25/04/2026
हाजी शबी अहमद साहब अमरोहा की वो मोअतबर शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत की भलाई और अल्लाह के घर की जियारत करने वालों की राह आसान बनाने में वक्फ कर दी।
आज आपकी उम्र एक दराज मरहले पर है और जिस्मानी तौर पर काफी कमजोरी भी आ चुकी है, लेकिन आपके हौसले आज भी बुलंद हैं। सदर हज कमेटी घेर मुनाफ अमरोहा के तौर पर आपने कसीर मुद्दत तक जो खिदमत अंजाम दी है, उसे कभी फरामोश नहीं किया जा सकता। आपने सिर्फ फॉर्म भरने का काम नहीं किया, बल्कि अल्लाह के मेहमानों के लिए एक रहनुमा और मददगार बनकर उनके सफर की हर मुश्किल को आसानी में तब्दील किया।
आज भी अमरोहा की कोई भी महफिल आपके जिक्र के बिना अधूरी मानी जाती है। आपकी सादगी और लोगों से जुड़ाव का आलम यह है कि बेपनाह कमजोरी के बावजूद आप हर महफिल और इज्तिमा की रौनक बनते हैं। चाहे दूसरों के कांधो का सहारा लेना पड़े,लेकिन आप अपनों के बीच पहुंचने का कोई मौका नहीं छोड़ते,आपकी मौजूदगी महफिल में एक बुजुर्ग के साये की तरह सुकून और बरकत पैदा करती है,
हाजी साहब का वजूद हम सबके लिए एक सबक है कि उम्र का तकाज़ा चाहे जो भी हो,अगर दिल में खिदमत का जज्बा हो तो इंसान ता-उम्र समाज के लिए रोशनी का मीनार बना रहता है। अमरोहा की अवाम आपके इस जज्बे को सलाम करती हैं और आपके साये की सलामती के लिए दुआगो हैं।
अल्लाह ताला हाजी साहब को सेहत और आफ़ियत अता फरमाए और आपका साया हम सब पर सदा क़ायम व दायम रहें। आमीन।