21/09/2020
दोस्तों आज हम महादेव के भक्तों के लिए बहुत ही शानदार और दमदार कलेक्शन Mahakal Attitude Shayari आप सभी से शेयर करने जा रहे हैं जिसमे आपको देवा दी देव महादेव और भोलेनाथ शिव शंकर के महाकाल होने की एक झलक देखने को मिलेगी। ये कलेक्शन उन सभी शिव भक्तों के लिए हैं जो शिव भक्ति करते हैं, शिव को अपना आराध्य मान उन्हें पूजते हैं और दिन रात महादेव की उपासना करते हैं।

महाकाल जो की भगवान् शिव का रूद्र और प्रचंड रूप हैं और जो काल का भी काल हैं, वो महाकाल हैं। जिसमे सिर्फ आग, गुस्सा, पापी का सर्वनाश, दुष्टों का संहार, धर्म और सत्य की विजय समाहित हैं। शिव के प्रमुख अवतारों में पहला अवतार महाकाल को माना जाता हैं। इस अवतार की शक्ति माँ महाकाली मानी जाती हैं। वर्तमान में महाकाल के रूप में भगवान भोलेनाथ तीर्थ नगरी उज्जैन में विराजमान हैं। वेदों में शिव का नाम ‘रुद्र’ रूप में आया हैं। रुद्र का अर्थ होता हैं भयानक। रुद्र संहार के देवता और कल्याणकारी हैं। महादेव, जिन्हे भोलेनाथ, भोले बाबा, कालो के काल महाकाल, त्रिलोकीनाथ, नीलकंठ, शिव शंकर, शिव शम्भू, जटाधारी, अर्धनारेश्वर आदि कई नामो से जाना जाता हैं, भगवान शिव ने धरती पे कई बार अवतार लिया हैं, और पूरी दुनिया में इनके भक्त फैले हुए हैं और हर तरफ से इस ब्रह्माण्ड में महादेव की गूंज सुनाई देती हैं। जब इस धरती पे कुछ भी नहीं था, उससे पहले से ही महादेव का अस्तित्व था, और आदि से अंत तक महादेव का ही वास रहेगा क्युकी शिव ही आदि हैं और शिव ही अंत हैं, सब कुछ शिव में ही जाकर मिल जाता हैं। भगवान शिव को त्रिनेत्र धारी भी कहा जाता हैं और जब भोलेनाथ की ये तीसरी आँख खुलती हैं तो महाप्रलय आती हैं और तीनो लोक में हाहाकार होता हैं और इस महाप्रलय के विनाश से सिर्फ सर्वनाश होता हैं। भगवान् शिव को देवो के देव महादेव भी कहा गया हैं और सभी देवी देवता महादेव का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शिव जितने भोले हैं उनका गुस्सा भी उतना ही प्रलयकारी हैं, इसलिए पुराणों में इनका नाम रूद्र भी हैं। जटाजूटधारी, भस्म भभूत शरीर पर लगाए, गले में नाग लपेटे, रुद्राक्ष की मालाएं पहने, जटाओं में चंद्र, गंगा की धारा, हाथ में त्रिशूल एवं कटि में बाघम्बर और नंगे पांव रहने वाले शिव कैलाश में निवास करते हैं। माता पार्वती उनकी पत्नी अथवा शक्त्ति हैं और गणेश और कार्तिकेय के वे