27/07/2022
*वन विभाग जन हानि की प्रतीक्षा कर रहा है, और तभी क्षेत्र में पिंजरे लगायेंगे,वाह रे वन विभाग के अधिकारियों को जो राजधानी में बैठे हुए हैं ए सी के नीचे बैठ कर जनहानि की प्रतीक्षा कर रहा है!!! ऐसे अधिकारियो को सैल्यूट तो बनता है, ये नहीं कि कौमिनल वन पंचायत में लैंटाना अमेरिकाना कूरी झाड़ी उन्मूलन के लिए वजट रिलीज करें, और वन क्षेत्र में जालीदार सुरक्षा घेरा बंदी करें, रास्तों के दोनों ओर 50-50 मीटर तक झाड़ियों की सफाई की जाये, एक जन सामान्य को भाग्य के भरोसे छोड़ कर इति श्री कर लें, यही वन विभाग की जिम्मेदारी है जंगली जानवरों व मानव जाति का संघर्ष चल रहा है तो वन विभाग को उपाय नहीं सूझ रहा है, जबकि उपाय है लेकिन करना नहीं है , लेकिन पहाड़ों के गांवो में रहने वाले मजबूर गांव वाशियो को एकजुट होकर अपने निकटतम क्षेत्र से जंगली जानवरों के छुपने के स्थान झाड़ियों की सफाई करनी होगी तभी सुरक्षित रह सकते हैं, सरकारों और वन विभाग के भरोसे नहीं रहना चाहिए, और वैज्ञानिको से भी निवेदन है कि जब सब प्रकार के वैज्ञानिक युग में यंत्र बन गये है तो मानव जाति सुरक्षा हेतु ऐसा हेलमेट तैयार करें, जो मनुष्य के अतिरिक्त किसी भी जीव जंतु के 50-100 मीटर निकट होने पर सेंसर द्वारा अलार्म बजा दे, जैसे वाहन दुर्घटना ग्रस्त होने पर एअर बैग खुल जाते हैं वैसे ही हेलमेट सक्रिय होकर मनुष्य की गर्दन तक हेलमेट खुल जाये, क्योंकि बाघ गुलदार तेंदुआ भालू मनुष्य के गर्दन पर वार करके ही शिकार बनाता है, तो ऐसा तकनीकी हेलमेट आने पर जंगली जानवर आसानी से मनुष्य का शिकार नहीं कर पायेगा, साथ ही आत्मरक्षा हेतु लाइसेंसी बंदूक का लाइसेंस दिया जाये ताकि 50-100 मीटर की दूरी तक मनुष्य अपना बचाव कर सकें, रास्ते में सौर ऊर्जा लाइट हो,साफ सफाई बेहतर हो तभी बचाव संभव है, वरना कब कौन जंगली जानवरों का शिकार बनेगा कोई पता नहीं, और अन्य लोग नैशनल हाइवे जाम कर इति श्री कर लेंगे, और आम आदमी जंगली जानवरों का आसान शिकार बनता रहेगा, फिर ना भगवान बचायेगा,ना अल्लाह*