10/04/2018
OM Hospital ने फिर किया मानवता को शर्मसार, रुपयों के लिए महिला के शव को बनाया बंधक
Raipur । एक बार फिर रायपुर का ओम हॉस्पिटल घिर गया है विवादों में दरअसल आज एक प्रसूता की मौत हो गई. मृतक का नाम अलका था. वो 8 महीने की गर्भवती थी. 1 अप्रैल को उसे ओम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. मृतका ने एक मृत बच्चे को जन्म दिया था. हॉस्पिटल ने 1 लाख 70 हज़ार रुपए का बिल बनाया जिसमें से परिजनों ने 1 लाख रुपए चुकाए. इधर 70 हजार रुपए की राशि बकाया रहने पर ओम हॉस्पिटल ने शव को बंधक बना लिया. परिजनों का कहना है कि अलका की मौत पहले ही हो चुकी थी, लेकिन बिल बनाने के लिए डॉक्टरों ने उसकी मौत की बात छिपाई. मृतका दुर्ग की रहने वाली थी.
इधर मृतका के भाई ने बताया कि बहन की शादी सालभर पहले ही हुई थी. मृतक अलका के भाई ने उसके पति और ससुराल पर गर्भावस्था के समय मृतका के साथ जमकर मारपीट करने का आरोप लगाया है. यहां तक कि मृतका और मृत बच्चे के शव पर भी मारपीट के गंभीर निशान हैं.
इधर डीडीनगर थाना पुलिस से मृतका के मायकेवालों ने ससुराल वालों की शिकायत की है और कहा है कि पति और ससुराल की प्रताड़ना से गर्भवती अलका की जान चली गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच में जुट गई है.
वहीं एक तरफ ओम हॉस्पिटल की संवेदनहीनता मामले में उजागर हुई है कि किस तरह से पैसों के लिए मानवता तक को हॉस्पिटल ने ताक पर रख दिया.
हम आपको बता दे की इससे पहले भी ओम हॉस्पिटल अपने ऐसे ही संवेदनहीनता के चलते सुर्खियों में था! मामला है जनुअरी का जब मृत बच्चे को जिंदा बताकर उपचार किया जाता रहा! दस दिनों के बाद बच्चे की मौत की घोषणा करते हुए यहां के चिकित्सकों ने डेढ़ लाख का बिल थमा दिया था । परिजनों को पहले ही संदेह हो चुका था कि उनका बच्चा जीवित है भी कि नहीं? इसीलिए वो बच्चे से मिलना चाह रहे थे किंतु अस्पताल प्रबंधन परिजनों की बच्चे से मुलाकात नहीं करवाता रहा! अंतत: रहस्य खुला। परिजनों ने हंगामा किया। पुलिस आई। आश्वासन मिला और कहा गया कि अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के विरुद्ध अपराध दर्ज किया जाएगा। दु:खी परिजनों के समक्ष संतुष्ट रहने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं था! धरना टला। फिर राज्य सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग के मंत्री, सचिव, जिले के स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सकों पर दृष्टि रखने वाले तमाम संगठन से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली!
इस तरह की घटनाओ से पता चलता है कि प्रदेश के निजी हॉस्पिटल जमकर मनमानी कर रहे हैं और इन पर जिला प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा.आखिर कब तक निजी हॉस्पिटल अपने आर्थिक फायदे के लिए जनता के भावनाओ के साथ खेलते रहेंगे?अब देखना यह है की आगे इस मुद्दे पे क्या करवाई होती है?