03/10/2024
Knowledge is power
एक बार अलवर के महाराजा जयसिंह इंग्लैंड गए थे वहां लंडन में रहने के दौरान एक शाम को महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में टहलने को निकले थे तब उन्होंने वहां रोल्स रॉयस कंपनी का शोरूम देखा तो कार खरीदने के लिए शोरूम में गए तो कंपनी के सेल्समेनो ने महाराजा जयसिंह को गरीब भारत के सामान्य व्यक्ति समझ के उनका अपमान किया,
उस अपमान से व्यथित होकर महाराजा जयसिंह होटल में वापस आएं और रोल्स रॉयस के वहीं शोरूम में फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा जयसिंह को कुछ कारें खरीदना चाहते हैं फिर क्या था जब महाराजा जयसिंह अपने रजवाड़ी पोशाक में रोल्स रॉयस कंपनी के शोरूम पर पहुंचे तो वहां के अंग्रेज मैनेजर और सेल्समैनों ने महाराजा जयसिंह के लिए रेड कार्पेट बिछाकर उनका भव्य स्वागत किया और महाराजा जयसिंह की सेवा करने लगे महाराजा जयसिंह ने शोरूम में पड़ी हुई सारी कारें को खरीद लिया और उन कारों को भारत में पहुंचाने का किराया और इंतजाम कर ने को कहा,
भारत वापस आकर महाराजा जयसिंह ने सभी 6 कारों को अलवर नगरपालिका को कचरा उठवाने के काम में लगा दिया अब दुनिया की फर्स्ट क्लास रोल्स रॉयस कार कचरा उठवाने के लिए उपयोग होती हैं यह खबर पुरी दुनिया में फ़ैल गई इससे रोल्स रॉयस कंपनी की कार की बहुत बदनामी हुई और उनकी कारों कि बिक्री में गिरावट आई इसलिए रोल्स रॉयस कंपनी ने महाराजा जयसिंह से बिनती करते हुए कहा कि आप हमारी कंपनी की कार को कचरा उठवाने के लिए मत उपयोग किजिए हम आपसे माफी मांगते हैं और आप को 6 नई रोल्स रॉयस कार आपको बिना किसी शुल्क के देंगे
तब जाकर महाराजा जयसिंह ने अलवर नगरपालिका से सभी रोल्स रॉयस कार को कचरा उठवाने के काम से वापस लिया।
महाराजा जयसिंह को अंग्रेजो पर बहुत चीड़ थी और वो अंग्रेजो को चीड़ा ने का एक भी मौका जानें नहीं देते थे जब 1890 में महाराजा जयसिंह अलवर की मेयो कॉलेज में पहले दिन पढ़ने के लिए गए तो हाथी पर सवार होकर कोलेज पहुंचे थे और सभी अंग्रेजों पर रोब झाड़ दिया था, महाराजा जयसिंह अंग्रेजी भाषा बहुत अच्छी तरह से जानते थे पर अंग्रजों को चीड़ा ने के लिए वो अंग्रेजो के साथ संस्कृत में बात करते थे।
महाराजा जयसिंह का अंग्रेजो के प्रति गुस्सा देख करअंग्रेजों ने महाराजा जयसिंह को 1933 में देश से बाहर निकाल दिया और फ्रांस भेज दिया था वहां चार साल बाद उनकी मौत हो गई थी ।
ऐसे स्वाभिमानी और देशभक्त थे अलवर के महाराजा जयसिंह