11/02/2025
#कुम्भ_के_नाम_से_विख्यात_अफ्रीका_में_स्थित_Egypt_से_कौशिक_गोत्रीय_अग्निवंशियों_का_पौराणिक_सम्बन्ध :
आज हम जिस देश को Egypt के नाम से जानते हैं वहाँ के शासक ब्राह्मण थे, इस बात को सारी दुनियां जानती है लेकिन वे लोग कौन ब्राह्मण थे, उन लोगों का मूल धर्म क्या था और उनके देश का मूल नाम क्या था उसके बारे में वहाँ के स्थानीय लोग भी भूल चुके हैं। लेकिन उस देश में जिन लोगों का साम्राज्य था, उनके वंशज़ आज भी भारत में रह रहे हैं। यह बात अलग है कि वे लोग अपने पौराणिक विरासत को नहीं बचा पाये। लेकिन अपनी मूल पहचान को आज तक नहीं भुला सके हैं।
भगवान शिव के द्वारा देवों के अधिपति बनाये गये अग्निदेव के वंशज़ों के देश इजिप्ट के सबसे अन्तिम प्रतापी राजा को रामाशेष के नाम से लोग भले ही जान रहे हैं लेकिन वे किस वंश के थे और उनके देश को लोग इजिप्ट क्यों कहते हैं, आज इसके बारे में रहष्योद्घाटन करने वाला हूँ।
आज जिस देश को लोग इजिप्ट और मिश्र के नाम से जानते हैं यह भगवान चन्द्रदेव के वंश में उत्पन्न प्रजापति बलकाश्व के पुत्र कुश के नाम पर स्थित विश्व के उस सबसे बड़े साम्राज्य की पावन भूमि का उपनाम है। इस पावन भूमि पर कौशिक विश्वामित्र भगवान के सबसे छोटे पुत्र अग्नि देव के वंशज़ों के द्वारा शासित वह देश था, जो परमपिता परमेश्वर भगवान शिव जी कृपा से अग्निदेव को प्राप्त हुआ था। भगवान शिव! अग्निदेव को उनके माता-पिता (चक्षुस्मति-कौशिक विश्वामित्र) सहित अपने लोक में बुला कर दिक्पति बनाने के उपरान्त अग्निदेव द्वारा स्थापित जिस लिंग में समा कर अन्तर्ध्यान हो गये थे, वह लिंग! अग्निपति के नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा उस लिंग को धारण करने वाला पवित्र देश भी शिव भक्तों के प्रसिद्ध तीर्थ अग्निपति धाम के नाम से पहचाना जाता था। कालान्तर में अग्निपति के नाम पर ही वह देश Egypt (इजिप्ट) कहलाया।
इस देश की राजधानी जिस नगर को बनाया गया था उसका नाम गृहपति अग्नि की माता चक्षुस्मति के नाम पर चक्षुस्मति पुरी ही रखा गया था। इसका प्रमाण शिव शिव पुराण के सप्तम खण्ड : शतरुद्र संहिता : उत्तरार्द्ध के अट्ठाइसवें अध्याय में देख सकते हैं। कौशिक गोत्रीय अग्नि देव के वंशज़ों के द्वारा शासित देश का राज-चिह्न भी चक्षु ही था जो इस बात का प्रतीक था कि उस चिह्न को धारण करने वाले लोग ब्रह्मर्षि विश्वामित्र भगवान की सबसे छोटी पत्नी चक्षुस्मति देवी के पुत्र अग्नि देव के वंशज़ हैं।
विदित हो कि चक्षुस्मति देवी! नर्मदा नदी के पास स्थित नर्मपुर नामक नगर में रहने वाली एक नागकन्या थी। इसके कारण ही उनके नाम पर बसाये गये इजिप्ट के तटवर्ती नगरों और गाँवों में स्थित भग्नावषेशों में ब्राह्मणों के साथ नागवंशियों के स्मृति चिह्न आज भी यत्र-तत्र बिखरे हुए दिखाई देते हैं। लेकिन अफसोस इस बात है कि आज उस देश में उन्हें सजाने-संवारने वाला कोई नहीं रहा।
भारत के विन्ध्य पर्वत के दक्षिण भाग में प्रवाहित होने वाली नर्मदा नदी के तट पर स्थित नर्मपुर नामक नगर के पास रह रहे कौशिक विश्वामित्र जी का नागकन्या से भेंट और विवाह तथा विश्वामित्र जी के द्वारा चक्षुस्मति देवी के गर्भ से उत्पन्न गृहपति अग्नि के जन्म की कथा भी "शिव पुराण के सप्तम खण्ड : शतरुद्र संहिता : उत्तरार्द्ध" के सत्ताईसवें अध्याय में पढ़ सकते हैं।
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