26/02/2022
बेरोजगारी की विकराल समस्या का कारण सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों के बावजूद ज्यादातर स्थानीय(छोटे) उद्योगों का असफल हो सदा सर्वदा के लिए बंद हो जाना है।
स्थानीय उद्योग श्रम प्रधान और अल्प लागत उद्योग होते हैं, जिन्हें कम पूंजी में आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
इंटरनेट विस्तार के बाद शुरू हुई ऑनलाइन मार्केटिंग की सूची में आज किराना और परचून की दुकानों में मिलने वाली सामग्री भी शामिल हो चुकी हैं। ये कंपनियां मुट्ठी भर कर्मचारियों के बल पर बाजार के बहुत से बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही हैं। उनके बाजार विशेषज्ञ (एक्सपर्ट) अपनी विशेषज्ञता चतुराई और बाजीगरी से उपभोक्ताओं को बड़े-बड़े प्रलोभन दे प्रभावित और दिग्भ्रमित कर रहे हैं।
स्थापित ब्रांड की मांग के कारण दुकानदारों ने भी स्थानीय उत्पादों को महत्व देना बंद कर दिया है जिससे छोटा उत्पादक दुकानदारों को अतिरिक्त लाभ देने के साथ-साथ ज्यादा बारंबारता (4-5 पूंजी) में उधार देने को बाध्य होता है। जिससे उत्पादकों को गुणवत्ता से समझौता करना पड़ता है। परिणाम स्वरूप स्थानीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ता का विश्वास खत्म होने लगा है और शहरों कस्बों में अनेक छोटे उधोग असफल हो बंद।
आइये स्थानीय उत्पादकों की राह में आने वाली बाधाओं के सामने एक मजबूत सुरक्षा प्रणाली बनाएं। सामूहिक प्रयास द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण करें। स्थानीय उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन के इस प्रयास को व्यक्तिगत और सामाजिक चुनौती के रूप में स्वीकार करें।
पटना/बिहार को हमने राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल बनाने का लक्ष्य रखा है। अगर आप चाहते हैं स्थानीय स्तर पर रोजगार के ढेर से सारे अवसरों का सृजन हो तो इस मुहिम से जुड़े।
जुड़े फेसबुक पेज : startup patna cluster.
व्हाट्सअप : 89871 85971
ईमेल : [email protected]