके पश्चात संतान से जल ग्रहण कर, व्रत का समापन किया जाता है!

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 #कार्तिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाने वाला  #करवा चौथ का व्रत 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 100 वर्षों मे...
18/10/2016

#कार्तिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाने वाला #करवा चौथ का व्रत 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 100 वर्षों में पहली बार करवा चौथ पर 4 शुभ संयोग बन रहे हैं । इस बार यह पर्व बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में आ रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार चंद्रमा #रोहिणी नक्षत्र में उदय होगा और अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेगा वहीं बुध अपनी कन्या राशि में रहेगा। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्णजी की रोहिणी #नक्षत्र भी है। बुधवार गणेशजी और कृष्णजी दोनों का दिन है।
ये अद्भुत संयोग #करवाचौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है। इसे करक करवा चौथ भी कहते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार अद्भुत संयोग तो कई बार बनते है लेकिन इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी का रोहिणी नक्षत्र भी है। यह अद्भुत संयोग करवाचौथ व्रत पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख प्रदान करेगा।

करवा चौथ का व्रत #अखण्ड #सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं करेंगी। करवा चौथ महिलाओं के लिए इस बार खास रहेगी, चंद्रोदय रात 8.55 पर रोहिणी नक्षत्र में होगा। शास्त्रों के अनुसार ज्योतिषशास्त्र रोहिणी नक्षत्र में #चंद्रोदय होने से पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा और घर में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा की पूजा से स्त्रियों के रोग एवं शोक दूर होंगे। इस दिन किए गए शुभ कामों का पूरा फल मिलेगा।
व्रत की विधि
सुबह स्नान कर अपने पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य व अखंड सौभाग्य के लिए संकल्प लें। बिना कुछ खाए-पिए रहें। शाम को पूजन स्थान पर एक साफ लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय व भगवान श्रीगणेश की स्थापना करें। पूजन स्थान पर मिट्टी का करवा भी रखें। इस करवे में थोड़ा धान व एक रुपए का सिक्का रखें। इसके ऊपर लाल कपड़ा रखें।
इसके बाद सभी देवताओं का पूजन कर लड्डुओं का भोग लगाएं। भगवान श्रीगणेश की आरती करें। जब #चंद्रमाउदय हो जाए तो चंद्रमा का पूजन कर अर्घ दें। इसके बाद अपने पति के चरण छुएं व उनके मस्तक पर तिलक लगाएं। पति की माता अर्थात अपनी सास को अपना करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि सास न हों तो परिवार की किसी अन्य सुहा​​गिन महिला को करवा भेंट करें।

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