25/02/2014
हर हर हर महादेव
शास्त्रों में शिव जी के लिए कई प्रकार की पूजन विधियां बताई गई हैं। इन विधियों में कुछ कठिन भी हैं और कुछ बहुत सरल। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है तो उसे भी शिव कृपा प्राप्त हो जाती है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए एक और सबसे सरल उपाय बताया गया है, शिवलिंग पर बिल्व पत्र अर्पित करना। शिवजी के पूजन में बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। बिल्व पत्र अर्पित किए बिना महादेव की पूजा पूर्ण नहीं हो सकती है। मान्यता है कि सिर्फ बिल्व पत्र चढ़ाने से भी व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं,
शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप है। तीनों लोकों में जितने पुण्य-तीर्थ हैं, वे सभी तीर्थ बिल्व के मूलभाग में निवास करते हैं। जो मनुष्य बिल्व वृक्ष के मूलभाग में महादेव का ध्यान करते हुए पूजन करता है, उसे शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।
बिल्व वृक्ष के पूजन के लिए गंध, पुष्प, कुमकुम, प्रसाद आदि पूजन सामग्री विशेष रूप से रखना चाहिए।शिवरात्रि पर बिल्व वृक्ष की जड़ के समीप दीपक जलाएं। ऐसा करने पर शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होती है।
शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष के मूल में जो भक्त महादेव का पूजन करता है, उसका निश्चय ही कल्याण हो जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से बिल्व वृक्ष पर जल अर्पित करता है उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस वृक्ष के फूल, पत्ते और फलों का उपयोग कई प्रकार की औषधियों में किया जाता है।
शिवजी को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय हैं और इसी वजह से शिव पूजन में इनका स्थान महत्वपूर्ण है। बिल्व पेड़ से पत्ते तोड़ने से पहले निवेदन करें कि आप किस उद्देश्य से बिल्व पत्ते तोड़ रहे हैं। इसके बाद बिल्व पत्रों को तोडकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शिव कृपा जल्दी प्राप्त होती है। किसी भी माह की अष्टमी, चर्तुदशी, अमावस्या, पूर्णिमा तिथि एवं सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए।
सोमवार शिवजी का प्रिय दिवस होता हैं। इसलिए एक दिन पूर्व का तोड़े हुए बिल्व पत्र शिवजी पर अर्पित करें। बाजार से खरीदकर लाए हुए बिल्वपत्र किसी भी दिन शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं। बिल्व पत्र को छह माह तक बासी नहीं माना जाता है। ये पत्ते प्रतिदिन धोकर पुन: शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं।