12/01/2025
*•तिलका मांझी* को 13 जनवरी, 1785 को भागलपुर, बिहार, भारत में फाँसी दी गई थी!
_संसाधनों की कमी के कारण तिलका मांझी की सेना की हार के बाद उन्हें पकड़ लिया गया और भागलपुर के चौराहे पर एक बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी गई।
_भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, जिस स्थान पर उन्हें फांसी दी गई थी, वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की गई तथा उनके सम्मान में भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय कर दिया गया।
_झारखंड के दुमका में भी एक अन्य प्रतिमा स्थापित की गई।
_तिलका मांझी 1771 से 1784 तक अंग्रेजों और उनके सहयोगियों के खिलाफ संथाल विद्रोह के नेता थे।
_उन्होंने अंग्रेजों, स्थानीय साहूकारों और सामंतों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
_वर्ष 1784 को अंग्रेजों के खिलाफ पहला सशस्त्र विद्रोह माना जाता है।
_तिलका मांझी उर्फ जबरा पहाड़िया जिन्होंने राजमहल, झारखंड की पहाड़ियों पर ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया।
_आज उनके शहादत दिवस पर उन्हे क्रान्तिकारी नमन व श्रद्धांजलि।
🌷🙏🇮🇳धीरु