07/08/2026
हमारी हकीकत अब जनता के सामने आ गई मोटा भाई
झोला उठाने कर भागने का समय आ गया
जरूर पढ़े और विचार करे
2019, जब कश्मीर से 370 हटने की चर्चा गर्म थी, संसद में बिल आने वाला था, उसी समय कश्मीर के मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से प्रतिनिधिमंडल के रूप में लगातार मुलाकातें कीं, डिमांड थी कि 370 या 35A हटाना गलत होगा... परिणामस्वरूप बिल हल्का तो कर ही दिया गया, कश्मीरी और भारत के मुस्लिमों को खुश करने के लिए बैकडोर से नई डोमिसाइल पालिसी लागू कर दी गई, जिसमे कश्मीर में बसने और ज़मीन खरीदने के लिए कश्मीर में 15 वर्ष के निवास की शर्त लगा दी गई... मामला फिर वहीं लौट आया... कश्मीर जैसा 370 के समय था, आज भी वैसा ही है !
लोग समझते हैं कि संसद में कानून के बाद भारत से तीन तलाक खत्म हो गया, नहीं जनाब, सिर्फ एक बैठक में तीन बार तलाक बोल देने की इस्लामी रबायत (तलाक़े विद्दत) खत्म हुई है, अब भी एक माह के अंतर से तीन बार तलाक (मोबाइल, व्हाट्सएप और ईमेल पर भी तलाक सम्भव है) का इस्लामी कानून (तलाक ए एहसन) भारत मे नाफ़िज़ है ! इसके लिए मुल्ले मौलवियों ने देश के केंद्रीय नेतृत्व को अपने तर्कों से सहमत कर लिया...
वक्फ बोर्ड अमेंडमेंट कानून में तो हद ही हो गई, मुस्लिमों को खुश करने के बिल को प्रवर कमेटी को भेज दिया गया, मुस्लिमों के दर्जनों शिष्टमंडलों ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, प्रवर कमेटी के चैयरमैन जगदंबिका पाल से अनेकोनेक मीटिंगे की ! हुआ वही जो मुसलमान चाहते थे... उम्मीद पोर्टल खुल गया... सैकड़ों नई संपत्तियां वक्फ संपत्तियों में शामिल हो गईं, उम्मीद पोर्टल में वक्फ संपत्ति रजिस्टर कराने हेतु प्रारम्भ में 6 महीने दिए गए... लेकिन मुसलमानों की मांग पर इस अवधि को बढ़ा कर डेड़ वर्ष कर दिया गया... स्याह भी सफेद हो गया... उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति एप्रूव करने वालों ने बगैर मुतबल्ली वाली अनेक संपत्तियां एप्रूव कर दीं !! वक्फ बोर्ड की सबसे घातक धारा Wakf By Use आज भी मान्य है... हज़ारों गांवों-शहरों में कब्रिस्तान इत्यादि तो छोड़िए... उन स्थानों को भी हड़प लिया गया कि यहां ताजिया रखा जाता था/है .... नवाब की बकरियां चरती थीं...
देश मे अंग्रेजों का शासन था, हर शहर में सिविल लाइंस और कैंट हैं, जहां स्कूलों, चर्चो, कब्रिस्तानों के नाम पर लाखों एकड़ प्राईम ज़मीन ईसाइयों को फ्री में 99 वर्ष की लीज पर दे दी गई !! ईसाइयों और उनकी संस्थाओं का प्रभाव और कार्यशीलता देखिये... 99 वर्ष कब के समाप्त हो गए... ईसाइयों से न कोई ज़मीन वापस ली गई, न कोई नया लैंड एग्रीमेंट किया गया और न सरकार ने पूरे देश मे कहीं ईसाइयों से किराया लेना शुरू किया ! यह ईसाइयों के सरकार के साथ मेल जोल और शिष्टमंडलों से मुलाकातों का नतीजा है...
ऐसे इस देश मे सैकड़ों केस हैं, गुजरात के एक मुख्यमंत्री ने... ज़फ़र सरेशवाला के निवेदन पर हाईकोर्ट द्वारा सरकारी जमीन पर बने एक मदरसें को तोड़ने के आदेश के बाद आखिरी मिनट पर बुलडोजरों को रोक दिया था !
अब यही सब कुछ FCRA अमेंडमेंट (विदेशी फंडिंग) के प्रस्तावित कानूनों को लेकर हो रहा है, लगातार ईसाइयों के प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री इत्यादि से मिल रहे हैं... ईसाइयों ने अमेरिकी सरकार के माध्यम से भारत सरकार को दवाब में लिया है, #विदेशी_फंडिंग ही भारत मे करोड़ों हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए ज़िम्मेदार है ! FCRA कानून का भविष्य अधर में लटका हुआ है, वर्तमान सत्र में इस बिल को Introduce होना था... ईसाइयों और मोमिनों ने सम्भवतः इस बिल पर ग्रहण लगा दिया है...
हम हिंदुओं ने व्यक्तिपूजा, राधे-राधे... षटकर्मों और भाँति भांति प्रकार के मूर्खतापूर्ण कृत्यों से ज़्यादा कुछ नहीं किया है... हमें मुसलमानों और ईसाइयों से बहुत कुछ सीखना है...