SHIV Shakti Jyotish

SHIV Shakti Jyotish om kaal bhairvaye namaha har har har mahadev

24/04/2016
har har har mahadev
24/03/2014

har har har mahadev

har har har mahadevwish you very happy and colorful holli
16/03/2014

har har har mahadev
wish you very happy and colorful holli

har har har mahadevholi ki sabhi frds ko shubh kamnaye
13/03/2014

har har har mahadev
holi ki sabhi frds ko shubh kamnaye

har har har mahadevभगवान सदाशिव तथा जगदम्बा कीकृपा प्राप्ति के लिये मन्त्र :-दक्षिणामूर्ति शिव :आदि गुरु स्वरूपदक्षिणामू...
05/03/2014

har har har mahadev
भगवान सदाशिव तथा जगदम्बा की
कृपा प्राप्ति के लिये मन्त्र :-
दक्षिणामूर्ति शिव :आदि गुरु स्वरूप

दक्षिणामूर्ति शिव भगवान शिव का सबसे तेजस्वी स्वरूप है । यह उनका आदि गुरु स्वरूप है । इस रूप की साधना सात्विक भाव वाले सात्विक मनोकामना वाले तथा ज्ञानाकांक्षी साधकों को करनी चाहिये ।

मन्त्र...॥ऊं ह्रीं दक्षिणामूर्तये नमः ॥

ब्रह्मचर्य का पालन करें.
ब्रह्ममुहूर्त यानि सुबह 4 से 6 के बीच जाप करें.
सफेद वस्त्र , आसन , होगा.
दिशा इशान( उत्तर और पूर्व के बीच ) की तरफ देखकर करें.
भस्म से त्रिपुंड लगाए .
रुद्राक्ष की माला पहने .
रुद्राक्ष की माला से जाप करें.

har har har mahadev
01/03/2014

har har har mahadev

har har har har mahadev
28/02/2014

har har har har mahadev

हर हर हर महादेव आप सभी को शिवरात्रि की शुभ कामनाये.....
27/02/2014

हर हर हर महादेव
आप सभी को शिवरात्रि की शुभ कामनाये.....

हर हर हर महादेवआप सभी को शिवरात्रि की शुभ कामनाये.........    फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. मा...
26/02/2014

हर हर हर महादेव
आप सभी को शिवरात्रि की शुभ कामनाये.........
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था. प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं. इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया. तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरा को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं. उनका रूप बड़ा अजीब है. शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है.

भोला है शिव: शिव को जहां एक ओर प्रलय का कारक माना जाता है वहीं शिव को भोला भी कहा जाता है. मात्र बेल और भांग के प्रसाद से प्रसन्न होने वाले भगवान शिव की आज के दिन पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व और विधान है. प्राचीन कथा के अनुसार आज के दिन ही शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. नर, मुनि और असुरों के साथ बारात लेकर शिव माता पार्वती से विवाह के लिए गए थे. शिव की नजर में अच्छे और बुरे दोनों ही तरह के लोगों का समान स्थान है. वह उनसे भी प्रेम करते हैं जिन्हें यह समाज ठुकरा देता है. शिवरात्रि को भगवान शिव पर जो बेल और भांग चढ़ाई जाती है यह शिव की एकसम भावना को ही प्रदर्शित करती है. शिव का यह संदेश है कि मैं उनके साथ भी हूं जो सभ्य समाजों द्वारा त्याग दिए जाते हैं. जो मुझे समर्पित हो जाता है, मैं उसका हो जाता हूं.

शिव की महिमा: शिव सबसे क्रोधी होने के साथ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले भी हैं. इसीलिए युवतियां अपने अच्छे पति के लिए शिवजी का सोलह सोमवार का व्रत रखती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार शिव जी की चाह में माता पार्वती ने भी शिव का ही ध्यान रखकर व्रत रखा था और उन्हें शिव वर के रुप में प्राप्त हुए थे. इसी के आधार पर आज भी स्त्रियां अच्छे पति की चाह में शिव का व्रत रखती है और शिवरात्रि को तो व्रत रखने का और भी महत्व और प्रभाव होता है.

शिव की आराधना करने वाले उन्हें प्रसन्न करने के लिए भांग और धतूरा चढ़ाते हैं. इस दिन मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग’ पर चढ़ाया जाता है. अगर पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर उसे पूजने का विधान है. इसके साथ ही रात्रि के समय शिव पुराण सुनना चाहिए.

जैसा कि हमेशा ही कहा जाता है शिव भोले हैं और साथ ही प्रलयकारी भी तो अगर आप भी अपने सामर्थ्य के अनुसार ही शिव का व्रत रखते हैं तो आपकी छोटी सी कोशिश से ही भगवान शिव अतिप्रसन्न हो सकते हैं.

हर हर हर महादेव    शास्त्रों में शिव जी के लिए कई प्रकार की पूजन विधियां बताई गई हैं। इन विधियों में कुछ कठिन भी हैं और ...
25/02/2014

हर हर हर महादेव

शास्त्रों में शिव जी के लिए कई प्रकार की पूजन विधियां बताई गई हैं। इन विधियों में कुछ कठिन भी हैं और कुछ बहुत सरल। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है तो उसे भी शिव कृपा प्राप्त हो जाती है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए एक और सबसे सरल उपाय बताया गया है, शिवलिंग पर बिल्व पत्र अर्पित करना। शिवजी के पूजन में बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। बिल्व पत्र अर्पित किए बिना महादेव की पूजा पूर्ण नहीं हो सकती है। मान्यता है कि सिर्फ बिल्व पत्र चढ़ाने से भी व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं,

शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप है। तीनों लोकों में जितने पुण्य-तीर्थ हैं, वे सभी तीर्थ बिल्व के मूलभाग में निवास करते हैं। जो मनुष्य बिल्व वृक्ष के मूलभाग में महादेव का ध्यान करते हुए पूजन करता है, उसे शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।

बिल्व वृक्ष के पूजन के लिए गंध, पुष्प, कुमकुम, प्रसाद आदि पूजन सामग्री विशेष रूप से रखना चाहिए।शिवरात्रि पर बिल्व वृक्ष की जड़ के समीप दीपक जलाएं। ऐसा करने पर शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होती है।
शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष के मूल में जो भक्त महादेव का पूजन करता है, उसका निश्चय ही कल्याण हो जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से बिल्व वृक्ष पर जल अर्पित करता है उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस वृक्ष के फूल, पत्ते और फलों का उपयोग कई प्रकार की औषधियों में किया जाता है।

शिवजी को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय हैं और इसी वजह से शिव पूजन में इनका स्थान महत्वपूर्ण है। बिल्व पेड़ से पत्ते तोड़ने से पहले निवेदन करें कि आप किस उद्देश्य से बिल्व पत्ते तोड़ रहे हैं। इसके बाद बिल्व पत्रों को तोडकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शिव कृपा जल्दी प्राप्त होती है। किसी भी माह की अष्टमी, चर्तुदशी, अमावस्या, पूर्णिमा तिथि एवं सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए।

सोमवार शिवजी का प्रिय दिवस होता हैं। इसलिए एक दिन पूर्व का तोड़े हुए बिल्व पत्र शिवजी पर अर्पित करें। बाजार से खरीदकर लाए हुए बिल्वपत्र किसी भी दिन शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं। बिल्व पत्र को छह माह तक बासी नहीं माना जाता है। ये पत्ते प्रतिदिन धोकर पुन: शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं।

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