13/05/2026
नशा सिर्फ शराब, सिगरेट या ड्रग्स का नहीं होता, असली खेल दिमाग के अंदर बनने वाले “डोपामीन” का होता है। डोपामीन एक ऐसा रसायन है जो हमें खुशी, उत्साह और इनाम का एहसास देता है। जब इंसान कोई ऐसा काम करता है जिससे तुरंत मज़ा मिले — जैसे शराब पीना, सिगरेट पीना, जुआ खेलना, अश्लील सामग्री देखना, लगातार सोशल मीडिया स्क्रोल करना या बहुत ज्यादा जंक फूड खाना — तब दिमाग में डोपामीन तेज़ी से बढ़ता है। यही तेज़ सुख धीरे-धीरे आदत और फिर लत बन जाता है।
समस्या यह नहीं कि डोपामीन बुरा है। समस्या तब शुरू होती है जब इंसान आसान और तेज़ सुख का गुलाम बन जाता है। दिमाग बार-बार उसी चीज़ की मांग करने लगता है जिसने पहले आनंद दिया था। शुरुआत में जो चीज़ थोड़ी खुशी देती थी, कुछ समय बाद उतनी ही खुशी पाने के लिए उसकी मात्रा बढ़ानी पड़ती है। यही वजह है कि नशा धीरे-धीरे इंसान की इच्छाशक्ति, ध्यान और आत्मनियंत्रण को कमजोर कर देता है।
आज के समय में केवल ड्रग्स ही नशा नहीं हैं। मोबाइल, रील्स, गेमिंग, अश्लीलता, लगातार नोटिफिकेशन देखना — ये सब भी डोपामीन के छोटे-छोटे इंजेक्शन की तरह काम करते हैं। इंसान को बिना मेहनत के आनंद मिल जाता है, इसलिए दिमाग कठिन कामों से भागने लगता है। पढ़ाई, व्यायाम, ध्यान, किताबें और अनुशासन जैसे काम फीके लगने लगते हैं क्योंकि उनका परिणाम धीरे-धीरे मिलता है।
डोपामीन का संतुलन बिगड़ने पर इंसान बेचैनी, चिड़चिड़ापन, आलस, ध्यान की कमी और मानसिक थकान महसूस कर सकता है। कई लोग सोचते हैं कि उन्हें मोटिवेशन की कमी है, जबकि असल में उनका दिमाग लगातार आसान सुख का आदी हो चुका होता है। जब तक दिमाग को हर थोड़ी देर में तेज़ उत्तेजना मिलती रहेगी, तब तक सामान्य जीवन उबाऊ लगता रहेगा।
आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अत्यधिक भोग और इंद्रियों का असंतुलित उपयोग मन और शरीर दोनों को कमजोर करता है। लगातार उत्तेजना से मन अस्थिर होता है, नींद खराब होती है और जीवनशक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है। संयम, दिनचर्या, सात्विक भोजन, व्यायाम, ध्यान और प्रकृति के साथ समय बिताना दिमाग को फिर से संतुलित करने में मदद करते हैं।
डोपामीन को खत्म करने की नहीं, सही दिशा देने की जरूरत है। मेहनत से मिलने वाला डोपामीन इंसान को मजबूत बनाता है। व्यायाम, लक्ष्य पूरा करना, नई चीज़ सीखना, अच्छे संबंध बनाना और अनुशासन में रहना — ये सब भी डोपामीन देते हैं, लेकिन यह आनंद शरीर और मन को तोड़ता नहीं बल्कि मजबूत करता है।
जो इंसान अपने डोपामीन पर नियंत्रण सीख लेता है, वह धीरे-धीरे अपनी आदतों, भावनाओं और जीवन पर भी नियंत्रण पाने....